40 हजार लोगों के गिरफ्तार होने के बाद, नीतीश सरकार ने शराबबंदी कानून पर लिया यू-टर्न

बिहार की नीतीश कुमार जिस शराबबंदी कानून का प्रचार करते हुए कहते थे कि यह कानून देशभर के लिए नज़ीर बनेगा| अब उसी कानून में वे खुद नरमी बरत रहे हैं| इस कानून के तहत लगभग 40 हजार गिरफ्तारियां होने के बाद, पहली बार सरकार को एहसास हुआ कि वर्तमान शराबबंदी क़ानून में जो सज़ा का प्रावधान है, वो अपराध के हिसाब से ठीक नहीं है|

बिहार विधानसभा का मॉनसून सत्र शुक्रवार को शरू हुआ| इसी विधानसभा सत्र में शराबबंदी कानून में संशोधन से संबंधित विधेयक की प्रति वितरित की गई। इस संशोधन के अनुसार पहली बार शराब पीने पर गिरफ़्तारी अब जमानती कर दी गई है| इसके साथ सार्वजनिक जुर्माने के वर्तमान प्रावधान को भी ख़त्म करने का प्रावधान किया गया है|

बिहार में शराब का धंधा करने वाले को मिलने वाली दस साल की सजा को कम कर पांच साल किया जाएगा। वहीं शराब पीते अथवा नशे की हालत में कोई पकड़ा जाता है तो उसे मिलने वाली न्यूनतम सजा को पांच साल से घटा कर तीन महीने किया जा सकता है। कई मामलों में सजा को कम किया गया है। हालांकि कई में सजा जस-की-तस रखी गई है।

इसके साथ ही सामूहिक रूप से जुर्माना लगाने के प्रावधान को समाप्त किया गया है और किसी परिवार द्वारा दखल किए गए स्थान अथवा मकान में कोई मादक द्रव्य अथवा शराब पाया जाता है या उपभोग किया जाता है तो 18 वर्ष से अधिक उम्र वाले परिवार के सभी सदस्य को दोषी मानने वाले शब्द को नए कानून में हटा दिया गया है।

गौरतलब है कि शराबबंदी कानून लागू होने के समय से ही विवादित रहा है| इस कानून के तहत अभी तक 40 हजार लोगों की गिरफ्तारी हो चुकी है| मगर गिरफ्तार हुए लोगों में ज्यादातर दलित समाज के गरीब लोग हैं|

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