बिहार राज्य का अबतक का सबसे बड़ा बजट आज होगा पेश. कृषि, स्वास्थ्य और शिक्षा पर रहेगा जोर

​बिहार राज्य का बजट 27 फरवरी (सोमवार) को विधानमंडल में पेश होने जा रहा है. इस बार का बजट कई मायने में बेहद महत्वपूर्ण होगा. डेढ़ लाख करोड़ का बजट पहली बार राज्य सरकार पेश करने जा रही है. वित्तीय वर्ष 2017-18 का बजट एक लाख 55 हजार करोड़ से ज्यादा और एक लाख 60 हजार करोड़ से कम का होगा जो चालू वित्तीय वर्ष 2016-17 के एक लाख 41 हजार करोड़ से 10-12 फीसदी ज्यादा के होने का अनुमान है. 

इसके अलावा नये बजट में पहली बार योजना और गैर-योजना आकार का अंतर समाप्त हो जायेगा. अब नये बजट में सभी योजनाएं के लिए पैसे ‘कैपिटल एक्सपेंडिचर’ के रूप में आवंटित किये जायेंगे. राज्य में योजना आकार जैसी बात देखने को नहीं मिलेगी. इसी तरह वेतन, पेंशन समेत अन्य गैर-योजनागत खर्चों को ‘कमिटेड एक्सपेंडिचर’ के रूप में दिखाया जायेगा. यह बदलाव केंद्र के निर्देश के बाद किया जा रहा है. केंद्र सरकार ने ही योजना और गैर-योजना आकार का अंतर समाप्त कर दिया है. 
सात निश्चयों से लेकर कई योजनाओं को 2016-17 के बजट में रखा गया था. योजनाओं को राज्य सरकार धरातल पर उतारने का काम कर रही है. योजनाओं पर डाल रहे हैं एक नजर.

 

 राज्य में नवंबर, 2015 में महागंठबंधन की सरकार बनी. चुनाव से पहले ही कई वादे किये गये थे. उन वादों को सरकार ने 2016 के बजट में अपनी कार्ययोजना में डाला. सात निश्चयों से लेकर कई योजनाओं को 2016-17 के बजट में रखा गया. योजनाओं को राज्य सरकार ने धरातल पर उतारने का काम कर रही है. सात निश्चयों के तहत शिक्षा विभाग को बिहार स्टूडेंट क्रेडिट कार्ड योजना की शुरुआत करने की जिम्मेवारी दी गयी. 

 

इस योजना की शुरुआत 02 अक्तूबर, 2016 को गांधी जयंती पर की गयी. 12वीं पास 25 साल से नीचे के वैसे छात्र-छात्राएं, जो आगे की पढ़ाई जारी रखना चाहते हैं, उन्हें चार लाख रुपये तक का ऋण दिया जा रहा है. सत्र 2016-17 के लिए सरकार ने पांच लाख छात्र-छात्राओं को स्टूडेंट क्रेडिट कार्ड योजना का लाभ देने का लक्ष्य रखा है. लेकिन, अब तक 6,351 आवेदन आये. इसमें से 668 छात्र-छात्राओं को स्टूडेंट क्रेडिट कार्ड योजना के तहत ऋण उपलब्ध कराने के लिए बैंकों के पास आवेदन स्वीकृत कर भेजा गया है और 60 को अब तक इसका लाभ दे दिया गया है. वहीं, स्वयं सहायता भत्ता के तहत 2.50 लाख आवेदन आये. जिसमें 19 हजार छात्र-छात्राओं को इसका लाभ दिया गया है. इसमें छात्रों को रोजगार तलाशने के लिए 1000 रुपये प्रति माह दिया जा रहा है. इसके अलावे कुशल युवा कार्यक्रम के तहत 54,304 आवेदन आये. 

15-25 आयु वर्ग के एेसे 23 हजार छात्र-छात्राओं को हिंदी-अंगरेजी बोलने, कंप्टूयर का ज्ञान 200 केंद्रों के जरिये दिये जा रहे हैं. 

