प्रधान सचिव नृपेंद्र मिश्रा के जगह बिहार के पीके सिन्हा होंगे प्रधानमंत्री कार्यालय के नए OSD

मोदी सरकार में बिहारी अधिकारियों का दबदबा बना हुआ है| एक बार फिर प्रधानमंत्री मोदी ने एक बिहारी अधिकारी को बड़ी जिम्मेदारी दी है| इस बार सेवानिवृत आइएएस अधिकारी पीके सिन्हा को प्रधानमंत्री कार्यालय में OSD (आफिसर ऑन स्पेशल ड्यूटी) बनाया गया है| वो प्रधान सचिव नृपेंद्र मिश्रा की जगह लेंगे|

पीएमओ में श्री सिन्हा की नियुक्ति प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सलाह पर की गयी है| श्री सिन्हा इसके पहले यूपी में कई महत्वपूर्ण पदों पर कार्य कर चुके हैं| कैबिनेट सेक्रेटरी बनने के पहले वे ऊर्जा और जहाजरानी मंत्रालय के  सेक्रेटरी भी रह चुके हैं| श्री सिन्हा की शिक्षा-दीक्षा दिल्ली में ही हुई है| उनके पिताभी यूपीएससी में अधिकारी रहे थे|

बता दें कि 1977 बैच के आईएएस अधिकारी पीके सिन्हा देश के सबसे वरिष्ठ नौकरशाहों में से एक हैं| फिलहाल वो भारत सरकार के कैबिनेट सचिव की जिम्मेदारी निभा रहे हैं| बिहार के औरंगाबाद जिले के मूल निवासी और यूपी कैडर के आइएस अधिकारी रहे पीके सिन्हा का जन्म 18 जुलाई, 1955 को हुआ| उनका पूरा नाम प्रदीप कुमार सिन्हा है, लेकिन आम तौर पर लोग उन्हें पीके नाम से जानते हैं| 64 साल के मृदु भाषी सिन्हा जहां भी रहे अपने कार्यों की छाप छोड़ी है|

1977 बैच के आइएएस अधिकारी सिन्हा पहले जहाजरानी मंत्रालय में सचिव भी रह चुके हैं| उत्तर प्रदेश काडर के आईएएस अधिकारी के तौर पर उन्होंने केंद्र और उत्तर प्रदेश सरकार के कई महत्वपूर्ण पदों पर भी कार्य किया|

1990 के दशक के अंत में वो खेल मंत्रालय में पहले निदेशक और युवा मामलों के संयुक्त सचिव की जिम्मेदारी निभा चुके हैं| 1992-94 के दौरान वो मेरठ विकास प्राधिकरण के उपाध्यक्ष और 2003-04 में ग्रेटर नोएडा विकास प्राधिकरण के अतिरिक्त मुख्य कार्यकारी अधिकारी थे|

2004-12 तक यूपीए सरकार के कार्यकाल में वो ज्यादातर समय पेट्रोलियम मंत्रालय में थे| पेट्रोलियम मंत्रालय में रहते हुए उन्हें संयुक्त सचिव, अतिरिक्त सचिव और फिर विशेष सचिव भी बनाया गया था|

Narendra Modi, Fertilizer Industry, Bihar, Barauni, BJP, PMO

17 फरवरी को पीएम मोदी सात हजार करोड़ से बननेवाले बरौनी खाद कारखाना रखेंगे आधारशिला

17 फरवरी को देश के प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी बिहार के दौरे पर आ रहे हैं और साथ में बिहार राज्य के लिए एक बड़ा तोहफा भी लेकर आ रहे हैं| 17 को पीएम मोदी उलाव हवाई अड्डे पर उतरेंगे और बेगूसराय में एक कार्यक्रम में हिस्सा लेंगे| इसके साथ ही वे बरौनी में सात हजार करोड़ से बननेवाले नये खाद कारखाने की आधारशिला रखेंगे|

अब बरौनी खाद कारखाना हिंदुस्तान उर्वरक रसायन लिमिटेड के नाम से जाना जायेगा| इस कारखाने के निर्माण पर सात हजार करोड़ खर्च होंगे| इसका निर्माण कार्य जनवरी, 2021 तक पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है| साथ ही मई, 2021 से ही यहां यूरिया का उत्पादन शुरू हो जायेगा| 

जाहिर हैं यही से पीएम मोदी बिहार में अगामी लोकसभा चुनाव प्रचार की शुरुआत करेंगे| बिहार बीजेपी के सारे नेती इसी तैयारी में लगा दिए गए हैं|

वहीं, बरौनी खाद कारखाने में करोड़ों रुपये खर्च कर प्रधानमंत्री के आगमन स्थल को तैयार किया जा रहा है| 1998 से बंद परे बरौनी खाद कारखाने में अब तेजी से चीजें बदलने लगी हैं| खंडहर पड़े भवन डेंटिंग-पेंटिंग कर सवार दिए गए हैं| कैंपस में कई एकड़ में निर्माण का कार्य चल रहा है, जिसके लिए सैकड़ों की संख्या में मजदूर, अभियंताओं की टीम और अधिकारी लगे हुए हैं|

