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Yoga Day: 57 साल से विश्व में योग की अलख जगा रहा मुंगेर का योग विद्यालय

दुनियाभर में कोरोना वायरस संकट के बीच आज आंतरारष्ट्रीय योग दिवस मनाया जा रहा है। 21 जून को 6वें अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस के अवसर को लेकर लोग काफी उत्साहित है। कुछ ऐसा ही हाल बिहार का है। प्राचीन काल से ही भारत वर्ष में योग की समृद्ध परंपरा रही है। बिहार के मुंगेर जिले को ‘योग नगरी’ के नाम से जाना जाता है। यहां स्थित है दुनिया का पहला योग विद्यालय ‘बिहार स्कूल ऑफ योगा’। योग को आगे बढ़ाने में ‘बिहार स्कूल ऑफ़ योगा’ का योगदान काफी महत्वपूर्ण रहा है। ‘बिहार स्कूल ऑफ़ योगा’ की स्थापना स्वामी सत्यानंद ने सन् 1964 में मुंगेर के गंगा नदी के तट पर की थी। ‘बिहार स्कूल ऑफ योगा’ को दुनिया का पहला योग विद्यालय माना जाता है। आज यहां पूरी दुनिया के लोग बिना किसी भेदभाव के योग सीखते हैं।

स्वामी सत्यानंद सरस्वती ने योग सिखाने के लिए 300 से ज्यादा पुस्तकें लिखीं, जिसमें योग के सिद्धांत कम और प्रयोग ज्यादा हैं। वर्ष 2010 में सत्यानंद स्वामी के निधन के बाद इस स्कूल की जिम्मेदारी स्वामी निरंजनानंद के कंधों पर आ गई। बिहार स्कूल ऑफ योग के शिक्षक दीपक ब्यास कहते हैं, “यह स्कूल केवल बिहार तक ही सीमित नहीं है, यह देश के विभिन्न कॉलेजों, जेलों, अस्पतालों और अन्य कई संस्थाओं में लोगों को योग का प्रशिक्षण देता है।  आज इस विशिष्ट योग शिक्षा केंद्र से प्रशिक्षित 14,000 शिष्य और 1,200 से अधिक योग शिक्षक देश-विदेश में योग ज्ञान का प्रचार-प्रसार कर रहे हैं।”

पतंजलि और गीता के योग दर्शन पर आधारित यह संस्थान विज्ञान, चिकित्सा और मनोविज्ञान को समन्वय कर आज योग की व्यावहारिक शिक्षा दे रहा है। बिहार स्कूल ऑफ़ योगा की स्थापना के समय स्वामी सत्यानंद सरस्वती ने कहा था कि योग भविष्य की संस्कृति बनेगी। उनकी कही यह बातें आज सच हो रही हैं।

The Cultural Heritage of India: The Great Bihar School of Yoga at ...

आश्रम के नियम

आश्रम में प्रतिदिन सुबह चार बजे उठकर व्यक्तिगत साधना करनी पड़ती है। इसके बाद निर्धारित नियमित कार्यक्रम के अनुसार कक्षाएं शुरू होती हैं। शाम 6:30 बजे कीर्तन के बाद 7:30 बजे अपने कमरे में व्यक्तिगत साधना का समय निर्धारित है। रात आठ बजे आवासीय परिसर बंद हो जाता है। यहां खास-खास दिन महामृत्युंजय मंत्र, शिव महिमा स्त्रोत, सौंदर्य लहरी, सुंदरकांड व हनुमान चालीसा का पाठ करने का भी नियम है। बसंत पंचमी (सरस्वती पूजा) के दिन हर साल स्कूल का स्थापना दिवस मनाया जाता है। इसके अलावा गुरु पूर्णिमा, नवरात्र, शिव जन्मोत्सव व स्वामी सत्यानंद संन्यास दिवस पर भी विशेष कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं।

योगा एट होम विद फैमिली

योग का अभ्यास शारीरिक ही नहीं मानसिक तौर पर भी इंसान को मजबूत बनाता है। कोविड-19 वैश्विक महामारी से बचाव के दृष्टिगत सरकार की ओर से छठे अंतरराष्ट्रीय योग दिवस का आयोजन ‘योगा एट होम विद फैमिली’ की थीम पर ऑनलाइन किया जा रहा है। इस वक्त लोग वैश्विक महामारी कोरोना संक्रमण के दौर से गुजर रहे हैं। ऐसे में बचाव और रोकथाम के लिए दुनियाभर में इस महामारी से रोकथाम के लिए स्वास्थ्य संगठन और चिकित्सक लोगों को अपनी शारीरिक और मानसिक स्थिति को मजबूत करने और रोग-प्रतिरोधक क्षमता को विकसित करने के लिए योग जैसे पौराणिक व्यायाम करने का सुझाव दे रहे हैं। राष्ट्रपति और प्रधानमंत्री ने योग दिवस पर देशवासियों को बधाई दी है। कई केंद्रीय मंत्री और नेताओं समेत अन्य लोग अपने घरों पर योगाभ्यास करते नजर आए। वहीं, देश की सीमाओं पर जवानों ने भी योगाभ्यास किया।

देशवासियों ने किया योग तो बिहार में महागठबंधन ने किया ‘हठयोग’

पटना: कल  (21 जून) देश भर में अंतराष्ट्रीय योग दिवस के मौके पर लोगों ने योग कर योग दिवस को मनाया।  बिहार स्थित योग नगरी मुंगेर में योग दिवस की धूम रही। देश और विदेश के लोग योग करने मुंगेर पहुंचे थे तो देश के कोने-कोनेमें योग शिवर का आयोजन किया गया था। 

 

