लालू यादव के 22 ठिकानों पर आयकर विभाग का छापा, खतरे में है महागठबंधन !

लालू यादव के दिल्‍ली, गुड़गांव समेत 22 ठिकानों पर आयकर विभाग ने छापा मारा है. पीटीआई के मुताबिक सूत्रों के मुताबिक 1000 करोड़ की बेनामी लैंड डील मामले में यह छापेमारी की गई है. इसके साथ राजद नेता और लालू के करीबी प्रेम चंद गुप्‍ता के ठिकानों पर भी छापे मारे गए हैं. यह छापेमारी ऐसे वक्‍त हुई है जब हाल ही में बिहार बीजेपी के नेता सुशील कुमार मोदी ने लालू यादव और उनके परिवार पर जमीन घोटाले के आरोप लगाए.

 

इस मसले पर प्रतिक्रिया देते हुए सुशील कुमार मोदी ने कहा कि नीतीश जी की मांग पर ही अब लालू के खिलाफ छापे पड़ रहे हैं. उल्‍लेखनीय है कि राजद अध्यक्ष लालू प्रसाद यादव की संपत्ति मामले में सोमवार को बिहार के मुख्यमंत्री, नीतीश कुमार ने दोटूक शब्दों में बीजेपी नेता सुशील मोदी को सलाह दी थी कि अगर उनके आरोपों में तथ्य है तो वे जांच करा लें. पिछले एक महीने से राजद अध्यक्ष लालू यादव और उनके परिवार के सदस्यों पर अपने पद का दुरुपयोग कर संपत्ति अर्जित करने के आरोप लगते रहे हैं. इस मामले में नीतीश कुमार ने पहली बार बयान दिया था. उसी परिप्रेक्ष्‍य में सुशील मोदी ने यह बात कही.

 

बिहार की सियासत बदलेंगे ये छापे?

 

पहले से ही इन मामलों को लेकर बिहार की सियासत काफी गरम है. बीजेपी नेता सुशील मोदी की तरफ से किए जा रहे खुलासे के बाद लालू पहले से ही बैकफुट पर थे. लालू यादव और उनके परिवार के लोगों पर इस बात का आरोप था कि बिहार में 7.5 एकड़ में बन रहे सबसे बड़े मॉल में भी घोटाला हुआ था और गलत तरीके से लालू के परिवार वालों की संपत्ति में हिस्सेदारी मिली थी.

 

अब इस छापेमारी से लालू और उनके परिवार की मुश्किलें बढ़ सकती हैं. खास तौर से लालू की पहले से ही खराब छवि पर और अधिक असर पड़ेगा. बिहार में नीतीश कुमार के साथ मिलकर सरकार चला रही आरजेडी को भी इस बात का एहसास है कि इस वक्त पार्टी के मुखिया के भ्रष्टाचार के मामले में घिरने पर उसकी हालत फिर कमजोर हो सकती है.

 

आरजेडी नेता रघुवंश प्रसाद सिंह ने तो इस इनकम टैक्स विभाग की छापेमारी के बाद कहा है कि बीजेपी इस वक्त घबराहट में लालू यादव पर इस तरह कारवाई कर रही है. लेकिन, इससे हम डरने वाले नहीं हैं.

हालांकि, बीजेपी की तरफ से इस पूरे मामले में मोर्चा संभाल रहे सुशील मोदी का कहना है कि मुख्यमंत्री नीतीश कुमार इस बारे में कोई कारवाई नहीं कर पाए.

 

एक बात साफ है कि इस कारवाई के बाद लालू यादव चौतरफा घिर गए हैं. लालू यादव के दोनों बेटों- उपमुख्यमंत्री तेजस्वी यादव और मंत्री तेजप्रताप यादव- और राज्यसभा सांसद बेटी मीसा भारती पर गलत तरीके से संपत्ति बनाने का आरोप है. दिल्ली और आसपास के इलाके में संपत्ति बनाने के मामले में लालू के पते का ही इस्तेमाल किया गया था.

 

इसके पहले चारा घोटाले के मामले में सुप्रीम कोर्ट से भी लालू यादव को बड़ा झटका लग चुका है. लालू यादव के खिलाफ अलग-अलग मामलों में अब अलग-अलग सुनवाई होगी.

 

नीतीश के हाथ मजबूत

 

आरोपों के चक्रव्यूह में फंसे लालू यादव और उनकी पार्टी नेताओं की तरफ से भले ही बीजेपी पर वार किए जा रहे हों. लेकिन इतना तो तय है कि मुख्यमंत्री नीतीश कुमार पर बना लालू का दवाब अब पूरी तरह से खत्म हो जाएगा.

 

कमजोर होते लालू, नीतीश को मजबूत करते नजर आएंगे. गठबंधन के तमाम अंतरविरोधों के बावजूद लालू हर हाल में नीतीश कुमार के नेतृत्व को पहले की तरह ही आगे मानने पर मजबूर होंगे.

 

बीजेपी नेता सुशील मोदी ने मुख्यमंत्री नीतीश कुमार पर आरोप लगाते हुए कहा कि वो चाहते हैं कि सांप भी मर जाए और लाठी भी न टूटे. मतलब साफ है कि इस कारवाई को नीतीश कुमार केंद्र की कारवाई बताकर अपना पल्ला झाड़ लेंगे जबकि, दूसरी तरफ लालू के पास नीतीश के सामने दंडवत होने के अलावा कोई और चारा न होगा.

 

हालांकि सवाल नीतीश कुमार पर भी खड़े होंगे- क्या नीतीश कुमार लालू के इस पूरे मामले में चुप्पी साधेंगे या फिर लालू के खिलाफ कारवाई भी करके दिखाएंगे? इस पूरे मामले में नीतीश की चुप्पी उनकी छवि पर भी सवालिया निशान लगा देगी.

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