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विश्लेषण: उपचुनाव में तेजस्वी ने नीतीश को फिर दी पटखनी, जानिए जोकिहाट में क्यों जीती आरजेडी?

बिहार में जोकिहाट विधानसभा उपचुनाव आरजेडी प्रत्याशी शहनवाज अपने निकटतम प्रतिद्वंद्वी और जेडीयू उम्मीदवार मोहम्मद मुर्शीद आलम को 41225 वोटों से हराया। आरजेडी उम्मीदवार शहनवाज को 81240 वोट जबकि जेडीयू उम्मीदवार मुर्शिद आलम को 40015 वोट मिले। जीत के बाद आरजेडी विधायक दल के नेता तेजस्वी यादव ने कहा कि यह अवसरवाद पर लालूवाद की जीत है, लालू विचार नहीं बल्कि विज्ञान है।

जोकीहाट सीट पर साल 2005 से ही जेडीयू का कब्जा रहा था। ताजा चुनाव परिणाम से साफ है कि मुस्लिम वोटरों का जेडीयू से मोह भंग हो रहा है। भाजपा के साथ जाने की वजह से जदयू की लगातार तीसरी बार हार हुई है|

साल 2005 में बिहार के अंदर लालू विरोधी लहर आई जिसकी वजह से नीतीश को सत्ता मिली थी। इसके बाद उन्होंने मुस्लिम वोटरों में सेंध लगाना शुरू किया। जिसमें वह सफल भी रहे। चुनावों में भाजपा के साथ रहने के बावजूद मुस्लिम वोटरों ने नीतीश को वोट दिया था। मगर साल 2014 में भाजपा से अलग होने की वजह से उन्हें अपने दम पर चुनाव लड़ना पड़ा और करारी हार मिली। बता दें कि इस सीट पर पहले तस्लीमुद्दीन परिवार का कब्जा था। उनके निधन के बाद उनके बेटे सरफराज आलम यहां से विधायक थे। इसी साल मार्च में उन्होंने जदयू से इस्तीफा देकर राजद के टिकट पर अररिया की लोकसभा सीट पर चुनाव लड़ा और जीत हासिल की थी। उनके इस्तीफे की वजह से ही यह सीट खाली हुई थी।

 

आइए समझते हैं जोकिहाट पर क्यों जीती आरजेडी

मुस्लिम बहुल इलाका है जोकिहाट: इस सीट पर दो लाख 70 हजार वोटर हैं, जिसमें से करीब 70 फीसदी आबादी मुस्लिमों की है| यहां यादवों की भी अच्छी खासी आबादी है. ऐसे में यहां इस बार आरजेडी का M+Y (मुस्लिम+यादव) समीकरण फीट बैठता हैl हालांकि जेडीयू ने भी मुस्लिम प्रत्याशी को टिकट दिया था, लेकिन आरजेडी का समीकरण भारी पड़ रहा था।1969 में बने इस विधानसभा सीट पर हमेशा से मुस्लिम प्रत्याशी जीतते आ रहे हैं, हालांकि पार्टियां बदलती रही हैं।पिछले चार बार से जेडीयू के प्रत्याशी यहां से जीतते रहे हैं।

मोहम्मद तसलीमुद्दीन के परिवार का इस सीट पर रहा है दबदबा: जोकिहाट सीट पर मुस्लिमों के बड़े नेता मोहम्मद तसलीमुद्दीन का दबदबा रहा है। अबतक हुए 14 बार हुए विधानसभा चुनावों में नौ बार तस्लीमुद्दीन के परिवार से ही जीतते रहे हैं। इस बार भी आरजेडी के ने तस्लीमुद्दीन के छोटे बेटे शाहनवाज आलम आलम को टिकट दिया है। इस सीट पर जीत दर्ज करने के लिए जेडीयू ने भी तसलीमुद्दीन के परिवार को ही टिकट दिया था। तस्लीमुद्दीन के बड़े बेटे सरफराज आलम 2010 और 2015 में जदयू के टिकट पर यहां से विधायक बने थे।

जेडीयू के प्रत्याशी हैं दागदार: मुख्यमंत्री नीतीश कुमार अपराधियों और अपराध के प्रति जीरो टॉलरेंस की बात कहते हैं, लेकिन जोकिहाट पर उनकी पार्टी के प्रत्याशी मुर्शीद आलम के खिलाफ कई मुकदमें दर्ज हैं। इसमें से कई गंभीर मुकदमें भी हैं। वहीं आरजेडी प्रत्याशी शाहनवाज आलम साफ सुथरा चेहरा हैं। तेजस्वी यादव ने प्रचार के दौरान भी इस मुद्दे को जोर शोर से उठाया था।

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