बिहार के तर्ज पर अब छत्तीसगढ़ में भी लागू होगी पूर्ण शराबबंदी

​बिहार के बाद मध्यप्रदेश और अब छत्तीसगढ़ की सरकार ने भी चरणबद्ध तरीके से शराब की बिक्री बंद करने का ऐलान कर दिया है.

सोमवार को मध्य प्रदेश में चरणबद्ध तरीके से शराबबंदी लागू करने के राज्य सरकार के ऐलान के एक दिन बाद अब छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री रमन सिंह ने अपने राज्य में शराबबंदी लागू करने की घोषणा की है. छत्तीसगढ़ में तीन हजार तक की आबादी वाले गांवों में पहले से ही शराबबंदी लागू है. ऐसे में रमन सिंह के ताजा बयान को पूरे राज्य में शराबबंदी लागू करने की तरफ बढ़ाया गया कदम माना जा रहा है.
उन्होंंने यह ऐलान अपनी बिहार यात्रा के दौरान किया. रमन सिंह ने मंगलवार को बिहार के मुंगेर में कहा कि अब पूरे छत्तीसगढ़ में शराबबंदी लागू की जाएगी. रमन सिंह बिहार की दो दिवसीय यात्रा के क्रम में मंगलवार को मुंगेर के योग केंद्र में थे.
उन्होंने आज राजधानी पटना में बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार से भी मुलाकात की. कुछ दिनों पहले ही नीतीश कुमार शराबबंदी को लेकर आयोजित कार्यक्रम में भाग लेने छत्तीसगढ़ गए थे.

इस समय देश में गुजरात और बिहार ऐसे राज्य हैं जहां पूर्ण शराबबंदी लागू है. गुजरात में यह बहुत पहले से है तो बिहार की नीतीश कुमार सरकार ने इसे पिछले साल अप्रैल में लागू किया था. नीतीश कुमार ने शराबबंदी को लेकर कई राज्यों का दौरा भी किया है. वे इस पहल को पूरे देश में लागू करने की अपील करते रहे हैं. कल मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने ऐलान किया था कि राज्य में धीरे-धीरे शराबबंदी लागू की जाएगी. शिवराज के अनुसार, इस निर्णय के तहत पहले चरण में नर्मदा नदी के पांच किलोमीटर के दायरे की सभी शराब दुकानों को बंद किया जाएगा. इसके बाद रिहाइशी इलाकों में शराबबंदी लागू की जाएगी.

शिवराज सिंह ने किया एलान, बिहार के तरह मध्यप्रदेश में भी होगा पूर्ण शराबबंदी

जब से बिहार में पूर्ण शराबबंदी हुआ है तब से देश के अनेक हिस्सों में शराबबंदी की मांग तेज हो गई है । बिहार के बाद मध्य प्रदेश सरकार ने बड़ा कदम उठाते हुए चरणबद्ध तरीके से शराब बंदी का एलान किया है। शिवराज सिंह ने कहा कि पहले चरण में नर्मदा के किनारे वाले इलाकों में शराबबंदी की जाएगी। दूसरे चरण में रिहायशी इलाकों में भी शराब को बंद कर दिया जाएगा।

नर्मदा सेवा यात्रा के तहत नरसिंहपुर जिले के नीमखेड़ा इलाके में एक प्रोग्राम के दौरान उन्होंने कहा कि पहले चरण में राज्य सरकार नर्मदा नदी के किनारे पांच किलोमीटर तक सभी शराब की दुकानें बंद कराएगी इसके अगले चरण में रिहाइशी इलाकों में फिर शैक्षिक संस्थान और धार्मिक स्थान के आसपास की दुकानें बंद कराई जाएंगी। शिवराज सिंह चौहान ने राज्य में नशा मुक्ति आंदोलन चलाने का ऐलान भी किया। ज्ञात हो कि गुजरात, बिहार, नागालैंड, मणिपुर, केरल और लक्षद्वीप में शराब पर पूरी तरह से रोक है।

 

इसके अलावा उत्तर प्रदेश की कैबिनेट मिनिस्टर रीता बहुगुणा जोशी ने भी शराब बंदी पर संकेत दिए कि प्रदेश में शराबबंदी की ओर बड़ा कदम उठाया जा सकता है। उन्होने कहा कि योगी सरकार प्रदेश में चरण बद्ध तरीके से शराब बंदी लागू करने पर विचार कर रही है।

निश्चय यात्रा पर निकले नीतीश कुमार के नाम सोचने को मजबूर कर देने वाला एक खुला पत्र।

​नीतीश बाबु,

सादर प्रणाम

बचपन में जब चिट्ठी लिखना सिखाया जाता था, तब ऐसे ही लिखना शुरू किये थे। भूल-चूक की माफ़ी की गुहार लगा रही हूँ। लोग एगो-दुगो परिवार से परेशान हो जाते हैं, आप तो इतने सारे परिवारों के मुखिया हैं, आपकी परेशानी का आलम हम तो कब्बो सोचियो नहीं सकते हैं।

खैर, सुनने में आया कि आप ‘निश्चय यात्रा’ पर निकले हैं। अब इसका मतलब तो हम जैसा आमआदमी को समझ में आवे से रहा, मगर एतना जरूर लग रहा है कि जैसे पहिले के जबाना में राजा लोग निकलता था अपने प्रजा का हाल-चाल जानने, वैसे ही शायद आपहुँ निकले हैं।

जानते हैं नीतीश बाबु, राजा जब महल से निकलने वाला होता है न, तो उससे ज्यादा मेहनत उसके सिपाहियों को करनी पड़ती है, उसके प्रजा को करनी पड़ती है। ना-ना! राजा के स्वागत के लिए नहीं, बल्कि अपना दर्द राजा से छुपाने के लिए।

आप तो निकले होंगे हाल-चाल जानने, अपने शासन का प्रभाव जानने, मगर आप वही जान पाएँगे जो आपको जनवाया जायेगा। परजा अपने राजा के लिए एतना तो करिये सकती है न!