 

बिजली : हर घर बिजली पहुंचाने की घोषणा पर अमल की शुरुआत भी सरकार ने कर दी है. सरकार ने इसके लिए राज्य भर में सर्वे कराया है और 50 लाख घरों में अगले दो सालों में बिजली पहुंचाने का लक्ष्य है. पहले साल जहां 20 लाख घरों में नि:शुल्क बिजली कनेक्शन देनी है. वहीं, अगले वित्तीय वर्ष में 30 लाख घरों में बिजली पहुंचा दी जायेगी.  

 

ग्रामीण कार्य विभाग : हर घर पक्की नाली-गली बनाने की प्रक्रिया भी शुरू हो गयी है. इसमें 4000 किलोमीटर गली का निर्माण करना है. 100 से कम आबादी वाले इलाके की सड़कों का निर्माण पंचायत करेगी. वहीं, 100-250 की आबादीवाले सड़क का निर्माण ग्राम सड़क संपर्क योजना के तहत होगा. 250 से ज्यादा आबादी वाले इलाके में भी सड़कें बनेंगी.  

 

विज्ञान व प्रावैधिकी विभाग: सात निश्चयों के तहत राज्य के हर जिले में एक-एक इंजीनियरिंग कॉलेज खोले जाने हैं. राज्य में पहले से सात सरकारी  इंजीनियरिंग कॉलेज थे. इस वित्तीय वर्ष में छह नये इंजीनियरिंग कॉलेज खोले गये हैं. इस साल  राष्ट्रकवि रामधारी सिंह दिनकर इंजीनियरिंग कॉलेज बेगूसराय, बीपी मंडल  इंजीनियरिंग कॉलेज मधेपुरा, कटिहार इंजीनियरिंग कॉलेज, सीतामढ़ी,  इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी, शेरशाह इंजीनियरिंग कॉलेज, सासाराम और  बख्तियारपुर इंजीनियरिंग कॉलेज खोले गये हैं.

 

ये छह नये इंजीनियरिंग कॉलेज चल रहे हैं. सात पॉलिटेक्निक संस्थानों की भी स्थापना की गयी है. 

 

घोषणा और उपलब्धि 

  •   पटना में आइटी पार्क बनाने की घोषणा 
  •   छह नये इंजीनियरिंग कॉलेज व सात पॉलिटेक्निक कॉलेजों की हुई स्थापना –  2017-18 में आठ नये इंजीनियरिंग कॉलेज की स्थापना का है प्रस्ताव
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  • इंजीनियरिंग कॉलेजों में प्राचार्यों की हुई नियुक्ति 

 

घोषणाएं 

 

  • 12वीं पास छात्र-छात्राओं को बिहार स्टूडेंट क्रेडिट कार्ड देने की योजना
  • नौकरी की तलाश के लिए स्वयं सहायता भत्ता देने की योजना
  • हिंदी-अंगरेजी बोलने की ट्रेनिंग और कंप्यूटर ज्ञान के लिए कुशल युवा कार्यक्रम 
  • राज्य के हर प्रमंडल में विश्वविद्यालयों की स्थापना
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  • उपलब्धियां
  •  
  • 02 अक्तूबर, 2016 से बिहार स्टूडेंट क्रेडिट कार्ड योजना शुरू, 60 लोगों को मिल चुका है लाभ
  • 19,000 छात्र-छात्राओं को स्वयं सहायता योजना के तहत मिल रहे हर माह एक हजार रुपये
  • 200 केंद्रों में कुशल युवा कार्यक्रम के तहत 23 हजार युवाओं को दी जा रही ट्रेनिंग
  • मगध विवि का बंटवारा कर पाटलिपुत्र विवि की स्थापना को मंजूरी
  • बीएन मंडल विवि का बंटवारा कर पूर्णिया विवि बनाने की मंजूरी
  • तिलका मांझी विवि का बंटवारा कर मुंगेर विवि बनाने की मंजूरी
  •  
  • स्वास्थ्य सेवाओं में सुधार का किया गया प्रयास
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राज्य सरकार की ओर से स्वास्थ्य सेवा में गुणात्मक सुधार के लिए संरचना के विकास को लेकर घोषणा की गयी थी. अवसर बढ़े, आगे पढ़े योजना के तहत सरकार ने घोषणा की थी कि राज्य के सामाजिक उत्थान में युवाओं का योगदान, उच्च शिक्षा के विकास व कुशल कामगारों की आपूर्ति के पक्ष को मजबूत करने के लिए हर जिले में जीएनएम संस्थान, पैरा मेडिकल संस्थान, सभी मे

