नये बिहार के हीरो: अपने गाँव के ‘मुन्ने’ ने लौटाया बिहार का गुरूर

सदियों से हिंदुस्तान के लिए गौरव का स्थान रखने वाले अपने बिहार ने वो दिन भी देखे जब इसके लिए खुद अपना चेहरा पहचान पाना मुश्किल था। ऐसे कठिन समय में भी बिहार ने तो अपनी पहचान खोई मगर बिहारियों ने जीवटता और पहचान यूँ ही बरकरार रखी।

आज जब हम पूरे गर्व से 22 मार्च को बिहार दिवस मनाते हैं, तब ऐसे कुछ हीरों को याद करना अतिआवश्यक हो जाता है जिनकी दम से बिहारी पहचान दुनिया में अपनी छाप छोड़ती रही, हिंदुस्तान का नाम ऊँचा करती रही।

बिहार का सबसे अधिक एक्टिव फॉलोवर वाला ‘आपन बिहार’ ला रहा ऐसे ही कुछ नामचीन हस्तियों को आपके सामने जिनका नाम बिहार की शान है। विभिन्न क्षेत्रों में हिंदुस्तान का प्रतिनिधित्व करने वाले ये शख्सियत जब खुद को ‘बिहारी’ कहने से नहीं हिचकते तो लगता है हमने इन दिनों में चाहे जो भी खोया हो, आत्मसम्मान नहीं खोया। पूरे मार्च चलने वाली ‘नये बिहार के हीरो’ श्रृंखला में प्रस्तुत है आज की कड़ी-

 

सोच, नीति और कार्यकुशलता से विरोधियों को भी अपना मुरीद बना लेने की कला अगर अभी भारतीय राजनीति में किन्हीं के पास है तो उनमें से एक नाम बिहार के वर्तमान मुख्यमंत्री नीतीश कुमार का है । इसीलिए शायद उन्हें आधुनिक युग का चाणक्य कहा जाता है।

 

1 मार्च 1951 को नालंदा जिले के बख्तियारपुर के कल्याणबीघा गाँव में जन्में नीतीश कुमार कुल मिला कर पाँच बार बिहार प्रदेश के मुख्यमंत्री पद का भार संभाल चुके हैं और वर्तमान में भी मुख्यमंत्री के रूप में कार्यरत हैं।

बिहार और राष्ट्रीय राजनीति में नीतीश कुमार आज एक बड़ा नाम है। आइए जानते है नीतीश कुमार की पूरी कहानी . .

नीतीश का शुरुआती जीवन 
नीतीश का जन्म 1 मार्च 1951 को बिहार में नालंदा जिले के कल्यानबीघा गाँव में हुआ था। उनकी माँ परमेश्वरी देवी घरेलू महिला थीं,जबकि पिता कविराज राम लखन सिंह फ्रीडम फाइटर थे। घर में नीतीश को ‘मुन्ना’ के उपनाम से जाना जाता था। नीतीश ने बिहार कॉलेज ऑफ इंजीनियरिंग (अब एनआईटी पटना) से इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग में डिग्री हासिल की और कुछ समय तक बिहार स्टेट इलेक्ट्रिसिटी बोर्ड में काम भी किया। हालाँकि बाद में नौकरी छोड़कर पूरी तरह राजनीति में सक्रिय हो गए।

 

राजनीति में पहचान 

लालू प्रसाद यादव, मुलायम सिंह यादव और शरद यादव की तरह ही नी​तीश कुमार को भी उस समाजवादी आंदोलन से आगे बढ़ने का मौका मिला, जो भारत में लगी एकमात्र इमरजेंसी की वजह से पैदा हुआ था। कांग्रेस के विरोध में खड़ी जनता पार्टी के युवा नेताओं में नीतीश कुमार का नाम भी प्रमुखता से लिया जा सकता है। नीतीश ने अपने राजनीतिक जीवन की शुरूआत जनता पार्टी के कार्यकर्ता के तौर पर ही की। सन् 1977 में जब जनता दल अपने पूरे परवान पर थी, नी​तीश बाबू को विधानसभा चुनाव में हार का मूंह देखना पड़ा। 1980 के विधानसभा चुनाव मे भी हार ही उनके हिस्से में आई।

 

फिर पीछे मुड़कर नहीं देखा

लगातार दो बार हारने के बाद भी उनका आत्मविश्वास नहीं टूटा। लगातार काम करते रहे और आखिरकार 1985 में वे जीते। इस जीत के बाद उन्होंने कभी पीछे मुड़कर नहीं देखा और राजनीति में लगातार उनका कद बढ़ता चला गया। सन् 1990 के केन्द्रीय मंत्रीमण्डल में उन्हें कृषि राज्य मंत्री के तौर पर काम करने का मौका मिला।

 

जनता पार्टी की टूट से पूरे देश के समाजवादियों को झटका लगा और हरेक राज्य में ढेर सारे छोटे दलों का गठन होने लगा। लालू प्रसाद यादव ने राष्ट्रीय जनता दल बनाया तो नीतीश कुमार ने समता पार्टी का दामन थामा।

नीतीश कुमार ने केन्द्रीय मंत्रीमंडल में बतौर रेल मंत्री काम किया और राष्ट्रीय स्तर पर उनकी पहचान स्थापित हुई। 2000 में वे पहली बार बिहार के मुख्यमंत्री बने लेकिन उनका कार्यकाल महज सात दिन तक चल पाया। नवम्बर 2005 में उन्हें एक बार फिर पूर्ण बहुमत के साथ बिहार का मुख्यमंत्री बनने का मौका मिला। 2010 में एक बार फिर उन्होंने अपने बेहतरीन काम की वजह से जनता का जबरदस्त समर्थन हासिल किया और तीसरी बार बिहार के मुख्यमंत्री चुने गए। इस गठबंधन सरकार में शामिल भाजपा के साथ उनके मतभेद लगातार बढ़ते गए, जिसका एक प्रमुख कारण भाजपा के प्रधानमंत्री पद के प्रत्याशी नरेन्द्र मोदी का प्रखर विरोध था। गठबंधन टूट गया लेकिन सरकार चलती रही।

2014 में हुए लोकसभा के चुनावों में पार्टी की बुरी हार की वजह से उन्होंने एक बार फिर अपने पद से इस्तीफा दे दिया और जीतनराम मांझी बिहार के मुख्यमंत्री बने।

जीतनराम मांझी के साथ नी​तीश कुमार के मतभेद शुरूआत में ही सामने आने लगे और मतभेद इस कदर बढ़ गए कि पार्टी अपने ही मुख्यमंत्री के खिलाफ हो गई। बिहार में हुए चुनाव में राष्ट्रीय जनता दल के साथ गठबंधन करके उन्होंने हमेशा की तरह एक बार फिर अपने प्रतिद्वंदियों का चौंकाया। जनता ने एक बार फिर सुशासन बाबू को चुना। उनके द्वारा दिया गया नारा “बिहार में बहार है,नीतीश कुमार है” काफी मशहूर हुआ। तब से लेकर अब तक बिहार की कमान नीतीश कुमार के हाथ में है और आने वाले समय में उन्हें भारतीय प्रधानमंत्री के विकल्प के तौर पर भी देखा जा रहा है।

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