ये खाली आपके साथ नहीं हो रहा है, सब राजा लोग के साथ हुआ है, अतः इसको अपने ऊपर तो लेबे मत कीजियेगा।

आपका निश्चय यात्रा ‘आरा’ आ रहा है। इहें हमारा घर पड़ता है। आप आ रहे हैं, सब स्टेट रोडवा चकचकाता हुआ मिलेगा। स्कूल-कॉलेज मस्त, एकदम लीपा-पोता हुआ। अस्पताल में रोज़ से जादे मरीज दिखेंगे, स्कूल में रोज़ से जादे लइकन। पार्क-सार्क बनल मिलेगा। पेड़-वेड़ रंगल मिलेगा। ट्रैफिक तो एकदम सरसरा के भागेगा। पुलिस अंकल ना वर्दी में पैसा लेते दिखेंगे, ना ही बिन वर्दी वाला से लिवाते दिखेंगे। हमलोग का वश चला तो एककगो चिरईं को भी दाना दे दें, ताकि कम से कम आपके आने पर सुनर से चहचहाये। गऊ माता जो एन्ने-उन्ने चरती दिखती हैं, सब एक लाइन में चरेगी। एकदम खुशनुमा ना दिखे समां तो कैसा स्वागत! है कि नै!

ई शराबबंदी वाला जो हुआ न, मानव सृंखला जो बना, बहुते गज़ब था। मतलब मज़ा आ गया। सही चीज़ हुआ है बिल्कुल। बाकिर जानते हैं, अंदर के बात तो ई है कि नशा का खाली रूप बदला है, बन्द थोड़े हुआ है। दवा दुकान वाले बताते हैं अचानक से कोरेक्स पीने वाले लोग बढ़ गए हैं, अल्प्राजोलम से नींद पाने वाले बढ़ गए हैं। पहले गुमनामी की ज़िंदगी जीने वाली दवाएं जैसे एक्सटेसी, हैश, एलएसडी, आइस, एफड्रइन, मारीजुआना, हशीश कैथामिन, चरस, नारफेन, लुफ्रिजेसिक, एमडीएमएस अचानक से मशहूर हो गईं हैं। बड़े-बड़े लोग कोकीन के सहारे और मध्यम वर्गीय लोग कैथामिन के सहारे पर टिक गये हैं। गरीब भी नशा करने में अमीरों की बराबरी करने से नहीं चूकते, उनके लिए तो एक्सटेसी, एसिड, स्पीड, हेरोइन आदि एैसे नशीले पदार्थ भी तो उपलब्ध हैं ही। न्यूज़ वाले कहते हैं “पहले बिहार नशीले पदार्थों का उत्पादक हुआ करता था, अब बिहार ही इसका बाज़ार बन चूका है”। नेपाल, बांग्लादेश के रास्ते से आसानी से इसकी तस्करी हो रही है।

गुटखा-सिगरेट तो लॉन्ग टर्म में जान लेते हैं नीतीश बाबु, मगर ई खतरनाक दवाओं से जान तो आजे-कल में न जायेगा।

आप भी कहेंगे कि क्या हँसुआ के बियाह में खुरपी के गीत गाने लगे हम भी। अब नशाबंदी के समर्थन में पूरा बिहार से 3 करोड़ से जादे लोग लाइन लगा के खड़ा हो गया, तब भी हमको नशा ही नशा दिख रहा है। अँधेरे की तरफ मुड़ चुके युवा ही दिख रहे हैं। बाकी कलाम बाबा कह के गये हैं न “सफल होना बड़ी बात नहीं, उसे बरकरार रखना बड़ी बात है”। और जब आप सफल हो रहे हैं तो इस सफलता को बनाये रखने की उम्मीद भी तो आपसे ही की जायेगी न।

खैर! एगो-दुगो और बात है! कह दें?

पिछले साल रोड बनाने में बिहार भारत का नंबर वन राज्य रहा। लेकिन राष्ट्रीय राजमार्गों की हालत खास अच्छी नहीं दिखती। अब देखिये न, NH30 तो जेतना बना नहीं है उतना टूटा ही हुआ है। आप कहेंगे ये बिहार सरकार के जिम्मे नहीं, मगर लाखों लोगों का राह है ये साहेब! कमर भी सड़क जैसा ही टूटने लगा है लोगों का!

