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सीनियर आईपीएस ने कहा, मुंगेर में पुलिस ने नियमों की धज्जियां उड़ाई, लिपि सिंह को दी नसीहत

सोमवार देर रात बिहार के मुंगेर में दुर्गा विसर्जन सामिल हुए लोगों पर पुलिस द्वारा की गयी बर्बरतापूर्ण करवाई कू लेकर लोगों में काफी आक्रोश है| इसको लेकर मुंगेर की एसपी लिपि सिंह पर कई सवाल उठ रहे हैं| सोशल मिडिया पर चल रहे विडियो में साफ दिख रहा है कि पुलिस ने जरुरत से ज्यादा बल प्रयोग किया है और आरोप है कि पुलिस ने बिना चेतावनी के ही लोगों पर फायरिंग कर दी|

पुलिस अपने पक्ष में सफाई दे रही है कि उसने सहजता के साथ काम किया और लोगो पर ही हिंसा का आरोप लगाकर अपने करवाई को जायज बता रही है| मगर इसी बीच एक सीनियर आईपीएस ने ही लिपि सिंह के करवाई को अनुचित बता दिया है|

मुंगेर में हुई झड़प का विडियो शेयर करते हुए कर्नाटक सरकार की गृह सचिव डी रूपा ने कहा कि प्रतिमा विसर्जन के दौरान लोगों को काबू करने के लिए पुलिस कार्रवाई में नियमों की धज्जियां उड़ाई गई हैं।

अपने आधिकारिक ट्विटर से डी रूपा ने ट्वीट किया, ‘सीआरपीसी में अनियंत्रित भीड़ को तितर-बितर करने के लिए पुलिस के न्यूनतम बल का उपयोग और भीड़ के अवरोध पैदा करने पर फोर्स की उचित संख्याबल निर्धारित है।’

उन्होंने आगे लिखा, ‘नियम के अनुसार, गोली चलाने से पहले चेतावनी और फिर आंसू गैस छोड़े जाते हैं। दुख की बात है कि मुंगेर में इसका पालन नहीं हुआ।’

अपना बिहार को मुंगेर से काफी लोगों ने विडियो भेजा और वहां हुए पुलिसिया करवाई की जानकारी थी| हमने इस मुद्दे को सोशल मिडिया पर प्रमुखता से उठाया है और मुख्यधारा के मिडिया का ध्यान इस घटना के तरफ खीचा है|

बता दें कि मुंगेर के दीनदयाल चौक के पास सोमवार देर रात प्रतिमा विसर्जन के दौरान पुलिस और लोगों के बीच झड़प हो गई। विडियो में गोलियों की आवाज़ साफ़-साफ़ सुनाई दे रही है और पुलिस निहत्य लोगों को घेरकर बेहरमी से पीटते हुए दिख रही है| इस घटना में अधिकारिक तौर पर एक व्यक्ति की मौत बताई गयी है मगर स्थानीय लोग 4 लोगों के मरने की बात कह रहे हैं|

हालांकि पुलिस ने सफाई में कहा कि असामाजिक तत्वों की ओर से पथराव और फायरिंग की गई, जिसमें कई पुलिसकर्मी जख्मी हो गए। इसके बाद पुलिस ने हालात को संभालने के लिए कार्रवाई की। पुलिस अभी भी गोली चलने की बात से इनकार कर रही है|

लोगों का यह भी आरोप है कि लिपि सिंह जदयू संसद आरसीपी सिंह की बेटी है, इसलिए सरकार लिपि सिंह के करतूत पर पर्दा डालने में लगी है|

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बिहार के सारण और बेगुसराय जिले के शिक्षकों को मिला प्रतिष्ठित राष्ट्रीय शिक्षक पुरस्कार

केन्द्र सरकार के शिक्षा विभाग के स्कूल शिक्षा और साक्षरता विभाग ने शुक्रवार की रात करीब नौ बजे अपने वेबसाइट पर राष्ट्रीय शिक्षक पुरस्कार के लिए चयनित शिक्षकों की सूची डालकर इसे सार्वजनिक किया। इस सूची में बिहार के दो जिलों के शिक्षकों को भी जगह मिली है| बिहार से जिन दो शिक्षकों को राष्ट्रीय शिक्षक पुरस्कार के लिए भारत सरकार ने चयनित किया है उनमें सारण के अखिलेश्वर पाठक एवं बेगूसराय के संत कुमार सहनी शामिल हैं। देशभर से 47 शिक्षकों का चयन राष्ट्रीय शिक्षक पुरस्कार 2020 के लिए हुआ है। चयनित सभी शिक्षकों को शिक्षक दिवस पर भारत के राष्ट्रपति रामनाथ कोविन्द के हाथों पुरस्कृत किया जाएगा।

मंत्रालय द्वारा जारी एक आदेश के अनुसार स्कूल शिक्षा और साक्षरता विभाग ने वर्ष 2020 के लिए पुरस्कार प्राप्तकर्ताओं का चयन करने के लिए राष्ट्रीय स्तर पर एक स्वतंत्र जूरी का गठन किया था. जारी आदेश के अनुसार, “राष्ट्रीय स्तर पर स्वतंत्र जूरी ने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से 153 शिक्षकों की सूची की समीक्षा करने के बाद सभी 36 राज्य और केंद्र शासित प्रदेश चयन समितियों और 7 संगठन चयन समितियों द्वारा शॉटलिस्ट किया गया है.”

बिहार का नाम राष्ट्रीय फलक पर स्थापित करने वाले दो शिक्षकों में से एक अखिलेश्वर पाठक सारण जिले के गड़खा के मध्य विद्यालय चैनपुर भैंसवारा में हेडमास्टर हैं। वहीं दूसरे चयनित शिक्षक संत कुमार सहनी उत्क्रमित हाईसकूल खरमौली, वीरपुर, बेगूसराय में हेडमास्टर हैं। चयनित सूची में अखिलेश्वर का नाम 12वें जबकि संत सहनी का नाम 47वें क्रम पर अंकित है।

 

एक बार फिर यूपीएससी में बिहारियों का शानदार प्रदर्शन, इन लोगों ने किया राज्य का नाम रौशन

यूपीएससी 2019 का रिजल्ट घोषित हो गया है| हर बार के तरह इसबार भी कई बिहारियों ने इस परीक्षा में शानदार प्रदर्शन किया है| भागलपुर के श्रेष्ठ अनुपम को यूपीएससी में 19 वां रैंक आया है। वे दिल्ली आईआईटी से कैमिकल इंजीनियर हैं। उन्होंने दूसरे प्रयास में बाजी मारी है। अनुपम ने बताया कि पहली बार वे बिना किसी तैयारी हुए थे। इस बार उन्हें सफल होने का पूरा विश्वास था। उन्होंने वर्ष 2012 में दसवीं परीक्षा सेंट जोसेफ स्कूल से पास की। उस समय वे देश के सेकेंड टॉपर हुए थे। उनके पिता विनीत कुमार अमर कारोबारी हैं। उन्होंने बताया कि उन्होंने भी दिल्ली यूनिवर्सिटी से पढा़ई की थी। सिविल सर्विस में आना चाहते थे मगर परीक्षा में सफल नहीं हो पाए। बेटे की सफलता से उन्हें बहुत खुशी हैं। अनुपम की मां भी एमएससी पास हैं। अनुपम के एक मामा इनकम टैक्स कमिश्नर हैं जो पीरपैंती के रहने वाले हैं। अनुपम का घर भागलपुर शहर के खलीफाबाग चौक के पास है।

shresth anupam of bhagalpur got 19th rank in upsc in second attempt

श्रेष्ठ अनुपम

वहीं बिहार के गोपालगंज के रहने वाले प्रदीप सिंह ने देशभर में 26 वां स्थान लाकर जिले के साथ राज्य का नाम रौशन किया है| पिछले साल भी इस परीक्षा में 93वीं रैंक हासिल की थी। लेकिन रैंक अच्छी नहीं होने के चलते इंडियन रेवेन्यू सर्विस मिला था।प्रदीप के पिता इंदौर में रहते हैं मगर मूल रूप से वे बिहार के हैं|

