बिहार का मानव संसाधन ही उसका सबसे बड़ा खजाना है..

कोई बिहारी बेहतर करता है तो इसका डंका तो हमलोग पीटते हैं मगर अक्सर सरकार के तरफ से कोई रिएक्शन नहीं आता। आज अच्छा लगा कि ईशान किशन के ऐतिहासिक बल्लेबाजी के लिए राज्य के मुख्यमंत्री ने भी पीठ थपथपाया है।
ईशान जैसे कई बिहारी प्रतिभा राज्य के बाहर अपने क्षेत्र में नाम कमा रहे हैं। ये लोग राज्य के ब्रांड एंबेसडर हैं, प्रेरणा हैं। सरकार को इन सभी बिहारी प्रतिभा को आधिकारिक तौर पर राजकीय सम्मान से सम्मानित करना चाहिए। सरकारी कार्यक्रमों में इनकी भाग्यदारी बढ़ानी चाहिए। इनके अनुभवों और क्षमता का उपयोग कैसे राज्य के हित में किया जाना चाहिए इसका योजना बनाया जाना चाहिए।
राज्य से बाहर जाकर देश और दुनिया में नाम कमाने वाले बिहारियों का अक्सर यह शिकायत रहता है कि वे पूरी दुनिया में सम्मानित होते हैं, लोग तारीफ करते हैं मगर अपने ही राज्य में सरकार और समाज के तरफ से उन्हें उचित सम्मान नहीं मिलता, उनकी उपेक्षा की जाती है। बिहार आज सिर्फ मजदूर निर्यात नहीं करता, उसके साथ डॉक्टर, इंजिनियर, कलाकार, अफसर, क्रिकेटर, उद्यमी, आदि भी बड़ी संख्या में निर्यात करता है। बिहार का मानव संसाधन ही उसका सबसे बड़ा खजाना है।
इस खजाना का लाभ उठाना है तो हमें न सिर्फ शिक्षित और हुनरमंद नागरिक तैयार करते रहना होगा, बल्कि पलायन के बाद भी हमें अपने बिहारी समाज को प्यार, सम्मान और अपनापन से उन्हें अपनी मातृभूमि से जोड़ के रखना होगा।

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