पटना बिहार की राजधानी है। बड़ी खुस हैं हमलोग, परकासपर्ब में आये लोगों ने पटना की बड़ी तारीफ करी। मगर पटना से बाहर निकलते ही ये छवि धुमिल हो गयी न साहेब।

खाली पटना, गया और राजगीर ही तो बिहार का हिस्सा नहीं है न! इतना कुछ है और भी जिलों भभुआ, वैशाली, भागलपुर, मिथिलांचल, बेगुसराय आदि में, उसका कुच्छो सोच रहे हैं का साहेब? ऊ का है कि हमको भी तो लगना चाहिए न, हमपर भी नज़र है हमारे राजा की!

बिहार की तरक्की से मन गदगद है वैसे, इसको बनाये रखने की गुज़ारिश के साथ

भारतीय गणतंत्र की जान
आपकी विश्वसनीय एवं मासूम प्रजा

आपन बिहार से आपकी जनता!

नोट- अशुद्धियाँ जानबूझ के की गईं हैं। क्षमा करते हुए भावसंगत होने की कृपा करें।

इससे पहले भी हुआ था शराबबंदी मगर बिहार में नीतीश की शराबबंदी है सबसे ज्यादा असरदार

बिहार में शराबबंदी 2016 का सबसे चर्चित फैसला है। ऐसा नहीं है कि पहली बार किसी सरकार ने शराबबंदी का फैसला लिया है। इससे पहले भी दो बार शराबबंदी दो नाकाम कोशिश हो चुकी । मगर नीतीश कुमार की शराबबंदी तमाम शुरुआती आशंकाओं और पुराने अनुभवों को नकारते हुए एक नया मिसाल कायम कर रहीं है। ऐसा सिर्फ़ इसलिए संभव नहीं हो पाया कि इस फैसले के पिछे सरकार ईमानदारी से प्रयास कर रहीं है बल्कि इसलिए संभव हो रहा क्योंकि पहली दो कोशिशों को राजनीतिक दलों और आम लोगों का आज जैसा व्यापक समर्थन नहीं था।

 

पहले भी लागू हो चुकी है शराबबंदी

इस बीच के दशकों में शराब की बुराइयों के भयंकर कुपरिणाम खुल कर सामने आए. 1938 में डॉ. श्रीकृष्ण सिंह की सरकार ने और 1978 में कर्पूरी ठाकुर सरकार ने आंशिक शराबबंदी लागू की थी. 1978 में केंद्र की मोरारजी देसाई सरकार ने पूरे देश में चरणबद्ध तरीके से शराबंदी लागू की थी. उसी अभियान को सफल बनाने की कोशिश बिहार के तत्कालीन मुख्यमंत्री कर्पूरी ठाकुर की सरकार कर रही थी.

 

मोरारजी देसाई

मोरारजी देसाई

1978 के अभियान के पीछे गांधीवादी मोरारजी थे तो 1938 के फैसले के पीछे राज्य के तत्कालीन आबकारी मंत्री जगलाल चौधरी. लेकिन कांग्रेस के अंदर शराबबंदी के सवाल पर एकमत नहीं था. लेकिन चौधरी नशाबंदी के खिलाफ अपने कड़े रुख पर कायम रहे.

 

कांग्रेस ने जब चौधरी को 1952 में मंत्री नहीं बनाया तो तब बिहार में आम चर्चा थी कि शराबबंदी के खिलाफ अपने कठोर निर्णय के कारण चौधरी को मंत्री पद गंवाना पड़ा. याद रहे कि जिस सरकार में दलित नेता जगलाल चौधरी कैबिनेट मंत्री थे, उसी सरकार में जगजीवन राम मात्र संसदीय सचिव थे.

 

यानी उस समय वे बाबू जगजीवन राम से तब बड़े नेता थे, पर उनकी जिद के कारण कांग्रेस का केंद्रीय हाईकमान भी नाराज हो गया.

 

1946 की अंतरिम सरकार में भी चौधरी मंत्री बनाए गए, पर उनका विभाग बदल दिया गया था.1952 में तो कांग्रेस हाईकमान ने उन्हें मंत्री तक नहीं बनने दिया. गांधी जी ने तब कहा था कि यह देख कर पीड़ा होती है कि जो कांग्रेसी आजादी की लड़ाई में शराब की दुकानों पर धरना दे रहे थे, वे कांग्रेसी भी अब बदल गए.

 

कलकत्ता में मेडिकल की पढ़ाई बीच में ही छोड़ कर जगलाल चौधरी असहयोग आंदोलन में कूद पड़े थे. नशाबंदी लागू करके चौधरी जी गांधीजी के विचारों का ही पालन कर रहे थे. गांधीजी आबकारी राजस्व को पाप की आमदनी मानते थे.

 

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जब गांधीजी से यह कहा गया कि इसी आमदनी से सरकारी स्कूलों का खर्च चलता है तो गांधी ने कहा कि ‘यदि इस आमदनी के बंद होने से सभी पाठशालाओं को भी बंद कर देना पड़े तो उसे भी मैं सहन कर लूंगा. पर पैसे के लिए कुछ लोगों को पागल बनाने की इस प्रकार की नीति एकदम गलत है.’

 

जगलाल चौधरी गांधी की यह उक्ति दुहराते रहते थे.

