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जारी हुआ बिहार बोर्ड दसवीं और बारहवीं कक्षा के डमी ऐडमिट कार्ड, गलती है तो सुधारें

बिहार बोर्ड ने दसवीं और बारहवीं कक्षा के डमी ऐडमिट कार्ड जारी कर दिए हैं। रजिस्ट्रेशन प्रोसेस के दौरान डीटेल्स भरने में कोई गलती हो गई है तो छात्र इसमें सुधार कर सकते हैं। बिहार स्कूल एग्जामिनेशन बोर्ड ने इन ऐडमिट कार्ड को ऑनलाइन जारी किया है और इन्हें आप बीएसईबी की ऑफिशल वेबसाइट या नीचे दिए डायरेक्ट लिंक पर क्लिक करके देख सकते हैं।

अपना ऐडमिट कार्ड डाउनलोड करने के लिए आवेदकों को स्कूल कोड, रजिस्ट्रेशन नंबर और डेट ऑफ बर्थ की जरुरत पड़ेगी। इसलिए ऐडमिट कार्ड डाउनलोड करने से पहले इन्हे पहले से तैयार रखें। डमी ऐडमिट कार्ड में छात्रों का नाम, रोल नंबर, परीक्षा का नाम, विषय आदि की जानकारी होती है। अगर इनमें से किसी में कुछ गलत जानकारी चली गई है तो उसमें सुधार किया जा सकता है। दसवीं और बारहवीं के डमी ऐडमिट कार्ड के लिए अलग-अलग लिंक दिए गए हैं।

डमी ऐडमिट कार्ड के जरिए छात्र इस बात से सुनिश्चित हो जाएंगे कि उनकी डीटेल्स ठीक से भरी हुई है क्योंकि इन्हीं डीटेल्स के आधार पर आगे उनके सर्टिफिकेट बनेंगे और गलत जानकारी होने पर आगे उन्हें कहीं भी ऐडमिशन लेने में दिक्कत हो सकती है।

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बिहार बजट : शिक्षा पर होगा सबसे ज्यादा खर्च, हर जिले में खुलेंगे इंजीनियरिंग कॉलेज

बजट में रकम हासिल करने में इस बार शिक्षा मंत्री अशोक चौधरी सबसे आगे रहे। कुल 14437 करोड़ रुपए इनके विभाग को मिले. निल बटे सन्नाटा रहे खान एवं भूतत्व मंत्री मुनेश्वर चौधरी. इनके विभाग के लिए बजट में शून्य प्रावधान किया गया है.खास यह भी रहा कि इस बार मुख्यमंत्री के हिस्से वाले विभागों का बजट कम हो गया है.762 करोड़ पिछले साल मिला था. इस बजट में 731 करोड़ ही मिले.

 

बजट में पैसा,स्वीकृत स्कीमों को ही दिया गया है. सात निश्चय से जुड़े महकमों की राशि बढ़ी है. तो 14 विभागों को कमोबेश उतने ही पैसे दिये गये जितना उन्हें 2016-17 में मिला था. स्कीमों के लिए 80891.61 करोड़ रुपए में से 77.42%राशि 10 प्रमुख विभागों को मिली है शेष 22.57%में ही बाकी विभाग सिमटे हैं. फोकस सामाजिक सेवा के क्षेत्र में आने वाले शिक्षा,पेजजल आपूर्ति एवं स्वच्छता,समाज कल्याण जैसे विभागों पर इस बार भी कायम है. आर्थिक सेवा क्षेत्र से जुड़े विभाग मसलन कृषि पर व्यय कमोबेश जस का तस है.
बिहार सरकार की ओर से प्रस्तुत किये गये बजट में शिक्षा पर सबसे ज्यादा जोर दिया गया है. 2017-18 के लिए शिक्षा विभाग के लिए सरकार ने ‍25,251.39 करोड़ रुपये का आवंटन किया है, जो पिछले साल की तुलना में 3354 करोड़ रुपये अधिक है. शिक्षा विभाग का पैसा डेढ़ गुना बढ़ा है. राज्य सरकार  तीन नये विश्वविद्यालय भी इस साल खोलने जा रही है. साथ ही मुख्यमंत्री  निश्चय योजना के तहत दो सालों में सभी घरों में बिजली पहुंचाने का लक्ष्य रखा गया है. बजट में पथ निर्माण विभाग पर भी खास जोर दिया गया है.

