यह अपने बिहार का अकबर है, इंडियन ब्लाइंड क्रिकेट टीम का खिलाड़ी

ये अकबर है। पंजवार का अकबर। हमारे गांव का अकबर। हमारा अपना – अकबर अंसारी। इंडियन ब्लाइंड क्रिकेट टीम के ग्यारह खिलाड़ियों में से एक।

चौंकिए मत! यहीं सच है| और हां, सिर्फ जन्म का नाता नहीं है गांव से। यहीं के स्कूल में पढ़ा है। यहीं के मैदानों में दौड़ा है। यहीं के पोखर और तालाबों में तैरा है।

बचपन से हुड़दंगी। पढ़ने जाता था लेकिन हमेशा खेलने की फिराक में रहता था। घरवालों को चिंता लगी रहती थी क्योंकि दिखता कम था बच्चे को। एक दिन बड़ा हादसा हुआ। तालाब में तैरने के दौरान जहरीले पानी के कारण आंख की रोशनी पूरी तरह से गायब हो गई । आनन-फानन में देवरिया ले जाया गया। वहां डॉक्टरों ने आंखों के पर्दे फट जाने की बात कही। परिवार पर कहर टूट पड़ा।

किसी ने नेपाल ले जाने का सुझाव दिया। अकबर नेपाल गया। इलाज हुआ। आंखों की रोशनी वापस नहीं आ पाई। अकबर के पिताजी हारे नहीं। एम्स ले गए। डॉक्टर हार गये। शत-प्रतिशत ब्लाइंड डिक्लेयर कर दिया। किसी को कुछ सूझ नहीं रहा था। वहीं पर एक डॉक्टर ने ब्रेल लपि सीखने के लिए हॉस्टल में रखने का सुझाव दिया।

3 महीने का कोर्स छोरे ने 21 दिन में कंप्लीट किया। सबके लिए आश्चर्य था यह।

मैनेजमेंट ने बच्चे में संभावना देखी। 3 महीने के बाद भी हॉस्टल में रख लिया। अकबर पढ़ने लगा। पढ़कर सीखने लगा। हाई स्कूल..इंटर…किरोड़ीमल कॉलेज से स्नातक….अभी बी. एड. कर रहा है। पढ़ाकू भी ऐरा गैरा नहीं। हिंदी ऑनर्स में 67.2 प्रतिशत अंकों के साथ स्नातक बना है अपना चैंपियन ।

बच्चे की पढ़ाई शुरू हुई। लेकिन मन हमेशा खेल-मैदान की ओर भागने को होता। उठा, चला, दौड़ा, फिर भागना शुरू किया। जब भागा तो 200 मीटर की दौड़ में और जब उछला तो लांग जम्प में अपने इंस्टिट्यूट को मेडल दिला दिया। अब शुरू हुई मनमानी। जो ठाना वहीं किया|

किरोड़ीमल कॉलेज में भाला फेंक प्रतियोगिता में गोल्ड मेडल जीता। फुटबॉल खेलते हुए दिल्ली टीम की ओर से नेशनल खेला। सबके बावजूद मन क्रिकेट में ही लगता था। खुद को एकाग्र करना शुरू किया। अपना सब कुछ क्रिकेट के लिये झोंक दिया। 2013 में पहला बड़ा मौका मिला। देहरादून में आयोजित टी 20 ब्लाइंड टूर्नामेंट में शानदार खेला। 2 बार मैन ऑफ द मैच रहा। सबसे महत्वपूर्ण रहा 2016 में दिल्ली नार्थ जोन टूर्नामेंट। इस टूर्नामेंट का “मैन ऑफ द सीरीज” चुना गया था हमारा अकबर।

एक और बात समझिए। यह खिताब और अहम हो जाएगा। ब्लाइंड क्रिकेट टीम में 4 खिलाड़ी पूर्णतः न देख सकनेवाले होते हैं। 3 खिलाड़ी 3 मीटर की दूरी तक देख सकने वाले होते हैं। 4 खिलाड़ी वैसे होते हैं, जो 6 मीटर तक देख सकते हैं। अकबर उन 4 खिलाड़ियों में से एक था जो बिल्कुल नहीं देख सकते थे।

दिल्ली टीम का ओपनर बॉलर है अपना खिलाड़ी। वन डाउन बैटिंग करने के लिए आता है। दिल्ली टीम का कप्तान रहा है।

श्रीलंका दौरे के लिये भारत को एक ऑल राउंडर की तलाश थी। अकबर भारतीय टीम के लिए चुना गया। हाल ही में 3 वनडे और 5 मैचों की टी -20 सीरीज खेलकर आया है। वर्ल्ड कप की तैयारी में जोर शोर से लगा है। निश्चित रूप से वर्ल्ड कप खेलेगा अकबर। उसे खेलना ही होगा। अपने लिए, अपने गांव के लिए, अपने देश के लिए और अपने जैसे हजारों स्वप्नदर्शियों के लिये।

बधाई जवान। गांव को गौरव के शिखर तक पहुंचाया है तुमने। आनंद रहो। मस्त रहो। देश का मान बढ़ाओ।

संजय सिंह
सिवान ।

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