IIT-JEE एडवांस का परिणाम आने के बाद सुपर-30 के आंनद सर ने FB पर किया भावुक पोस्ट।

IIT-JEE एडवांस 2017 का रिजल्ट आज जारी हो गया है। आनंद कुमार के ‘सुपर 30’ के सभी परीक्षार्थी सफल हुए हैं।

इस वर्ष JEE की परीक्षा 21 मई, रविवार को आयोजित की गयी थी। जेइइ एडवांस में बिहार के अभयानंद सुपर 30 के शशि कुमार ने 258वां रैक हासिल कर बिहार टॉपर बने।  इसी संस्‍थान से केशव राज 487वें रैंक के साथ सेकेंड बिहार टॉपर बने। सुपर 30 के ही श्रेयस राज को 562वां रैंक मिला है।

JEE का परिणाम घोषित होने के बाद गणितज्ञ आनंद कुमार facebook पर किया भावुक पोस्ट आंनद कुमार ने फेसबुक पर लिखें है…

“आंसुओं से नज़रें चुराकर हंसने का हुनर देखना है तो सुपर 30 के आंगन में एक बार आइएगा जरूर । आज फिर से सुपर 30 के अपने आंगन में मैंने कई सपनों को करवटें बदलते देख रहा हूँ । सफलता के शोर में गुरबत के दर्द को सिमटते देख रहा हूँ । पिछले 15 वर्षों से मैं हर साल यही अनुभव करते आ रहा हूँ ।
कामयाबी और सपनों में बड़ा गहरा रिश्ता होता है। जब मेहनत इरादों के रथ पर सवार होकर अपने सफर पर चल पड़ती है तो लाख मुसीबतों के बाद भी सफलता कदम चूमने को बेकररार हो जाती है। और इस बार के आई.आई.टी. प्रवेश परीक्षा के रिजल्ट में मेरे सभी 30 बच्चों ने सफलता के झंडे गाड़कर यह सिद्ध भी कर दिया है । चाहे बेरोजगार पिता का बेटा केवलिन हो या सड़क किनारे अंडे बेचने वाले का बेटा अरबाज आलम हो, खेतों में मजदूरी करने वाले का बेटा अर्जुन हो या फिर भूमिहीन किसान का बेटा अभिषेक। इन सभी 30 बच्चों ने घनघोर आर्थिक पिछड़ेपन के काले बादलों का सीना चीरकर अपने सफलता की रौशऩी से पूरे समाज को रौशन कर दिया है। मैं आपने आपको बड़ा भाग्यशाली समझता हूँ क्योंकि मुझे मेरे पूरे परिवार के प्रत्येक सदस्य खासकर छोटे भाई प्रणव के साथ-साथ उन सभी शिक्षकों का सहयोग भी मुझे हासिल है, जो बच्चों के सफलता के लिए रात-दिन एक कर देते हैं । 
आज मेरे बच्चों ने मुझे कुछ और बड़ा करने का हौसला दिया है। बहुत ही जल्द मैं सुपर 30 का दायरा बड़ा करने जा रहा हूं। देश के कई हिस्सों में मैं घूम-घूम कर टेस्ट आयोजित करूंगा। ताकि 30 से ज्यादा बच्चों को उनकी मंजिल तक पहुंचा सकूं। मैं हर साल 30 बच्चों को अपने घर में रखता हूँ और खून-पसीने के अपने गाढ़ी कमाई के पैसे से ही उनके और अपने परिवार के लिए भोजन-भात का इंतजाम करता हूँ । आज तक मैंने किसी से एक रुपया चंदा नहीं लिया । आगे सुपर 30 को बड़ा करने के लिए मुझे किसी से पैसे नहीं चाहिए। हां, आपके सपने जरूर चाहिएं। और चाहिए आपका आशीर्वाद । मैंने सुना है कि दुआओं में बड़ी ताकत होती है । तो आइये समय निकालकर कभी मिलाने सुपर 30 के बच्चों से। रहेगा आपका इंतजार ।
If one has to see the art of turning tears of pain into tears of joy, Super 30 is the place to witness the transition. Today again I have seen many dreams turning into reality in the courtyard of Super 30, where the trials and tribulations of poverty have given way to joy of success.
And the story has been repeating for the last 15 years before my eyes. Perhaps, it is all because of the strong determination of the students. When it gels with dreams, success is never far away, no matter what the odds are. This year all my 30 students made it to IIT. As the results came, there was joy all around and the smiling faces of the students and their parents made my day. Be it the story of Kelvin, son of an unemployed father, or roadside egg seller’s son Arbaaz Allam, a farm labourer’s son Arjun or landless farmer’s son Abhishek, they all stand tall having overcome the stiff odds of poverty and deprivation to make it to IIT and become an inspiration for several others like them. They have all over one stiff odds to script their success stories.
I consider myself fortunate to have got full support from all my family members and especially my younger brother Pranav and my all my teachers, who worked day and night with me to bring smiles on so many faces. Today, I have also got inspired to do something bigger. Very soon I will plan to naked Super 30 bigger. We will organise tests in different parts of the country so that more and more students could be helped to successfully chase their dreams.
Every year I keep 30 students at home and nurture them and my family with my hard earned money. I have never accepted any donation from anyone. Even in future, I will not take money from anyone for expansion, but I will certainly require more dreamers who would be committed to put in hard work to realise their dreams. What is more, I require your blessings, as they give me strength. I have heard blessings have great power. Please do spare time someday to meet the inspiring lot of Super 30 students. I will wait for you.”

