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कर्नाटक सरकार मजदूरों को बंधक बनाने की कोशिश की, विरोध के बाद पलटना पड़ा फैसला

कर्नाटक सरकार ने मजदूरों को श्रमिक स्पेशल ट्रेन से अपने घर जाने पर लगा दिया था रोक

देश में जब लॉकडाउन लगा, सारा कारोबार बंद हो गयें, कारखाना में काम बंद हो गया और इस सब के कारण बिहार के लाखों मजदूर बेरोजगार हो गयें| रोज कमाकर रात के खाने का इंतजाम करने वाले मजदूरों के सामने भूख से मरने की स्थिति आ गयी| वापस अपने गाँव लौटने के लिए साधन नहीं था और न ही राज्य सरकार उनके मदद के लिए आगे आई और न वो कंपनी उनकी मदद की जिसके यहाँ ये लोग काम करते थे| ‘

स्थिति की किस स्तर तक पहुँच गयी इसका अंदाजा इससे लगा लीजिये कि मजदूर परेसान होकर साइकिल और पैदल ही हजारों किलोमीटर दूर अपने गाँव के लिए निकल गए|

जब इन गरीब मजदूर को रोकना चाहिए था, इनको जब मदद और सहारा की जरुरत थी तब इन्हें बेसहारा मरने को छोड़ दिया| अब जब केंद्र सरकार ने इनके लिए स्पेशल ट्रेन से चलाकर, गाँव पहुंचा रही है, उसके साथ कारखाना में फिर से भी काम शुरू हो रहा| तब कर्नाटका राज्य अपने बड़े कारोबारियों के साथ मिलकर इनको घर जाने पर रूक लगा दिया था मगर भारी विरोध के बाद कर्नाटक सरकार को अपना फैसला बदलना पड़ा| पिछले फैसले को पलटते हुए राज्य में फंसे प्रवासी कामगारों को शुक्रवार से उनके मूल स्थानों तक भेजने के लिए श्रमिक स्पेशल ट्रेनें चलाने का निर्णय किया है और इसके लिए संबंधित राज्यों से सहमति मांगी है।

मजदूरों के अधिकारों का उठा था मामला

बिहार के मजदूरों को घर आने से जबरदस्ती रोकना न सिर्फ उनके स्वतंत्रा का हनन है बल्कि यह उनके मानव अधिकारों का भी हनन है| जो मजदूर खुद से रुकना चाहते हैं वो खुद से यह फैसला ले सकते हैं मगर जो अपने घर लौटना चाहते हैं उनको घर जाने से नहीं रोका जाना चाहिए|

कर्नाटक सरकार के इस फैसला का कड़ा विरोध करते हुए बिहार के नेता प्रतिपक्ष ने तेजस्वी यादव ने कहा, “कर्नाटक की भाजपा सरकार (BJP Government) बिहार के आप्रवासी कामगारों को अपना दास न समझे। मुख्‍यमंत्री (CM) नीतीश कुमार (Nitish Kumar) से इस मामले में हस्‍तक्षेप करें|”

तेजस्वी ने इसे बिहारियों का अपमान बताया है| उन्होंने आगे कहा, “बिहारियों को बंधुआ मजदूर (Bonded labourers) मानने की प्रवृत्ति बर्दाश्त के बाहर है।

कर्नाटक के मुख्‍यमंत्री से मिलकर वहां के उद्योगपतियों (Industrialists) ने बिहारी कामगारों की वापसी पर रोक लगवा दी है। यह बिहारी कामगारों के मानवाधिकार (Human Rights) का उल्लंघन है। कोई भी सरकार महामारी (Epidemic) के दौर में बुनियादी सहानुभूति को धता बताते हुए कामगारों को जबरन रोकने और बंधक बनाने का हुक्म जारी नहीं कर सकती है।” कर्नाटक सरकार के इस फैसले के बाद बाम दल ने भी करा विरोध जताया है| उन्होंने ने इस फैसले को जल्द से जल्द वापस लेने को कहा है|

हालांकि तेलंगाना सरकार ने कर्नाटक सरकार के उलट लॉकडाउन के दौरान भी बिहार के मजदूरों रुकने की अपील किया था और उनको मदद देने का आश्वासन भी दिया था|


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