 

केंद्र और राज्य सरकार के झगड़े के कारण बिहार के 16 लाख किसानों को होगा नुकसान

FARMER_2_27320f

हर बार केंद्र और राज्य सरकार के झगडे में भुगतना जनता को ही होता है।  फिर से केंद्र और राज्य सरकार के बिच मतभेद सामने आया है, जिसका नुकसान इस बार बिहार के किसानों को उठाना होगा।

प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना की प्रीमियम राशि को लेकर केंद्र और राज्य सरकार के झगड़े में राज्य के 16 लाख से अधिक किसानों को बीमा का लाभ इस साल नहीं मिल पायेगा. राज्य सरकार को इस बीमा योजना पर साढ़े छह सौ करोड़ रुपये खर्च करना होगा. इतनी ही राशि केंद्र सरकार भी वहन करेगी. 15 अगस्त तक राज्य सरकार को बीमा कंपनियों का चयन कर लेना है.

मगर, बिहार सरकार ने आरोप लगाया है कि यूपी में अगले साल चुनाव के कारण केंद्र सरकार ने वहां इस योजना की प्रीमियम राशि मात्र 4.09 प्रतिशत तय की है. जबकि बिहार के लिए 14.92 प्रतिशत निर्धारित की गयी है.

इस पर राज्य सरकार ने कडा आपत्ति दर्ज कराया है और जिसके कारण अभी तक राज्य सरकार ने बिमा कंपनियों का चयन नहीं किया है।

 

आज बिहार सरकार के सहकारिता विभाग के प्रधान सचिव अमृत लाल मीणा केंद्र के समक्ष बिहार का पक्ष रखेंगे. इसके बाद ही कोई आधिकारिक निर्णय हो पायेगा. जानकारी के मुताबिक अगर एक-दो दिन में इसका समाधान नहीं निकाला गया तो इस वर्ष बिहार के 16 लाख किसानों को फसल बिमा का लाभ नहीं मिल पायेगा।

 

क्या है झगड़ा का कारण

केंद्र सरकार ने राज्यों को 10 बीमा कंपनियों की सूची उपलब्ध करायी है. इसमें तीन कंपनियां बिहार मे पहले से ब्लैक लिस्टेड हैं. बाकी की छह कंपनियों ने बिहार में खेती को लेकर रिस्क फैक्टर को आधार बनाते हुए न्यूनतम प्रीमियम दर 14.92 प्रतिशत तय किया. बीमा योजना पर बिहार में कुल पंद्रह सौ करोड़ रुपये खर्च होंगे जिसमें साढे छह सौ करोड़ राज्य और इतनी ही राशि केंद्र को वहन करना होगा. दो सौ करोड़ रुपये किसानों को देने होंगे. केंद्र सरकार को लिखे पत्र में कहा गया है कि यूपी में प्रीमियम का दर लगभग चार प्रतिशत है.

वहीं उसी कंपनी द्वारा बिहार के जिलों को छह कलस्टर में बांटकर छह बीमा कंपनियों द्वारा प्रीमियम तय किया है. पहले कलस्टर के लिए 18.56 प्रतिशत, दूसरे के लिए 11.97 प्रतिशत, तीसरे कलस्टर के लिए 27.42 प्रतिशत, चौथे के लिए 18.89 प्रतिशत, पांचवें के लिए 10.37 प्रतिशत और छठे जिलों के कलस्टर के लिए 13.38 प्रतिशत प्रीमियम तय किया गया. इसे राज्य सरकार ने अधिक और अतार्किक बताया है.सहकारिता विभाग के अधिकारी ने बताया कि नयी पीएम फसल बीमा योजना में राज्य सरकार को लगभग दो गुणा से अधिक राज्यांश मद में खर्च करना होगा. खरीफ फसल में प्रीमियम मद में अब तक राज्य सरकार को अधिकतम 192.22 और बीमा क्षति पूर्ति मद में 685.06 करोड़ रुपये देना पड़ा है.

 

सहकारिता मंत्री आलोक मेहता ने कहा कि केंद्र बिहार को विशेष राज्य का दर्जा भी नहीं‍ दे रहा व दूसरे राज्यों की तुलना में यहां प्रीमियम राशि भी अधिक है. उन्होंने कहा कि हम किसानों के लाभ के लिए बीमा चाहते हैं न कि बीमा कंपनियों के लाभ के लिए. बिहार का बक्सर और बलिया जिले के मौसम, मिट्टी, वातावरण आदि सब एक समान है. एक ही रिस्क फैक्टर है, पर बक्सर के लिए प्रीमियम दर 14 प्रतिशत और बलिया की प्रीमियम दर चार प्रतिशत तय की गयी है.

इसे कैसे स्वीकार किया जाये? उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार से पूर्व में ही हमलोगों ने कहा था कि प्रीमियम दर में सिलिंग और एकरूपता होना चाहिए. इसे केंद्र सरकार ने अनसुना कर दिया. मेहता ने कहा कि पूर्वी राज्यों के काउंसिल की बैठक में भी मुख्यमंत्री ने इसे गंभीरतापूर्वक उठया था, लेकिन केंद्र सरकार ने इसे नहीं माना. उन्होंने कहा कि बीमा के लिए अब राज्य में अधिकतम 650 करोड़ रुपये खर्च किया गया है. बीमा कंपनियों के वर्तमान दर से 1500 करोड़ रुपये खर्च करना होगा. ऐसे में इस बीमा का कोई मतलब नहीं होगा.