अवसर बढ़े, आगे पढ़े योजना के तहत सरकार ने घोषणा की थी कि राज्य के सामाजिक उत्थान में युवाओं का योगदान, उच्च शिक्षा के विकास व कुशल कामगारों की आपूर्ति के पक्ष को मजबूत करने के लिए हर जिले में जीएनएम संस्थान, पैरा मेडिकल संस्थान, सभी मेडिकल काॅलेजों में नर्सिंग काॅलेज की स्थापना की जायेगी. प्रत्येक अनुमंडल में एक एएनएम स्कूल के साथ-साथ पांच नये मेडिकल काॅलेज अस्पतालों की स्थापना बेगूसराय, वैशाली, सीतामढ़ी, भोजपुर और मधुबनी में की जायेगी. 

 

चुनौतियां

 

बिहार चिकित्सा सेवाएं व आधारभूत संरचना निगम लिमिटेड (बीएमएसआइसीएल) की ओर से राज्य की स्वास्थ्य संरचनाओं के निर्माण की जिम्मेवारी दी गयी है. दवाओं की खरीद में होनेवाली अनियमितता को देखते हुए यहां पर खरीद का काम पूरी तरह से ठप पड़ गया था. एमडी के पद पर प्रधान सचिव को बैठाया गया था. साथ ही यहां पर जिन पदाधिकारियों को पदस्थापित किया गया, उनकी रुचि काम में नहीं रही. अब यहां पर स्थायी एमडी की नियुक्ति की जा चुकी है. योजनाओं को मृर्त रूप देने की दिशा में प्रयास जारी है. 

 

नगर विकास व आवास विभाग

 

घोषणाएंं 

 

नगर विकास व आवास विभाग की ओर से पिछले साल सात निश्चयों के तहत हर घर नल का जल, हर घर शौचालय और पक्की नाली-गली की योजनाओं का निर्माण  किया जाना है. 

  •  गंगा तट के मोकामा, बाढ़, बख्तियारपुर, फतुहा, बड़हिया, लखीसराय व बिहारशरीफ में सीवरेज नेटवर्क तैयार किया जाना. 
  • पटना में वेस्ट-टू-इनर्जी योजना को चालू करना
  • छोटे शहरों में वेस्ट-टू-कंपोस्ट योजना को चालू करना
  •  

उपलब्धियां

  •  
  • हर घर नल, हर घर शौचालय और पक्की नाली-गली की योजना की राशि आवंटित
  •  इ-टेंडर से काम का एलाॅटमेंट जारी 
  • गंगा तट के शहरों का सीवरेज नेटवर्क का काम अधर में
  •  पटना में वेस्ट-टू-इनर्जी का काम नहीं हुआ
  • छोटे शहरों में वेस्ट-टू-कंपोस्ट योजना नहीं हुई शुरू 

चुनौतियां 

 

नगर विकास व आवास विभाग में सभी स्तर पर पदाधिकारियों और कर्मचारियों की भारी कमी है. योजनाओं को पूरा करने के लिए आवश्यक कर्मियों की नियुक्त नहीं की जा रही है. हर घर शौचालय योजना का काम तेजी से आगे बढ़ा है, पर सामुदायिक शौचालय की योजना में बड़ी बाधा जमीन की उपलब्धता बनी हुई है. शहरों में सामुदायिक शौचालय के लिए जमीन नहीं है. सामुदायिक शौचालय निर्माण के बाद हर परिवार को एक शौचालय की चाबी सौंपी जानी है. 

