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बातचीत: जब रितिक से मिलवाया गया तो हमें लगा कि कैसे ये हमारा रोल निभाएँगे: आनंद कुमार

“जब रितिक रोशन से मिलवाया गया तो हमें लगा कि कैसे ये हमारा रोल निभाएँगे? ये तो बहुत ही अच्छे दिखने वाले शख्स हैं। एकदम ब्रिटिश टाइप के दिखते हैं और हम तो बिल्कुल देहाती। हमें तो यक़ीन नहीं हो रहा था।

तब रितिक ने हमसे कहा कि उन्हें यह रोल निभाने की तैयारी में करीब एक साल लगेगा। वे अपनी मसल को कम कर लेंगे। बहुत दुबले लगेंगे। वह बात करने का तरीका भी बदल लेंगे। उनकी रोल को निभाने को लेकर जो प्यास और तड़प थी, हमें बहुत अच्छी लगी।

अब वह दिखते कैसे भी हों, लेकिन एक कलाकार की यही तो ख़ूबी होती है कि वह हर रोल में अपने आप को ढाल ले। हमें यकीन हो गया कि वह इस रोल को निभा लेंगे।” यह कहना है आनंद कुमार का, जिन पर रितिक रोशन अभिनीत फिल्म ‘सुपर 30’ आधारित है।

अपना बिहार से बात करते हुए आनंद बताते हैं, “करीब साढ़े आठ साल पहले मुझे एक फोन आया संजीव दत्ता का, जिन्होंने मुझे कहा कि हम आप पर कहानी लिखना चाहते हैं। तब पहली बार लगा कि चलो कोई मुझ पर फिल्म बनाना चाहते हैं। हालांकि मैंने इस बात को संजीदगी से नहीं लिया। फिर मेरे भाई को फोन आया संजीव का कि वह एजुकेशन पर बात करने के लिए पटना आना चाहते हैं तो भाई ने उन्हें आने के लिए कहा।

उस समय वह अनुराग बसु के साथ आए। हम तो उन्हें नहीं जानते थे। गूगल किया तब मालूम पड़ा कि वह तो जाने-माने फिल्म निर्देशक हैं। बात तब बन नहीं पाई। अनुराग बासु दूसरी फ़िल्मों में व्यस्त हो गए। हालाँकि संजीव दत्ता हमारे संपर्क में रहे।”

फिर फिल्म इस मुक़ाम पर कैसे पहुंची?

करीब ढाई साल पहले हमें संजीव जी को फोन आया और उन्होंने हम दोनों भाइयों को मिलने बुलाया। बातचीत हुई। तब मेरा कहना था कि हम सभी मिल जुल कर फैसला करें कि एक्टर और निर्देशक कौन हो? जब विकास बहल का नाम सामने आया तो मुझे उनकी फिल्म ‘क्वीन’ की याद आई जो कि मुझे बहुत पसंद आई थी।

निर्देशक विकास बहल पर यौन शोषण जैसे आरोप लगे थे। आपको तब लगा हो कि फिल्म शायद ना भी बने?

नहीं, मुझे पूरा यकीन था कि कुछ भी हो जाए फिल्म ज़रूर बनेगी। रितिक और विकास दोनों ने बहुत मेहनत की है। जब विकास को क्लीन चिट मिली तो मैं बहुत खुश हुआ। मेरे पिताजी कहते थे कि मेहनत कभी बेकार नहीं जाती।

आपकी फ़िल्म में एजुकेशन माफ़िया की भी बात हुई है?

हाँ, हमारा ‘सुपर 30’ जब अच्छा कर रहा था तो कुछ लोगों से सहन नहीं हो रहा था। वे सभी हमारे साथ-साथ हमारे भाई पर भी हमले करने लगे। बुरा लगता है कि कैसे हमारी वजह से हमारे भाई को परेशानी उठानी पड़ी। जब ये फिल्म बन कर तैयार हो गई है तो हमारे आसपास के एजुकेशन माफ़िया को ये बात भी बुरी लगी और उन लोगों ने हमारे भाई पर जान लेना हमला करवाया। अभी भी उसके पांव में गहरी चोट है। इन माफ़ियाओं को हमारी मशहूरी बुरी लग रही थी। कैसे एक गरीब का बेटा इतनी इज़्ज़त पा रहा है।