याद रहे कि 1946 में गठित अंतरिम सरकार में भी चौधरी नशाबंदी लागू करने की जिद करते रहे. याद रहे कि चौधरी पासी परिवार से आते थे. नशाबंदी से सबसे अधिक आर्थिक नुकसान उसी जातीय समूह को हो रहा था. इसके बावजूद उन्होंने नशाबंदी पर अपना विचार कभी नहीं बदला. उन्हें आज की तरह जनसमर्थन व पार्टी का सहयोग मिला होता तो शायद वे लागू करने में सफल होते.

 

वहीं जब मोराजी देसाई ने शराबबंदी लागू की तो पहले साल में एक चौथाई दुकानें बंद करने का फैसला किया. फसले के बाद मोरारजी देसाई पटना आए तो उनकी प्रेस कांफ्रेंस में मैं भी था.

एक संवाददाता ने सवाल पूछा,‘पूर्ण शराबबंदी कब तक लागू करेंगे ? प्रधानमंत्री ने कहा कि मैं तो आज ही लागू कर दूं,पर तुम लोग ही शराबबंदी का विरोध कर रहे हो.’ इस पर लंबा ठहाका लगा.

 

दरअसल मीडिया का एक बड़ा हिस्सा तब शराबबंदी के विरोध को हवा दे रहा था. खैर मोरारजी सरकार पांच साल पूरा नहीं कर सकी. बाद की सरकारों ने भी नशाबंदी की कोशिश तक नहीं की. नई सरकारों ने शराबबंदी की जरूरत नहीं समझी.

बिहार क्रांति की भूमि है यहां से प्रायः राजनितिक क्रांति की शुरुआती होती रहीं है और देश को दिशा देती रही है। मगर इस बार बिहार से समाजिक क्रांति की शुरुआत हुई है। उम्मीद है कि शराबबंदी के जरिए नशामुक्ति का जो सबसे बड़ा क्रांति बिहार से शुरु हुआ है वह पूरे देश में फैलेगा ।

बिहार में बने दुनिया के सबसे बड़े मानव श्रंखला में विदेशी लोग भी सामिल हुए

रोहतास- बिहार में मद्यनिषेध को लेकर बने मानव श्रृंखला में सिर्फ़ बिहार के लोगों ने ही भाग नहीं लिया बल्कि रोहतास जिले के जीटी रोड(NH2) पर आस्ट्रेलिया से आई विदेशी टीम ने भी भाग लिया। उन्होंने कहा कि आज से नो वाइन साथ ही उन्होंने कहा कि वे वाइन हमेशा पीते थे लेकिन बिहार के लोगों के नशामुक्त अभियान से मिले संदेश के बाद अब शराब नहीं पियेंगे।

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अपने देश जाकर यहां की संस्कृति की प्रशंसा करेंगे और राज्य सरकार व बिहार के इस मुहीम की हिस्सा बनेंगे। वे लोगों के साथ बारह बजे से एक बजे तक मानव श्रृंखला में खड़े रहे। ऑस्ट्रेलिया निवासी हेबर्ट डुर, मोनिका डुर, सिमोन डुर ने कहा कि वे वाराणसी से आ रहे है यहाँ आकर मानव श्रृंखला के बारे में पता चला। वे कहे कि कुछ ही पल में यहां के संस्कृति और मिशन ने मेरा मन मोह लिया।

मध्यप्रदेश सरकार बिहार में शराबबंदी के बाद क्राइम रेट पर रिसर्च कर रही है

दुनिया भर में बिहारी के शराबबंदी पर बात हो रही है और जल्द ही शराबबंदी कानून को लेकर लोगों को जागरुक करने के लिए मानव श्रृंखला बना विश्व रिकार्ड बनाने जा रहा है। शराबबंदी के बाद बिहार में क्राइम और रोड दुर्घटना में भारी कमी आने के बाद अब दुसरे राज्य भी शराबबंदी पर विचार करने लगें है।

 

मध्यप्रदेश सरकार ने नर्मदा नदी के किनारे से पांच किमी के दायरे में आनेवाली शराब की सभी दुकानों को अगले वित्त वर्ष से बंद करने का फैसला किया है. वहीं, राज्य सरकार ने अब शराब की दुकानों को लगातार खरीदारी करनेवालों का रेकॉर्ड रखने को कहा है. मध्य प्रदेश सरकार बिहार में शराबबंदी के बाद क्राइम रेट पर रिसर्च कर रही है, ताकि इस बारे में सही फैसला लिया जा सके.

विश्व रिकार्ड बनाने की ओर बढ़ रहा अपना बिहार ..

बिहार। प्रकाशोत्सव के सफल आयोजन के बाद अब
बिहार सरकार का पूरा ध्यान केंद्रित 21 जनवरी को शराबमुक्त बिहार के समर्थन में बनने वाले मानव श्रृंखला पर है।इस आयोजन में २ करोङ लोगों की भागीदारी होगी जो वैश्विक स्तर पर भी एक बङा आकङा होगा।

बिहार सरकार ने मानव श्रृंखला के मार्ग की दूरी दो गुनी से अधिक कर दिया है। पहले 5000 किमी में ह्यूमन चेन बनना था, लेकिन अब 11 हजार 292 किमी की मानव श्रृंखला बनेगी।वही सभी जिलाधिकारियों से विडियो कान्फ्रेंसिंग के बाद मुख्य सचिव अंजनी कुमार सिंह ने यह नया लक्ष्य तय कर सभी जिलों को जवाबदेही सौंपी है।