 

राज्य सरकार सड़कों और पुलों के निर्माण पर 6635़ करोड़ रुपये खर्च करेगी. वहीं कृषि विभाग में पिछले बजट की तुलना में 73.39 करोड़ रुपये की कटौती की गयी है.  बाल विकास परियोजना, आंगनबाड़ी केंद्र और कन्या विवाह योजना पर सरकार ने ज्यादा खर्च करने की योजना बनायी है. विवाह करनेवाले नि:शक्तों को 50 -50 हजार रुपये का अनुदान देने का भी प्रावधान किया गया है. 

 

3,354 करोड़ रुपये ज्यादा का किया गया आवंटन

 

बिहार सरकार ने बजट में सबसे ज्यादा राशि का प्रावधान शिक्षा विभाग में किया गया है. वित्तीय वर्ष 2017-18 में शिक्षा विभाग के लिए सरकार ने ‍25,251.39 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है. यह बजट पिछले वित्तीय वर्ष की तुलना में 3,354.37 करोड़ रुपये ज्यादा है. 

वित्तीय वर्ष 2016-17 के बजट में शिक्षा के लिए 21,897.37 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया था. अगले वित्तीय वर्ष में भी शिक्षा विभाग ने प्रदेश में शिक्षा की गुणवत्ता में सुधार के साथ-साथ करीब छह लाख छात्र-छात्राओं को बिहार स्टूडेंट क्रेडिट कार्ड योजना का लाभ देने का लक्ष्य रखा है. नियोजित शिक्षकों के लिए नयी सेवा शर्तों का निर्धारण किया जायेगा. इसके अलावा झोंपड़ी और खुले आसमान में चलनेवाले स्कूलों को शिक्षकों और छात्रों समेत भवनवाले स्कूलों में शिफ्ट किया जायेगा. 

 

खुलेंगे तीन नये विश्वविद्यालय : बिहार सरकार वित्तीय वर्ष 2017-18 में राज्य में तीन नये विश्वविद्यालय खोलने जा रही है. पूर्णिया विश्वविद्यालय, पाटलिपुत्र विश्वविद्यालय और मुंगेर विश्वविद्यालय खोलने के लिए राज्य कैबिनेट ने अनुमति दे दी है. बीएन मंडल से अलग होकर पूर्णिया विवि, मगध विवि से अलग होकर पाटलिपुत्र विवि और तिलका मांझी विवि से अलग होकर मुंगेर विवि की स्थापना की जा रही है. वहीं, राज्य में प्राइवेट यूनिवर्सिटी खोलने के लिए 11 प्रस्ताव आये हैं. इसमें से सात संस्थानों को एलओआइ निर्गत किया जा चुका है. 

स्कूलों में बढ़ी लड़कियों की संख्या : राज्य के सरकारी स्कूलों में छात्राओं की संख्या बढ़ी है. कई जिलों में तो नामांकित छात्रों से ज्यादा छात्राएं हैं. सरकार स्कूल से बाहर के बच्चों को स्कूल में लाने, नामांकन में वृद्धि करने, नये प्राथमिक विद्यालय और प्लस टू स्कूल खोलने, क्लास की संख्या बढ़ाने, शिक्षकों की उपलब्धता और उनकी नियमित उपस्थिति सुनिश्चित करने के साथ-साथ प्रारंभिक स्कूलों को हाइ स्कूलों में अपग्रेड करने का काम चल रहा है. 

