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राजनीति: बिहार रालोसपा में महा संग्राम चल रहा है!

पटना: 2 साल पहले 2014 के लोकसभा चुनाव में तीन सीटों पर चुनाव लड़ और तीनों सीटों को जीत बिहार के राजनीति में अपने शानदार आगाज के साथ बिहार के राजनीति के केंद्रबिंदु में आए राष्ट्रीय लोक समता पार्टी और केंद्रीय मानव संसाधन राज्य मंत्री श्री उपेंद्र कुशवाहा की पार्टी में महा संग्राम मचा हुआ है। 

रालोसपा पार्टी के ही जहानाबाद के सांसद और हाल तक प्रदेश अध्यक्ष रहे श्री अरूण कुमार पार्टी में बगाबत का झंडा बुलंद किये है और पार्टी दो फार दिख रही है।  ज्ञात हो कि अरूण कुमार वही नेता है जो विधानसभा चुनाव में नीतीश कुमार का छाती तोड़ देने की बात कही थी, ये बिहार में  दबंग  नेता वाली छवि  रखते हैं !

राष्ट्रीय अध्यक्ष श्री उपेंद्र कुशवाहा द्वारा बिहार इकाई भंग कर देने के बाद केन्द्रीय नेतृत्व और बिहार इकाई में आरपार की लड़ाई छिड़ चुकी है। कार्यकर्ता जातिगत आधार पर दो गुटों में बट चुके हैं। श्री उपेंद्र कुशवाहा और डॉक्टर अरुण कुमार के बीच आमने-सामने की लड़ाई छिड़ चुकी है और दोनों ओर से एक-दूसरे को औकात बताने की तैयारी की जा चुकी है।

कुशवाहा की ओर से पार्टी की बिहार इकाई को भंग किए जाने के एक दिन बाद कुमार ने पार्टी अध्यक्ष पर यह हमला बोला,  पार्टी अध्यक्ष एवं केंद्रीय मंत्री उपेंद्र कुशवाहा पर अलोकतांत्रिक और निरंकुश तरीके से संगठन चलाने का आरोप लगाया और साथ ही हवाला करोबारी के साथ रिस्ता होने का भी संगीन आरोप लगा दिया और अरूण समर्थकों ने पीएम को खत लिख उपेंद्र कुशवाहा का विदेशों में काला धन होने की भी आरोप लगाया है।

वही दुसरे तरफ से कुशवाहा समर्थक के तरफ से भी अरुण कुमार पर बहुत ही गंभीर एवं संगीन आरोप लगाय गये है। सोशल मिडिया में वायरल एक पत्र में अरुण कुमार को रणवीर सेना का ऐजेंट, घोर जातिवादी, सामंतवादी एवं दिल्ली में सांसद और मंत्रियों से लोगों व कंपनियों के लिये दलाली करने का संगीन आरोप लगाया है और यह भी कहा जा रहा है कि अरूण कुमार की देशभर में व विभिन्न संस्थाओं में काफी पैसे लगे है।

अरुण कुमार के बुलावे पर पूरे राज्य से कार्यकर्ता पटना पहुंचे थे। हालांकि कार्यकर्ताओं की संख्या अपेक्षा से कम थी लेकिन हर जिले का प्रतिनिधित्व था। कार्यकर्ताओं में पार्टी को बचाने की बेचैनी भी दिखी। अरुण कुमार को भी सुझाव दिए गए कि पीछे हटने का फायदा नहीं है।
उधर बाद में अरुण कुमार ने कहा कि कुशवाहा को 15 दिन का समय दिया गया है। पार्टी को सबने अपने खून-पसीने से सींचा है। अध्यक्ष को कार्यकर्ताओं के मुद्दों पर भी ध्यान देना होगा।

पटना में अरुण कुमार के समर्थकों की बैठक पर उपेंद्र कुशवाहा के समर्थकों की भी नजरें थीं। इस बीच खबर है कि केंद्र में मंत्री पद से कई लोगों की छुट्टी की चर्चा के बीच उपेंद्र कुशवाहा को भी उनके समर्थकों की ओर से साफ कह दिया गया है कि विवाद बढ़ा तो दिल्ली में कमजोर हो जाएंगे।

पार्टी के अंदरूनी सूत्रों के मुताबिक लोकसभा व विधानसभा में संख्याबल में कमी के कारण कोई भी पक्ष एकदम आगे बढ़कर दो टूक निर्णय लेने की स्थिति में नहीं है। एनडीए का घटक दल होने के कारण पार्टी पर विवाद को खत्म करने का दबाव भी है। अरुण कुमार के समर्थक जानते हैं कि अब विवाद बढ़ा तो नुकसान उपेंद्र कुशवाहा को भी हो सकता है।

 

 

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