जेईई मेन्स एग्जाम में कैसे लाए अच्छे मार्क्स? | पढ़े एक्सपर्ट आईआईटीयन की सलाह

जेईई मेन्स की उल्टी गिनती शुरू, 2अप्रैल को है परीक्षा, कट ऑफ क्या होगा? इस सोच में समय व्यर्थ नहीं करें-आईआईटियन शंकर

सीबीएसई की ओर से ज्वाइंट इंजीनियरिंग एंट्रेन्स एग्जाम (जेईई) मेंस- 2017 का काउंटडाउन शुरू हो चुका है। जेईई मेन आईआईटी, एनआईटी और इंडियन स्कूल ऑफ माइन्स धनबाद में प्रवेश के लिए पहले चरण की परीक्षा है।
जेईई मेन को उत्रीण करने वाले छात्र ही एडवांस 2017 में बैठने के लिए पात्र होंगे। 2 अप्रेल को ऑफलाइन एवं 8 व 9 अप्रेल को ऑनलाइन परीक्षा होगी। ऑफलाइन परीक्षा में मात्र 10दिन शेष रह गए हैं। स्टूडेंट्स को बी बोल्ड, बी कूल, बी रिलेक्स, बी पॉजिटिव एण्ड बी कोन्फिडेण्ट का सिद्धांत अपनाना चाहिए।

फिजिक्स में कंसेप्ट के साथ प्रेक्टिस जरूरी:-
शान्त चित्त दिमाग मुस्कुराहट की कुंजी होती है और यही मुस्कुराहट सफलता की कुंजी बनती है। इसलिए हमेशा मुस्कुराते रहें।

रैंक लाने में फिजिक्स का बहुत बड़ा योगदान होता है। यदि स्टूडेंट बेसिक कंसेप्ट के साथ तैयारी करे तो बेहतर स्कोर कर  सकता है। हर तरह के फॉर्मूले के प्रश्नों का अभ्यास आपके सफलता के अवसरों को बढ़ा देगा।

कट ऑफ क्या होगा? इसकी गणित में समय नष्ट न करें। अनावश्यक आकलन तनाव उत्पन्न करता है और एेसे में कोई काम सही नहीं हो सकता।
*पिछले 10 से 15 साल के पेपरों को सॉल्व करे और अपनी पोटेंशल को आके,
मॉडर्न फिजिक्स, फ्ल्यूड, वेब्स एंड साउंड, रोटेशन मैकेनिक्स एंड इलेक्ट्रॉनिक में बहुत कंसेप्ट हैं, जिनकी प्रेक्टिस जरूरी है। इलेक्ट्रीसिटी, मैग्नेटिज्म, ऑप्टिक्स, थर्मोडायनामिक्स को गहराई से रिवाइज करे।
पिछले कुछ सालों के पेपर का विश्लेषण करें तो क्लास 11 की यूनिट डायमेंशन चेप्टर से लेकर क्लास 12 की मॉडर्न फिजिक्स तक के हर चैप्टर को पढे़ं।
डेरीवेशन एंड रिजल्ट की प्रेक्टिस जरूर करें। किसी भी प्रश्न को हल करने के लिए बेसिक कंसेप्ट व डेरीवेशन का ही प्रयोग करें।
कुछ और नया न करें, जो साल भर अच्छा तैयार किया है, उस पर गौर करें और पूर्ण विश्वास रखें कि आप जंग के लिए तैयार हैं और यह सोचे की आप ही जीतेंगे।
*इस रणनीति से हल करें पेपर:-
आपने -आपके स्ट्रोंग जोन को समझे और पेपर की शुरुआत आपने इंटेरैटिंग सब्जेक्ट से करे।और हा फस्र्ट राउण्ड में सरल यानी स्टेटिक मेमोरी तथा नॉलेज पर आधारित आर्गेनिक और इनऑर्गेनिक के प्रश्नों को धैर्य से हल कर ले। सरल प्रश्नों को पहले हल करने से आपका आत्मविश्वास प्रबल होगा और आप सैकण्ड राउण्ड  में कठिन प्रश्न भी आसानी से हल कर पाएंगे।
और अंतिम कुछ दिनों में कुछ नया न करे । शांतचित मन से तैयारी के और सोचे की मै जेईई क्वालीफाई करूँगा। आपको निश्चित ही सफलता मिलेगी।
आईआईटियन शंकर
यंगेस्ट एडुकेशनिस्ट
बड़हरा ,भोजपुर