सीतामढ़ी जिले के नानपुर प्रखंड के बेला गांव के दीपांकर चौधरी ने यूपीएससी की फाइनल परीक्षा में 42वां स्थान पाया है। वे पिछले साल भी सेलेक्ट हुए थे। तब दीपंकर को 166वां रैंक मिला था। वो अभी आईपीएस की ट्रेनिंग ले रहे हैं। दीपांकर के पिता रंजन चौधरी झारखंड सरकार में संयुक्त सचिव पद से सेवानिवृत्त हैं। बहन अभी सीतामढ़ी में ही डॉक्टर हैं।

jehanabad daughter dr harsha priyamvada succed in upac civil services exam 2019 and got 165th rank i

हर्षा प्रियंवदा

जहानाबाद जिले की डॉक्टर हर्षा प्रियंवदा ने भी बाजी मारी है। यूपीएससी में सफलता का परचम लहराने वाली हर्षा को 165 वीं रैंक मिली है।  शहर के जाने-माने व्यवसायी लक्ष्मी फैशन प्रतिष्ठान के संचालक दिलीप कुमार की भतीजी हर्षा प्रियंवदा वर्तमान में एमबीबीएस डॉक्टर हैं।

पटना से सटे जगमाल बिगहा के मूल निवासी अभिषेक कुमार ने भी इस प्रतिष्ठित परीक्षा में सफलता पाई हैं। जिन्होंने तीसरे प्रयास में यूपीएससी की परीक्षा क्रैक की। अभिषेक ने 452 वां रैंक हासिल किया है। साक्षी समाचार प्रतिनिधि ने अभिषेक से उनकी सफलता की बाबत विस्तार से बात किया।

UPSC 2020 result Abhishek Kumar of Bihar clear rank - Sakshi Samachar

अभिषेक कुमार

अभिषेक का रिजल्ट जगमाल बिगहा के लोगों के लिए खुशियों भरा संदेशा लेकर आया। घर में बेटे की कामयाबी की खुशियां मनाई जा रही है। पिता किसान हैं, जोत इनती बड़ी नहीं कि ठाठ से बैठकर आराम करें। लिहाजा खुद ही खेत में दिनभर पसीना बहाना होता है। मां को तो बस इतना पता है कि बेटा बड़ा अफसर बनने वाला है। पास पड़ोस के गांव वाले भी अभिषेक के घर जुटने लगे हैं और बधाइयों का सिलसिला जारी है।

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Bihar Board Results 2020: जानें कब आयेगी बिहार बोर्ड मेट्रिक और इंटर का रिजल्ट?

 बि‍हार बोर्ड (Bihar Board) कक्षा 10वीं और 12वीं की परीक्षाएं समाप्‍त हो चुकी हैं और अब मूल्‍यांकन का काम भी लगभग समाप्‍त हो चुका है| हालांक‍ि बोर्ड ने मूल्‍यांकन का काम समाप्‍त करने के ल‍िये 12 मार्च तक का लक्ष्‍य रखा था| लेक‍िन श‍िक्षकों की कमी के कारण इसमें कुछ समय और लग रहा है| छात्र उम्‍मीद कर सकते हैं क‍ि मार्च के आख‍िरी सप्‍ताह तक बि‍हार बोर्ड, मैट्र‍िक और इंटरमीडिएट के पर‍िणाम जारी कर सकता है| सूत्रों की मानें तो बोर्ड ने कक्षा 10वीं की कॉप‍ियां 26 फरवरी से 8 मार्च 2020 के बीच जांच ली थीं और स‍िर्फ इंटरमीडिएट की कॉप‍ियां ही जांच के ल‍िये बाकी रह गई थीं|

शिक्षा विभाग के अपर मुख्य सचिव आर के महाजन ने मंगलवार को कहा कि कोरोना को लेकर मैट्रिक व इंटर के मूल्यांकन (कापी जांच) पर कोई खास असर नहीं पड़ेगा। दोनों ही परीक्षाओं के रिजल्ट अपने तय समय पर ही आएंगे। उन्होंने कहा कि यह शिक्षकों के सहयोग से ही संभव हो रहा है। इंटर की कापियों का मूल्यांकन समय पर चल रहा है। पुराने शिक्षक, अतिथि शिक्षक, वित्तरहित संस्थानों के शिक्षक और कुछ नियोजित शिक्षक मूल्यांकन कार्य में जुटे हैं। मैट्रिक का भी मूल्यांकन आरंभ हो चुका है। कापियों के मूल्यांकन में कोई विलम्ब नहीं हुआ है।

हालांक‍ि बोर्ड ने अब तक यह खुलासा नहीं क‍िया है कि‍ परीक्षा के पर‍िणाम की घोषणा कब तक कर दी जाएगी और आध‍िकार‍िक वेबसाइट पर इसे कब तक चेक क‍िया जा सकेगा| परीक्षा के पर‍िणाम से संबंधित ज्‍यादा जानकारी Biharboardonline.gov.in पर चेक क‍िया जा सकता है|

इंटरमीडिएट परीक्षा पास करने के लिए, एक उम्मीदवार को प्रत्येक विषय के कुल अंकों का 30 प्रतिशत और प्रत्येक विषय के थ्योरी में कुल अंकों का 40 प्रतिशत अंक लाना होगा| फर्स्ट डिवीजन को प्राप्त करने के लिए, एक छात्र को 300 अंक प्राप्त करने होते हैं, जबकि दूसरे डिवीजन के लिए यह 225 अंक लाने होते हैं|

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बिहार के दरभंगा एअरपोर्ट शुरू करने की मिली मंजूरी, रक्षा मंत्रालय से मिला एनओसी

अगले साल से दरभंगा एअरपोर्ट को फिर से शरू करने का सपना साकार होने लगा है|  रक्षा मंत्रालय ने दरभंगा एयरबेस के रनवे के मजबूतीकरण, टर्मिनल बिल्डिंग सहित अन्य विभिन्न निर्माण कार्य करने के लिए एनओसी जारी कर दी है|

इस बात की जानकारी जेडीयू के राष्ट्रीय महासचिव संजय झा ने दी|  उन्होंने कहा कि रक्षा मंत्रालय के इस एनओसी के बाद दरभंगा एयरपोर्ट पर निर्माण कार्य की प्रक्रिया बहुत जल्द शुरू हो जाएगी| इसी साल 19 सितंबर को दिल्ली की एक कंपनी को रनवे के मजबूतीकरण के लिए टेंडर फाइनल हो चुका है|

गौरतलब है कि केंद्र सरकार की उड़ान योजना के तहत दरभंगा एयरपोर्ट के जीर्णोद्धार का काम होना है| नरेंद्र मोदी की सरकार ने क्षेत्रीय एयरपोर्ट को बढ़ावा देने के लिए 2016 में उड़ान स्कीम को लॉन्च किया था| इसके बाद ही पटना में तत्कालीन उडड्यन मंत्री और मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के बीच करार हुआ था|

दरभंगा एअरपोर्ट का रनवे दुरुस्त हो जाने के बाद दरभंगा में 180 सीटर या उससे अधिक क्षमता वाले हवाई जहाज भी उतर पायेंगे|

संजय झा ने बताया कि दरभंगा एयरपोर्ट पर निर्माण कार्य में तेजी लाने के लिए बिहार के उपमुख्यमंत्री सुशील मोदी ने भी दिल्ली में नागरिक उड्डयन मंत्री और विभागीय सचिव के साथ बैठक की थी| मुख्यमंत्री का सचिवालय भी केंद्र सरकार के लगातार संपर्क में है|

संजय झा ने मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की दरभंगा एयरपोर्ट के प्रति प्रतिबद्धता का जिक्र करते हुए कहा कि दिल्ली में पिछले साल 24 दिसंबर को हुए मिथिला समाज के एक कार्यक्रम में उन्होंने कहा था कि जल्द ही दरभंगा से लोग उड़ान सेवा का लाभ उठा पाएंगे| तब मुख्यमंत्री ने कहा था कि भूमि अधिग्रहण में पैसे की दिक्कत नहीं आएगी| उसके अगले ही दिन 25 दिसंबर को पूर्व प्रधानमंत्री भारत रत्न अटल बिहारी वाजपेयी के जन्मदिन के कार्यक्रम में वित्त मंत्री अरुण जेटली जी ने कहा था कि उड़ान योजना में दरभंगा पर विशेष ध्यान है| इसे प्राथमिकता दी जा रही है|