बिहार के इस गाँव के हर घर में एक IITians पैदा लेता है, इस बार फिर 50 छात्रों ने किया आइआइटी मेन्स परीक्षा क्रैक किया।

गया: प्राचीन काल में बिहार विश्व गुरू के नाम से प्रसिद्ध था।  पूरे विश्व से लोग ज्ञान प्राप्ति के लिए बिहार आया करते थे।  बिहार ज्ञान की भूमी रही है।  समय के साथ बिहार की वह पहचान कायम नहीं रह सका मगर बिहार ज्ञान की भूमी आज भी है।  बिहारी लोगों के काबलियत इसका प्रमाण है। 

जिस गया के पावन भूमी पर बुद्ध को ज्ञान मिला था उसी गया जिले एक गाँव  मानपुर के पटवाटोली बस्ती के बच्चे फिर शिक्षा के क्षेत्र में बिहार का नाम हर साल रौशन कर रहें है।

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लगभग साढ़े तीन दशक पूर्व से शिक्षा जगत में विख्यात बिहार का मैनचेस्टर के नाम से मशहूर पटवाटोली मोहल्ले में पूर्व के भांति इस बार भी 50 छात्रों ने आईआईटी मेन्स में सफलता हासिल किया है।

 

बुनकरों की इस बस्ती की एक खासियत इसे देश में खास बनाती है। अभावों में जी रही इस बस्ती की नई पौध सपने देखती है तथा उन्हें पूरा करने का हुनर भी जानती है। ऐसे में आश्चर्य नहीं कि यहां हर साल आइआइटियंस पैदा हो रहे हैं। वर्ष1992 से शुरू हुआ यह सिलसिला आज तक जारी है। यहां से इस साल भी 11 बच्चों ने आइआइटी की प्रवेश परीक्षा में अच्छी रैंकिंग पाई है। पटवा टोली के बच्चों ने इस साल भी अपना रिकॉर्ड कायम रखा है। इससे इलाके में खुशी का माहौल है।

 

गाँव के पूर्व छात्रों द्वारा गठित नव प्रयास नामक संस्था के मदद से गाँव में स्टडी सेंटर चलाये जा रहें है।  पूर्व छात्र जो आइआइटी में सफल हो चुके है वह समय निकाल गाँव आ कर बच्चों को पढाते हैं,  उनकी प्रोबलेम सोल्व करते है, उनका मार्गदर्शन करते है तथा उनको प्रोत्साहित भी करते रहते हैं।

 

अभी पटवा टोली में पांच स्टडी सेंटर चल रहे हैं। यहां के बच्चों के सफलता के पीछे उनकी काबिलियत और मेहनत के साथ-साथ ऐसे सेंटर्स का भी अहम योगदान है। यहां पढने वाले छात्रों का कहना है, ‘‘यहां पढ़ाई करते हुए एक रुचि पैदा होती है। एक प्रतियोगी माहौल मिलता है। इससे पढ़ाई में निखार आता है।’’

 

आज पटवा टोली के सफल छात्र माइक्रोसॉफ्ट, ओरेकल, सैमसंग, हिंदुस्तान एयरनॉटोकिल लिमिटेड जैसी प्रमुख देशी-विदेशी कंपनियों में काम कर रहे हैं।

 

सीमित संसाधनों के वाबजूद ये बच्चे सफलता के मिशाल कायम कर रहें है।  यह बिहार की वही पावन भूमी है जहां बुद्ध को ज्ञान मिला था,  दशरथ मांझी ने अपने मेहनत, जूनून और हिम्मत के दम पर अकेले पहाड़ तोड़ दिया था।  आज उसी भूमी पर एक बार फिर इतिहास दोहराया जा रहा है।  मेहनत, जूनून और हिम्मत तो बिहारी के DNA में है।