ऑपइंडिया ने फेक न्यूज़ फैलाया कि गोपालगंज में रोहित को एक मस्जिद में बलि दे दी

बिहार के डीजीपी गुप्तेश्वर पाण्डेय ने खुद जांच कर इस खबर को फेक साबित किया

गोपालगंज जिले के कटेया थाने के बेलही डीह गांव के राजेश जायसवाल के पुत्र रोहित कुमार का शव 29 मार्च को खनुआ नदी से में मिला। पुलिस ने शव को अपने कब्जे में लेकर उसके पोस्टमार्टम के लिए सदर अस्पताल में भेज दिया था। 28 मार्च को रोहित गांव के चार-पांच लड़कों के साथ खनुआ नदी में स्नान करने के लिए गया था मगर देर शाम हो जाने के बाद भी वह घर नहीं लौटा। इससे चिंतित उसके परिवार वाले रोहित की खोज शुरू की। रोहित के गायब होने के अगले दिन 29 मार्च को पता चला कि वह नदी में डूब गया है। वहीं, परिजनों ने छह लड़कों पर हत्या करने का आरोप लगाया था। पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए पांच आरोपितों को गिरफ्तार कर न्यायिक हिरासत में भेज दिया था।

इस मामले के लगभग 50 दिन बाद सोशल मिडिया पर तरह-तरह के दावे किये जाने लगे| अचानक सोशल मिडिया पर कुछ विडियो वायरल हुए जिसमें रोहित के पिता राजेश और बहन ने वीडियो के द्वारा लोगों से उनके लिए आवाज़ उठाने की माँग कि|  वायरल वीडियो में कटेया थानाध्यक्ष गाली-गलौज करते सुने जा रहे थे।

इस पूरे मामले को नफरत फ़ैलाने के लिए मशहूर प्रोपेगंडा पोर्टल ऑप इंडिया ने हिन्दू मुस्लिम रंग दे दिया| उन्होंने यह आधारहीन खबर प्रकाशित किया कि रोहित की हत्या स्थानीय मस्जिद में किया गया| मुसलमानों या मौलवियों ने मस्जिद की शक्ति बढ़ाने के लिए रोहित की बलि दे दी|

यही नहीं, यह भी दावा किया गया कि मुसलमानों के डर से गाँव के हिन्दू पलायन कर रहे हैं| मिडिया ने पहले ही हिन्दू-मुस्लिम का जहर समाज में फैलाया हुआ था| इस बात ने आग में घी का काम किया|

डीजीपी गुप्तेश्वर पाण्डेय ने इस खबर को फेक साबित किया

मामले के 50 दिन बाद भ्रामक जानकारियों के साथ इसको मामले को फिर से सोशल मिडिया पर वायरल होने के बाद बिहार पुलिस के डीजीपी ने इसे गंभीरता से लिया और खुद इस मामले के जांच में गोपालगंज के घटनास्थल पर पिछले कई दिनों से कैंप कर रहे थे| 19 मई को दीजीपी ने अपने यूटूब चैनल पर अपने पूरे जांच का विडियो शेयर किया|

तमाम गवाहों, स्थानीय लोग, पत्रकार और आरोपी के बयान इस विडियो में सामिल हैं| जांच के दौरान कही भी हिन्दू-मुस्लिम की बात नहीं आई| मस्जिद में बलि देने की बात को भी ग्रामीणों से लेकर सभी गवाहों ने झूठ कहा| ग्रामीणों ने तो यहाँ तक कहा कि उनको भी यह झूठी कहानी सोशल मिडिया से पता चला| गाँव में मात्र 15 परिवार ही मुस्लिम हैं, बहुजन आवादी भी हिन्दुओं की है| लोगों ने मुसलमान के डर से पलायन के बात को भी झूठ बताया|

रोहित की हत्या हुई या उसकी डूबने से मौत हुई इसका अभी जांच चल रहा है| हालांकि अभी तक उसके हत्या के पक्ष में एक भी सबूत नहीं मिले हैं| रोहित के परिजन हत्या के आरोप लगा रहे हैं मगर पोस्टमार्टम करने वाले डॉक्टर कहते हैं कि उसकी मौत डूबने से ही हुई थी| गुप्तेश्वर पाण्डेय ने कहा कि पुलिस हत्या की जांच कर रही है| हत्या से संबंधित सबूतों की ख़ोज हो रही मगर सोशल मिडिया पर जो खबर चल रही थी कि रोहित का मस्जिद में बलि दी गयी, वह पूरी तरह से झूठ है|

ऑपइंडिया ने मारी पलटी

इस फेक न्यूज़ को वायरल करने वाले सबसे बड़े सरगना ऑपइंडिया झूठा साबित होने के बाद पलटी मार गया है| हालांकि अपने खबर को अपडेट करते हुए उसने माफ़ी मांगी है मगर उसने समाज में नफरत फैलाकर जो नुकसान कराया है उसका भरपाई नहीं की जा सकती| उसने लिखा – “बिहार के डीजीपी की जॉंच के बाद हम सूचनाओं को अपडेट कर रहे हैं। पीड़ित पिता इस दौरान कई बार अपने बयान से मुकरे हैं। लिहाजा उनकी ओर से किए गए सांप्रदायिक दावों को हम हटा रहे हैं। हमारा मकसद किसी संप्रदाय की भावनाओं का आहत करना नहीं था। केवल पीड़ित पक्ष की बातें सामने रखना था। इस क्रम में किसी की भावनाओं को ठेस पहुॅंची हो तो हमे खेद है।”

ज्ञात हो कि ऑपइंडिया पर समाज में नफरत फैलाने का आरोप लगता रहता है| पत्रकारिता के नाम पर ये लोग समाज को तोड़ रहे हैं| जान बुझकर ये लोग फेक न्यूज़ चलाते हैं और पकडे जाने पर चुपके से माफ़ी मांग लेते हैं| ऐसे लोगों पर करवाई होनी चाहिए| इसने समाज को तोड़ने का कोशिश तो किया ही है, साथ में बिहार को भी बदनाम किया है|

 

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