रिलीज़ से पहले ही आनंद कुमार की बायोपिक ने मचाया धूम, बनाया यह रिकॉर्ड

5 सितंबर यानी शिक्षक दिवस के विशेष मौके पर आनंद कुमार के जिंदगी पर आधारित फिल्म ‘सुपर 30’ का पोस्टर जारी किया गया| पोस्टर जारी करते ही ‘सुपर 30’ गूगल पर सबसे ज्यादा सर्च किए जाने वाला विषय बन गया| पिछले सप्ताह गूगल पर ऋतिक रोशन अभिनीत फिल्म ‘सुपर 30’ सबसे ज्यादा ट्रेंड कर रहा था|

गूगल ने इसकी जानकारी अपनी साइट पर दी है| गूगल ने अपने सोशल साइट पर एक छोटा-सा वीडियो क्लिप भी जारी किया है, जिसमें ऋतिक रोशन को आनंद कुमार की तरह पढ़ाते दिखाया गया है|

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इस उपलब्धि पर ख़ुशी जाहिर करते हुए आनंद कुमार अपने अधिकारिक फेसबुक पेज पर लिखा की पूरी दुनिया भर में फैले अपने तमाम शुभचिंतकों को मैं तहे-दिल से शुक्रिया अदा करना चाहता हूँ, जिनके आशीर्बाद और शुभकामनायों के बदौलत पिछले हफ्ते पोस्टर रिलीज़ के बाद न सिर्फ सोशल मीडिया पर सुपर 30 छाया रहा बल्कि गूगल में सर्च किये जाने वाले टॉपिक में नंबर-वन रहा | दोस्तों, जब आगाज ऐसा है तब अंजाम जरुर यादगार होगा |

ज्ञात हो कि फिल्म में ऋतिक रोशन सुपर 30 के संस्थापक आनंद कुमार की भूमिका में दिखेंगे| भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (आईआईटी) की प्रवेश परीक्षा की तैयारी कराने के लिए चर्चित संस्था ‘सुपर 30’ पर बन रही बायोपिक अभी रिलीज नहीं हुई, लेकिन अभी से यह लोगों की पहली पसंद बन गई है|

 

 

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जन्माष्टमी का मेला: ऊ दस रुपया में हम फोचका और मुरही-जलेबी खा लेते थे

– चाची, जिलेबी कइसे दे रहे हैं?

– बीस रुपे किलो!

– तीन रुपैय्या का दे दीजिए!

– तीने रुपा का लोगे ता एतना चिचिया काहे रहे थे.. तुम्हारे चक्कर में हमारा तीन ठो ग्राहक भाग गया.. खाली जिलेबिए लोगे कि मुरही भी तौल दें. आलूओ चौप गरमे छाने हैं अभी.

जन्माष्टमी का मेला लगा हुआ है. कृष्णजन्म के रात में हर साल बारिश होता है फिर भी अगला दिन मेला लगने में कोनो कसर नहीं रहता.. पूरा गाँव लाल-पियर फूंकना, पिपही आ जिलेबी-चौप के छनन-मनन से महमहा रहा है. कहीं कोई बुतरू अपने महतारी को फूंकना खरीदने के लिए खींचले ले जा रहा है तो कहीं कोई चल छैयां-छैयां वाला मोबाइल के लिए माटी में ओंघरा रहा है. नया-नया जवान हुआ लईका सब फोचका वाला को घेरले खड़ा है. फोचका खा कम रहा है आ सिंदूर-टिकुली के दोकान पर खड़ा लइकियन के भीड़ को ताड़ बेशी रहा है.. फोचका वाला भी सब समझ रहा है.. उधर फूंकना वाला ता अईसा लग रहा है जईसे अपना फेंफड़ा के सारा हवा फूंकने में भर देगा..

हम दुपहरिए से बाबा को खोज रहे हैं.. मेला देखने के लिए पईसा बाबा ही देते थे.. बाबा पहीले दादी को पैसा देते, दादी खुदरा करा के रखतीं फिर हमलोगों को मिलता.. हम घर में सबसे बड़े थे त हमारे हिस्सा में दसटकही आता था.. ऊ दस रुपया में हम फोचका खा लेते, मुरही-जलेबी खा लेते, हाथ पर ललका मेहँदी वाला ठप्पा से ॐ नमः शिवाय लिखवा लेते, एगो मीठा पानो हो जाता आ अंत में भाड़ा पर एकाध कॉमिक्सो पढ़ने के लिए ले आते.. अरे हाँ याद आया, ऊहे टाइम में मित्थुन, सचिन आ दिव्या भारती का पोस्टर मेला से खरीदकर घर का एगो पूरा देवाल छाप दिए थे..

पूरे गाँव में कम से कम दस जगह पूजा का पंडाल लगता था. कहीं बुनिया का परसादी, कहीं अमरुद-केला त कहीं आटा वाला.. भर मुट्ठी आटा वाला परसादी फांक के कभी फूफा बोले हैं.? नहीं बोले ता का किए अपने जीवन में महराज! सब पंडाल में परसादी खाते अपने मित्रमंडली के साथ पूरे गाँव का एक चक्कर.. किसी के पास दू रुपैय्या है, किसी के पास पांच ता कोई पईसा के लिए अपने घर से आधा किलो धान बेचने लाया है.. अरे हाँ, हमारा फइशन सेन्स ता पूछिए मत.. सीधे गोविन्दा-चंकी पांडे को टक्कर देते थे.. पियरका शर्ट-ललका पइंट के नीचे हरियक्का हवाई चप्पल पहिनने का हिम्मत रनबीर सिंहो नहीं कर सकता है.. ऊपर से सरसों तेल लगाके मम्मी जो बाल सोंट देती थी, मर्जी है कि बड़का चक्रवातो में एगो बाल इधर से उधर हो जाए..

अब सांझ ढल रहा है.. रात होने लगा है.. मेला वाला लोग सब धीरे-धीरे मुरही-कचरी लेके घर लौट रहा है.. भर रास्ता कोई पिपही बजाते जा रहा है त कोई फूंकना फूट जाने पर चिचियाते जा रहा है.. हम भी अपना मित्र मंडली के साथ लौट रहे थे कि रस्ते में महेन चचा भेंटा गए.. लुंगी ऊपर उठा के कमर में खोंसे आ हाथ में पतरका सटका लिए.. बुझा गया कि चिंटुआ फेर आज कुछ तूफानी किया है.. चचा हमको रोके आ पूछे..

– अरे तुमलोग चिंटुआ को देखा है? ससुरा दुपहरिए से गायब है.. महतारी का पइसा चोरा के भागा है.. आज अगर मिल जाए ता ईहे सटका से सब मेला घूमना हम निकाल देंगे.. तुम्ही सब उसको बहसा दिया है..

– हम नहीं देखे हैं चचा.. हमारे साथ त आज ऊ अइबो नहीं किया है.. बताओ ना रे बिक्कुआ, आया है आज ऊ हमारे साथ..!

चचा दांत पीसते आगे बढ़ गए.. अब हम उनको का बताएं कि चिंटुआ तीन रुपैय्या देकर भीसीआर में मित्थुन चकरबरती का धमाकेदार एक्शन फिलिम देख रहा है.. पप्पा को नहीं बताओगे वाला मम्मी-कसम देके..

– अमन आकाश (एम.फिल. (मीडिया स्टडीज)
माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय, भोपाल)

 

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Bus2Patna 6:अब हमारा मन डिफरेन्शिएशन में कम आ इश्क के इंटीग्रेशन में जादा लग रहा था

“भईयाजी, हाफ केजी पपीता तौल दीजिएगा!”

“अरे मईडम जी, एतना बड़का सब्जी मंडी में आधा किलो पपीता कौन देगा! लेना है तो पूरा पीसे लेना होगा! अढ़ाई-तीन किलो का होगा!”

पटना में चार दिन से झमर-झमर पानी बरस रहा था.. ई ससुरा गैसो को आजे ख़तम होना था. अब बताइए, एतना अफतकाल में कौन गैस वाला दोकान खोल के बैठल होगा! ऊपर से बाजार समिति का कादो-किचकिच! पते नहीं चलता है कोन ओरिजिनल कादो है और कौन गलल केला आ पपीता का किचकिच! बुभुक्षितः किम् न करोति पापम्! हम छत्ता उठाए आ चल दिए फलहार के बेवस्था में.. बारिश अभियो पड़िए रहा था. पपीता वाला के ईहाँ पपीता तौलवा ही रहे थे कि पीछे से पपीतो से बेशी मीठगर आवाज़ सुनाई दिया..