जहाँ चारो तरफ लोगयोग कर रहें थे बिहार में महागठबंधन के नेता हठयोग कर रहे थे। आम और खास सभी अहले सुबह योग करते दिखे। गांव से लेकर शहर तक लोगों ने योग का लाभा उठाया पर बिहार में योग पर भी सियासत जमकर सियासत हुई। महा गठबंधन के नेताओं ने एक तरीके से अन्तर्राष्ट्रीय योग दिवस की उपेक्षा की।

 

इस मौके को बिहार सरकार ने सियासी चश्मे से देखा। सरकारी स्तर पर योग से जुड़े न तो कार्यक्रम का आयोजन किया गया न ही किसी मंत्री या अधिकारी ने दिलचस्पी दिखाई। राजधानी पटना के गांधी मैदान और कंकड़बाग स्थित शिवाजी पार्क मे भी पतंजलि द्वारा योग कार्यक्रम का आयोजन किया गया। जिसमें केंद्रीय मंत्री रविशंकर प्रसाद और गिरिराज सिंह के साथ सैकड़ों की तादाद में लोगों ने योगाचार्य के मार्गदर्शन योगाभ्यास किया।

 

इस ‘हठयोग’ पर बीजेपी ने महागठबंधन पर कड़ा प्रहार किया है। बीजेपी प्रवक्ता संजय टाइगर ने कहा है कि बिहार सरकार का रूख संघीय ढांचा के खिलाफ है। उन्होंने कहा कि पीएम नरेन्द्र मोदी के प्रस्ताव पर संयुक्त राष्ट्रसंघ की ओर से योग दिवस को मंजूरी मिली है। महागठबंधन के नेता सत्ता के नशे में चूर हैं और वे योग का महत्व को समझना नहीं चाहते।

 

तो इसपर महागठबंधन के तरफ से जेडीयू प्रवक्ता नीरज कुमार ने कहा कि भाजपा के लोग योग का राजनैतिक लाभ लेना चाहते हैं। नीरज ने कहा कि भाजपा के लोग सत्ता भोग के लिये योग कर रहे हैं। जेडीयू नेता ने कहा कि भाजपा के लोगों को योग की इतनी चिन्ता है तो मुंगेर स्थित योग विश्वविद्यालय का विकास क्यों नहीं हुआ।

 

तो ही आरजेडी प्रवक्ता प्रगति मेहता ने बीजेपी पर योग के ब्रांडिंग का आरोप लगाया है। आरजेडी नेता ने कहा कि योग निहायत निजी चीज है इसे हर आदमी को करना चाहिये और लोग करते भी हैं। उन्होंने ने कहा कि योग का राजनैतिकरण नहीं होना चाहिये।

 

गौरतलब है कि पिछले वर्ष मोदी सरकार के प्रयास से 21 जून को अंतराष्ट्रीय योग दिवस मनाने का प्रस्ताव यूएन में सर्वसंमति से पास किया गया।  पूरी दुनिया ने योग दिवस का स्वागत किया और सरकार ने भी इसे प्रोतसाहित किया मगर देश के अंदर ही राजनीतिक वजहों से लोग इसका विरोध कर रहें है।

 

विश्व का पहला योग विश्विद्यालय मुंगेर योग विश्विद्यालय की उपेक्षा क्यों ?

अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस पर मुंगेर ( बिहार ) के योग विश्वविद्यालय की उपेक्षा क्यों ?

आज पूरी दुनिया में योग का ढ़ोल पीटा जा रहा है। प्रधानमंत्री देशभर में योग के बड़े-बड़े कार्यक्रम आयोजित करवा रहे हैं। लेकिन दुनिया का पहला योग विश्वविद्यालय जो मुंगेर में अवस्थित है, उसकी अनदेखी हो रही है।

पूरे विश्व में योग नगरी के नाम से प्रसिद्ध मुंगेर ने योग को विश्व पटल पर लाने में अतुलनीय भूमिका निभाई है। मुंगेर के योग आश्रम ने योग को जन जन तक सुलभ कराने का काम किया है पर केन्द्र सरकार की तरफ से इस योग आश्रम की अनदेखी के कारण यहां के लोग पूरी तरह निराश और मर्माहत हैं।

२१ जून को विश्व योग दिवस मनाने की तैयारी चल रही है। पूरे भारत में योग प्रशिक्षण केंद्र खोलने की योजना बनाई जा रही है। इसके लिए कई संस्थानों को इस योजना की जिम्मेदारी भी सौंपी गई लेकिन मुंगेर के इस आश्रम को इस मुहिम में शामिल नही किया गया है। इस बात से बिहार के लोगों में काफी आक्रोश है और उन्हें इस बात का दुख भी है।

मुंगेर का योगाआश्रम, भारत ही नहीं पूरे विश्व में बिहार स्कूल ऑफ योगा के नाम से प्रसिद्ध है। इसकी स्थापना १९६३ में स्वामी सत्यानंद सरस्वती ने की थी। इतना ही नहीं योग को जीवन शैली बनाने में भी मुंगेर की धरती का काफी योगदान रहा है। यहां वर्ष २०१३ में विश्व योग सम्मेलन का आयोजन कराया गया था जिसमे करीब ७७ देशों के प्रतिनिधियों ने भाग लिया था।

राज्य सरकार भी इस योग आश्रम के उत्थान के लिए कोई ठोस रवैया नही उठा रही है खैर नीतीश सरकार के मंत्री से लेकर के विधायक तक योग दिवस का विरोध करते नही थक रहे हैं ऐसे में इस सरकार से इस  योगा विश्विद्यालय का कायाकल्प की उम्मीद करना  भी मूर्खता ही होगा।