लॉकडाउन के कारण खाने के लिये पैसे नहीं फिर भी नीतीश सरकार अपने शिक्षकों को 2 महीने से नहीं दे रही वेतन

कोरोना वायरस के कारण पूरे देश में ताला लगा है| सभी लोग अपने परिवार के साथ घर में बंद है| प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने संबोधित करते हुए कहा था कि ऐसे माहौल में छुट्टी करने पर कर्मचारियों का वेतन न काटने और स्वविवेक से निर्णय लें| यही नहीं सरकार गरीबों के लिए राहत पैकेज भी लेकर आई है और कर्मचारियों को अग्रिम वेतन देने की भी बात हो रही है मगर लगता है बिहार सरकार को प्रधानमंत्री के अपील का कोई फर्क नहीं पड़ा है|

बिहार के 4 लाख नियोजित शिक्षकों को इस संकट के घड़ी में अग्रिम वेतन तो छोड़िये, बिहार सरकार ने इनको अभी तक पिछले दो महीने का वेतन भी नहीं दिया है|

अब हालत यह है कि शिक्षकों के परिवार में वेतन न मिलने और लॉकडाउन होने के कारण भुखमरी तक की स्थिति का सामना करना पड़ सकता है| शिक्षक सरकार से लेकर राष्ट्रपत्ति तक मदद की गुहार लगा रही है मगर नीतीश सरकार के तरफ से कोई पहल नहीं की जा रही| बिहार के कई शिक्षक हर रोज हमें सन्देश लिख इस मामले को उठाने का निवेदन कर रहे हैं| शिक्षकों का आरोप है कि कि कार्यालय के सभी कर्मियों का वेतन तो ससमय मिल जाता है लेकिन शिक्षकों का वेतन पर ही बराबर ग्रहण लग जाता है। शिक्षकों के साथ सौतेला व्यवहार भी किया जा रहा है। इस तरह की कार्यशैली से शिक्षकों में काफी आक्रोश है।

ज्ञात हो कि बिहार के 4 लाख नियोजित शिक्षक नियमित शिक्षकों के समान वेतन की मांग को लेकर हड़ताल कर रहे हैं| 17 फरवरी से प्राथमिक व 25 फरवरी से माध्यमिक शिक्षक हड़ताल पर हैं|

शिक्षकों का आरोप है कि हरताल फरवरी में स्टार्ट हुआ मगर सरकार ने जनवरी से ही वेतन पर रोक लगायी हुई है| यही नहीं, हड़ताली शिक्षकों के साथ गैर-हड़ताली शिक्षकों का भी वेतन रोक दिया है|

कोरोना के कारण पूरे देश में सरकारें राहत पैकेज का घोषणा कर रही है| खुद बिहार सरकार ने सभी राशन कार्डधारी परिवारों को एक महीने का राशन मुफ्त देने की घोषणा की है| साथ ही वृद्धजन पेंशन, दिव्यांग पेंशन, विधवा पेंशन और वृद्धावस्‍था पेंशन के तहत सभी को तीन माह की पेंशन तत्काल अग्रिम तौर पर ही दी जाएगी| वहीं लॉकडाउन क्षेत्र के सभी नगर निकाय और प्रखंड मुख्यालय की पंचायत में सभी राशनकार्ड धारी परिवारों को एक हजार रुपये उनके खता में भेजा जायेगा 1 से 12वीं तक के सभी छात्रों को 31 मार्च तक छात्रवृति दे दी जाएगी और कोरोना से लड़ रहे डॉक्टरों और अन्य चिकित्साकर्मियों को एक माह का मूल वेतन अलग से प्रोत्साहन राशि के तौर पर देने का ऐलान किया है| तो सवाल है कि बिहार के इन 4 लाख शिक्षकों के ही साथ ये सौतेला व्यवहार क्यों?

चाहे जो भी मामला हो, इस समय मानवता के आधार पर ही सही बिहार के इन शिक्षकों को उनकी पूरी वेतन तत्काल तौर पर जारी कर देना चाहिए| वेतन न मिलने के कारण सिर्फ वे चार लाख शिक्षक नहीं प्रभावित हो रहे हैं, बल्कि उन लोगों पर निर्भर पूरा परिवार प्रभावित हो रहा है|

 

 

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