 

पंचायती राज विभाग 

 

पंचायती राज विभाग की ओर से ग्रामीण क्षेत्रों में हर घर नल का जल और पक्की गली नालियों का निर्माण किया जाना है. इसके तहत इस वित्तीय वर्ष में राज्य के हर पंचायतों को 20 फीसदी वार्डों में योजना को अमल में लाया जाना है. करीब 27 हजार वार्डों में इस योजना को जमीन पर उतारना है. राज्य के हर वार्ड के लिए वार्ड विकास समिति का गठन किया जा चुका है. इन योजनाओं को पूरा करने के लिए 14वें वित्त आयोग और पांचवें राज्य वित्त आयोग  की राशि का उपयोग किया जाना है. 

 

उपलब्धियां

 

सभी वार्डों में वार्ड विकास समिति का गठन किया जा चुका है. 14वें वित्त आयोग की राशि जारी की जा चुकी है. इस दिशा में माॅडल प्राक्कलन भी तैयार किया जा चुका है. पुरानी राशि से योजनाओं पर धीमा अमल भी किया जा रहा है. 

चुनौतियां

 

अभी तक इस योजना ने रफ्तार नहीं पकड़ी है. इसके लिए पंचायतों को पंचम वित्त आयोग की राशि नहीं दी गयी है. योजनाओं को अमल में लाने में कर्मियों की कमी है. 

 

ग्रामीण विकास विभाग

 

ग्रामीण विकास विभाग के पास लोहिया स्वच्छता मिशन के तहत हर घर शौचालयों का निर्माण कराया जाना है. साथ ही प्रधानमंत्री योजना आवास योजना के साथ पुराने व अधूरे इंदिरा आवासों को पूर्ण कराना हैं. इस वित्तीय वर्ष में पांच लाख शौचालयो के निर्माण का लक्ष्य रखा गया है. विभाग की योजना है कि 2019 तक सभी पंचायतों, प्रखंडों और जिलाें को खुले में शौच से मुक्त कर देना हैं. 

 

उपलब्धियां

 

प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत राज्य में लाभुकों का चयन किया जा चुका है. वार्ड सभा की ओर से इसे अनुशंसित भी किया जा चुका है. लाभुकों को पहली किस्त के रूप में राशि देने की अंतिम प्रक्रिया पूरी की जा रही है. इस वित्तीय वर्ष में राज्य के पांच लाख आवासों की स्वीकृति दी गयी है. उधर पुराने इंदिरा आवासों के निर्माण में प्रगति आयी है. प्रतिदिन 5500 इंदिरा आवासों के निर्माण का कार्य पूरा किया जा रहा है. लोहिया स्वच्छता मिशन के तहत शौचालयों का निर्माण तेज गति से किया जा रहा है. अभी तक राज्य में एक अनुमंडल, नौ प्रखंडों और 204 पंचायतों को खुले में शौच से मुक्त किया जा सका है. राज्य में अभी तक कुल चार लाख, 37 हजार व्यक्तिगत शौचालयों का निर्माण कराया जा चुका है. 

 चुनौतियां

 इस वर्ष निर्धारित पांच लाख नये प्रधानमंत्री आवास योजना का निर्माण कराया जाना है. हर साल आवासों के निर्माण का कार्य अधूरा रह जाता है. उचित माॅनीटरिंग की वजह से निर्माण कार्य धीमा है. साथ ही शौचालय निर्माण के बाद व्यवहार में परिवर्तन के लिए अभियान चलाने की आवश्यकता होगी. 

 

घोषणाएं

 

  • पुराने छह मेडिकल काॅलेजों में 10 बेडों के पोषण पुनर्वास केंद्र की स्थापना
  • 10 नये एएनएम और 10 नये जीएनएम स्कूल की स्थापना
  • छपरा, समस्तीपुर और पूर्णिया में तीन नये मेडिकल काॅलेजों की स्थापना की स्वीकृति
  • पांच नये मेडिकल काॅलेज बेगूसराय, वैशाली, सीतामढ़ी, भोजपुर व मधुबनी में बनेगा 
  • सभी जिला अस्पतालों में नेत्र रोग व त्वचा रोग का ओपीडी शुरू करन
  • सभी जिला अस्पतालों में आइसीयू की स्थापना
  • सभी जिलों में फिजियोथेरेपी यूनिट की स्थापना 
  • सभी जिलों में डायलिसिस, एमआरआइ व सिटी स्कैन की सुविधा उपलब्ध कराना
  • 54 एएनएम, 23 जीएनएम, 33 पारा मेडिकल संस्थान व 16 बीएससी नर्सिंग काॅलेज का निर्माण पांच वर्षों में.  