मुख्य सचिव ने बताया कि एक किमी में 2000 लोग एकजुट होकर हाथों में हाथ पकड़कर शराबबंदी की मुहिम को अपना समर्थन देगें। उन्होंने कहा कि जिलाधिकारियों ने जानकारी दी कि एक कि०मी० में एक हजार लोग ही खड़े हो सकते हैं, इसलिए टारगेट बड़ा किया गया है। हालांकि लक्ष्य बदलने के बाद भी मानव श्रृंखला के मुख्य मार्ग की दूरी पूर्ववत 3007 किमी ही है। अलबत्ता जिलों के अंदर उपमार्ग – सबरूटों की दूरी 11292 किमी हो गयी है। उन्होंने जिलों को सख्त हिदायत दी है कि कहीं भी मानव श्रृंखला टूटने न पाए।

प्रदेश अध्यक्ष वशिष्ठ नारायण सिंह ने जिलाध्यक्षों के साथ मानव श्रृंखला की तैयारी को लेकर पार्टी कार्यालय में कई घंटे कार्यक्रम को सफल बनाने के लिए बैठक की। उन्होंने बाद में पत्रकारों से कहा कि नशाबंदी के खिलाफ बिहार के इस अद्भुत कार्यक्रम में पूरी एकजुटता बरती गई है। पार्टी कार्यकर्ता सभी जिलों में इसके लिए मुश्तैद है। बिना पार्टी के झंडे और बैनर के सभी कार्यकर्ता इस अभियान में हिस्सा लेंगे।आशार लगायें जा रहें हैं कि इस कार्यक्रम को सफल बनाने में महिलाओं का भूमिका सर्वाधिक रहेगा।

नाशाबंदी पर अपना बिहार का नारा-
महिलाओं का हुआ सपना साकार।
शराब मुक्त हुआ अपना बिहार।

 

शैलेश कुमार

2016 में बिहार के क्राइम ग्राफ में गिरावट, 20% की आई कमी

वर्ष 2016 में तो बिहार कई वजहों से चर्चा में रहा मगर सबसे ज्यादा शराबबंदी के कारण बिहार पूरे देश भर में सुर्खियों में बना रहा । शराबबंदी के कारण फायदे और नुकसान की तो कई बातें हो रही है मगर शराबबंदी के कारण एक बहुत बड़ा बदलाव दिख रहा है वह है अपराधिक मामलों में कमी ।

 

एडीजी (मुख्यालय) सुनील कुमार ने शुक्रवार को सचिवालय स्थित अपने कार्यालय में आयोजित प्रेस वार्ता में बीत रहे वर्ष 2016 में शराबबंदी को अपराध की कमी का सबसे महत्वपूर्ण कारण बताया. उन्होंने कहा कि शराबबंदी के बाद राज्य में सभी तरह के अपराधों में काफी कमी आयी है.

 

वर्ष 2015 की तुलना में 2016 के दौरान सभी तरह के आपराधिक घटनाओं में सम्मिलित रूप से औसतन 20 फीसदी की कमी आयी है. हत्या के मामले में 24 फीसदी, डकैती की घटनाओं में 26 प्रतिशत, लूट में 19 प्रतिशत, गृभेदन या चोरी में तीन फीसदी, फिरौती के लिए अपहरण के मामलों में 42 प्रतिशत, रेप में छह प्रतिशत व सड़क दुर्घटनाओं में 20 फीसदी की कमी आयी है. उन्होंने कहा कि आंकड़े बताते हैं कि शराबबंदी से अपराध में कमी आयी है. पुलिस हर तरह की चुनौती का सामना करने के लिए तैयार है.

 

भ्रम में नहीं रहें, आज से लागू होगा नया शराबबंदी कानून – नीतीश

बिहार में पूर्ण शराबबंदी के अधिसूचना को पटना हाईकोर्ट द्वारा असंवैधानिक बता रद्द कर देने के बाद आज नीतीश कुमार ने यह स्पष्ट हा कि शराबबंदी को लेकर नया कानून रविवार से लागू हो जायेगा. गांधी जयंती के मौके पर सुबह नौ बजे इसकी अधिसूचना जारी कर दी जायेगी ।

दादी जी मंदिर परिसर में अग्रसेन जयंती समारोह को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि नये विधेयक को विधानमंडल का दोनों सदन पारित कर चुका है और इस पर राजभवन की सहमति मिल गयी है तथा सात सितंबर को कैबिनेट ने भी अपनी मंजूरी दे दी है. उन्होंने कहा कि सरकार ने इसे गांधी जयंती के अवसर पर लागू करने का निर्णय लिया था, इसलिए रविवार से यह प्रभावी हो जायेगा.

 

मुख्यमंत्री ने कहा कि शराबबंदी को लेकर समाज की मानसिकता बदलनी होगी. शराबबंदी से प्रदेश में दूसरा व्यवसाय बढ़ेगा और सरकार को राजस्व की प्राप्ति होगी.मुख्यमंत्री ने कहा शराब का कारोबार नैतिक नहीं था. इस अनैतिक व्यापार से पांच हजार करोड़ के घाटे का तर्क दिया जा रहा है. जबकि, इसके बंद हो जाने से 10 हजार करोड़ रुपये की बचत हो रही है. उन्होंने समारोह में उपस्थित महिलाओं से कहा कि आप पूर्ण नशामुक्ति के घुम-घुम कर प्रयास करने की अपील की. उन्होंने महिलाओं से व़़ृद्धजनों के लिए भी कार्य करने का आह्वान किया.