जानेमाने गणितज्ञ आनंद कुमार ने 2002 में ‘सुपर 30’ की स्थापना की थी। ‘सुपर 30’ के विद्यार्थियों को वे अपने साथ रखते हैं और वे उनसे कोई फीस नहीं लेते बल्कि उनके रहने-खाने का खर्च भी खुद ही वहन करते हैं। इस संस्थान का रिकार्ड रहा है की हर साल सुपर बच्चे IIT क्रैक करते हैं।

यही इस संस्थान का खासियत है जिससे इसे सुपर 30 कहा जाता है। आनंद कुमार ‘सुपर 30’ के लिए कोई भी सरकारी एवं गैर सरकारी वित्तीय मदद नहीं लेते। उन्हें अनेक देशी-विदेशी पुरस्कारों से सम्मानित किया गया है। सुपर 30 के संस्थापक आनंद कुमार पर बनी फिल्म सुपर -30 का ट्रेलर लांच हुआ है। जिसमें आनंद की भूमिका प्रसिद्ध फिल्म अभिनेता ऋतिक रोशन ने निभाई है।

ऋतिक रोशन अभिनीत यह फिल्म तमाम सिनेमा घरों में 12 जुलाई को रिलीज़ होने जा रही है । इस बायोपिक में यह दिखाने का प्रयास किया गया है कि एक शिक्षक में बड़ी ताकत होती है और वह समाज में बगैर जाति और धर्म के भेदभाव किए बड़ा बदलाव ला सकता है।

फिल्म देश के उन तमाम शिक्षकों को समर्पित है जो शिक्षण के माध्यम से राष्ट्र निर्माण में लगे हैं। जिस तरह से फिल्म निर्देशक और कलाकारों ने मेहनत की है, मुझे पूरा यकीन है कि आपलोगों को फिल्म खूब पसंद आयेगी। यह फिल्म देश के उन तमाम शिक्षकों को समर्पित है जो शिक्षण के माध्यम से राष्ट्र निर्माण में लगे हैं|

मुझे विश्वास है कि विकास बहल के बेजोड़ निर्देशन और रितिक रोशन के दमदार अभिनय के जरिए फिल्म लोगों को यह सन्देश देने में सफल होगी कि शिक्षा ही सभी समस्याओं का समाधान है। इस फिल्म के माध्यम से न सिर्फ युवाओं को निराशा से निकालने का प्रयास किया गया है बल्कि उन्हें शिक्षा के क्षेत्र में महत्वपूर्ण योगदान देकर देश को प्रगति पथ पर आगे बढ़ाने के लिए भी उत्साहित करने की कोशिश की गयी है. मुझे पूरा भरोसा है कि शिक्षा की ताकत द्वारा समृद्धि की ओर ले जाने वाले सामाजिक मुद्दे पर आधारित यह फिल्म लोगों को न सिर्फ पसंद आएगी बल्कि इसे पीढियां याद रखेंगी।

– सैय्यद आसिफ इमाम काकवी

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ऋतिक रौशन की फिल्म ‘सुपर 30’ का ट्रेलर रिलीज़, आनंद कुमार के आँखों में आये आंसू

बिहार के आनंद कुमार के जिन्दगी पर बनी बनी फिल्म सुपर 30 का ट्रेलर का आज रिलीज़ हो गया है| ऋतिक रोशन अभिनीत इस फिल्म का इंतज़ार लोग काफी समय से कर रहे थे| चुकीं यह फिल्म एक बिहारी के जिन्दगी पर बनी है, इसलिए बिहार में इस फिल्म को लेकर जबरदस्त क्रेज है| इस फिल्म में आनंद कुमार के कड़े परिश्रम से लेकर उनकी सफल होने तक के संघर्षों को दिखाया जाएगा| ‘सुपर 30’ (Super 30) 12 जुलाई को सिनेमाघरों में दस्तक देगी|

आनंद कुमार के जिन्दगी के अलावा इस फिल्म में बिहारी टोन का भी जबरदस्त तरीके से उपयोग किया गया है| बिहार के स्थानीय डायलेक्ट को पकड़ते हुए ऋतिक ने जिस तरह से डायलॉग डिलिवरी दी है वह शानदार है। रितिक अपने किरदार में इतने डूबे नजर आ रहे हैं कि आप उनके इमोशन्स को महसूस कर सकेंगे। ट्रेलर से साफ है कि ‘सुपर 30’ के जरिए ऋतिक रोशन एक बार फिर दमदार वापसी करने वाले हैं।