“भईयाजी, हाफ केजी पपीता तौल दीजिएगा!”

बारिश से बचते-बचाते, हाथ में क्लासमेट का कॉपी आ रूमाल में मोबाइल लपेटकर पता नहीं कोन कोचिंग से एतना कीचड़ में ई कमल खिल गया.. हमको बुझा गया कि इनकरो ईहाँ के गैस खतम है. लेकिन ससुरा पपीता वाला त निकला बाजार समिति का उजड्ड देहाती! एक्के सुर में मना कर दिया कि नहीं देंगे! एक मन हुआ कि अपने पपीता में से आधा किलो कटवा के दे दें लेकिन फिर पटना सोच के मन मार लिए. ऊपर से पपीता छकड़ने वाला हंसुआ अभियो पपीता वाला के हाथे में था..

ता ई हमारा पहीला मुलाक़ात था. उनका तरफ से नहीं, हमरा तरफ से.. फिर एकाध दिन रामपुर लेन में भी देखाई दे दिए.. उनकर गुलाबी कलर वाला छत्ता हम दूरे से पहचान जाते थे.. अब हमारा मन आर.के. सुमन सर के डिफरेन्शिएशन में कम आ इश्क के इंटीग्रेशन में जादा लग रहा था.. हाँ एक और इम्पोरटेंट बात.. एतना भीड़-भड़क्का वाला पटना में कोनो सुंदर चेहरा आपको लगातार दिख रहा है ता आप सच में बहुत किस्मत वाले हैं.. उनका के चक्कर में केतना दिन रामपुर लेन साईं बाबा मन्दिर के पीछे पचीस-पचीस रुपया का गोलगप्पा खा गए.. साला हमको जौंडिस हो गया पर उनको मोहब्बत ना हुआ.. फेर एक दिन क्लास छूटा.. हम बचते-बचाते गुलाबी छत्ता के खोज में स्पीड पकड़ लिए.. ऊ आ उनकर तीन गो सखी पपीता वाला के दोकान पर देखा गयी.. ई बार ऊ लोग सौंस पपीता लेबे के बिचार में आए थे.. पीछे से हमहू पहुँच गए..

“भईवा आधा किलो पपीता तौल द..”

हमको पपीता वाला का जवाब भी मालूम था लेकिन हमको पपीता थोड़े खरीदना था.

SUFISM< BIBI KAMAL DARGAAH< KAKO ,JAHANABAD, BIhar, Aapna Bihar, apna bihar

क्या आप जानतें हैं? बीबी कमाल की पुत्री ने बिहार के काको में आकर डाली थी सूफी मत की नीव

सूफ़ी” शब्द ”सुफ” से बनता है और अरबी भाषा में इसका मतलब ”सुफ्फा” है, यानी ”दिल की सफाई। सूफ़ी अपने ज़ाहिरी लिबास की वजह से सूफ़ी कहलाए। अम्बिया, औलिया और सूफियों की ख़ास पहचान रही है। पहली हिजरी में भी ‘सूफ़ी’ शब्द था। सूफियाए इस्लाम” ने जो सूफ़ीवाद अपनाया वो आख़री पैगम्बर सल्लल्लाहू अलैहि वसल्लम के पवित्र जीवन का नैतिक पहलू है। इसको सभी सिलसिलों के सूफियों ने और सिलसिलए चिश्तिया के बुजुर्गों ने खास तौर से अपने सूफ़ीवाद के सिद्धांत की बुनियाद करार दिया है।

‘सूफ़ी वो है जो अपने नश्वर अस्तित्व को परम सत्य की खोज में डूबा दे और दुनियावी ख्वाहिशों से मुक्त होकर आध्यात्मिकता और सत्यता से अपना रिश्ता जोड़ ले। सूफ़ी अपने को तपा कर मैं और तुम की बंदिशों से पाक हो जाता है।

‘हया के फूल, सब्र व शुक्र के फल, अज़ व नियाज़ की जड़, ग़म की कोंपल, सच्चाई के दरख्त के पत्ते, अदब की छाल, हुस्ने एख़लाक़ के बीज, ये सब लेकर रियाज़त के हावन दस्ते में कूटते रहो और इसमें इश्क़े पशमानी का अर्क़ रोज़ मिलाते रहो। इन सब दवाओं को दिल की डेकची में भरकर शौक के चूल्हे पर पकाओ। जब पक कर तैयार हो जाए तो सफ़ाए क़ल्ब की साफी में छान लेना और मीठी ज़बान की शक्कर मिलाकर मोहब्बत की तेज़ आंच देना, जिस वक्त तैयार हो कर उतरे तो उसे ख़ौफे ख़ुदा के हवाले से ठंडा कर इस्तेमाल करना।” ये ही वो महान नुस्खा है जो इंसान को इश्के ख़ुदा की भट्टी में तपा कर आज भी कुंदन कर सकता है।

सूफियों की इबादत, नेक अमल और उच्च नैतिक मूल्यों का व्यावहारिक जीवन होता है। ये लोग रसूलुल्लाह सल्लल्लाहू अलैहि वसल्लम की शिक्षाओं और सहाबा के नक्शे कदम पर अमल करते हुए, कुरानी की शिक्षाओं को अपना कर इबादत को अपने जीवन का उद्देश्य बना लेते हैं। सूफियों का हर अमल सिर्फ़ अल्लाह की रज़ा की खातिर होता है। दुनिया के ज़ायके और हवस की खातिर नहीं।

”अल्लाह का वली बनने के लिए पहला क़ौल ये है कि मज़लूमों की फरियाद सुनना, बेचारों की आवश्यकता को पूरी करना और भूखों को खाना खिलाना” सूफ़ीवाद के तीन पहलू हुए:- इल्मी, अमली और इश्क़े हक़ीक़ी। हिंदुस्तान में गंगा-जमुनी तहजीब और सूफी धारा को आगे बढ़ाने में हजरत मखदूमे बीबी कमाल का महत्वपूर्ण योगदान माना जाता है। हजरत बीबी कमाल मध्य एशिया से आई विश्व की प्रथम महिला सूफी संत हैं। बीबी कमाल तुगलक वंश के शासन काल में एक सूफी संत महिला थीं। जो तांत्रिक विद्या के लिए प्रख्यात थीं। हिन्दुस्तान में सुफी विचारधारा के कई केंन्द्र हैं उस में एक मुख्य केन्द्र हजरत मखदूमे बीबी कमाल है अफगानिस्तान के कातगर निवासी हजरत सैयद काजी शहाबुद्दीन पीर जगजोत की पुत्री तथा सुलेमान लंगर रहम तुल्लाह की पत्नी थी| सूफियों ने एकता अखंडता कि शिछा हर समय में दी। वर्ष 1174 में बीबी कमाल अपनी पुत्री दौलती बीबी के साथ काको पहुंची थीं।

कमाल बिहारशरीफ के हजरत मखदुम शर्फुद्दीन बिहारी याहिया की काकी थी। बीबी कमाल की पुत्री दौलती बीबी ने काको में आकर सूफी मत की नीव डाली थी।

फिरोज शाह तुगलक ने 1351 ईसवी से 1388 ईसवी में बीबी कमाल को महान साध्वी के रूप में अलंकृत किया था। ये माता पुत्री काको में ग्यासुद्दीन के 1320 ईसवी से 1325 ईसवी तक के शासन काल के दौरान यहां थीं। बीबी कमाल अपनी तांत्रिक विद्या के कारण मुसलिम संप्रदाय से अधिक हिंदुओं में चर्चित थीं। बीबी कमाल अपनी तंत्र विद्या से सब कुछ जान लेती थीं। तदंतर बीबी कमाल की ख्याति दूर-दूर तक फैलने लगी। दिन-दुखी और रोगी अपना दुखड़ा सुना कर समस्याओं से मुक्ति के लिए बीबी कमाल के पास आने लगे। बीबी कमाल सबों को समस्या का निदान बताती और तांत्रिक उपचार करती। रोगी चंगा होने लगे, दीन-दुखी प्रसन्न होने लगे। फिरोजशाह तुगलक जैसे बादशाह ने भी बीबी कमाल को महान साध्वी के तौर पर अलंकृत किया था। इनके मजार पर शेरशाह, जहां आरा जैसे मुगल शासक भी चादरपोशी कर दुआएं मांगी थी। हिंदू-मुसलिम सभी संप्रदाय के लोग यहां बीबी कमाल की दुआ पाने लगे। लोगों की आस्था इतनी बढ़ गयी कि बीबी कमाल के गुजर जाने के बाद आज भी बीबी कमाल का मजार हिंदुओं की और मुसलमानों के इबादत का केंद्र बना हुआ है।