उपलब्धियां

 

  • अधिकतर  योजनाओं के लिए जमीन मिल चुकी है. 
  • योजना पूरी करने के लिए टेंडर जारी किया जा चुका है 
  • डीपीआर का काम किया जा रहा है. 
  • फिजियोथेरेपी यूनिट की स्थापना नहीं हो सका है
  • नेत्र रोग व त्वचा रोग के ओपीडी की शुरुआत नहीं हुई है.
  • आइसीयू की स्थापना नहीं की जा सकी है
  • 17 जिलों में पहले से ही डायलिसिस पीपीपी मोड में चल रहा है
  • किसी भी जिला अस्पतालों में सिटी स्कैन की स्थापना नहीं हुई 
  • पांच घंटे में पहुंचने के लक्ष्य पर हो रहा काम 

पटना : राज्य के किसी भी कोने से छह घंटे में पटना पहुंचने के लक्ष्य को पूरा करने के बाद अब पांच घंटे के लक्ष्य पर विभाग काम कर रहा है. इसके तहत स्टेट हाइवे के अलावे जिला सड़कों के चौड़ीकरण पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है.  ताकि, आवागमन सुलभ हो सके.  इसके अलावा दूरियां कम करने के लिए पुलों का निर्माण भी तेजी से हुआ है. चालू वित्तीय वर्ष में कुछ बड़े पुलों और अप्रोच रोड का काम पूरा करना था. 

उसे चुनाैती  मानते हुए काम को पूरा किया जा रहा है. अब राज्य में 300 किलोमीटर नेशनल हाइवे के निर्माण व 500 किलोमीटर  सड़क मरम्मत  का काम होगा. पहले 184 किलोमीटर नेशनल हाइवे का निर्माण व 300 किलोमीटर मरम्मत का लक्ष्य  निर्धारित किया गया था.

 

हर घर नल का जल योजना

 

सरकार के सात निश्चयों में हर घर नल का जल योजना के तहत घरों में पाइप से पानी पहुंचाने का लक्ष्य है. दूषित पानी बाधित इलाकों में ट्रीटमेंट प्लांट से पानी को स्वच्छ कर पाईप से घरों में पहुंचाना है. पीएचइडी की ओर से योजना के तहत पाइप से पानी पहुंचाने पर काम शुरू कर दिया गया है. 

 

घोषणाएं

 

  • मुख्यमंत्री ग्रामीण पेयजल निश्चय योजना में 2288 वार्ड में पानी पहुंचाने का काम
  • फ्लोराइड व आयरन प्रभावित 2130, आर्सेनिक  प्रभावित 96 टोले में  पानी की व्यवस्था
  • विश्व बैंक के सहयोग से 113 गांवों में पानी पहुंचाने का काम
  • पहले से कार्यरत 116 जलापूर्ति योजनाएं पूरा करने का लक्ष्य

उपलब्धि 

 

  • साढ़े आठ लाख घरों में पानी पहुंचाने का काम अंतिम चरण में
  • फ्लोराइड व आयरन प्रभावित 1500 टोले में काम शुरू
  • आर्सेनिक प्रभावित 96 टोले में टेंडर प्रक्रिया आरंभ
  •  विश्व बैंक परियोजना से 78 गांवों में पाइप बिछाने का काम शुरू
  • एससी-एसटी टोले में 256 मिनी जलापूर्ति योजनाओं का काम पूरा 
  • आर्सेनिक प्रभावित जिलों में 45 मिनी जलापूर्ति योजना में 20 योजनाओं का काम पूरा
  • फ्लोराइड व आयरन प्रभावित 20 जिलों में 162 योजनाएं पूरे, 185 योजनाओं का काम प्रगति पर 
  • 3378 ग्राम पंचायतों के 46,178 वार्ड में काम शुरू 