इस फिल्म में एक्टर ऋतिक रोशन  के अलावा मराठी फिल्मों की एक्ट्रेस मृणाल ठाकुर और बॉलीवुड में अपनी अलग पहचान बनाने वाले पंकज त्रिपाठी भी नजर आएंगे| बिहार के मैथेमेटिशियन आनंद कुमार उस समय खबरों में आए जब उनके पढ़ाए गए सभी 30 गरीब और जुझारू बच्चों ने आईआईटी जैसी परीक्षा को सफलतापूर्वक पास किया| आनंद कुमार के जीवन से प्रेरित होकर फैंटम फिल्मस के बैनर तले आनंद कुमार के जीवन पर ये फिल्म बनाई जा रही है| इस फिल्म को विकास बहल ने डायरेक्ट किया है|

फिल्म का ट्रेलर देख आनंद कुमार भावुक हो गये| अपने भावनाओं को व्यक्त करते हुए उन्होंने अपने फेसबुक पर लिखा, “ट्रेलर देखा | पूरे परिवार के आँखों में आंसू आ गये | लगा कि फिल्म में रितिक रोशन नहीं बल्कि मैं ही हूँ | संघर्ष के दिन याद आये | अत्याचारियों से मुकाबला करते हुये भी कठिन परिस्थितियों में भी विद्यार्थियों पढ़ाना | भाई का साथ | और सबकुछ | फिल्म की पूरी टीम का आभार |”

रिलीज़ से पहले ही आनंद कुमार की बायोपिक ने मचाया धूम, बनाया यह रिकॉर्ड

5 सितंबर यानी शिक्षक दिवस के विशेष मौके पर आनंद कुमार के जिंदगी पर आधारित फिल्म ‘सुपर 30’ का पोस्टर जारी किया गया| पोस्टर जारी करते ही ‘सुपर 30’ गूगल पर सबसे ज्यादा सर्च किए जाने वाला विषय बन गया| पिछले सप्ताह गूगल पर ऋतिक रोशन अभिनीत फिल्म ‘सुपर 30’ सबसे ज्यादा ट्रेंड कर रहा था|

गूगल ने इसकी जानकारी अपनी साइट पर दी है| गूगल ने अपने सोशल साइट पर एक छोटा-सा वीडियो क्लिप भी जारी किया है, जिसमें ऋतिक रोशन को आनंद कुमार की तरह पढ़ाते दिखाया गया है|

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इस उपलब्धि पर ख़ुशी जाहिर करते हुए आनंद कुमार अपने अधिकारिक फेसबुक पेज पर लिखा की पूरी दुनिया भर में फैले अपने तमाम शुभचिंतकों को मैं तहे-दिल से शुक्रिया अदा करना चाहता हूँ, जिनके आशीर्बाद और शुभकामनायों के बदौलत पिछले हफ्ते पोस्टर रिलीज़ के बाद न सिर्फ सोशल मीडिया पर सुपर 30 छाया रहा बल्कि गूगल में सर्च किये जाने वाले टॉपिक में नंबर-वन रहा | दोस्तों, जब आगाज ऐसा है तब अंजाम जरुर यादगार होगा |

ज्ञात हो कि फिल्म में ऋतिक रोशन सुपर 30 के संस्थापक आनंद कुमार की भूमिका में दिखेंगे| भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (आईआईटी) की प्रवेश परीक्षा की तैयारी कराने के लिए चर्चित संस्था ‘सुपर 30’ पर बन रही बायोपिक अभी रिलीज नहीं हुई, लेकिन अभी से यह लोगों की पहली पसंद बन गई है|

 

 

