बिहार के छपरा जिले में है एक “झांसी की रानी”, नाम है सोयल पांडेय।

झांसी की रानी के बारे में कौन नही जानता, सुभद्रा कुमारी चौहान की यह लाइन भी पढ़ी होगी, ‘बरछी ढाल, कृपाण, कटारी उसकी यही सहेली थी..।’

कुछ ऐसी हीं है छपरा की सोयल पांडेय। झांसी की रानी से थोड़ी अलग इसलिए हैं कि वह बरछी ढाल, कृपाण से नहीं अपने हाथ-पैर से मुकाबला करती हैं।

सोयल पांडेय की उम्र अभी सात साल है। और वह अपने से दोगुनी, तीन-गुनी उम्र की लड़कियों को मार्शल आर्ट की ट्रेनिंग देती हैं। छोटी सी उम्र में सोयल ने मार्शल आर्ट की कई प्रतियोगिताओं में गोल्ड मेडल जीत चुकी हैं। उन्हें ब्लैक बेल्ट हासिल हैं। राज्यस्तरीय प्रतियोगिता में चैंपियन रह चुकी है।

सोयल के पिता छपरा के गुदरी बाजार सलाफ्तगंज में धर्मेंद्र पांडेय ऑटो रिक्शा चलाते हैं। फिल्मों में देखती थी कि हीरोइन कैसे मार्शल आर्ट का इस्तेमाल कर बदमाशों को धूल चटा देती है। उन्हें भी शौक हुआ कि वह भी ऐसा ही बनेंगी।

पापा से बोलीं, मैं मार्शल आर्ट सीखूंगी, पापा ने मना कर दिया। छोटी बच्ची यह सब सीखे, वह नहीं चाहते थे। आर्थिक तंगी तो थी ही। सोयल जिद पर अड़ी रहीं, तो पिता मान गए। वह उसे मार्शल आर्ट के ट्रेनर अनिल कार्की के पास ले गए। कुछ ही दिनों में सोयल के कई सारे आर्ट सिख लिया।

सोयल जिस स्कूल में पढ़ती हैं, वहां भी बच्चों को मार्शल आर्ट की ट्रेनिंग देती है।

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