Padma Awards 2020: बिहार के मुजफ्फरपुर के पूर्व सांसद जॉर्ज फर्नांडिस को पद्म विभूषण

गणतंत्र दिवस (Republic Day 2020) के मौके पर दिए जाने वाले पद्म पुरस्कारों (Padma Awards 2020)का ऐलान कर दिया गया है| इस बार 7 हस्तियों को पद्म विभूषण (Padma Vibhushan), 16 को पद्म भूषण(Padma Bhushan) और 118 को पद्मश्री (Padma Shri) से सम्मानित किया गया है| इस बार पद्म विभूषण पाने वालों में पूर्व वित्त मंत्री अरुण जेटली(Arun Jaitley), पूर्व विदेश मंत्री सुषमा स्वराज(Sushma Swaraj), जॉर्ज फर्नांडिस का भी नाम है|

मंगलुरु में पले बड़े पूर्व रक्षा मंत्री जॉर्ज फर्नांडेस की जन्मभूमि भले ही दक्षिण में हो पर उनकी कर्मभूमि बिहार ही रहेगी. उस समय जब सोशल मीडिया जैसा आसान साधन नहीं हुआ करता था उस दौर में जॉर्ज फर्नांडेस (George Fernandes) ने दक्षिण से लेकर उत्तर की दुरी को तय किया.

फर्नांडेस ने उस समय जेल में थे जब 1977 में बिहार की जनता ने उन्हें तीन लाख वोट देकर मुजफ्फरपुर सीट से लोक सभा चुनाव में ऐतिहासिक जीत के लिए चुना.

तब वे जनता पार्टी के उम्मीदवार थे और देश में लगी इमरजेंसी के केस में जेल में बंद थे. चुनाव के दौरान वो शायद ही स्वयं प्रचार कर पाए. ये जीत ऐतिहासिक इसलिए भी रही क्योंकि जॉर्ज फर्नांडेस ने तीन बार के कांग्रेस सांसद एस.के.पाटिल को हराया था. जहां एक ओर 1989 में वी.पी सिंह सरकार के काल में जॉर्ज फर्नांडेस ने रेलवे मंत्री का कार्यभार संभाला वहीं 1998 – 2003 तक चली वाजपई सरकार के दौरान फर्नांडेस रक्षा मंत्री बनाए गए.

कारगिल युद्ध के समय सैनिकों का हौसला बढ़ाने वे सियाचिन जाते रहते थे. पोखरन टेस्ट से भी उन्होंने कभी अपनी नज़ारे नहीं हटाई.

मुजफ्फरपुर में फैलाई विकास की नई जड़े

अपनी इस जीत के बाद ही फर्नांडेस ने 1978 में मुज़फ़्फ़रपुर में थर्मल पावर प्लांट की नीव डाली जिसने ज़िले में रोज़गार के साधन बढ़ा दिए. फर्नांडेस ने चार बार मुजफ्फरपुर और तीन बार नालंदा से चुनाव जीता. नालंदा में उन्होंने फैक्टरियों के साथ राजगिर में सैनिक स्कूल भी खुलवाया.

जॉर्ज फर्नांडेस कि बदौलत दूरदर्शन केंद्र मुजफ्फरपुर तक पहुंचा. उन्होंने मुजफ्फरपुर में इंडियन ड्रग्स एंड फार्मासूटिकल्स लिमिटेड खुलवाया. इस से पहले मुजफ्फरपुर में केवल चीनी और तम्बाकू की फैक्टरियां ही हुआ करती थी.

लालू के लिए बन गए थे चुनौती

फर्नांडीस ने बिहार की राजनीति में एक प्रमुख भूमिका निभाई. याद होगा 1990 के दशक के दौरान फर्नांडेस ने राष्ट्रीय जनता दल (रजद) प्रमुख लालू प्रासाद यादव  के साथ अनबन के चलते रजद के लिए एक चुनौती बन चुके थे. फर्नांडेस ने शिकायत की कि उन्हें लालू द्वारा नजरअंदाज किया जा रहा है और ‘फ्रॉड फर्नांडेस’ कहकर बुलाया जा रहा है.

बाद में उन्होंने नितीश कुमार और पूर्व मुख्यमंत्री अब्दुल ग़फ़ूर के साथ मिलकर 1994  में समता पार्टी को जन्म दिया. फर्नांडेस इस पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष चुने गए. 1995 चुनाव में फर्नांडेस की समता पार्टी के खराब प्रदर्शन के चलते उन्होंने भारतीय जनता पार्टी के साथ हाथ मिला लिया. फर्नांडेस लालू की आँख का कांटा तोह थे ही पर इस गठबंधन के कारण लालू का शासन भी खत्म हो गया. 2005 के आते आते समता पार्टी जनता दल (यूनाइटेड) में जा मिली.

जब नितीश के साथ बिगड़े सम्बन्ध

एक छत में रहने के बावजूद नितीश और फर्नांडेस में अनबन होना स्वाभाविक था. नितीश ने फर्नांडेस को हटाकर शरद यादव को अपनी पार्टी का नया अध्यक्ष नियुक्त कर लिया था. 2009 में ये खबर आई की खराब स्वस्थ्य के चलते फर्नांडिस को मुजफ्फरपुर से जनता दल (यूनाइटेड) के नामांकन से मना कर दिया गया था. फर्नांडेस की हार के बावजूद किसी तरह वे राज्य सभा में अपनी सीट सुनिश्चित करने में कामयाब रहे.

मुजफ्फरपुर के लोगो के थे चहेते

फर्नांडेस टैक्सी ड्राइवर यूनियन के प्रमुख नेता भी रह चुके हैं. उन्होंने सोशलिस्ट ट्रेड यूनियन ज्वॉइन किया और होटलों, रेस्टोरेंटों में काम करने वाले मजदूरों की आवाज उठाई. नालंदा के लोगों के बीच फर्नांडेस ‘जारजे साहेब’ के नाम से मशहूर थे. मुज़फ़्फरपुर के लोग उन्हें बहुत पसंद किया करते थे. दिल्ली में होने के बावजूद वहां के लोगो फर्नांडेस को पोस्टकार्ड के ज़रिए अपनी समस्याएं लिखकर भेजते थे.

 

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