केबीसी के हॉट सीट पर बैठ आनंद कुमार ने अमिताभ के दिल के साथ जीता 25 लाख रूपये

महानायक अमिताभ बच्चन एक बार फिर अपने पसंदीदा शो केबीसी से छोटे परदे पर वापसी कर चुके हैं| वापसी के साथ ही इस शो ने टॉप 5 में अपनी जगह बना ली है| लेकिन अब महानायक के इस महा फेमस शो में एंट्री हुई एक ऐसे शख्स की, जिसे खुद अमिताभ बच्चन एक सुपरमैन मानते है| जी हां, यहां बात हो रही है है सुपर-30 के संस्थापक आनंद कुमार की| जिन्होंने केबीसी में आकर बिग बी का भी दिल जीत लिया| शुक्रवार को आनंद कुमार का ये शो टेलीकास्ट हुआ| बतौर सेलिब्रिटी पहुंचे आनंद ने हॉट सीट पर बैठकर ना केवल अमिताभ बच्चन के साथ दिल को छू लेने वाली बातें की बल्कि 25 लाख रुपए की राशि भी जीती| इस खेल में आनंद के दो स्टूडेंट्स अनिरुद्ध सिन्हा और अनूप कुमार ने उनकी मदद की|

यही नहीं सुपर 30 के संस्थापक आनंद कुमार के मीठापुर स्थित घर का माहौल भी शुक्रवार की रात कुछ अलग था। सोनी चैनल पर प्रसारित शो कौन बनेगा करोड़पति में सुपर 30 के संस्थापक आनंद कुमार अमिताभ बच्चन के सामने हॉटसीट पर बैठे थे। शो को देखने के लिए उनके घर के पास बकायदा प्रोजेक्टर लगवाया गया था। आनंद कुमार के साथ मोहल्ले के लोग, छात्र व उनके घर के लोग शो देखने के लिए बैठे हुए थे।

अमिताभ ने आनंद कुमार से पूछा….

अमिताभ बच्चन ने आनंद से पूछा कि सुपर 30 की स्थापना की प्रेरणा कैसे मिली और कैसे उन्होंने वंचित वर्गों के छात्रों के लिए मंच तैयार किया। आनंद से पूछा गया कि गांधीजी का जुड़ाव किस नदी से था? टाटा का पहला बिजनेस कौन था?

कभी साइकिल पर घूम-घूम कर पापड़ बेचते थे आनंद

कभी साइकिल पर घूम-घूम कर पापड़ बेचने वाले सुपर 30 के फाउंडर आनंद कुमार पर फिल्म बन रही है। उनकी बायोपिक बनाई जा रही है। फेमस मैथमेटेशियन आनंद से फिल्म के लिए निर्देशक विकास बहल और प्रोड्यूसर प्रीति सिन्हा ने संपर्क किया है। जुलाई में उनकी एक मीटिंग होनी है। इस फिल्म का नाम भी सुपर 30 रखा गया है।

मिडिल क्लास फैमिली के हैं आनंद

आनंद कुमार की फैमिली मिडिल क्लास से बिलॉन्ग करती है। उनके पिता पोस्टल विभाग में क्लर्क थे। बच्चों को अंग्रेजी स्कूल में पढ़ाने का खर्च निकालना उनके लिए मुश्किल था। इसलिए बच्चों को हिंदी माध्यम के सरकारी स्कूल में ही पढ़ाया। मैथ आनंद का फेवरेट सब्जेक्ट हुआ करता था। वे बड़े होकर इंजीनियर या साइंटिस्ट बनना चाहते थे।

12वीं के बाद आनंद ने पटना यूनिवर्सिटी में एडमिशन लिया जहां उन्होंने गणित के कुछ फॉर्मूले इजाद किए। इसके बाद कैम्ब्रिज से आनंद को बुलावा आ गया। यहां एक समस्या ये आई कि कैम्ब्रिज जाने और रहने के लिए लगभग 50 हजार रुपयों की जरूरत थी। लेकिन, इतने पैसे आनंद के पास नहीं थे।

पैसे की व्यवस्था हुई, लेकिन किस्मत को कुछ और मंजूर था

बताया जाता है कि जब कैम्ब्रिज जाने के लिए आनंद ने पिता से रुपयों की बात की तो उन्होंने अपने ऑफिस में बात कर रुपयों का इंतजाम कर लिया। 1 अक्टूबर 1994 को आनंद को कैम्ब्रिज जाना था लेकिन इससे पहले 23 अगस्त 1994 को पिता का निधन हो गया।