काको शरीफ जो बिहार की राजधानी पटना से 50 किलोमीटर की दुरी पर स्थित है यह बिहार में सूफीवाद का सबसे महत्वपूर्ण और सबसे पुराने केंद्र में एक है।

विश्व के प्रथम महिला सूफी संत के जहानाबाद रेलवे स्टेशन से पूरब बिहारशरीफ जानेवाली सड़क मार्ग पर काको में स्थित है।

जहानाबाद मुख्यालय से इसकी दूरी 8 किलो मीटर के करीब है। महान सूफी संत बीबी कमाल के मजार पर लोग रुहानी इलाज के लिए मन्नत मागते व ईबादत करते हैं। जनानखाना से दरगाह शरीफ के अंदर लगे काले रंग के पत्थर को कड़ाह कहा जाता है। यहां आसेब जदा और मानसिक रुप से विक्षिप्त लोग पर जूनूनी कैफियततारी होती है।

दरगाह के अंदर वाले दरवाजे से सटे स्थित सफेद व काले पत्थर को लोग नयन कटोरी कहते हैं। यहां चर्चा है कि इस पत्थर पर उंगली से घिसकर आंख पर लगाने से आंख की रोशनी बढ़ जाती है।

सेहत कुआं के नाम से चर्चित कुएं के पानी का उपयोग फिरोज शाह तुगलग ने कुष्ठ रोग से मुक्ति के लिए किया था। दरगाह से कुछ दूरी पर वकानगर में बीबी कमाल के सौहर हजरत सुलेमान लंगर जमीं का मकबरा है। आईने अकबरी में महान सूफी संत मकदुमा बीबी कमाल की चर्चा की गयी है, जिन्होंने न सिर्फ जहानाबाद बल्कि पूरे विश्व में सूफियत की रौशनी जगमगायी है। इनका मूल नाम मकदुमा बीबी हटिया उर्फ बीबी कमाल है। कहते हैं कि उनके पिता शहाबुद्दीन पीर जराजौत रहमतूल्लाह अलैह बचपन में उन्हें प्यार से बीबी कमाल के नाम से पुकारते थे। बाद में वह इसी नाम से सुविख्यात हो गईं। इनकी माता का नाम मल्लिका जहां था। बताते हैं कि बीबी कमाल का जन्म 1211 ई. पूर्व तुर्कीस्तान के काशनगर में हुआ। मृत्यु 1296 ई. पूर्व में हुई थी।

जहानाबाद जिले के काको स्थित हजरत बीवी कमाल की मजार बिहार के ऐतिहासिक पुरातात्विक धर्मिक और साम्प्रदायिक सद्भाव केन्द्रों में एक है।

– सयेद आसिफ इमाम

Bus To Patna, Aapna Bihar, Aman Aakash, Apna Bihar, Part 5

Bus to Patna 5: ऐ लड़का.. ऐ ललनमा के बेटा.. अरे इहाँ आओ.. तुम्ही पटना रहता है ना जी?

“ऐ लड़का.. ऐ ललनमा के बेटा.. अरे इहाँ आओ.. तुम्ही पटना रहता है ना जी? केतना साल से रह रहा है? पढ़ने-उढ़ने में मन लगाता है ना कि खाली गार्जियन के पईसा गंगाजी में बहाता है?”

ई सवाल पटना रहे वाला सब इस्टूडेंट को गाँव में सुने पड़ता है.. हरेक टोला में एगो चच्चा-कक्का अईसा रहबे करते हैं जो आपको पटना से घर जाने पर फुर्सत में बइठा के इंटरभ्यू लेते हैं.. इनका इंटरभ्यू यूपीएससी के इंटरभ्यू से जादा हार्ड होता है.. हमारे टोला में अईसे ही एगो महेन्द्र चाचा हैं.. जिनको पूरा टोला “महेन चा” कहकर बुलाता है.. मैलहा उजरा गंजी, नीचे बुल्लू कलर का चेक वाला लुंगी, माथा पर बान्हल गमछा आ हाथ में खैनी.. गंजी आ लुंगी के बीच में एक बित्ता का गैप, जिसमें से चचा का तोंद बाहरी दुनिया का हवा लेता रहता है.. ईहे चचा का कुल चौहद्दी है.. पछियारी टोला से दछिनवारी टोला तक केकर भैंसी सबसे जादा दूध देता है, केकर लड़की का चक्कर केकरा से चल रहा है से लेकर मोदी जी नवाज शरीफ को का धमकी देकर आए हैं, इनको सब खबर पूरा डिटेल में मालूम रहता है.. ई अपना टोला के अरनब गोस्वामी होते हैं, बड़ा-बड़ा के बोली इनके सामने फेल रहता है.. याद कीजिएगा, आपके टोला में भी होंगे अइसे चचा!

हाँ, हम टापिक से भटक गए.. मेन मुद्दा ई है कि शाम के हम पटना से घरे पहुंचे आ सुबह-सुबह निकले गाँव का हवा लेने ता पीछे से “महेन चा” धर लिए..

“आरे तो तुम तीन साल से पटना रहा है ना, अभी तक कोनो एगजाम नहीं निकाला..! ऊ चौधरी जी के मझिला लड़का को देखो, पिछले अगहन में गया था आ अभी रेलवे में नौकरी पा गया.. अभी तो एक्को साल नहीं हुआ है उसका गया हुआ.. तुमलोग से कुच्छो नहीं होगा.. गार्जियन झुट्ठो के गोइठा में घी सूखा रहा है.. पढ़ाई-लिखाई नहीं सम्हर रहा है त आ जाओ गाँव, ईंहे खेती-बाड़ी में मन लगाओ.. हम बुझते हैं तुम सबसे ईहो नहीं होगा.. दू अच्छर पढ़ लिए हो ना..!”

महेन चा एक्के सुर में हमको चाँद-तारा दिखा दिए आ हम मोने-मोने सोच रहे थे कि केकर मुंह देख लिए जे भोरे-भोर इनसे पाला पड़ गया.. हम खाली हूँ-हाँ, अरे नहीं चचा, हो जाएगा, सब हो जाएगा करते रहे आ ऊ हमको पानी पी-पीकर गरियाते रहे.. का सोचे थे कि दोस्त लोग सब मिलेगा उसको पटना का कहानी बताएंगे.. बाजार समिति में पपीता खरीदते समय एगो लड़की दिखी थी जो फिर एक दिन नाला रोड में भी दिखी आ कईसे हम पहीले उसका कोचिंग फेर हॉस्टल पता किए, बहुत कहानी सोच के आए थे लेकिन ईहाँ चचा के अग्निपरीक्षा में हमारा सारा पटनिया हेकड़ी हवा हो गया.. तभी हमको याद आया कि चचो के लड़का इस बार मैट्रिक का एग्जाम दिया है..

“ता चचा, छोड़िए ना ऊ सब बात.. ई बताइए कि चिंटूओ ना ई बार मैट्रिक दिया था, का हुआ उसका रिजल्ट?”

अचानक चचा का सुर पंचम से मध्यम पर आ गया..

“अरे ई जो नितीशबा का सरकार है ई कुल शिक्छा को नाश कर दिया है.. मास्टर सब को वेतनमे नहीं देता है.. आब तुम्हीं बताओ, बिना पईसा के तुम ही मन लगा के काम करेगा! कोनो मास्टर पढ़ाता है ढंग से? बता दो कि हाई स्कूल के एक्को गो मास्टर मन से पढ़ाता हो! इसी सब से ता बिहार बदनाम है पूरा देस में!”

