क्या बाढ़ के पानी में फिर डूबेगा उत्तर बिहार?

देश में अलग-अलग हिस्सों में सावन ऐसा झूमकर आया कि कई जगहों पर बारिश और बाढ़ से लोग बेहाल हैं। नदियां उफान पर हैं और अपनी हदें तोड़ने पर आमादा हैं। यूपी से लेकर बिहार, बंगाल से लेकर पूर्वोत्तर, महाराष्ट्र से लेकर मध्य प्रदेश तक और असम से अरुणाचल प्रदेश तक कई इलाकों में बारिश से आफत आई है। उत्तर बिहार और नेपाल में भारी वर्षा का असर नदियों पर दिखने लगा है।

नेपाल में लगातार हो रही बारिश से बिहार में बाढ़ का खतरा बढ़ गया है। उत्तर बिहार की नदियां बागमती, कमला, गंडक के अलावा पहाड़ी नदियों का जलस्तर भी तेजी से बढ़ने लगा है। इससे मुजफ्फरपुर, सीतामढ़ी, मोतिहारी, मधुबनी, और बेतिया में बाढ़ का खतरा मंडराने लगा है। वाल्मीकिनगर झंडु टोला स्थित एसएसबी कैंप में पानी भर गया है।

उत्तर बिहार में 48 घंटे तक भारी बारिश के आसार  

मानसून की अक्षीय रेखा के हिमालय की तराई क्षेत्र की ओर शिफ्ट कर जाने के कारण बिहार के उत्तरी भाग में ज्यादातर जगहों पर भारी बारिश जारी है। इसके अलावा सूबे के दक्षिण और मध्य भाग में एक दो जगहों पर भी भारी बारिश की स्थिति बनी हुई है। अगले 48 घंटे तक उत्तर बिहार के लगभग सभी भागों में भारी बारिश और कुछ जगहों पर अत्यधिक भारी बारिश के आसार हैं। इन इलाकों में वज्रपात की भी चेतावनी जारी की गई है।

मौसम विज्ञान केंद्र पटना के पूर्वानुमान के अनुसार अगले 72 घंटे बाद बारिश की तीव्रता में कमी आएगी। मौसम विज्ञान केंद्र से मिले इनपुट के आधार पर उत्तर बिहार और मध्य बिहार के कुल 19 जिलों में अलर्ट की स्थिति बनी हुई है।

CO कर रहे तटबन्ध की निगरानी

फिलहाल नदियां खतरे निशान से नीचे हैं लेकिन जिले में अलर्ट जारी करते हुये दरभंगा DM त्याग राजन ने तटबंध का निरीक्षण किया है साथ ही सभी को सतर्क रहने की बात कही है।  जिले के 80 प्रतिशत आबादी नदियों के अगल बगल में बसे होने के कारण बाढ़ की खतरा ज्यादा है।

तारडीह प्रखंड के सकतपुर इलाके में कमला नदी का पानी फैलने लगा है।  यहां पानी की बढ़ती रफ़्तार को देखते हुए बांध की सुरक्षा के पूरे उपाय किये जा रहे हैं।  खुद तारडीह प्रखंड के CO अशोक कुमार यादव ने बांध का निरीक्षण किया साथ ही गांव के लोगों को भी अलर्ट किया।

नदियों के जलस्तर में वृद्धि से दहशत में लोग

इलाके के लोगों को बाढ़ का डर अभी से ही सताने लगा है।  रंजीत कुमार झा ने कहा कि पानी जितनी तेजी से बढ़ रहा है अगर यही हाल रहा तो जहां बांध नीचा है वहां से पानी इलाके में फैल सकता है।  मालूम हो कि यह इलाका तारडीह प्रखंड के कैथवाड़ का है जहां पिछली बार दो जगहों से बांध टूटने की वजह से 14 पंचायत बुरी तरह बाढ़ से न सिर्फ प्रभावित हुए था बल्कि कई घर बुरी तरह से क्षतिग्रस्त भी हो गए थे।  यही वजह है कि बाढ़ की पिछली त्रासदी को झेल चुके ग्रामीणों के बीच अभी से ही डर बना हुआ है।

सुपौल के कई गांवों में घुसा पानी, टूटीं सड़कें

भारी बारिश से कोसी-महानंदा सहित अन्य सहायक नदियों के जल स्तर में उतार-चढ़ाव जारी है।  सुपौल के तटबंध के अंदर के दर्जनों गांवों में बाढ़ का पानी घुस गया है। कटिहार के कई इलाकों में बाढ़ का खतरा मंडराने लगा है।  बारिश के कारण कोसी नदी के जल स्तर में वृद्धि दर्ज की गयी। शुक्रवार को ही कोसी का डिस्चार्ज ढाई लाख क्यूसेक को पार कर चुका था, जो शनिवार की सुबह इस वर्ष के रिकॉर्ड स्तर तक पहुंच गया।

शुक्रवार एवं शनिवार को कोसी बराज से निकला पानी सुपौल, किसनपुर, सरायगढ़, निर्मली, मरौना के दर्जनों गांवों में पानी प्रवेश कर गया है।  दर्जनों सड़कें ध्वस्त हो गयी हैं. कटिहार में महानंदा के जल स्तर में वृद्धि हुई है।  पिछले 18 घंटे में इस नदी का जल स्तर 30 सेंटीमीटर बढ़ा है।

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