Ease of Doing Business में बिहार का रैंक 26, पड़ोसी राज्य यूपी और झारखण्ड टॉप 5 में शामिल

ईज ऑफ डूइंग बिजनेस किसी राज्य में कारोबार करने के स्थिति के बारे में बताता है, बड़े निवेशक इसी रैंकिंग को देखकर राज्य में निवेश का फैसला लेते हैं|

आपको लॉकडाउन के समय बिहार के मजदूरों की बदहाली याद होगी| याद होगा कि आक्रोशित युवा कैसे ट्विटर पर रोजगार इन बिहार नाम से ट्विटर ट्रेंड करवा रहे थे| लोगों के जनाक्रोश को भांपते हुए 15 साल से हुई सरकार, अचानक चुनाव से पहले जाग जाती है और राज्य में उद्योग लगवाने की बड़ी-बड़ी बात करने लगते हैं| मगर बिहार सरकार के दावे की पोल खुद केंद्र सरकार ने खोल दी है|

केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने पिछले दिनों देश के सभी राज्यों एवं केंद्र शाषित प्रदेशों की Ease of Doing Business की रैंकिंग जारी किया| इस रैंकिंग में बिहार ने 36 राज्यों में से 26 वीं रैंक हासिल की है।

वही बिहार के पड़ोसी राज्य उत्तर प्रदेश को दूसरी और झारखण्ड को पांचवी रैंक मिले हैं| 

इस रैंकिंग को घरेलू और वैश्विक निवेशकों को आकर्षित करने, कारोबारी माहौल में सुधार लाने और राज्यों के बीच प्रतिस्पर्धा पैदा करने के लिए जारी किया जाता है| इससे पहले साल 2018 में इस तरह की रैंकिंग जारी हुई थी। इस रैंकिंग को श्रम कानून, जमीन की उपलब्धता, निर्माण की अनुमति, पर्यावरण पंजीकरण, सूचना तक पहुंच और सिंगल विंडो सिस्टम जैसे मानकों पर मापा जाता है।

इस साल आंध्र प्रदेश ने इस रैंकिंग में शीर्ष पर अपने आप को बरकरार रखा है। वहीं, दूसरे स्थान पर तेलंगाना की जगह उत्तर प्रदेश ने ले ली है। वहीं तेलंगाना एक स्थान खिसककर तीसरे स्थान पर आ गया है। इस रैंकिंग में इस बार चौथे स्थान पर मध्य प्रदेश, पांचवें पर झारखंड, छठे पर छत्तीसगढ़, सातवें पर हिमाचल प्रदेश और आठवें स्थान पर राजस्थान रहा है। उत्तर प्रदेश ने रैंकिंग में काफी अच्छा प्रदर्शन किया है। 2017-18 की रैंकिंग में यह 12वें स्थान पर था, जो अब दूसरे स्थान पर आ गया है। वहीं, हिमाचल प्रदेश भी 2017-18 की रैंकिंग में 16वें स्थान पर रहा था। वहीं, यहां बिहार 26वें और त्रिपुरा सबसे नीचे 36वें पायदान पर है|

ईज ऑफ डूइंग बिजनेस किसी राज्य में कारोबार करने के स्थिति के बारे में बताता है| बड़े निवेशक इसी रैंकिंग को देखकर राज्य में निवेश का फैसला लेते हैं| बिहार में उद्योगों की काफी कमी है| और राज्यों के अपेक्षा बिहार को नए निवेश की सबसे ज्यादा जरुरत है ताकि लोगों को अपने घर में रोजगार दिया जा सके, राज्य के वित्तीय स्थिति में सुधार लाया जा सके और भयंकर गरीबी और पलायन को रोका जा सके|

राज्य में कारोबारी माहौल बनाना सरकार की पहली प्राथमिकता होनी चाहिए मगर यह रैंकिंग देखकर लगता है की नीतीश सरकार की उद्योग निति भगवान भरोसे है|

 

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