दुनिया भर में प्रसिद्ध गूगल बॉय कौटिल्य को गणित का ज्ञान देंगे यह प्रसिद्ध बिहारी गणितज्ञ

बिक्रमगंज (रोहतास):  जिसकी दुनिया दिवानी है वो गांव के गणितज्ञ का दिवाना है . जिसे बिन मांगे सभी कुछ ना कुछ देना चाहते है उसने जीवन का ज्ञान एक ग्रामीण शिक्षक से जानने की उत्सुकता दिखाई .और इस प्रकार दुनिया के लिए अबूझ पहेली बना गूगल ब्वाय कौटिल्य पंडित बिहार के बिक्रमगंज के चर्चित गणितज्ञ आर के श्रीवास्तव से गणित का ज्ञान सिखने उनके देहरादून स्थित मेधा क्लासेज में जा पहुँचा .इसी 2 जनवरी को देहरादून के आई पी एस मेधा क्लासेज में पहुँचे गूगल ब्वाय कौटिल्य पंडित ने वहां अध्ययनरत छात्रों के हर सवाल का जबाब पलक झपकते ही दे दिया.

कौटिल्य ने गणितज्ञ आर के श्रीवास्तव के ज्ञान से प्रभावित हो वही से आगे की पढ़ाई करने की हामी भरी . यह वही कौटिल्य पंडित है जिसे 4 वर्ष की उम्र में कौन बनेगा करोड़पति 2013 में बतौर मेहमान बुलाया गया था .जहाँ दुनिया के हर कोने की जानकारी से भरे सवालों का जबाब से रूबरू अभिनेता अमिताभ बच्चन ने कराया था . तब से लेकर आज तक दर्जनों स्थान पर मेहमान बने कौटिल्य को प्राइड ऑफ़ इंडिया समेत कई अवार्ड से सम्मानित किया जा चूका है .

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आई पी एस मेधा क्लासेज में कौटिल्य के पढ़ने की जिज्ञासा से ख़ुशी ब्यक्त करते हुए विद्यालय के निदेशक सांसद आर के सिन्हा ने रजनीकांत श्रीवास्तव को बधाई दी .

क्या कहते है कौटिल्य के दादा जी 
मेधा क्लासेज कैम्पस मे पहुँचे कौटिल्य के दादा जी जय कृष्ण शर्मा ने बच्चों को संदेश देते हुए कहाॅ की कौटिल्य कोई गौड गिफ्ट नही है यह आप ही लोगो की तरह है बस एक बार जो देख लेता है कभी भूलता नही।आप भी कौटिल्य बन सकते हो। और उन्होंने सबसे बड़ी बात बताया की देश का सबसे बड़ा जीनियस देश के सबसे कम पढ़ने वाले बच्चो मे से है। तो वही कौटिल्य के पिता सतीश शर्मा ने कहा की इस चन्द्रगुप्त के चाणक्य आर के श्रीवास्तव है।

कौन है मैथेमैटिक्स गुरू आर के श्रीवास्तव

– बिहार के प्रिंट मीडिया मे पिछले कुछ वर्षों से मैथेमेटिक्स गुरू आर के श्रीवास्तव के नाम से मशहूर आर के श्रीवास्तव के द्वारा आर्थिक रूप से गरीबों की नहीं रूकेगी पढ़ाई अभियान चलाया जा रहा है जिसका लाभ से आज काफी गरीब बच्चे आइआइटी जैसे प्रतिष्ठित संस्थानो मे जा चुके है।

अपनी माँ के हाथो से प्रत्येक वर्ष आर्थिक रूप से गरीबों को निःशुल्क काॅपी किताबे बटवाते हुए

अपनी माँ के हाथो से प्रत्येक वर्ष आर्थिक रूप से गरीबों को निःशुल्क काॅपी किताबे बटवाते हुए

बिक्रमगंज जैसे एक छोटे से शहर में इंजीनियरिंग की तैयारी करते छात्रों के नन्हे सपनो को साकार करने की जदोजहद में लगे आर के श्रीवास्तव की जिंदगी भी कम दिलचस्प नही है .बचपन के 5 वे साल में पिता पारसनाथ लाल के गुजरने से अनाथ हुए श्रीवास्तव को युवा अवस्था में भी एक जोरदार का झटका लगा .पिता के स्थान पर बड़े भाई शिव कुमार श्रीवास्तव का भी साथ 2014 में छूट गया जब उनकी मृत्यु हो गई .

 

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