बिहार में शराबबंदी का साइड इफेक्ट्स….

बिहार में शराबबंदी के साइडइफेक्‍ट्स के कई किस्‍से रोज सुनता रहता हूं । बड़े इवेंट्स नहीं हो रहे/लांचिंग शिफ्ट हो गई/बड़ी शादियां भी दूसरे शहरों में जा रही – पहले दिन से सुन रहा हूं । लेकिन बुधवार को मेरे हजाम राजेश ठाकुर की आपबीती अलग किस्‍म की थी ।

मोरल आफ स्‍टोरी को कैसे समझें,मैं तो नहीं समझ पा रहा । अंत में,आप समझिएगा ।
राजेश ठाकुर पुराना हजाम है । राजधानी पटना के एलिट क्‍लास में कई बड़े लोगों की सेवा करता है । बाल-दाढ़ी बनाने को बुधवार को मैं सैलून में गया हुआ था । कंघी-कैंची लगाने के कुछ देर बाद ही उसने कहा-सर,अब नीतीश कुमार को वोट नहीं देंगे । वह अब तक नीतीश कुमार को ही वोट देता आया है । गुस्‍से की इनसाइड स्‍टोरी को हमने तुरंत समझा । कहा-दारु बंद हो गया,इसलिए न । खैर,तुम्‍हारी पत्‍नी वोट देगी । वह तुम्‍हारी लत छूटने से खुश होगी । उसने कहा-नहीं,अब वह भी नहीं देगी । मैं चौंका-ऐसा कैसे । फिर तो नीतीश कुमार की सभी केमिस्‍ट्री खराब हो जाएगी । सपाट सा जवाब ठाकुर ने दिया-अब रात को घर जाता हूं,तो पॉकेट में पैसे कम होते हैं,पत्‍नी उदास रहने लगी है ।
शराबबंदी से हजाम राजेश ठाकुर की आमदनी कैसे कम हो गई,मेरे लिए पहेली थी । वह दारु दुकान के पास दालमोठ-भूंजा-अंडा थोड़े बेचता है । पर,उसने तुरंत सीधे-सीधे समझा दिया । कहा,सर – बाल व दाढ़ी बनाने के डेढ़ सौ रुपये लगते हैं । शराबबंदी के पहले शाम सात बजे के बाद आने वाले कस्‍टमर ‘हैप्‍पी आवर’ में होते थे । दो-तीन पेग लगाये रखते थे । बाल-दाढ़ी बनाने के बाद धीरे-से कहता था- हेड मसाज कर दें क्‍या । तुरंत ‘हां’ जवाब में मिलता था । फिर फेशियल करने की अनुमति भी मिल जाती थी । इस तरह टोटल बिल डेढ़ सौ रुपये से बढ़कर नौ सौ रुपयों का हो जाता था । कस्‍टमर हजार रुपये का नोट देता और सौ रुपये वापस न लेकर ‘टिप्‍स’ में हमें दे देता । इधर,नौ सौ रुपयों की सर्विस के बदले दुकान से नब्‍बे रुपयों का कमीशन मिलता । ऐसे में,शाम को दो-तीन सर्विस भी कर लिया,तो घर की रेलगाड़ी चलाने में कोई दिक्‍कत नहीं होती थी ।
रोज की आमदनी को जोड़ ही बेटे को जयपुर में इंजीनियरिंग में पढ़ा रहा हूं,पर अब आमद अचानक कम हो गई,इसलिए परेशानी हो रही है । आमदनी कैसे कम हुई,राजेश ने कहा-कस्‍टमर अब ‘हैप्‍पी आवर’ के मूड में नहीं आते । सो,एक्‍स्‍ट्रा सर्विस के ऑफर को कबूल नहीं किया जाता । नौ सौ की सर्विस अब मुश्किल हो गई है,डेढ़-दो सौ की सर्विस ही होती है ।
मैंने समझाने की कोशिश की । कहा-फिर भी तुम्‍हारी सेहत शराब छूटने से ठीक हो जाएगी । उसने जवाब दिया- शराब कितना पी लेता था मैं ,महीने में तीन-चार सौ रुपयों का । इस कारण कोई दिक्‍कत नहीं थी ।

 