हम समझ गए कि चिंटूआ का ज़रूर मैट्रिक में क्रॉस लगा है.. अब हम थोड़ा हल्का फील कर रहे थे आ हंसते हुए आगे बढ़ गए जहाँ हमारा मित्र-मंडली कहानी सुनने के लिए बेचैन हो रहा था!

Bus To Patna, Aapna Bihar, Aman Aakash, Apna Bihar, Part 4

Bus To Patna 4: जब से हम पटना आए हैं, अईसा लगता है कि हम यहाँ इस भीड़ में हेरा गए हैं

गाँव में हम बड़ी तेज थे पढ़े में.. सत्तर परसेंट नम्बर लाए थे मैट्रिक में.. घर में सब बहुत खुश था.. पिताजी सतनरायन भगवान का पूजा भी करवाए.. मम्मी छठी मैया से मनता भी मांगी थी कि हमारा बच्चा फस्ट किया ता हम एगो कलश और चढ़ाएंगे.. लेकिन जब से हम पटना आए हैं, लगता है कि हम कुच्छो नहीं है.. एतना भीड़ में कोई हमको चीन्हबो नहीं करता है, कोई नामो नहीं जानता है.. गाँव में ता मास्टर साहब दूरे से पहचान जाते थे.. अईसा लगता है कि हम यहाँ इस भीड़ में हेरा गए हैं.. अकेले कब्बो-कब्बो मन उचट जाता है..

एगो और परोबलम है, ईहाँ कुल पढ़ाई अंग्रेजिए में होता है.. हमको आता भी रहता है ता हम नहीं समझ पाते हैं.. बिहार बोर्ड से मैट्रिक पास किए हैं ना.. अंग्रेजी कम्पलसरी नहीं था ता हमलोग भी कामचलाऊए पढ़ते थे.. यहाँ सीबीएससी वाला सब जो फड़फड़ा के अंग्रेजी बोल देता है ता हमारा कन्फिडेंसे गड़बड़ा जाता है.. हमको आता भी रहता है लेकिन हम बोले नहीं पाते हैं.. बहुत संस्कारी बनने के चक्कर में हम बहुत दब्बू बन गए हैं, ई बात हमको पटना में आके पता चला.. ई मत करो, ऊ मत करो, बाल बढ़ा के काहे रखे हो जी, टीनही हीरो बनना है, इससे मत बतियाओ, उससे मत बतियाओ गाँव-समाज में एतना नियम होता है ना कि आपको कभी कंफिडेंट बनने ही नहीं देगा.. क्लास में जवाब आता भी रहता है ता बारह सौ के भीड़ में खड़ा होने से पहले बारह सौ बार सोचते हैं कि कहीं जवाब गलत हो गया तो बेइज्जती हो जाएगा.. अगर हिम्मत बढ़ा के खड़ा भी हो गए ता बोलते-बोलते तरवा से तरहथी तक पनिया जाता है..

मास्टर साहब खूब तेज़ी से पढ़ा रहे हैं.. उनको अपना सिलेबस कम्पलीट करना है.. चाहे हमको कुछ समझ में आए, चाहे न आए.. दीवालियो का छुट्टी नहीं दिए हैं.. कह रहे हैं कि एक्को दिन कलास छूटा ता सिलेबस कम्प्लीट नहीं हो पाएगा.. आज दिवाली है.. पूरा पटना बुकबुकिया लड़ी छत पर टांग रहा है, कोई झोरे के झोरा फटक्का खरीद के ले जा रहा है तो कोई मिठाई तौलवा रहा है.. हर दोकान में भीड़ लगा हुआ है.. बाजार समिति मेन गेट से मुसल्लहपुर हाट तक रोड पर खाली भीड़े दिखाई दे रहा है.. सब खुश है, सब चहक रहा है.. एगो हमही है जो मुंह लटका के हाथ में क्लासमेट का कॉपी लिए भीड़ से बचते-बचाते कलास जा रहे हैं..

सांझे मम्मी का फोन आया.. भगवान का पूजा किए हैं वहीं से गोर लाग लो.. मम्मी खूब गुस्साएल थी कि दिल्ली-पंजाब कमाने वाला सब घर आया है आ तुम पटना में रहके भी नहीं आए.. पता नहीं कोन फ़ारसी का डिग्री ले रहे हो.. मम्मी बोली कि आज बाहरे कुछ अच्छा खाना खा लेना, अब हम का बताएं कि दिन वाला खिचड़ी बचा हुआ है, उसी को गरम करके खाएंगे.. हम नहीं मना पाए ता का हुआ, कम से कम ऊ लोग ता ठीक से दिवाली मना लें..!!

Bus To Patna, Aapna Bihar, Aman Aakash, Apna Bihar, Part 3

Bus To Patna 3: ओहो, बी-टेक किए हो! अच्छा, इंजिनियर हो! केतना पईसा कमा लेते हो?

ओहो, बी-टेक किए हो! अच्छा, इंजिनियर हो! केतना पईसा कमा लेते हो? घरे केतना भेज पाते हो? ओतने में काम चल जाता है? एजी, ता बी-टेक काहे किए कुछ और कर लेते!

बहुत हंस्सी आता है ना जब पता चलता है कि दसमा में फर्स्ट आया सभी लड़का साइंस लिया है आ पटना-कोटा जाने के तैयारी में है! बहुत हंस्सी आता होगा ना जब पता चलता होगा देश के कोनो कोना के इंजिनियरिंग कॉलेज के हॉस्टल में पचास प्रतिशत से ज्यादा आबादी गमछा पहिनकर नहाने वाला बिहारी का है..! हाँ हम करते हैं बी-टेक, लेते हैं इंजीनियरिंग.. बहुत मन होता है हमरो कि गायक बनें, एक्टर बनें आ पायलट.. लेकिन घर पर माँ-बाबूजी के मेहनत से मुरझाएल चेहरा आ टेंसन से पाकल केश देखते हैं ना तो होता है कि केतना जल्दी हमरो नौकरी लग जाए आ हमहू अप्पन छोटकी बहिन के बियाह अपना पईसा से करें..!!

शुरू से कहानी सुनाएं.. सुनेंगे कि काहे करते हैं बी-टेक? ता सुनिए… जिस उमर में पायलट आ अन्तरिक्षयात्री बने के सपना देखे वाला बाबू साहब के लइका सब गर्दन में थर्मस टांग के पियरकी बस में बैठकर 50000 फीस वाला अंग्रेजी मीडियम में पढ़े जाता है ना.. ऊ ही उमर से हम बाबूजी के फीस के पईसा बचाने के लिए नवोदय आ नेतरहाट का तैयारी शुरू कर देते हैं.. जिस उमर में बड़का अफसर सब के लइका सब मॉम से पॉकेटमनी के लिए लड़ता है न, उस उमर में हम महतारी से दूर मकान मालिक से रूम भाड़ा कम करवाने के लिए लड़ते रहते हैं..!!

बचपने से एतना गरीबी आ कमी देखते हैं ना कि डॉक्टर आ पायलट बने के सपना अइसे भी नहीं देख पाते हैं, एक्टर-सिंगर ता बहुत दूर के बात है.. बाढ़ आने पर बाबूजी के चेहरा के पानी उतरते जो देखते हैं ना तब मन करता है कहीं एगो नौकरी बस मिल जाए. कईसेहू!! सुखाड़ आने पर बाबूजी के आँख में भरल पानी देखते हैं ना तब बुझाता है पईसा ही माई-बाप है..!!

गाँव के बड़का भईया सब का यूपीएससी का रिजल्ट पिछला दस साल से देख रहे हैं.. कब्बो इंटरव्यू में लटक जाते हैं त कब्बो प्रीओ नहीं निकलता है.. करेजा टूट गया है जी ई सब सुनकर.. भईया लोग ता मलिकार के बेटा हैं, बीघा के बीघा खेती है ऊ लोग का, तभी ना दस साल यूपीएससी का तैयारी कर सकते हैं.. हमर बाबूजी ता बनिहार हैं, छोटका किराना के दोकान है, पान का गुमटी है, लोकल बस में खलासी हैं, हम कहाँ से दस साल दिल्ली रह पाएंगे.. बाबूजी हमरा पढ़ावे खातिर खेत का एगो टुकड़ा बेचते हैं ना ता रात में एक्को रोटी नहीं घोंटाता है.. अइसा लगता है करेजा के टुकड़ा काट के बेच दिए हैं..!!