घर में आनंद के पिता अकेले कमाने वाले थे। चाचा अपाहिज थे। लिहाजा घर की सारी जिम्मेदारी आनंद के कंधों पर आ गई। इसके बाद आनंद अपने फेवरेट सब्जेक्ट मैथ पढ़ाकर गुजारा करने लगे।

लेकिन, जितना वे कमा रहे थे उससे घर का खर्च पूरा नहीं हो पा रहा था इसलिए आनंद की मां ने घर में पापड़ बनाने शुरू किया और आनंद रोज शाम को चार घंटे मां के बनाए पापड़ों को साइकिल में घूम-घूम कर बेचते। ट्यूशन और पापड़ से हुई कमाई से घर चलता था।

बिहार के लाल आनंद कुमार ने मसूरी में 2016 बैच के प्रशिक्षु आईएएस अफसर को किया संबोधित

8 मई को लालबहादुर शास्त्रीराष्ट्रीय प्रशासन अकादमी, मसूरी में सुपर-30 के संस्थापक गणितज्ञ आनंद कुमार को 2016 बैच के 180 प्रशिक्षु आईएएस अफसरों को प्रेरित किये। आनंद कुमार “शिक्षा में समानता” विषय पर व्याख्या दिए। अपने व्याख्यान के जरिए आनंद कुमार सुपर 30 की अबतक की यात्रा और निर्धन बच्चों के साथ उनकी सफलता के प्रेरणादायक अनुभवों को भी साझा किए। साथ ही वे भावी अधिकारियों को यह बताने का प्रयास किए कि देश को आगे बढ़ाने के लिए अंतिम पायदान के लोगों तक शिक्षा को पहुंचना अत्यावश्यक है।

 

वही अकादमी के संयोजक सी.श्रीधर द्वारा ने आनंद कुमार के योगदान की सराहना करते हुए उनसे प्रशिक्षु आईएएस अधिकारियों के बैच को पढ़ाने का आग्रह किया है। आनंद कुमार ने कहा कि देश का भविष्य जिन हाथों में सुरक्षित होने जा रहा है, उनके साथ अनुभव बांटना यादगार पल रहा।

 

आनंद कुमार अपने ऑफिसियल फेसबुक पेज पर पोस्ट किए है की:-

 

“लाल बहादुर शास्त्री राष्ट्रीय प्रशासन अकादमी, मसूरी में 2016 बैच के 180 प्रशिक्षु आईएएस अफसरों को संबोधित करने का अनुभव बड़ा सुखद रहा। सोचा था कि उन्हें मोटीवेट करूँगा लेकिन जिस तरह से सभी ने स्वागत किया तथा मेरी बातों को ध्यानपूर्वक सुना तब लगा जैसे मैं ही मोटीवेट हो गया। मैंने अपने अनुभव के आधार पर उन्हें बताना चाहा कि समाज के बदलाव में अधिकारियों की भूमिका राजनेतायों से भी कहीं अधिक होती है।”

खुशखबरी! सुपर 30 के संस्थापक आनंद कुमार ने 10वीं के छात्रों के लिए की बहुत बड़ी घोषणा

बिहार के महान गणितज्ञ आनंद कुमार एक बहुत बडी खुशखबरी दिया है। विश्व के सर्वश्रेष्ठ स्कूलों  में एक और हर साल 30 गरीब बच्चों का आईआईटी में पढने का सपना पूरा कराने वाले विश्व प्रसिंद्ध पटना के सुपर 30 में अब 10वीं के छात्रों का दाखिला होगा।

 

आईआईटी में दाखिले के लिए आयोजित जेईई परीक्षा में शामिल होने वाले गरीब छात्रों को सफलता दिलाने में मदद के लिए बने सुपर 30 की भारी सफलता के बाद इसके संस्थापक आनंद कुमार अब इस साल से इसका विस्तार करने जा रहे हैं और इसमें ऐसे छात्रों को शामिल करने जा रहे हैं जिन्होंने दसवीं की परीक्षा पास की है. सुपर 30 के मौजूदा कार्यक्रम में अब तक 12वीं पास छात्रों को लिया जाता था.

 

इस बात कि जानकारी देते हुए बिहार के प्रख्यात गणितज्ञ आनंद कुमार ने यह बताया है कि इसी वर्ष 2016 से ही वे अपने संस्थान में 10वीं पास विद्यार्थियों को शामिल करने जा रहे हैं. गौरतलब हो की पिछले सत्र तक ‘सुपर 30’में 12वीं पास विद्यार्थियों का एंट्रेंस के माध्यम से दाखिला लिया गया है.