अब इस स्‍टोरी को खत्‍म कर घंटों तक मैं ‘मोरल ऑफ स्‍टोरी’ के वाक्‍य को तलाशता रहा । पर वाक्‍य मिल नहीं रहे । वजह कि राजेश की स्‍टोरी के दो पक्ष हैं । जहां राजेश की आमदनी बढ़ रही थी,वहीं नशे में आया कस्‍टमर अधिक खर्च कर रहा था । कौन-कितना सही,जवाब आप सब भी तलाशें ।
इस राजेश ठाकुर की स्‍टोरी में ही छोटी-सी एक और सप्‍लीमेंटरी स्‍टोरी जोड़ देता हूं । यह किस्‍सा पटना में रेडीमेड कपड़ों के एक बड़े ब्रांडेड शॉप का है । रोज की बिक्री लाखों में होती थी । पर इन दिनों सेल्‍स कम हो गया । पिछले दिनों दो दिनों तक कोई कस्‍टमर नहीं आया था,तो दुकान मालिक ने मन की टीस हमें बताई थी । कहा-सच है,मार्केट में नकदी का संकट है । पर, दो दिनों तक कोई कस्‍टमर नहीं,यह तो सोच भी नहीं सकता था । फिर वे निष्‍कर्ष पर निकले । कहा-हुआ यह है कि उनकी पहचान ब्रांडेड शॉप की है । ब्रांड्स महंगे मिलते हैं । चुनिंदा कस्‍टमर ही पहले भी आते थे । अब जब से शराबबंदी हुई है,ये कस्‍टमर्स शराब की भूख मिटाने दिल्‍ली-कोलकाता जाने लगे हैं । निश्चित तौर पर,इन शहरों में ब्रांड्स की रेंज अधिक होती है । सो,ये कस्‍टमर पटना को भूलने लगे हैं । पर,ऐसे में हम दुकान वाले दूसरा कौन-सा रास्‍ता तलाशें,समझ से परे है । सुनकर बस मैं भी इतना कह सका कि आपके सवाल का जवाब तो अपुन के पास भी नहीं है ।

 

(सभार: ज्ञानेश्वर जी के फेसबुक पेज से)

राजनीति: शराबबंदी को लेकर देशभर में घूम रहें मुख्यमंत्री नीतीश कुमार पर मोदी का जोरदार हमला

पटना: पूरे देश में शराबबंदी के प्रचार में घूम रहे मुख्यमंत्री नीतीश कुमार पर पूर्व उपमुख्यमंत्री सुशील मोदी ने जोरदार हमला किया है। 

 

पूर्व उपमुख्यमंत्री सुशील कुमार मोदी ने कहा है कि पूरा बिहार अराजकता की चपेट में है और मुख्यमंत्री नीतीश कुमार शराबबंदी के देशव्यापी अभियान में जुटे हुए हैं। सूबे के सवा तीन लाख पंचायत शिक्षकों के साथ ही 10 विश्वविद्यालयों के हजारों शिक्षक व शिक्षकेत्तर कर्मी पिछले चार महीने से वेतन का इंतजार रहे है।

 

मोदी ने कहा कि लाखों पंचायत शिक्षकों को होली के बाद से वेतन नहीं मिल पाया है। विश्वविद्यालयों से लेकर प्राथमिक और माध्यमिक शिक्षक भी पिछले चार महीने से वेतन से वंचित हैं। यदि सरकार शिक्षकों को हर महीने वेतन देने में सक्षम नहीं है तो उसे घोषणा कर देनी चाहिए कि वह एक पर्व के बाद दूसरे पर्व पर ही वेतन देगी। वैसे प्रदेश के लाखों शिक्षकों को ईद के मौके पर भी वेतन मिलने की कोई उम्मीद नहीं है। टॉपर घोटाला शिक्षा क्षेत्र में व्याप्त अराजकता की महज एक बानगी है।

 

टॉपर घोटाले के साइड इफैक्ट के बाद इंटर और मैट्रिक के 85 हजार छात्रों की पौने दो लाख कॉपियों की स्क्रूटनी बीएसईबी के लिए चुनौती बनी हुई है,वहीं मगध विश्वविद्यालय स्नातक तृतीय वर्ष के छात्र परीक्षा परिणाम में गड़बड़ियों को लेकर वीसी के घेराव के लिए विवश हो रहे हैं तो दूसरी ओर बीपीएससी मुख्य परीक्षा की तिथि बढ़ाने को लेकर सैकड़ों छात्र आत्मदाह की चेतावनी दे रहे हैं। पिछले दो महीने से पटना आर्ट कालेज के छात्र आंदोलनरत हैं मगर नीतीश कुमार इन सबसे बेखबर हैं।

 

मैट्रिक और इंटर के 85 हजार छात्रों ने अपनी 1.72 लाख कॉपियों की जांच के लिए बोर्ड को आवेदन दिया। बार-बार तिथि तय करने के बावजूद जेईई पास करीब साढ़े आठ हजार छात्रों की ही आधी-अधूरी स्क्रूटनी हो पाई है। इससे हजारों छात्रों का भविष्य अधर में है। सरकार के अंतिम समय में नौंवी की परीक्षा लेने से हाथ खड़ा करने से लाखों छात्रों की 10वीं की पढ़ाई तीन महीने तक बर्बाद हो चुकी है।

बिहार: अब ना रहा वो प्यारा हाला, ना ही रही वो मधुशाला

पटना: सूखा लातूर और देश के दूसरे हिस्सों में है लेकिन प्यास क्या होती है, इसका दर्द तो बिहार वालों से पूछिए, बिहार के शराब प्रेमियों से पूछिए।

 

वे अपनी प्यास बुझाने के लिए हर तरकीब अपना रहे हैं. आज कल उनका यूपी, झारखण्ड और नेपाल जाना बढ़ गया है।

 

 पथिक बना मैं घूम रहा हूँ, सभी जगह मिलती हाला,
सभी जगह मिल जाता साकी, सभी जगह मिलता प्याला,
मुझे ठहरने का, हे मित्रों, कष्ट नहीं कुछ भी होता,
मिले न मंदिर, मिले न मस्जिद, मिल जाती है मधुशाला।।

