बिहार के पान बेचने वाले के बेटे ने जेईई मेंन में किया में किया टॉप, पूर्व डीजीपी ने की मदद

देश के प्रतिष्ठित इंजीनियरिंग कॉलेज में एडमिशन का रास्ता जेईई मेंन परिक्षा से होकर गुजरता है| जेईई मेंन के लिए देश भार में लाखों बच्चें तैयारी करते हैं| इसको लेकर इतना प्रतियोगिता है कि इस प्रवेश परिक्षा के तयारी के लिए देश भर में लाखों कोचिंग संस्थान चल रहे हैं| महंगे कोचिंग और बेहतासा प्रतिस्प्रधा के कारण गरीब परिवार से आने वाले छात्रों के लिए यह परिक्षा पास करना बहुत मुस्किल काम हो जाता है|

इस बार के जेईई मेंन परिक्षा का परिणाम आ चुका है| देश भर से चुनिंदा गरीब बच्चे द्वारा परिक्षा पास करने कि खबर आ रही है| ऐसी ही एक खबर बिहार से आ रही है| बिहार के शुभम चौरसिया जिन्‍होंने जेईई मेन परिक्षा पास किया बल्कि इसमें 99.56 प्रतिशत अंक हासिल किये हैं|

शुभम ने गरीबी और मुश्किलों का सामना कर यह कारनामा दिखाया। वह बिहार के गया में रहते हैं जहां उनके पिता शिव कुमार प्रसाद चौरसिया पान की एक छोटी सी दुकान चलाते हैं। शुभम के पिता के पास इतने पैसे नहीं थे कि वह शुभम को 10वीं कक्षा के बाद पढ़ा पाते। मगर उनकी शिक्षा को आगे बढ़ाने में गया के ही एक कोचिंग सेंटर मगध सुपर 30 का एक बड़ा योगदान था।

यह कोचिंग सेंटर पूर्व डीजीपी अभयानंद द्वारा शुरू किया गया था, जो गरीब बच्चों को प्रीमियर इंजीनियरिंग और मेडिकल संस्थानों में लाने में मदद करता है। द बेटर इंडिया को दिये एक इंटरव्‍यू के दौरान शुभम ने बताया कि ‘मेरे पिता एक सुपारी व्रिकेता हैं, जिन्होंने मुझे शिक्षित करने के लिए कई कठिनाइयों का सामना किया। जब मैंने 10 वीं कक्षा पूरी की, तब यह स्पष्ट हो गया कि वह मेरी शिक्षा को आगे बढ़ाने में सक्षम नहीं होंगे। मैंने आगे की पढ़ाई के लिये उम्मीद छोड़ दी थी। मगर मगध सुपर 30 में आने के बाद मेरी उम्‍मीद फिर से बंधी। मैंने इस कोचिंग में दो साल पढ़ाई की।

सुभम की कामयाबी काबिल-ए-तारीफ है मगर इसके साथ आज एक बात सोचने कि जरुरत है कि सुभम जैसे कितने बच्चें होंगे जिनके पास प्रतिभा तो है मगर संसाधन के आभाव में बहुत से अवसरों से वंचित रह जाते हैं| सबको तो अभयानंद जी जैसे लोग नहीं मिलते और न ही एक इंसान सबको सहारा दे सकता है| शिक्षा के साथ सामान अवसर उपलब्ध करवाना सरकार की जिम्मेदारी होती है| कोचिंग के रूप में शिक्षा का हो रहा व्यापारीकरण, सरकारी शिक्षा संस्थानों कि दुर्दशा और बढ़ती असमानता पर सरकार को ध्यान देना ही होगा|

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