राजस्व व भूमि सुधार विभाग

 

विभाग की ओर से महादलित विकास योजना के तहत दो लाख, 40 हजार, 705 वास रहित परिवारों को वास भूमि उपलब्ध करायी गयी. विशेष सर्वेक्षण और बंदोबस्ती अधिनियम के अंतर्गत राज्य के 38 जिलों में हवाई फोटोग्राफी का कार्य पूरा हुआ है. हवाई फोटोग्राफी से प्राप्त डाटा से तैयार रि-सर्वे के मानचित्र के सत्यापन का काम  12 जिलों के एक हजार 478 राजस्व गांवों में पूरा. 700 राजस्व गांवों की खानापूर्ति, 204 राजस्व गांवों के प्रारूप का प्रकाशन पूरा. ऑपरेशन दखल दिहानी योजना से लगभग एक लाख बेदखल परचाधारियों को  उनकी जमीन पर दखल दिलायी गयी. अभियान बसेरा के अंतर्गत लगभग 60 हजार योग्य श्रेणी के परिवार को वास भूमि उपलब्ध करायी गयी. 

 

 भवन निर्माण विभाग 

 

सात निश्चयों के तहत भवन निर्माण काम में तेजी

 

सरकार के सात निश्चयों के तहत जिला निबंधन सह परामर्श केंद्र, आइटीआइ, इंजीनियरिंग कॉलेज के निर्माण में तेजी लायी जा रही है. विभाग ने सभी जिलों में लगभग 169 करोड़ से जिला निबंधन सह परामर्श केंद्र का निर्माण काम पूरा किया. 362 करोड़ से बननेवाले विधानमंडल एक्सटेंशन भवन का उद्घाटन हुआ. 490 करोड़ से बिहार संग्रहालय व 490 करोड़ से अंतरराष्ट्रीय कन्वेंशन सेंटर का निर्माण अंतिम चरण में है. विभाग की ओर से वैशाली में 152 करोड़ से बननेवाले बुद्ध सम्यक दर्शन संग्रहालय व स्मृति स्तूप, 240  करोड़ से बननेवाले कटिहार व शेरशाह इंजीनियरिंग कॉलेज, 135 करोड़ से बननेवाले बीपी मंडल इंजीनियरिंग कॉलेज के निर्माण की प्रक्रिया चल रही है. 

 

घोषणाएं

 

  • स्टेट हाइवे व जिला सड़कों के चौड़ीकरण का काम
  • दीघा-सोनपुर रेल सह सड़क पुल के अप्रोच रोड का काम
  • आरा-छपरा फोर लेन पुल का निर्माण
  • गांधी सेतु के दोनों तरफ पीपा पुल का निर्माण
  • जीपीओ गाेलंबर से जंकशन होते हुए एक्जीबिशन रोड फ्लाइओवर में मिलाने का काम

उपलब्धियां

  • ठेकेदारों के निबंधन हेतु  इ-रजिस्ट्रेशन की सुविधा शुरू
  • आवागमन सुरक्षित व सुगम बनाने के लिए डिडिकेटेड रोड सेफ्टी सेल कार्यरत
  • सीवान-सिसवन 31 किलोमीटर, सरैया-मोतीपुर 28 किलोमीटर, बीरपुर-उदाकिशुनगंज 100 किलोमीटर स्टेट हाइवे का निर्माण
  • 850 करोड़ से 62 पथों व 51 पुल-पुलियों का निर्माण
  • गया में फल्गु नदी पर मानपुर प्रखंड में पुल का निर्माण
  • गोपालगंज-बेतिया के बीच पुल का निर्माण
  • विजय घाट पुल का निर्माण
  • मुख्यमंत्री सेतु निर्माण योजना से 60 पुलों का निर्माण
  • गांधी सेतु के बगल में पीपा पुल चालू
  • आरा-छपरा व दीघा-सोनपुर रेल सह सड़क पुल का काम अंतिम चरण में
  • कच्ची-दरगाह-बिदुपुर छह लेन पुल में काम शुरू
  • जीपीओ गाेलंबर से पटना जंकशन होते हुए एक्जीबिशन रोड फ्लाइओवर का निर्माण अंतिम चरण में
  • मुख्यमंत्री की घोषणा के सवा साल बाद भी नहीं हो सका एसटीइटी 

मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के आदेश के सवा साल बाद भी राज्य में विशेष शिक्षक पात्रता परीक्षा का आयोजन नहीं हो सका. राज्य के हाइ व प्लस-टू स्कूलों में शिक्षकों की बहाली के लिए होनेवाली विशेष शिक्षक पात्रता परीक्षा (एसटीइटी) के लिए शिक्षा विभाग ने गाइडलाइन तैयार करने में ही समय लगा दिया. विभाग ने ऑनर्स विषयों के अभ्यर्थियों को अलग से पांच अंक देने के प्रावधान को लेकर विधि विभाग में फाइल भेजी, जिसे पिछले साल के अंत में मंजूरी मिली. बावजूद इसके एसटीइटी के आयोजन पर ग्रहण लगा हुआ है. मुख्यमंत्री नीतीश कुमार 18 दिसंबर, 2015 को ही (विज्ञान, गणित और अंगरेजी) एसटीइटी कराने का निर्देश दिया था, लेकिन सवा साल बीतने के बाद भी शिक्षा विभाग अब तक गाइडलाइन फाइनल कर रहा है. 

 

बिहार विद्यालय परीक्षा समिति की ओर से 17-18 दिसंबर को टीइटी-एसटीइटी के लिए संभावित तारीख की घोषणा करने के बाद उसे स्थगित करना पड़ा. इसी गाइडलाइन की वजह से वर्तमान में हाइ व प्लस-टू स्कूलों में चल रही शिक्षकों की नियुक्ति प्रक्रिया पर भी रोक लगा दी गयी थी. 

 

ट्रेंड अभ्यर्थियों को ही मिलेगा मौका : एसटीइटी में इस बार उन्हीं अभ्यर्थियों को मौका मिलना हैं, जो ट्रेंड हैं. समस्या आ रही है कि स्कूलों में गणित विषय में बहाली होनी है. ऐसे में गणित में ऑनर्स करनेवाले को पांच अंक मिल रहे हैं. वहीं, जिन अभ्यर्थियों ने वैकल्पिक पेपर भौतिकी व रसायनशास्त्र रखा, उन्हें साइंस विषय के लिए अतिरिक्त पांच अंक नहीं दिये जा रहे हैं. सिर्फ ऑनर्स वाले अभ्यर्थियों को ही अंक मिल रहे हैं. इससे वैकल्पिक विषयवाले अभ्यर्थियों ने राज्य सरकार से मांग की कि उन्हें भी अतिरिक्त पांच अंकों का लाभ दिया जायेगा. इसके बाद शिक्षा विभाग ने इस पर विधि विभाग से राय मांगा है. 

 

विधि विभाग से स्थिति स्पष्ट होने के बाद ही आगे की कार्रवाई की जायेगी. राज्य में 2011 में एसटीइटी का आयोजन किया गया था. हर साल टीइटी-एसटीइटी लेने की बात कही गयी थी, लेकिन नहीं हो सका. 2011 में हुई एसटीइटी के सफल अभ्यर्थियों के सर्टिफिकेट की मान्यता सात सालों के लिए है. सात सालों तक चलनेवाले बहाली प्रक्रिया में वे शामिल हो सकते हैं. एसटीइटी में हाइस्कूलों में करीब 68 हजार और प्लट-टू स्कूलों में 20 हजार अभ्यर्थी क्वालिफाइ किये थे.

 

अभ्यर्थियों की बहाली प्रक्रिया 2012 में शुरू की गयी, जो अब तक जारी है. हाइस्कूलों में 17,500 पदों में 12,000 पदों पर बहाली हो चुकी है. जबकि, 5500 पद खाली हैं. वहीं, प्लस-टू स्कूलों में 17,583 पदों में से 5,391 पदों पर बहाली हुई है. 12,192 पद अभी भी खाली हैं. इस पर बहाली की प्रक्रिया चल रही है.

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