20 छात्रों को शामिल करने की योजना

सुपर 30 के लिए अल्प एवं दीर्घकालिक योजनाओं के बारे में बताते हुए कुमार ने बताया कि 12वीं पास छात्रों को पढ़ाने के मौजूदा कार्यक्रम के अलावा हमलोग दो साल के इस नये कार्यक्रम में करीब 10-20 छात्रों को पढ़ाने की योजना बना रहे है. हमलोग इस साल से इस कार्यक्रम की शुरुआत करेंगे और अगले साल से इसे और व्यापक फलक पर किया जायेगा. नये कार्यक्रम में कितने छात्रों को शामिल किया जायेगा. इस बारे में पूछे जाने पर उन्होंने बताया कि अंतिम रूप दिया जा रहा है, लेकिन इसमें 10, 15 या 20 छात्रों को शामिल किया जा सकता है

 

आनंद का यह भी कहना है कि 12वीं पास छात्रों के लिए प्रोग्राम पहले के ही तरह से सुचारू रहेगा. जबकि सिर्फ 10वीं पास छात्रों का नए प्रोग्राम के तहत ‘सुपर 30’ में दाखिला लिया जाएगा. इसके अलावा उन्होंने कई और योजनाओं को अपने संस्थान में लागु करने की बात कही है जिनमें संस्थान की वेबसाइट के माध्यम से ऑनलाइन लेक्चर भी दिया जाएगा, जिससे कई विद्यार्थियों को घर बैठे ही इसका लाभ मिल पाएगा. जबकि संस्थान के लेक्चर्स की ऑनलाइन उपलब्धता से परीक्षार्थियों का बड़ा वर्ग भी लाभान्वित हो सकेगा।

 एक स्कूल भी खोलना चाहते है आनंद कुमार

प्रतिष्ठित भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थानों में दाखिले के लिए आयोजित संयुक्त प्रवेश परीक्षा में इस साल 30 छात्रों में से 28 ने सफलता हासिल की, जो 15 साल पहले इसकी स्थापना के बाद इसकी नई उपलब्धि है. कुमार ने कहा कि उनकी सबसे बड़ी आकांक्षा गरीब बच्चों के लिए आत्मनिर्भर मॉडल पर आधारित एक स्कूल की स्थापना करना है. कुमार ने बताया कि सुपर 30 की वेबसाइट पर डाउनलोड किये जा सकने योग्य लेक्चर एक रुपये में उपलब्ध कराने की भी योजना है.


 

बिहार के लाल आनंद कुमार को आईआईएम लखनऊ ने प्रतिष्ठित पुरस्कार से किया सम्मानित

हर साल 30 गरीब छात्रों को आईआईटी जैसे प्रतिष्ठित संस्थान में दाखिला दिला उनकी जिंदगी बदलने वाले सुपर 30 के संस्थापक आनंद कुमार को प्रतिष्ठित लक्ष्मीपत सिंघानिया-आईआईएम लखनऊ राष्ट्रीय नेतृत्व पुरस्कार  से सम्मानित किया गया।

पढें आनंद कुमार से खास बातचीत

केंद्रीय वित्तमंत्री अरुण जेटली ने शनिवार को दिल्ली में एक समारोह में आनंद कुमार को यह सम्मान दिया। पिछले कुछ वर्षों में यह पुरस्कार रतन टाटा, आनंद महिंद्रा, नारायण मूर्ति , किशोर बियानी जैसे लोगों को मिला है । उल्लेखनीय योगदान करने वालों को प्रत्येक वर्ष यह पुरस्कार दिया जाता है। संस्थान की तरफ से कहा गया है कि सुपर 30 से सैकड़ों छात्रों का आईआईटी में दाखिले का सपना साकार हुआ है।