 

विज्ञान व प्रावैधिकी

 

‍37.79 करोड़ की कटौती, हर जिले में खुलेंगे इंजीनियरिंग कॉलेज

 

राज्य सरकार ने वित्तीय वर्ष 2017-18 के लिए विज्ञान व प्रावैधिकी विभाग और सूचना व प्रावैधिकी विभाग का बजट पिछले साल की  तुलना में घटा दी है. विज्ञान प्रावैधिकी विभाग में 13.87 करोड़ और सूचना व प्रावैधिकी विभाग में 23.92 करोड़ रुपये वार्षिक बजट में घटाये गये हैं. राज्य सरकार ने वित्तीय वर्ष 2017-18 में विज्ञान व प्रावैधिकी विभाग में 213.45 करोड़ का प्रावधान किया गया है, जबकि 2016-17 के वित्तीय वर्ष में 227.32 करोड़ रुपये का प्रावधान था. इसी प्रकार सूचना व प्रावैधिकी विभाग मेें 248.64 करोड़ का प्रावधान किया गया है, जबकि 2016-17 में 272.56 करोड़ रुपये का प्रावधान था. 

 

राज्य सरकार ने विज्ञान व प्रावैधिकी विभाग के बजट में कटौती की है. बावजूद इसके सात निश्चय के तहत हर जिले में एक इंजीनियरिंग कॉलेज की स्थापना की जायेगी. बिहार कॉलेज ऑफ इंजीनियरिंग भागलपुर के परिसर में 50 एकड़ जमीन पर आइआइआइटी (इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ इनफॉरमेशन टेक्नोलॉजी) की स्थापना भी की गयी है. वहीं, बोधगया में नेशनल काउंसिल ऑफ साइंस म्यूजियम के माध्यम से रीजनल साइंस सेंटर के निर्माण कराया जायेगा. इसके लिए सरकार ने राशि जारी कर दी है. इसके अलावा पटना में डॉ एपीजे अब्दुल कलाम साइंस सिटी, दरभंगा में तारामंडल सह विज्ञान संग्रहालय का निर्माण किया जायेगा. 

शिक्षा देकर बिहार के सौ दलित बच्चों का भविष्य उज्ज्वल बना रहे हैं केबीसी विनर सुशील कुमार

टीवी कार्यक्रम ‘कौन बनेगा करोड़पति’ (केबीसी) की हॉट सीट पर बॉलीवुड के मेगा स्टार अमिताभ बच्चन के सवालों के जवाब दे करोड़पति बने सुशील कुमार आज भी जमीन से जुड़े हैं। शिक्षा को विकास व आत्मनिर्भरता का वाहक मानते हुए उन्होंने सौ से अधिक महादलित बच्चों को गोद लेकर उन्हें पढ़ाना शुरू किया है।
सुशील कुमार पूर्वी चंपारण के मोतिहारी स्थित कोटवा प्रखंड के मच्छहर गांव की मुसहर बस्ती में छोटे—छोटे बच्चों को पढ़ा रहे हैं। मेहनत—मजदूरी करके अपना भरण-पोषण करने वाले इन लोगों के बच्चों को इससे पहले तक शिक्षा का मतलब ही नहीं पता था लेकिन सुशील कुमार की वजह से आज इस बस्ती के बच्चे शिक्षा का अर्थ भी जानते हैं और अपने उज्ज्वल भविष्य को भी पहचान रहे हैं।

कुछ समय पहले तक इन बच्चों को “क” से कबूतर और “ख” से खरगोश का भी ज्ञान नहीं था लेकिन सुशील कुमार की मेहनत के चलते आज ये बच्चे किताब पढ़ने लायक बन गए हैं। सुशील कुमार ने लगभग एक साल पहले इन बच्चों को पढ़ाने का फैसला किया था। सुशील कुमार इन बच्चों को खुद भी पढ़ाते हैं। साथ ही उन्होंने बच्चों को पढ़ाने के लिए दो टीचरों को भी नियुक्त किया है। इसके बाद पढ़ाई का सिलसिला ऐसा चला कि आज इनमें से कई बच्चे ऐसे भी हैं जो सरकारी स्कूल में पढ़ने जाने लगे हैं। वहीं इन बच्चों के माता पिता का कहना है कि आज अपने बच्चों को पढ़ते-लिखते देखकर उन्हें बेहद खुशी होती है।

