अब शराब माफियाओं की संपत्ति होगी नीलाम, गठजोड़ अफसर भी होंगे बर्खास्त

बिहार में पिछले वर्ष से पूर्ण शराबबंदी के लागू होने के बावजूद भी चोरी छिपे शराब का कारोबार किया जा रहा है।इससे रोकना सरकार और पुलिस प्रशासन की बङी जिम्मेदारी बन गई है।बिहार के हर क्षेत्र में हर दिन प्रशासन शराब पकड़ रही है।जिससे देखते हुए सरकार ने शराब माफियाओं के खिलाफ कठोर कार्रवाई का एेलान कर दिया है।सरकार ने अब शराब माफियाओं की संपत्ति नीलाम का फरमान जारी कर दिया है।साथ ही शराब माफिया के साथ गठजोड़ रखने वाले अफसरों को बर्खास्त किया जाएगा। जिस परिसर और वाहन में शराब मिलेगी, उसे भी नीलाम कर दिया जाएगा।

बुधवार को सरकारी छुट्टी के बावजूद मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने शाम 5 बजे सचिवालय पहुंच कर पूरे तीन घंटे तक जोनल आईजी, प्रमंडलीय आयुक्त, डीआईजी, डीएम और एसपी के साथ वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग की।इस दौरान मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य में बाहर से शराब लाने वाले, शराब का स्टोरेज करने वालों,बेचने वालों और पीने वालों के पूरे नेटवर्क को ध्वस्त करें साथ ही शराब माफिया से गठजोड़ करने वाले पर सीधा प्रहार होना चाहिए। बड़े-बड़े माफिया को पकड़िए, तब निचले स्तर पर खौफ कायम होगा जिसकी कोई रूटीन नहीं सीधे सख्त कार्रवाई  होनी चाहिए। इस मामले में किसी तरह की कोई शिथिलता नहीं चाहिए।जो संभव प्रयास हो किजिए बस किसी भी हाल में बिहार के अंदर शराब नहीं आनी चाहिए।लगातार  छापेमारी में कोई परहेज बर्दाश्त नहीं होगी। छापेमारी लगातार होनी चाहिए। जोनल आईजी सिर्फ समीक्षा नहीं करें, एक्शन भी लें। डीएम और एसपी हरेक सप्ताह उत्पाद अफसरों के साथ बैठक करके कार्रवाई की समीक्षा करें। वीडियो कांफ्रेंसिंग में मुख्य सचिव अंजनी कुमार सिंह, डीजीपी पी.के. ठाकुर, गृह विभाग के प्रधान सचिव आमिर सुबहानी, एडीजी आलोक राज, मुख्यमंत्री के प्रधान सचिव चंचल कुमार, पुलिस महानिरीक्षक जी.एस. गंगवार, मुख्यमंत्री के सचिव अतीश चन्द्रा और मनीष कुमार वर्मा मौजूद थे।

 

मुख्यमंत्री ने अफसरों से सीधा सवाल दागा कि यह चूहे के शराब पीने का क्या मामला है? आखिरकार शराब चूहा कैसे पी गया? आपलोगों को पता भी है कि इसे लेकर सोशल मीडिया पर बिहार की छवि कितनी खराब हुई है?

एक अपील पर 4 करोड़ लोगों ने घर से बाहर आकर मानव शृंखला बनाई। शराब का धंधा करने वाले तो मुट्ठी भर होंगे, उनका सफाया होना चाहिए। मुख्यमंत्री ने कहा कि शराब माफियाओं से मिले अफसर बख्शे नहीं जाएंगे। जिन थानेदारों के खिलाफ शिकायतें मिली हैं उन पर क्या कार्रवाई हुई? क्या आप लोगों को किसी ने रोका है? ऐसे थानेदारों और उत्पाद पदाधिकारियों को बर्खास्त करिए। यह समय रिसर्च का नहीं

है।

 

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