शौक नहीं है जी हमको इंजीनियरिंग करने का.. बस लगता है कि चार साल बाद दसो हजार के नौकरी ता मिल जाएगा.. चार साल बाद घरे कुच्छो ता हाथ बटाएंगे.. हमारा सपना बंगला खरीदना आ बड़का गाड़ी खरीदना नहीं, बाबूजी को अपना कमाई से एगो खादी का कुरता, मम्मी को एगो साड़ी आ छोटकी बहिन को राखी पर अपने हाथ से पांच हजार रुपया देना होता है..!!

अटल बिहारी वाजपेयी के कारण ही नीतीश बने थे बिहार का मुख्यमंत्री

राजनीति में विरले ही एसे नेता होते हैं जिसको पक्ष से लेकर विपक्ष तक के लोगों का भी प्यार और सम्मान मिलता है| भारतीय राजनीति में पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी वैसे ही विरले नेताओं में से एक हैं| गुरुवार को अटल जी के निधन के बाद पूरा देश शोक मना रहा है| बिहार में भी शोक की लहर है| सभी पक्ष के नेताओं ने इस घटना पर दुःख जाहिर की है|

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अटल जी के बारे में खबर मिलते ही बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने सभी काम छोड़कर दिल्ली के लिए रवाना हो गये| बताया जाता है कि मुख्यमंत्री आवास पर जेडीयू की अहम बैठक होनेवाली थी| दिल्ली जाने से पहले वह अटल बिहारी वाजपेयी के लिए एक भावुक संदेश दिया और उनके बेहतर स्वास्थ्य के लिए कामना की| उन्होंने कहा कि अटल बिहारी वाजपेयी जी से हमें सदैव मार्गदर्शन मिलात रहा है. मैंने उनके जीवन से सामाजिक जीवन की बारीकियां सीखी है|

गौरतलब है कि नीतीश कुमार अटल जी के मंत्रिमंडल में रेल मंत्री थे| उनको हमेसा से अटल जी का विशेष स्नेह मिलता रहा है| बीजेपी के अन्य नेता को इसकी हमेसा शिकायत रहती थी| इस बात को खुद नीतीश कुमार स्वीकारते हैं|

अभी कुछ दिनों पहले ही नीतीश कुमार ने बिहार की विभिन्न रेल परियोजनाओं का उद्घाटन करने पटना पहुंचे रेलमंत्री पीयूष गोयल के सामने कहा कि जब मैं रेल मंत्री था, तो  देश के कई जगहों पर आयोजित कार्यक्रम में शामिल होता था और तत्कालीन प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी जी भी इन कार्यक्रमों में सहर्ष शामिल होते थे।

नीतीश ने कहा कि उस दौरान कैबिनेट से पारित कराने के बाद कई तरह की परेशानियां होती थीं, लेकिन अटल जी का ऐसा  आशीर्वाद प्राप्त था कि रेल मंत्रालय का कोई भी प्रस्ताव कैबिनेट में नहीं  अटकता था। उनकी वजह से देश की कई जगहों पर ऐसे कई महासेतु का निर्माण अपने रेल मंत्रित्वकाल में मैंने कराने की कोशिश की थी।

नीतीश को बनाया था मुख्यमंत्री 

अटल जी ही नीतीश को बिहार के मुख्यमंत्री के कुर्सी तक पहुचाया है| यही कारण है कि वे चाहे किसी गठबंधन में रहे वह हमेसा अटल जी का सम्मान और तारीफ करते रहें हैं| बता दें कि पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी ने बिहार की राजनीति को बहुत गहरा प्रभावित किया है। पहली बार संयुक्त बिहार से केंद्र सरकार में 15 मंत्री बनाए गए थे। केंद्र की पांच वर्षों की अटल सरकार के दौरान बिहार की राजनीति पर राजधर्म का ऐसा असर दिखा कि लालू राबड़ी सरकार के अंत की पृष्ठभूमि भी तभी ही तैयार हो गई थी। वाजपेयी जी ही थे जिन्होंने नीतीश कुमार को कम सीटें आने के बावजूद सीएम चेहरा बनाया।

 

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तुम लोग सिर्फ ‘बिहारी’ हो, मैं ‘अटल बिहारी’ हूँ..

93 साल के उम्र में भारत के पूर्व प्रधानमंत्री श्री अटल बिहारी वाजपेयी जी का गुरुवार को निधन हो गया| उनके निधन पर पूरा देश शोक में डूबा हुआ है| बिहार से भी अटल जी की अनेक यादें जुड़ी हुई है| बिहार सरकार ने शुक्रवार को छुट्टी के साथ सात दिन के राजकीय शोक की घोषणा की है|

अटल जी जब-जब बिहार आते थे तो वे कहते थे कि ‘तुम लोग सिर्फ बिहारी हो, मैं अटल बिहारी हूँ|”

वो जब भी बिहार आते थे तो किसी होटल में नहीं बल्कि किसी कार्यकर्ता के घर ही रहते थे।

बिहार के उपमुख्यमंत्री सुशील मोदी ने एक निजी बात को याद करते हुए कहा कि मैंने अटलजी को सिर्फ एक पोस्टकार्ड भेजकर अपनी शादी का निमंत्रण दिया था लेकिन चुनाव हारने के बावजूद वो हमारी शादी में पहुंचे थे। शायद वो इसलिए मेरी शादी में आये थे क्योंकि मेरा विवाह अंतर्जातीय विवाह था। अटलजी हमेशा से अंतरजातीय विवाह को बढ़ावा देते थे।

अपने पूरे जीवनकाल में अटल बिहारी वाजपेयी ने बिहार को जी भर जीया। जी भर कर दिया। उनके कार्यकाल में सिर्फ संयुक्त बिहार से 15 केंद्रीय मंत्री बनाय गए थे|

वो अटल बिहारी वाजपेयी ही थे जिनके कारण दो हिस्से में बंटे मिथिलांचल को 78 वर्षों के बाद एक होने का अवसर मिला। कोसी महासेतु के रूप में वाजपेयी ने बिहार को ऐसी सौगात दी, जिसने राज्य के दो हिस्सों को लंबी प्रतीक्षा के बाद एक कर दिया।

यह पुल सुपौल और मधुबनी को जोड़ता था, लेकिन वस्तुत: यह उत्तर बिहार के नौ जिलों को जोड़ने वाला सेतु था। जबतक यह पुल नहीं बना था, लोगों को सुपौल जाने के लिए 50 से 70 किलोमीटर तक की अतिरिक्त दूरी तय करनी पड़ती थी। वर्ष 1934 में भूकंप के कारण कोसी पर निर्मित पुल टूट गया। इसके कारण मिथिलांचल दो भागों में बंट गया। एक ओर दरभंगा और मधुबनी रह गए तो दूसरी ओर सुपौल, सहरसा, मधेपुरा, पूर्णिया और सीमांचल का इलाका था। वाजपेयी ने वर्ष 2003 में इसका शिलान्यास किया। वर्ष 2012 में पुल बनकर तैयार हुआ और मिथिलावासियों का दशकों पुराना सपना पूरा हुआ।

वह वाजपेयी ही थे जिन्होंने मैथिलि भाषा को सम्मान दिलाया था और उसे संवैधानिक दर्ज़ा दिलवाया था|

इसके अलावा भी पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी ने बिहार को कई सौगातें दीं, जो राज्य के विकास में मील का पत्थर साबित हुईं|