बिहार के इस गाँव के हर घर में एक IITians पैदा लेता है, इस बार फिर 50 छात्रों ने किया आइआइटी मेन्स परीक्षा क्रैक किया।

गया: प्राचीन काल में बिहार विश्व गुरू के नाम से प्रसिद्ध था।  पूरे विश्व से लोग ज्ञान प्राप्ति के लिए बिहार आया करते थे।  बिहार ज्ञान की भूमी रही है।  समय के साथ बिहार की वह पहचान कायम नहीं रह सका मगर बिहार ज्ञान की भूमी आज भी है।  बिहारी लोगों के काबलियत इसका प्रमाण है। 

जिस गया के पावन भूमी पर बुद्ध को ज्ञान मिला था उसी गया जिले एक गाँव  मानपुर के पटवाटोली बस्ती के बच्चे फिर शिक्षा के क्षेत्र में बिहार का नाम हर साल रौशन कर रहें है।

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लगभग साढ़े तीन दशक पूर्व से शिक्षा जगत में विख्यात बिहार का मैनचेस्टर के नाम से मशहूर पटवाटोली मोहल्ले में पूर्व के भांति इस बार भी 50 छात्रों ने आईआईटी मेन्स में सफलता हासिल किया है।

 

बुनकरों की इस बस्ती की एक खासियत इसे देश में खास बनाती है। अभावों में जी रही इस बस्ती की नई पौध सपने देखती है तथा उन्हें पूरा करने का हुनर भी जानती है। ऐसे में आश्चर्य नहीं कि यहां हर साल आइआइटियंस पैदा हो रहे हैं। वर्ष1992 से शुरू हुआ यह सिलसिला आज तक जारी है। यहां से इस साल भी 11 बच्चों ने आइआइटी की प्रवेश परीक्षा में अच्छी रैंकिंग पाई है। पटवा टोली के बच्चों ने इस साल भी अपना रिकॉर्ड कायम रखा है। इससे इलाके में खुशी का माहौल है।

 

गाँव के पूर्व छात्रों द्वारा गठित नव प्रयास नामक संस्था के मदद से गाँव में स्टडी सेंटर चलाये जा रहें है।  पूर्व छात्र जो आइआइटी में सफल हो चुके है वह समय निकाल गाँव आ कर बच्चों को पढाते हैं,  उनकी प्रोबलेम सोल्व करते है, उनका मार्गदर्शन करते है तथा उनको प्रोत्साहित भी करते रहते हैं।

 

अभी पटवा टोली में पांच स्टडी सेंटर चल रहे हैं। यहां के बच्चों के सफलता के पीछे उनकी काबिलियत और मेहनत के साथ-साथ ऐसे सेंटर्स का भी अहम योगदान है। यहां पढने वाले छात्रों का कहना है, ‘‘यहां पढ़ाई करते हुए एक रुचि पैदा होती है। एक प्रतियोगी माहौल मिलता है। इससे पढ़ाई में निखार आता है।’’

 

आज पटवा टोली के सफल छात्र माइक्रोसॉफ्ट, ओरेकल, सैमसंग, हिंदुस्तान एयरनॉटोकिल लिमिटेड जैसी प्रमुख देशी-विदेशी कंपनियों में काम कर रहे हैं।

 

सीमित संसाधनों के वाबजूद ये बच्चे सफलता के मिशाल कायम कर रहें है।  यह बिहार की वही पावन भूमी है जहां बुद्ध को ज्ञान मिला था,  दशरथ मांझी ने अपने मेहनत, जूनून और हिम्मत के दम पर अकेले पहाड़ तोड़ दिया था।  आज उसी भूमी पर एक बार फिर इतिहास दोहराया जा रहा है।  मेहनत, जूनून और हिम्मत तो बिहारी के DNA में है।