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खबरें बिहार की बिहारी वीर

उरी आतंकी हमले में शहीद हुए बिहार के जवानों के आश्रितों को राज्य सरकार देगी 5-5 लाख रुपए

उरी आतंकी हमले में शहीद हुए 17 जवानों के परिवार में आक्रोश भी है और नम आंखों के साथ सुलग रहे जज्बात भी. पूरा देश जहां शहीदों को श्रद्धांजलि दे रहा है, वहीं पाकिस्तान के नापाक इराकों के खि‍लाफ लोगों ने जुलूस भी निकाला. शहीदों के घरवालों ने सरकार से अपील की है कि इस बार जवानों की कुर्बानी बेकार न जाए.
बिहार के मुख्यमंत्री नीतिश कुमार ने आंतकी हमले की कड़ी निंदा की. साथ ही सीएम ने बिहार के शहीद हुए तीन जवानों के आश्रितों को 5-5 लाख रुपए मदद राशि के रूप में देने की घोषणा भी की।

ये हैं बिहार के तीन लाल जो कल उड़ी में हुए हमले में दुश्मनों से लोहा लेते-लेते शहीद हो गए।

गया के एस के विद्यार्थी

गया के परैया प्रखण्ड के बोकनारी गांव के शहीद सुनील कुमार विद्यार्थी की खबर के बाद पूरे गांव में गम का माहौल है। इस बीच उनके पिता और बेटी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से अपील की है कि सेना पर हमला करने वालों का मुंहतोड़ जवाब मिलना ही चाहिए।

शहीद सुनील कुमार विद्यार्थी के पिता मथुरा प्रसाद यादव ने सरकार से आर पार की लड़ाई लड़ने की अपील की है। उन्होंने कहा की बेटे की शहादत का गम है, लेकिन और कितने शहीद होंगे।

सुनील के शहीद होने की खबर से पूरा बोकनारी गांव उनके घर के बाहर जमा हो गया। सुनील 1999 में सेना में भर्ती हुआ था। उनकी पत्नी किरण देवी चार बच्चो आरती, अंशु, अंशिका और आर्यन के साथ गया के चंदौती में रहती हैं। रविवार की शाम उन्हें पति के शहीद होने की जानकारी श्रीनगर से दी

भोजपुर के अशोक कुमार सिंह

आतंकी हमले में शहीद होने वाले भारत मां के सपूतों में बिहार के भोजपुर जिले के पीरो गांव का एक लाल अशोक कुमार सिंह ने भी अपनी बलि दे दी।

मूल रूप से पीरो प्रखंड के जितौरा पंचायत अन्तर्गत रकटू गांव निवासी जगनारायण सिंह का यह लाडला 6 बिहार रेजिमेंट में हवलदार के पद पर कार्यरत था । जो फिलहाल जम्मू-कश्मीर में अपने अन्य साथियों के साथ आतंकवादियों से लोहा लेने के लिए तैनात किया गया था ।

42 वर्षीय अशोक बचपन से ही देशभक्ति की भावना से लबरेज थे । सन 1988 में 15 बिहार रेजिमेंट के बहादुर सिपाही अपने बड़े भाई कामता सिंह की शहादत के बाद अशोक की देशभक्ति और जोर मारने लगी, और वे भी 6 बिहार रेजिमेंट में बतौर सिपाही शामिल हो गए ।

इस दौरान अपनी मेहनत और लगन के बल पर अशोक ने हवलदार का पद हासिल किया और दिन रात बतौर सैनिक देश सेवा में लगे रहे । देश की सरहद पर तैनाती के दौरान कई बार उनका आतंकियों से सामना हुआ जिसमें उन्होंने पूरे साहस के साथ दुश्मनों को सबक सिखाया ।

सरहद की रक्षा की जिम्मेवारी संभालते हुए अपनी शहादत देने वाले अशोक पर आज पीरो वासी ही नहीं बल्कि पूरा देश गौरवान्वित महसूस कर रहा है । अपने चार भाइयों में अशोक तीसरे नंबर पर थे। बडे़ भाई कमता सिह के दो बेटे विनोद कुमार एवं ददन कुमार भी सेना में हैं जबकि अशोक का बडा बेटा विकास भी आर्मी में अपनी सेवा दे रहा है ।

कैमूर के राकेश सिंह

बिहार के कैमूर जिले के नुआंव थाना क्षेत्र के राकेश सिंह भी अपने पीछे दो साल का बेटा हर्षि‍त छोड़ गए हैं. मासूम की आंखें जहां अपने पिता को ढूंढ़ रही हैं, वहीं पत्नी का रो-रोकर बुरा हाल है. 2008 में सेना में भर्ती हुए राकेश का शुक्रवार के बाद से ही परिवार वालों से संपर्क नहीं हुआ है. साल 2012 में उनकी शादी हुई थी. राकेश चार भाई थे, जिनमें से एक ही पहले ही किसी बीमारी के कारण मौत हो गई है. जबकि दो भाई खेती पर निर्भर हैं.

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