इसके अलावा जब बच्चों को भी कॉपी किताब आदि मिलती है तो उनका भी खुशी का कोई ठिकाना नहीं रहता। गौरतलब है कि जब सुशील कुमार केबीसी में आए थे तब वह खुद एक डाटा आॅपरेटर की नौकरी करते थे लेकिन आज वह पीएचडी कर रहे हैं और शिक्षा के जरिए बच्चों का भविष्य उज्ज्वल बना रहे हैं।

अब प्रतिष्ठित विश्व बैंक ( Wold Bank) ने भी इस बिहारी को आमंत्रित किया है !

बिहार-बिहार-बिहार, बिहारी-बिहारी-बिहारी हर तरफ आप सुनते होंगे|
बिहार के बारे में आप कैसा सुनते हैं वो इस पर निर्भर करता है कि आपकी संगति कैसी है! कुछ लोगों को बिहारी मतलब बांके बिहारी श्री कृष्णा समझ में आता है, अयोध्यावासी तो बिहारी या मिथिला सुन के हंसी-मजाक करना शुरू कर देते हैं| मंत्रालय, सचिवालय में बिहारी का मतलब कोई बड़ा साहेब या IAS अधिकारी होता है| कहीं बिहारी शब्द सुन के मुँह से वाहे गुरु जैसा शब्द भी निकल जाता है| ये बहुत बड़ा और मजेदार विषय है| खैर आज जिन शक्सियत से हम आपको मिलवाने से जा रहे हैं, उसका आत्म-विश्वास उन्हें खास बनाता है|

सबसे पहले तो नाम ही बहुत खास है इनका| नाम में प्रयुक्त शब्दों को देखें तो इनका एक जबरदस्त व्यक्तिव बनता है| ज्ञान व् ‘विवेक’ का ‘सागर’ जो अनंत गहराईयों में बिहार व् देश के लिए सुन्दर सपना रखता हो, साथ में व्यव्हार-विचार बिलकुल मृदु हो, साधारण हो, सरल हो वो ही शायद ये कहला सकता है-  ” शरद विवेक सागर “!

अब हम बताते हैं हाल ही में इन्हें मिली एक और उपलब्धि के बारे में जो इनके अक्टूबर महीने में अमेरिका के राष्ट्रपति श्री बराक ओबामा से मुलाकात के बाद दूसरी बड़ी खबर है और उपलब्धि भी है; उनके लिए, हमारे बिहार के लिए, हर भारतीय के लिए!
उन्होंने लगभग 9 घंटे बिताया अमेरिका के वाइट हाउस में और वो ९० मिनट का खास Session रहा अमेरिकी राष्ट्रपति के साथ | राष्ट्रपति बराक ओबामा ने उसी दौरान शरद विवेक सागर को बधाई देते हुए कहा कि “उम्मीद करता हूँ मजा आ रहा होगा आपको, वाइट हाउस में”| आपको पता ही है, ये भारत के एक मात्र नागरिक हैं जिन्हें इस साल अमेरिकी राष्ट्रपति ने बुलाया| इस खबर को हर छोटे बड़े मीडिया हाउस ने खूब जगह दी थी| यह चर्चा का विषय बन गया था|

अब इसी महीने  इनको  “वर्ल्ड बैंक यूथ सबमिट ” में आने का आमंत्रण मिला है !

24 वर्षीय ‘Dexterity Global’ के CEO को इस साल नवम्बर महीने में होने वाले ‘World Bank Youth Summit’ में आमंत्रित किया गया है, जो अमेरिका के वाशिंगटन DC में आयोजित होना है| इस प्रोग्राम का नाम है ‘The World Bank Youth Summit: Rethinking Education for the New Millennium’, जो इस बार साथ लायेगा वर्ल्ड बैंक के प्रतिनिधि व् पूरी दुनिया के कुछ चुनिंदा यूथ लीडर्स को जिन्होंने प्राइवेट सेक्टर या सरकारी सेक्टर में अपने बेहतर काम, नई सोच, इनोवेशन के साथ अलग मुकाम पाया है| यहाँ ये सभी आपस में विचारों का आदान प्रदान करेंगे |
इस प्रोग्राम के लिए विश्व भर से लगभग १८०० लोगो में से कुछ विशेष शख्सियतों को बुलाया गया है जिनकी इस सदी में ‘शिक्षा व् शिक्षा व्यवस्था’ को ले के उम्दा और अलग सोच है|

