जम्मू और कश्मीर में बिहारियों पर आतंकी हमले पूरे बिहार के आत्मसम्मान पर है हमला..

मजदूरों के मौत पर सरकार द्वारा छोटे-मोटे पैसे दे कर उनके मौत को नॉर्मल बनाया जा रहा है.

हाल ही में हमने देखा कि देश के केंद्र शासित प्रदेश जम्मू एवं कश्मीर में मजदूरों पर हमला हुआ है, जिसमें हमारे बिहार के राजा राशि देव और जोगिंदर राशि देव की आतंकियों द्वारा हत्या कर दी गयी है,और चुनचुन राशि देव गंभीर रूप से घायल हो चुके है। इस मुद्दे को लेकर राजनीति  में गहमागहमी भी तेज हो गई है और विपक्ष नेता तेजस्वी यादव ने इस घटने का जिम्मेदार नीतीश कुमार को ठहराया है। उन्होंने कहा है कि यदि अपने प्रदेश में रोज़गार उपलब्ध होता तो मजदूरों की ये हालत नही होती। इस मामले का संज्ञान लेते हुए मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने पीड़ित परिजनों को दो-दो लाख रुपए राशि देने की घोषणा की है।

मजदूरों के मौत का नर्मलाइजेशन

यह कोई पहली बार नही हुआ है कि बिहार के मजदूर किसी अन्य राज्य में गए और उनके साथ दुर्व्यवहार किया गया है, ऐसे हमले हम महाराष्ट्र में भी देख चुके है, जहाँ पर उत्तर भारतीयों को पीट कर भगाया जा रहा था और उस समय भी उस वेदना का शिकार बिहारी ही ज्यादा हुए थे। कोरोना काल को नही भुलाया जा सकता जब बिहारी मज़दूर भुखमरी से अपना जान बचाने के लिए मीलो दूर पैदल ही निकल चुके थे ओर जिनमें कई रास्ते में ही अपनी जान गवां दिए। तब भी नीतीश कुमार जी ने सारे मजदूरों के अकाउंट में एक हज़ार रुपए की राशि दी थी। हम यह देख रहे है कि जब भी मजदूरों पर कोई विपत्ति आती है तो बिहार सरकार या तो उस मुद्दे को अनसुना करती है अगर सुनती भी है तो कुछ टोकन मनी प्रदान कर देती है। क्या इस टोकन मनी से मजदूरों की समस्याओं का निदान हो सकता है? क्या उनकी जिंदगियां बचाई जा सकती है? या ऐसा नहीं लगता कि इस तरह से छोटे-मोटे पैसे दे कर उनके मौत को नॉर्मल बनाया जा रहा है। इस मामले पर केंद्र सरकार की भी बेरुख़ी देखी जा सकती है| केंद्र के तरफ से भी प्रदेश या भारतीय मजदूरों की सुरक्षा के लिए कोई ठोस कदम नही उठाए जा रहे है।

इस बात में कोई संदेह नहीं है कि बिहार के लोगों को अपने राज्य में काम नही मिल रहा है जिसकी वज़ह से उन्हें अन्य प्रदेश जाना पड़ रहा है, और वहाँ पर वो अनेक प्रकार के यातनाओं का शिकार हो रहे हैं। यह मुद्दा कोरोना काल के समय से ज़्यादा जोरो-शोरो पर है लेकिन फिर भी मजदूरों के लिए राज्य सरकार ने कोई मज़बूत कदम नहीं उठाए। राज्य सरकार की ओर से हमने एम.एस.एम.ई. (लघु कार्य उद्योग) क्षेत्र में राज्य के पिछड़े लोगो को कम ब्याज पर लोन की व्यवस्था को ज़रूर देखा है लेकिन उससे मजदूरों की हालत पर कोई खास सुधार देखने को नही मिला है। बिहार के लाखों मज़दूर ऐसे है जो अन स्किल्ड है ऐसे में वह रोजगार खोलने का नही सोच सकते, दूसरा कई मज़दूर इतने ग़रीब है कि उन्हें तुरंत खाने-कमाने का साधन चाहिए उनके किए लोन लेने से लेकर रोजगार खोलने तक बहुत लंबी प्रक्रिया है जिसे पूरा करने में वो असमर्थ हैं। सबसे महत्वपूर्ण मजदूरों में जागरूकता एवं शिक्षा का अभाव है जो उन्हें और दयनीय स्थिति में डाल देता है। लेकिन इन सब बातों को राज्य सरकार निरन्तर नजरअंदाज कर रही है और मजदूरों के उत्थान के लिए कोई प्रभावी एक्शन नही ले रही है।

जब हम मजदूरों की बात करते है तो उसमें संगठित एवं असंगठित क्षेत्र की बात जरूर आती है और बीते वर्ष हमने देखा कि भारत के करोड़ो मजदूर असंगठित क्षेत्र में है जहाँ पर उनके नाहीं स्वास्थ्य की सुरक्षा है नाहीं उनके जान की। इस दिशा में केंद्र सरकार ने ई-श्रम नामक पोर्टल लांच किया है जो देश के विभिन्न मजदूरों का रजिस्ट्रेशन कर रही है जिसमें चार करोड़ मज़दूर रजिस्टर भी हो चुके हैं, लेकिन अभी जमींनी स्तर पर इसका फायदा देखने को नही मिला है।

मजदूरों की स्थिति में सुधार के लिए कुछ आवश्यक कदम

मजदूरों की सुरक्षा के लिए केंद्र एवं राज्य सरकार दोनों को मजबूत कदम उठाना चाहिए, सबसे पहले केंद्र सरकार को यह जिम्मेदारी लेनी चाहिए कि देश के किसी भी कोने से मज़दूर यदि किसी केंद्र शासित प्रदेश में काम कर रहे है तो उनकी सुरक्षा की जिम्मेदारी सबसे पहले केंद्र सरकार की होनी चाहिए, समय-समय पर उनके हाल का जायजा लेना केंद्र सरकार का कर्तव्य है। यदि किसी भी जगह आतंकी हमले की सुराग मिले तो वहाँ के स्थानीय लोगो के साथ-साथ अस्थानीय लोगो को भी जजानकारी देनी चाहिए।

दूसरा राज्य सरकार जैसे कि बिहार को अपने राज्य में ही ज्यादा से ज्यादा लोगो को रोजगार देने की सुविधा करनी चाहिए, जैसे कि बिहार में अभी भी कल-कारखानों की कमी है यदि कारखाने अपने ही राज्य में आ जाए तो हमारे लोग क्यों ही जाएंगे दूसरे राज्य। यदि कुछ लोग बाहर काम भी करते हैं तो उन सभी लोगो का डाटा राज्य सरकार के पास होनी चाहिए और राज्य सरकार को यह सुनिश्चित करना चाहिए कि राज्य के मजदूर वर्ग रजिस्टर्ड हो जहाँ भी जाए उनके जान-माल की सुरक्षा बनी रहे। भारत के एक भी मज़दूर की जान कीमती है हम निर्दोष मजदूरो की जान के साथ खिलवाड़ नही कर सकते।

– ऋतु, शोधार्थी (दिल्ली विश्वविद्यालय)

 

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