171 किमी लंबी परियोजना का उद्घाटन
हाजीपुर-सुगौली रेलखंड की 171 किमी लंबी परियोजना का उद्घाटन वर्ष 2004 में तत्कालीन प्रधानमंत्री अटल  बिहारी वाजपेयी ने किया था| उस समय नीतीश कुमार रेलमंत्री थे| हालांकि यह परियोजना समय पर पूरी नहीं हो सकी| यह अब वर्ष 2019 में पूरा होने की संभावना है| काम तेजी से चल रहा है|
बिहार को भी हुआ दूरसंचार क्रांति का लाभ 
वाजपेयी सरकार की नयी दूरसंचार नीति ने निश्चित लाइसेंस शुल्क की जगह भारत में दूरसंचार क्रांति की शुरुआत की| उन्होंने टेलीकॉम कंपनियों के लिए कई नीतियां और कानून बनाये| भारत संचार निगम लिमिटेड के लिए एक अलग पॉलिसी बनी| इससे विदेश संचार निगम लिमिटेड का आधिपत्य खत्म हुआ| इसका लाभ बिहार को भी हुआ|
मैथिली को संविधान की आठवीं अनुसूची में जगह: वाजपेयी जी ने बिहार की प्रमुख भाषा मैथिली को संविधान की आठवीं अनुसूची में भी शामिल किया। उन्होंने वर्ष 2003 में ही मैथिली को यह सम्मान दिया। उन्होंने कहा कि मैथिली इसकी वास्तविक हकदार थी। वाजपेयी जी ने बिहार की चिरप्रतिक्षित मांग पूरी की।

बिहार को वाजपेयी की प्रमुख देन: कोसी महासेतु, कोसी रेल पुल, मुंगेर में गंगा पर पुल, दीघा-सोनपुर गंगा पुल, हरनौत रेल कारखाना, राजगीर आयुध फैक्ट्री, ईस्ट-वेस्ट कॉरिडोर।

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स्वतंत्रता दिवस: वाघा बॉर्डर के अलावा बिहार के पुर्णिया में आधी रात को फहराया जाता है तिरंगा

देश में मात्र दो जगह आधी रात को तिरंगा फहराया जाता है| एक वाघा बॉर्डर पर और दूसरा बिहार के पूर्णिया में| आज से 71 साल पहले, आजादी की पहली सुबह से जो परंपरा शुरू हुई थी वह आज भी जारी है|

दरअसल,14 अगस्त 1947 की आधी रात को देश के पहले प्रधानमंत्री पंडित जवाहरलाल नेहरू ने लालकिले पर झंडा फहराया था| ठीक उसी समय पूर्णिया के भट्ठा बाजार के चौक पर लोग रेडियो पर समारोह का प्रसारण सुन रहे थे| स्वत्रंता सेनानी रामेश्वर प्रसाद सिंह भी वहीं मौजूद थे उन्होंने उसी समय तिरंगा फहराया था|

आजादी के साल 1947 से लगातार हर साल पूर्णिया के भट्ठा बाजार स्थित झंडा चौक पर रात के 12 बजकर 01 मिनट पर राष्ट्रीय ध्वज फहराया जाता है| हर साल की तरह इस साल भी पूर्णिया के सामाजिक कार्यकर्ता विपुल सिंह ने झंडा चौक पर तिरंगा फहराया। इस मौके पर कई जनप्रतिनिधि, सामाजिक कार्यकर्ता और सदर विधायक विजय खेमका ने झंडे को सलामी दी।

इस पर सदर विधायक विजय खेमका ने कहा कि यह पूर्णिया ही नहीं, बल्कि बिहार के लिये गौरव की बात है| पूरे देश में आज भी वाघा सीमा के बाद पूर्णिया के झंडा चौक पर मध्य रात्रि को सबसे पहले झंडोत्तोलन किया जाता है| मध्य रात्रि में झंडोत्तोलन स्वाधीनता संग्राम के दिवानों की याद दिलाती है|

जानकारी हो कि पूर्णिया शहर के कई गणमान्य लोग 14 अगस्त रात 12:00 बजे झंडा चौक पर झंडोत्तोलन के वक्त मौजूद रहते हैं। अधिवक्ता दिलीप कुमार दीपक ने बताया कि यह परंपरा 71 सालों से चल रहा है। इस बार भी धूमधाम से स्वतंत्रता दिवस मनाया गया। उन्होंने बताया कि देश का पहला झंडा पूर्णिया में फहराया जाता है। इसके बाद 15 अगस्त की सुबह दिल्ली सहित पूरे भारत में झंडा फहराया जाता है।

 

 

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केरल में छा गया बिहार का यह कन्हैया, मात्र 26 सेकंड में बच्चे की बचाई जान

भारी बारिस के कारण केरल राज्य बाढ़ के तबाही से जूझ रहा है| कई जिलों में पानी घुस चुका है| राहत कार्य युद्ध स्तर पर जारी है| अभी तक बाढ़ के कारण 37 लोगों के मौत की खबर आ चुकी है| इस सब माहौल के बीच एक अच्छी खबर केरल में तेजी से फ़ैल रही है| बिहार का कन्हैया केरल में हीरो बना हुआ है|

दरअसल, इस वक्त केरल के उन सभी जिलों में जो बाढ़ के कहर से जूझ रहे हैं एनडीआरएफ की टीमें और रेस्क्यू अधिकारी राहत और बचाव का काम करने में जुटे हुए हैं। एनडीआरएफ की टीमें अपनी जान पर खेलकर लोगों को बाढ़ के कहर से बचा रही हैं। मगर एनडीआरएफ की टीम में सबसे ज्यादा बिहार के कन्हैया कुमार की तारीफ हो रही है|

एनडीआरएफ़ (नेशनल डिजास्टर मैनेजमेंट फ़ोर्स) के सदस्य कन्हैया कुमार इस आपदा की घड़ी में केरल में जाने-माने चेहरा बन गए हैं|

जब केरल के इदुक्की ज़िले की पेरियार नदी में भीषण बाढ़ आई तो उसी वक़्त नदी के तट के पास एक पिता गोद में अपनी नवजात को लिए मदद की आस में खड़े थे|

कन्हैया कुमार एनडीआरएफ़ में एक सिपाही हैं और वो उस पिता की गोद में नवजात को देखते ही दौड़ पड़े| कन्हैया ने उस नवजात को उनकी गोद से लेने में जरा भी देरी नहीं की|

वो उस नवजात को लेकर एक पुल की तरफ़ भागे| कन्हैया के पीछे-पीछे उस नवजात का पिता और बाक़ी लोग भी भागने लगे| ऐसा करने के लिए कन्हैया के पास बहुत वक़्त नहीं था, लेकिन उन्होंने कर दिखाया|

कन्हैया ने बच्चे को निकाला ही था कि पुल बाढ़ के पानी में बह गया| पल भर में ही लगा कि वहां कोई पुल था ही नहीं और नदी समंदर की तरह दिखने लगी| इदुक्की में एनडीआरएफ़ के अधिकारियों का कहना है कि कन्हैया ने नवजात को सुरक्षित निकालने में महज 26 सेकंड का वक़्त लिया|

अपने बच्चे को सुरक्षित निकाले जाने पर पिता के चेहरे पर ख़ुशी और आंसू एक साथ दिख रहे थे|

बिहार के हैं कन्हैया कुमार 

केरल के सोशल मीडिया के सनसनी कैन्हैया कुमार बिहार के हैं| गरीब परिवार और छोटे भाई-बहन की जिम्मेदारी होने के कारण कन्हैया ने स्कूल ख़त्म होते ही प्रतियोगी परीक्षा की तैयारी शुरू कर दी थी| 6 महीने से वह एनडीआरएफ़ में कार्यत है|

मीडिया से बात करते हुए कन्हैया ने कहा कि ”मैंने सरकारी नौकरी परिवार की मदद के लिए हासिल की| मेरे दो और भाई सेना में हैं| एक कश्मीर में है| हम लोगों की मुलाक़ात बड़ी मुश्किल से होती है|

हमारे माता-पिता को अपने बेटे के काम पर गर्व है| केरल में जो भी बाढ़ की त्रासदी से प्रभावित हैं वो सारे मेरे परिवार हैं|”

केरल में बाढ़ की आपदा और राहत बचाव पर कन्हैया कुमार ने कहा, ”हमलोगों को पता था कि हम केरल में बाढ़ में फँसे लोगों को निकालने जा रहे हैं| जब हम यहां पहुंचे तो ऐसा लगा कि जो सोचकर आए थे उससे ज़्यादा करने की ज़रूरत है|”

बिहार को अपने कन्हैया के इस साहसिक कारनामे पर गर्व है| बिहार से भारी संख्या में लोग सरकारी नौकरी में हैं और देश सेवा में कार्यत हैं| राष्ट्र निर्माण और राष्ट्र सेवा में बिहारी युवा हरदम आगे रहते हैं| कन्हैया जैसे युवा देश भर में राज्य का नाम रौशन करते हैं|