हाँ ये वही शरद विवेक सागर हैं जिन्होंने केवल 16 साल की उम्र में Dexterity Global की स्थापना की, जहाँ बच्चों को शिक्षा में एक प्लेटफार्म देना इनका एक मात्र उदेश्य हैं| जहाँ ये बच्चों में लीडरशिप क्वालिटी से लेकर कई मौके प्रदान करते हैं| सही और सटीक दिशा निर्देश दे के ये भारत में हर साल लगभग १२ लाख बच्चों को लाभांवित करते हैं अपने इस प्रयास से|

साल 2016 इनके लिए लाजबाब रहा है, और हम बिहारवासियों के लिए भी जब जनवरी -फरवरी में शुरुआत हुई थी धमाकेदार उपलब्धि से; जब पहली बार किसी बिहारी का नाम दुनिया के प्रसिद्द मैगज़ीन Forbes में शामिल हुआ| शरद विवेक सागर का नाम टॉप 30 अंडर 30 लीडर/ उभरते बिजनेसमैन के लिस्ट में आया था, जिसमें फेसबुक के Mark Zuckerbarg , Malala Yousafzai समेत कई जानी-मानी हस्तियाँ थीं| मीडिया में हर तरफ चर्चा का विषय तब जो शुरू हुआ आज तक चल रहा है| एक के बाद उपलब्धियों से धमाल मचा रखा है शरद विवेक सागर जी ने!

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अअभी 2 महीने और बचे हैं 2016 में| न जाने कितनी और उपलब्धियों और रिकॉर्डस से बिहार का यह लाल देश का नाम रोशन करेगा| ये अनुमान भी लगा पाना मुश्किल ही नहीं नामुमकिन सा है|

आपन बिहार टीम की ढेर सारी शुभकामनायें इनके साथ हैं।

सीबीएसई की तरह होगा बिहार बोर्ड दसवी और इंटरमीडियट का नया सिलेबस

बहुत जल्द बिहार विद्यालय परीक्षा समिति दसवी और इंटरमीडिएट स्तर पर गणित और विज्ञान के पाठ्यक्रम में बदलाव करने जा रही है. उम्मीद है की वर्ष 2018 सत्र से पाठ्यक्रम सीबीएसई के तरह लागु कर दी जायेगी।

सीबीएसई और आइसीएसई बोर्ड के स्टूडेंट्स की तरह बिहार बोर्ड के स्टूडेंट्स की भी अपने विषय पर मजबूत पकड़ होगी. जल्द ही बिहार विद्यालय परीक्षा समिति मैट्रिक और इंटरमीडिएट स्तर पर मैथेमेटिक्स और साइंस के सिलेबस को सीबीएसई पैटर्न पर करने जा रहा है. इसको लेकर तैयारी शुरू हो चुकी है. नवंबर में होने वाली एकेडमिक काउंसिल की बैठक में इसे अमली जामा दिया जायेगा. नये सिलेबस को 2018 से लागू करने की संभावना है. नये सिलेबस में पूरी तरह से एनसीइआरटी को लागू किया जायेगा. 9वीं से 12वीं तक हर विषय में एनसीइआरटी बुक से ही पढ़ाई होगी. यह बदलाव नयी शिक्षा नीति के तहत किया जा रहा है.

