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संपादकीय

कानून का एक सच्चा सिपाही उम्मीदों के शहर से अधूरी ख्वाहिश लेकर विदा हो गया!

पिछले 12 वर्षों से टीवी पत्रकारिता के पेशे से जुड़ा हूँ। जिले से लेकर राजधानी तक का एक छोटा सा सफर तय कर लिया जिस दौरान कई अनुभवों के साथ खट्टी मीठी यादें भी जुड़ गयी। एक अध्याय आईपीएस शिवदीप लांडे से भी जुड़ा है जिनके अंदाज से भले ही अपराधी और माफिया खौफजदा होते थे लेकिन पत्रकारों की नजर में इनकी बाजीगरी खबर बन जाती थी लेकिन आज नम आँखों से बड़े ही अफ़सोस के साथ कहना पर रहा है कि अब ऐसे ऑफिसर हम सबके बीच से यानि बिहार की सरजमीं से विदा हो गए और महाराष्ट्र के सफर पर निकल पड़े। इस ऑफिसर का गुनाह क्या था? ये हम नही जानते लेकिन इतना तय है कि सुर्ख़ियों में यूँ ही कोई नही आता बल्कि कुछ तो काम करना पड़ता है। लांडे ने भी खनन माफिया, अपराधी, नक्सलियों और सफेदपोश को बेनकाब करने की बीड़ा उठा ली थी और अंजाम कुछ भी हो इस ऑफिसर को परवाह नही होती थी।मिला क्या तो सियासत से इनाम की जगह सेंटिंग पोस्ट की सजा क्योंकि हुक्मरानों को ईमानदारी और वफ़ादारी हजम नही होता। आज लांडे की विदाई हो गयी लेकिन चर्चे नही हुए ,हमें शर्म आती है कि हमेशा सुर्ख़ियों में रहनेवाले की विदाई एक गुमनाम मुसाफिर की तरह हुई, अधिकारियों से लेकर समाजसेवियों और सियासत के रहनुमाओं के पास वक्त नही था या फिर बिहार की राजधानी पटना में फूलों की माला ख़त्म हो गयी थी। चला चली की उस बेला में शुक्र था कि मेरी मुलाकात इस ऑफिसर से हो गयी और कुछ बाते चलते चलते सुन लिये और एक तस्वीर भी खिंचवा लिए ताकि कोई बेईमान और चाटुकार अफसरों की कार्यप्रणाली से दीदार होना पड़े तो ये तस्वीरें ईमानदारी की गवाही देगी।चाणक्य की पंक्ति है कि किसी भी ब्यक्ति को अधिक ईमानदार नही होनी चाहिए क्योंकि सीधे पेड़ सबसे पहले काटे जाते है शायद लांडे के साथ भी यही हुआ क्योंकि एक ईमानदार ब्यक्ति ना तो प्रकाश से डरता है ना ही अंधकार से। सिटी एसपी हो या एसपी फिर प्रभारी एसएसपी चाहे एसटीएफ एसपी या गवर्नर एडीसी सभी जगहों पर अच्छे कार्यों से लांडे ने पहचान बनाई और लोगों के दिलो पर राज किया।ऐसे ऑफिसर का मनोबल तोडना मतलब अपराध को बढ़ावा देना, अपराधियों को सहानुभूति मिलना, माफियाओ का दबदबा बढ़ाना नही तो और क्या है। जब भी बड़े माफियाओं ,गुंडे के गिरेबां तक लांडे के हाथ पहुँचते थे सियासत में भूचाल मच जाती थी और इस ऑफिसर का ट्रांसफर पोस्टिंग कर तुरंत ही ठिकाना लगा दिया जाता था लेकिन आग और हवा को कब तक कैद रखोगे आखिर यही हुआ लांडे ने बिहारी सिस्टम से तौबा करने का जिद ठाना और महाराष्ट्र सरकार ने लांडे की सेवा पर मुहर लगा दी जिसके बाद आज बिहार के गृहविभाग ने विरमित होने की स्वीकृति दे दी और कानून का ये जावाज सिपाही हँसते हँसते बिहार की सरजमी से विदा हो गया और कई यादे छोड़ गया।ऐसे ऑफिसर और भी है जो अच्छे कार्यों का परिणाम भुगत रहे है क्योंकि उनके भी बुलंद चट्टानी इरादों को सियासत के सौदागरों ने तोड़ का रख दिया है अब ऐसे में बेचारे सिस्टम से लड़े तो कैसे लड़े,आईपीएस विकास वैभव की बात कर रहा हूँ जिनकी सादगी,शालीनता और पुलिसिंग किसी से छुपी नही है। मुझे जो कहना था कह दिया लेकिन सरकार अपने कर्मों का फल भुगत रही है और जनता चोट खा रही है अब भी अगर हीरे को नही तरासोगे तो मिटटी की तरह इंसानियत भी बेजान हो जायेगी और एक दिन कानून बेजान होकर खिलौना बन जायेगा और अपराध हम सभी के जीने का अधिकार छीन लेगा।

 

रजनीश कुमार (ETV, Bihar)

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