राजनीतिक कारणों से भाग रही है बिहार सरकार

तो कृषि मंत्री राधामोहन सिंह ने कहा कि बिहार सरकार राजनीतिक कारणों से पीएम फसल बीमा योजना लागू नहीं कर रही है. सीएम ऐसा तर्क दे रहे हैं जैसे लगता है कि बिहार देश से अलग हो. सभी राज्य प्रीमियम के 50: 50 फार्मूले पर तैयार हैं, पर बिहार बहाने बना रहा है.

 

नीतीश कुमार ने दिया प्रधानमंत्री मोदी को एक अॉफर

 मेदिनीनगर (पलामू) : बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को खुला अॉफर देते हुए कहा है कि अगर देश में पूर्ण शराबबंदी करा दें तो मैं योगा दिवस में जरूर भाग लूंगा। 

 

पलामू में आयोजित महिला सम्मेलन में नीतीश ने कहा कि शराबबंदी के बिना योग का कोई मतलब नहीं है।  बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के अाह्वान पर पूरे देश में 21 जून को योग दिवस मनाया जा रहा है. यदि इसके पूर्व 20 जून को प्रधानमंत्री देश में शराबबंदी को लागू करते हैं, तो मैं भी उनके साथ 21 जून को होनेवाले योग दिवस में शामिल होऊंगा.

 

 

शराब बंद किये बिना योग की बात बेमानी है। लोग योगाभ्यास इसलिए करते हैं कि शरीर स्वस्थ रहे, लेकिन नशापान करने से शरीर स्वस्थ नहीं रह पाता, इसलिए प्रधानमंत्री अगर सच्चे मन से लोगों को स्वस्थ बनाना चाहते हैं, तो सबसे पहले उन्हें शराबबंदी को लागू करनी चाहिए। वह शुरू से ही योग करते हैं, योग कोई प्रचार की चीज नहीं है।

 

नीतीश कुमार ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भी शराबबंदी के पक्षधर हैं। गुजरात में पहले से ही शराबबंदी थी,जब मोदी वहां के मुख्यमंत्री बने, तो उन्होंने भी गुजरात में इसे जारी रखा। आज तो वे देश के प्रधानमंत्री हैं।उन्हें पूरे देश में शराबबंदी लागू करनी चाहिए। पूरे देश में न सही, लेकिन उन्हें कम-से-कम भाजपा शािसत राज्यों में तत्काल शराब बंद करानी चाहिए।

 

झारखंड सरकार भी सहयाेग करे
शराबबंदी के बाद झारखंड सरकार से भी अपेक्षित सहयोग की अपील की गयी थी. सम्मेलन में नीतीश कुमार ने वह पत्र पढ़ कर भी सुनाया, जो उन्होंने झारखंड के मुख्यमंत्री रघुवर दास को भेजा था.
सीएम ने उस पत्र का जवाब दिया था, जसिमें यह कहा गया था कि पत्र को आवश्यक कार्रवाई के लिए उत्पाद विभाग को भेज दिया था. उन्होंने चुटकी लेते हुए कहा कि शराबबंदी में सहयोग करने के नाम पर झारखंड सरकार ने यही किया कि बिहार के सीमावर्ती क्षेत्रों में शराब का कोटा बढ़ा दिया. पलामू में 50% व गढ़वा में शराब का 45% कोटा बढ़ा दिया गया. ऐसे में समझा जा सकता है कि झारखंड सरकार का सोच क्या है?

 

उन्होंने कहा कि झारखंड की महिलाएं जाग चुकी हैं. वैसे झारखंड की जो सरकार है, वह स्वयं निर्णय लेने में सक्षम नहीं है, क्योंकि वह रिमोट पर चल रही है.
उन्होंने कहा कि यदि रघुवर दास नहीं सुन रहे हैं, ताे कोई बात नहीं, बाबूलाल मरांडी के नेतृत्व में जब भी झारखंड में सरकार बनेगी, तो सबसे पहला काम सूबे में शराबबंदी होगी.

 
उन्होंने कहा कि शराब के नाम पर आदिवासियों को बदनाम करने का काम किया जाता है, जबकि झारखंड के बड़े आदिवासी नेता शिबू सोरेन ने खुद शराबबंदी का अभियान चलाया था. उन्होंने पलामू में सम्मेलन आयोजन के लिए पूर्व मंत्री सुधा चौधरी को बधाई दी. सम्मेलन को बिहार के संसदीय कार्य मंत्री श्रवण कुमार, झारखंड के पूर्व मुख्यमंत्री बाबूलाल मरांडी, बिहार के पूर्व विधानसभा अध्यक्ष उदय नारायण चौधरी, प्रदेश अध्यक्ष जलेश्वर महतो सहित कई लोगों ने भी संबोधित किया.