ये हरिवंश राय बच्चन की है जो कुछ दिन पहले बिहार का हालात बताने के लिए काफी था मगर अब बिहार का हालात अलग है अब यहा मंदिर और मस्जिद तो मिल जाती है मगर मधुशाला नही मिलती।

बिहार के शराब प्रेमी परेशान हैं. आखिर उन्हें सबसे बड़ा धोखा मिला है! नीतीश कुमार चुनाव से पहले शराबबंदी की बात कर रहे थे. सभी को लग रहा था कि महिलाओं को लुभाने के लिए यह नीतीश कुमार का चुनावी जुमला होगा. ऐसा कुछ होगा नहीं. सरकार क्यों चाहेगी कि उसके राजस्व मे करोडों की कमी आए। मगर उनके अरमानों पर पानी फिर गया।

सूखा तो लातूर और देश के दूसरे हिस्सों में है लेकिन प्यास क्या होती है, इसका दर्द बिहार के शराब प्रेमियों से पूछिए.

 

शराबबंदी के बाद बिहार के मौजूदा हालात पर मधुशाला के तर्ज पर अमित शाण्डिलय ने एक कविता लिखा है जो वर्तमान स्थिति को बताती है।

 

amit_shandilya_poem_madhushala

 

 

कौन चलेगा डगमग-डगमग
कौन उठाएगा प्याला
अब ना रहा वो मय का हाला
ना ही रही वो मधुशाला ।

मधुशाला मिलती ही नहीं तो
मन्दिर मस्जिद जातें है ,
मेल कराते मन्दिर मस्जिद
जेल कराती मधुशाला ।

प्रेम जिन्हें मय से प्रगाढ़ था
वो मुश्किल से जीतें हैं ,
कुछ तो झारखण्ड, बंगाल में जाकर
मस्त ख़ुशी से पीतें हैं ।

साक़ी को चिंता है बहुत
मय के अस्तित्व खोने का,
सच पूछो तो ख़ुशी मनाओ
‘मैं’ का अस्तित्व होने का ।

डूब रही थी जिनकी कश्ती
बच गया वो मतवाला
अब ना रहा वो प्यारा हाला
ना ही रही वो मधुशाला ।

 

© Aapna Bihar E Media

आपने देखा बिहार की ‘मुंह सूंघवा’ पुलिस को ?? सोशल मीडिया पर फोटो वायरल

पटना। बिहार की शराबबंदी की चर्चा  पूरे देश में है। सोशल साईट पर भी यह मुद्दा गर्म है तो नीतीश कुमार पूरे देश में घूम-घूम के इसके पक्ष में माहौल बना रहे है।

बिहार में शराबबंदी के बाद खूब तस्वीरें वायरल हो रही है। कुछ तो फेक होती है पर कुछ असली तस्वीरें भी हैं।

इन दिनों एक तस्वीर सोशल मीडिया पर खूब धूम मचा रही है जो बिहार की मुंह सूंघवा पुलिस की तस्वीर है।

मुंह सुंघती पुलिस

मुंह सुंघती पुलिस

शराबबंदी के बाद पुलिस के जवान को ब्रेथ एनालाइजर कई जगहों पर नहीं दिया गया है। ऐसे में पुलिस के जवान सीमावर्ती राज्यों से बिहार में प्रवेश करने वाले लोगों की जांच मुंह सूंघकर कर रहे हैं। सोशल मीडिया पर यह तस्वीर पिछले कई दिनों से खूब शेयर हो रही है।

हालांकि यह पता नहीं चल पाया हैपटना। बिहार में शराबबंदी के बाद खूब तस्वीरें वायरल हो रही है। कुछ तो बनावटी होती है पर कुछ असली हैं। इन दिनों एक तस्वीर सोशल मीडिया पर खूब धूम मचा रही है जो बिहार की मुंह सूंघवा पुलिस की तस्वीर है।

शराबबंदी के बाद पुलिस के जवान को ब्रेथ एनालाइजर कई जगहों पर नहीं दिया गया है। ऐसे में पुलिस के जवान सीमावर्ती राज्यों से बिहार में प्रवेश करने वाले लोगों की जांच मुंह सूंघकर कर रहे हैं। सोशल मीडिया पर यह तस्वीर पिछले कई दिनों से खूब शेयर हो रही है।

हालांकि यह पता नहीं चल पाया है कि  यह तस्वीर कहा की है। फोटो में जो जगह दिख रहा है उसके अनुसार तो यह किसी राज्य का बॉर्डर एरिया लगता है। जहां से लोग बिहार की सीमा में प्रवेश करते हैं। पुलिस ब्रेथ एनालाइजर नहीं होने की वजह से मुंह सूंघ पता कर रही है कि व्यक्ति ने शराब पी है की नहीं। कि तस्वीर कहा की है। फोटो में जो जगह दिख रहा है उसके अनुसार यह किसी राज्य का बॉर्डर एरिया है। जहां से लोग बिहार की सीमा में प्रवेश करते हैं। पुलिस ब्रेथ एनालाइजर नहीं होने की वजह से मुंह सूंघ पता कर रही है कि व्यक्ति ने शराब पी है की नहीं।