मैथेमेटिक्स और साइंस का सिलेबस एक हो, इसके लिए सीबीएसइ और आइसीएसइ बोर्ड सहित 10 से अधिक स्टेट बोर्ड ने इसे मंजूरी दे दी है. कुछ दिनों पहले बिहार बोर्ड के पास पत्र लिखा गया था. इसमें मैथ और साइंस के सिलेबस को एक पैटर्न पर करने की बात कही गयी थी. इस पत्र को बोर्ड की ओर से शिक्षा विभाग को भेज दिया गया था. अब इस प्रस्ताव पर विचार किया जा रहा है.

परीक्षा पैटर्न में भी किया जायेगा बदलाव
2017 की मैट्रिक और इंटरमीडिएट के परीक्षा पैटर्न में बदलाव करने की भी तैयारी बिहार बोर्ड की ओर से की जा रही है. ज्ञात हो कि वर्तमान पैटर्न पिछले दो सालों से लागू है. पूर्व अध्यक्ष लालकेश्वर प्रसाद ने 40 अंकों का वस्तुनिष्ठ प्रश्न को लागू किया था. इससे पहले रहे बोर्ड अध्यक्ष राजमणि प्रसाद ने वस्तुनिष्ठ प्रश्न में मल्टीपल च्वाइस को समाप्त कर दिया था. एक बार फिर नये अध्यक्ष आनंद किशोर परीक्षा पैटर्न को बदलाव करने जा रहे हैं. समिति से मिली जानकारी के अनुसार 2017 में ही नये पैटर्न पर परीक्षा ली जा सकती है.  

नवंबर में होगी बैठक
मैट्रिक और इंटर के परीक्षा पैटर्न में बदलाव लिया जायेगा. नवंबर में इसको लेकर बैठक होगी. अभी विचार चल रहा है. नये परीक्षा पैटर्न को 2017 से ही लागू किया जायेगा.

मेडिकल इंट्रेंस एग्जाम : नीट में फिर बिहारी छात्रों का जलवा, टॉप 100 में कई बिहारी

कल मेडिकल इंट्रेंस एग्जाम नीट 1 और नीट का परिणाम घोषित किया गया, बिहार के छात्र-छात्राओं ने फिर अपना परचम लहराया और राज्य का नाम रौशन किये।
टॉप 100 में बिहार के कई छात्रों को जगह मिला।

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गुजरात के हेत शाह ने 99.99 पर्सेंटाइल अंक हासिल करके टॉपर बने हैं। उसे 720 में 685 अंक मिले हैं। इस बार चार ट्रांसजेंडर ने भी नीट क्वालीफाई किया। बिहार  के भी कई बच्चे टॉप-100 में जगह बनाने में सफल हुए हैं। बेतिया की शिवांगी को मिला 52वां रैंक…

– बेतिया की छात्रा शिवांगी गुप्ता को ओबीसी कैटेगरी में 52वां रैंक मिला है, जबकि जनरल कैटेगरी में उसका रैंक 334 है।
– इसके अलावा प्रदीप डेनियल मरांडी का अपनी कैटेगरी में रैंक 84, नालंदा की अंशिका की अपनी कैटेगरी में 128वां रैंक है।
– वहीं पटना के आयुष आनंद को कैटेगरी में 277 व सत्यम कुमार को 342वां रैंक मिला है।
– निखिल कुमार का जनरल में रैंक 672, हिमांशु राज का 611, आकांक्षा सुमन का 1074 है।
– निवेदिता शंकर को कैटेगरी में 112, शिवानी को जनरल में रैंक 845 मिला है।
– जगदेव पथ की आनंद प्रियदर्शिका को कैटेगरी में 759वां रैंक मिला है।

परसेंटाइल के आधार पर है नीट का रिजल्ट

– नीट का रिजल्ट मंगलवार को जारी हुआ। गोल के फाउंडर व मैनेजिंग डायरेक्टर विपिन कुमार सिंह ने बताया कि नीट का रिजल्ट परसेंटाइल के आधार पर निकाला गया है।
– इसमें जनरल कैटेगरी से 171329, ओबीसी से 175226, एससी से 47183 और एसटी से 15170 छात्रों ने क्वालिफाई किया है।
– नीट का फेज वन 1 मई को आयोजित किया गया था जबकि दूसरा फेज 24 जुलाई को आयोजित हुआ था।
– नीट का रिजल्ट 17 अगस्त को जारी होना था, लेकिन बोर्ड ने एक दिन पहले ही रिजल्ट घोषित कर दिया है।

