बिहार में दो बार आई भीषण बाढ़, बावजूद बाढ़ राहत राशि में केंद्र सरकार ने राज्य से किया भेदभाव

बिहार में हर साल आने वाली बाढ़ और उससे होने वाली तबाही जगजाहिर है| बाढ़ से उत्तर बिहार तो हर लगभग हर साल डूबता है मगर बीते साल बाढ़ ने राजधानी पटना में भी अपनी धमक दिखा दी| राज्य के उपमुख्यमंत्री को हाफ-पैन्ट में रेस्क्यू किये जाने की तस्वीर तो अभी भी सबको याद होगा|

मगर इनसब के बावजूद केंद्र सरकार पर बाढ़ सहायता राशि देने में बिहार करने का गंभीर आरोप लग रहा है| यह सवाल तब उठा जब बीते मंगलवार केंद्र द्वारा राज्यों को बाढ़ राहत के लिए 5908 करोड़ रुपए जारी किए गए| बिहार में पिछले साल दो बार भीषण बाढ़ आई लेकिन इसके बावजूद बिहार की मांग पर विचार नहीं किया गया|

कर्नाटक को सर्वाधिक 1869 करोड़ रुपए राहत राशि दी गई| मध्य प्रदेश को 1749 करोड़ रुपए और उत्तर प्रदेश को 956 करोड़ रुपए की राशि देने का निर्णय हुआ| इससे पहले भी कर्नाटक को 1200 करोड़, मध्य प्रदेश को एक हजार करोड़ और महाराष्ट्र को 600 करोड़ रुपए की राहत राशि मुहैया कराई गई थी| उस समय बिहार को 400 करोड़ रुपए दिए गए थे| बिहार में बाढ़ राहत की मद में नुकसान और पुनर्वास के मद में केंद्र से 4000 करोड़ रुपए की सहायता मांगी गई थी| एक केंद्रीय टीम ने राज्य का दौरा भी किया था| मंगलवार की बैठक के बाद जब बिहार सरकर ने जानकारी मांगी कि आखिर किन कारणों से राज्य की मांग पर विचार नहीं किया गया, तब उन्हें बताया गया कि केंद्रीय टीम जल्द राज्य का फिर से दौरा करेगी|

मंगलवार को दिल्ली में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह (Amit Shah) की अध्यक्षता में राष्ट्रीय आपदा राहत फंड में राज्यों की मांग पर विचार के लिए एक बैठक आयोजित की गई थी| बैठक में केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण (Nirmala Sitharaman) भी मौजूद थीं|

बिहार के साथ यह भेदभाव तब हो रहा है जब राज्य में केंद्र में सत्ताधारी दल भाजपा और जेदयू की सांझी सरकार है| यही नहीं मौजूदा केंद्र सरकार में भी राज्य से 6 मंत्री है|

केंद्र के इस फैसले के बाद राज्य में राजनीतिक बयानबाजी का दौर शुरू हो गया है| जनता दल यूनाइटेड (JDU) के नेता और राष्ट्रीय प्रवक्ता केसी त्यागी (KC Tyagi) ने कहा कि नीतीश सरकार ने 2000 करोड़ रुपए से अधिक तो बाढ़ प्रभावित लोगों के खाते में सहायता राशि ट्रांसफर की है| उसके बाद यह हमारी समझ से परे है कि किस आधार पर बिहार के गरीब लोगों के साथ नाइंसाफी हो रही है| उम्मीद करते हैं कि केंद्र जल्द से जल्द इस गलती पर भूल सुधार करेगा| वहीं कांग्रेस पार्टी के विधायक शकील अहमद खान (Shakeel Ahmed Khan) ने कहा कि केंद्र सरकार नीतीश कुमार को नहीं बल्कि बिहार की जनता को डबल इंजन की सरकार के नाम पर उल्लू बना रही है|

 

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