बिहार सरकार ने नई उद्योग नीति की मंजूर दी, निवेशकों मिलेगी भारी छूट

बिहार में उद्योग को बढावा देने और निवेशकों को लुभाने के मकसद से बिहार में नई उद्योग नीति की मंजूरी दी गई है। अब राज्य में उद्योग लगाने पर निवेशकों को भारी छूट दी जायेगी।

 

नई औद्योगिक निवेश प्रोत्साहन नीति 2016 को मंगलवार को कैबिनेट की मंजूरी मिल गई। इसमें निवेशकों के लिए कैपिटल की बजाय ब्याज सब्सिडी का प्रावधान है। राज्य में वर्ष 2021 तक निवेश करने वाली औद्योगिक इकाइयों के कर्ज के ब्याज पर राज्य सरकार सब्सिडी देगी। ऐसी इकाइयों के बैंक कर्ज के सालाना ब्याज का 10% तक सरकार प्रतिपूर्ति करेगी।

निवेशकों को पांच साल तक वैट समेत राज्य सरकार द्वारा लिए जाने वाले सभी टैक्स की प्रतिपूर्ति की जाएगी। औद्योगिक इकाइयों की दो श्रेणियां-प्राथमिकता व गैर प्राथमिकता होगी। निवेशकों को सिंगल विंडो की सुविधा मिलेगी।

 

इंडस्ट्रियल पार्क के लिए 25 एकड़ जमीन

इंडस्ट्रियल पार्क और आईटी पार्क लगाने वालों की ब्याज छूट की सीमा 50 करोड़ होगी। फूड पार्क व टेक्सटाइल पार्क लगाने पर ब्याज सब्सिडी की सीमा परियोजना लागत की 35 प्रतिशत होगी। इंडस्ट्रियल पार्क के लिए 25 एकड़ जमीन और आईटी पार्क के लिए 3 एकड़ जमीन जरूरी।
स्टांप ड्यूटी की शत-प्रतिशत प्रतिपूर्ति

प्राथमिकता वाले क्षेत्र में निवेश पर स्टांप ड्यूटी व जमीन के कन्वर्जन की पूरी प्रतिपूर्ति होगी। वहीं बैंक कर्ज के सालाना ब्याज की 10% प्रतिपूर्ति होगी। यह परियोजना लागत की 30% या अधिकतम 10 करोड़ होगी। निवेशकों के लिए बिहार में उत्पादित 15% सामान की खरीद अनिवार्य होगी।

प्राथमिकता वाले उद्योग

खाद्य प्रसंस्करण, पर्यटन, छोटे मशीन निर्माण, इलेक्ट्रॉनिक्स, इलेक्ट्रिकल, आईटी, टेक्सटाइल, प्लास्टिक, रबर, अक्षय ऊर्जा, हेल्थ केयर, चमड़ा और इंजीनियरिंग कॉलेज को प्राथमिकता श्रेणी में रखा गया है। अन्य उद्योग गैर प्राथमिकता वाली सूची में रखे गए हैं।

महिला, थर्ड जेंडर, एससी व एसटी को अतिरिक्त छूट

महिला, एससी-एसटी, विधवा, एसिड अटैक पीड़ित और थर्ड जेंडर के निवेश करने पर 10% ब्याज का अतिरिक्त 15% छूट होगी।

इधर, भागलपुर को स्मार्ट बनाने पर खर्च होंगे 1309 करोड़ रु.

भागलपुर को स्मार्ट सिटी बनाने पर 1309 करोड़ रुपए खर्च किए जाएंगे। इस परियोजना के लिए स्पेशल पर्पज ह्वेकिल (एसपीवी) कंपनी के गठन को कैबिनेट ने मंजूरी दे दी। इसका नाम भागलपुर स्मार्ट सिटी लिमिटेड कंपनी होगा। कैबिनेट ने स्मार्ट सिटी मिशन के तहत अभी 1309 करोड़ में से 463 करोड़ और 2.5 करोड़ रुपए राज्यांश को खर्च करने के प्रस्ताव को प्रशासनिक स्वीकृति दी। एसपीवी चीफ ऑपरेटिंग अफसर की देख-रेख में काम करेगा। सीओओ सीधे केंद्र को रिपोर्ट करेगा। एसपीवी में मेयर उपाध्यक्ष होंगे।

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