7 हजार रैंक तक को एमबीबीएस

– विशेषज्ञों के अनुसार 7 हजार तक जनरल कैटेगरी में ऑल इंडिया रैंक लाने वाले छात्रों को सरकारी मेडिकल कॉलेजों में एमबीबीएस मिलने की संभावना है।
– विपिन कुमार सिंह ने बताया कि ओबीसी में 1500, एससी-एसटी कैटेगरी में 600 से 700 रैंक लानेवाले छात्रों को 15% कोटा के तहत सरकारी कॉलेजों में एमबीबीएस मिल सकता है।
– बिहार स्टेट के 85% कोटा के लिए 16 हजार ऑल इंडिया रैंक लानेवाले जनरल कैटेगरी के छात्रों को बिहार के सरकारी मेडिकल कॉलेजों में दाखिले की उम्मीद है।
– वहीं बीसी, ईबीसी, एससी एवं एसटी कैटेगरी वाले छात्रों को इससे पीछे रैंक तक में एमबीबीएस मिलने की संभावना है।

लूसेंट के छात्र को 1295वां स्थान

– लूसेंट इंटरनेशनल स्कूल देहरादून के उपाध्यक्ष एवं गुरुकुल ट्यूटोरियल्स पटना के संस्थापक ई. भूपेश कुमार ने बताया कि लूसेंट के छात्रों ने नीट में अच्छा प्रदर्शन किया है।
– छात्र आलोक कुमार ने ऑल इंडिया में 1295वां स्थान हासिल किया है।

हल चलाने वाले का बेटा उड़ाएगा फाइटर प्लेन

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किसी भी मां-बाप के लिए सबसे बड़ा खुशी का पल तब आता है जब वो अपने संतान को कामयाबी के शिखर पर पहुंचता हुआ देख ले। बिहार के रोहतास जिला  के सूर्यपुरा प्रखंड में पड़रिया नामका एक गांव है और इस गांव के एक मध्यमवर्गीय किसान हैं सत्येंद्र सिंह। आज सत्येंद्र सिंह की खुशियों का कोई ठिकाना नहीं हैं क्योंकि उनका बेटा विवेक एयरफोर्स में फ्लाइंग ऑफिसर जो बन गया है। सत्येंद्र सिंह के घर पर बधाई देने वालों का तांता लगा हुआ है और जो भी बधाई देने पहुंचे रहे हैं उनका मुंह मीठा कराया जा रहा है।

अब हम आपको विवेक के बारे में कुछ और जानकारी दे दें। बचपन से ही मेधावी विवेक की प्रारंभिक शिक्षा-दीक्षा गांव के ही स्कूल में हुई। उसके बाद विवेक का एडमिशन झुमरी तलैया के मशहूर सैनिक स्कूल में हुआ। विवेक ने एनडीए की परीक्षा पास किया। एयरफोर्स में 22 वां रैंक हासिल करने के बाद अब विवेक फ्लाइंग ऑफिसर बन गए हैं। पुणे में ट्रेनिंग पूरी करने के बाद विवेक को फिलहाल हैदराबाद में तैनात किया गया है।

ट्रेनिंग के बाद जब विवेक गांव वापस लौटे तो अपनी कामयाबी का श्रेय उन्होंने माता-पिता और अपने गुरु हिटजी कोचिंग संस्थान के निदेशक आर के श्रीवास्तव को दिया। विवेक ने कहा कि मां पिता के आशीर्वाद की ही बदौलत आज वो इस मुकाम तक पहुंचे हैं। इस मौके पर उन्होंने कहा कि कठिन परिश्रम और लगन हो तो अपने लक्ष्य तक आसानी से पहुंचा जा सकता है। विवेक की सफलता पर उनके गांववालों को भी गर्व महसूस हो रहा है।