इस उपलब्धि पर आनंद कुमार ने कहा, “कल का तीसरा कार्यक्रम भी यादगार था । केंद्रीय वित्तमंत्री माननीय अरुण जेटली के हाथों से मुझे लक्ष्मीपत सिंघानिया-आईआईएम लखनऊ राष्ट्रीय नेतृत्व पुरस्कार प्राप्त हुआ । पिछले कुछ वर्षों में यह पुरस्कार रतन टाटा, आनंद महिंद्रा, नारायण मूर्ति , किशोर बियानी जैसे लोगों को मिला है । इस प्रतिष्ठित पुरस्कार के लिए मैं माननीय मंत्री अरुण जेटली जी तथा आईआईएम लखनऊ को तहे-दिल से धन्यवाद देना चाहता हूँ । मैं आप सभी को विश्वास दिलाता हूँ कि भविष्य में मैं और भी अच्छा करने का प्रयास करूँगा |”

 

बिहार के सिर्फ आनंद कुमार नहीं बल्कि अभयानंद के सुपर 30 से भी 300 में से 270 छात्रों ने किया IIT JEE क्रैक..

पटना: सिर्फ पटना सुपर30 के संचालक आनंद कुमार ही नहीं बल्कि बिहार के पूर्व D. G. P अभयानंद भी हर साल गरीब मेधावीं बच्चों को आईआईटी में दाखिला करवाते है।  

 

पढाने का जुनून हो, कुछ अलग करने का जुनून हो तो वक्त की कमी तो बस बहाना है। आइजी अंकल के नाम से मशहूर बिहार के पूर्व डीजीपी अभयानंद को भी एक एेसा ही जुनून है- बच्चों को पढाना और आइआइटी की तैयारी कराना।

 

इस साल भी उनके द्वारा देश भर में संचालित रहमानी सुपर 30 से 270 बच्चों को आइआइटी की परीक्षा में उत्तीर्णता हासिल की है। वे कहते हैं जब बच्चों का रिजल्ट आता है तो उनको एसे खुशी महसूस होती है जैसे उनका खुद का रिजल्ट आया हो।

 

इस बार 270 बच्चों ने आइआइटी क्रैक किया है।

अभयानंद बताते हैं कि इस बार उनके रहमानी सुपर थर्टी और देश के बाहर सीएसआर के तहत चल रहे संस्थानों से 270 बच्चों ने आइआइटी क्रैक किया है। तीन सौ बच्चे इस कतार में थे। वह कहते हैं कि मेरी यह धारणा बन रही है कि अब हर समाज के लोग यह कोशिश कर रहे हैं बच्चे पढ़ें। उन्हें यह समझ में आ गया है कि यह सरकार के बूते की बात नहीं। समाज की मदद से ही आंकड़ा बढ़ रहा है। यह अच्छा है।

 

बिजी शिड्यूस से वक्त निकालकर प्रसिद्ध गणितज्ञ आनंद कुमार के सुपर-30 में फिजिक्स पढ़ाना शुरू किया। वहां बच्चे उन्हें आइजी अंकल कहते थे। एडीजी बनने के बाद भी बच्चे उन्हें इसी नाम से पुकारते थे।
उनके शिक्षक रहते सुपर-30 आइआइटी को रिकार्डतोड़ सफलता मिली। फिर कुछ कारणों से अभयानंद सुपर-30 से अलग हो गए और इसी साल आइजी अंकल के पढाने के जुनून के कारण ही रहमानी सुपर 30 की स्थापना हुई। इसके बच्चे हर साल आइआइटी में अपनी सफलता का परचम लहराते रहे हैं, इस बार भी रहमानी क्लासेज के 270 बच्चों ने आइआइटी क्रैक किया है। यह अभयानंद जी का ही कमाल है।
रिटायरमेंट के बाद और मेहनत की।
सुपर-30 से अलग होने के बाद उन्होंने मुस्लिम बच्चों को पढ़ाने की योजना बनाई। यहीं से जन्म हुआ रहमानी सुपर 30 का। वली रहमानी ने जगह उपलब्ध करायी इसीलिए इसका नाम रहमानी सुपर 30 पडा।  मुस्लिम बच्चों ने भी सफलता हासिल की। बच्चों के आइजी अंकल एडीजी हुए और डीजीपी होने के बाद कुछ वर्ष पहले रिटायर भी हो गए हैं मगर पढ़ाने और पढऩे का सिलसिला आज भी लगातार जारी है।

 

बिहार के लिए आनंद कुमार अभयानंद जैसे लोग गौरव है जो बार बार बिहार और बिहारी का नाम रौशन करते रहते है।