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बिहारी विशेषता

बिहार के एक राजमिस्त्री की बेटी को राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी करेंगे सम्मानित

फुलवारीशरीफ कि मुन्नी ने कुछ ऐसा कमाल कर दिखाया है, जिससे उसकी तारीफ़ पूरा देश कर रहा है. फुलवारी शरीफ प्रखंड मुख्यालय से दस किलोमीटर दूर ढिबड़ा – शाहपुर के सटे फ़तेहपुर गाँव के दलित टोले में रहने वाली सातवीं क्लास में पढने वाली मुन्नी को राष्ट्रपति सम्मान के लिए चयन किये जाने की जानकारी मिलते ही दलित टोले में ख़ुशी का माहौल है. देशभर के हजारों छात्रों को पीछे छोड़ते हुए डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम इग्नाइट प्रतियोगिता में चयनित 32 बच्चों में फुलवारी शरीफ  के फ़तेहपुर टोले की रहने वाली गरीब दलित परिवार की मुन्नी का नाम भी शामिल हो गया है. आगामी सात नवंबर को दिल्ली में महामहिम राष्ट्रपति प्रणव मुखर्जी इन 32 बच्चो को सम्मानित करेंगे.उसके नायाब आईडिया की  धमक राष्ट्रपति भवन तक पहुँच गई है. भारत के राष्ट्रपति प्रणव मुखर्जी अब उन्हें सम्मानित करेंगे. देशभर के हजारों छात्रों को पीछे छोड़ते हुए डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम इग्नाइट प्रतियोगिता में चयनित 32 बच्चों में मुन्नी अपना नाम जुड़वाने में सफल रही है.

मुन्नी के दादा जीवनभर बैलगाड़ी चलाते रहे. पिता नरेंद्र राम राजमिस्त्री का काम करते हैं. मुन्नी अपने तीन भाई-बहनों में सबसे बड़ी है. राजकीय मध्य विद्यालय ढिबरा में सातवीं कक्षा में पढ़ती है. मुन्नी कहती है कि मुझे मैथ बनाने में अच्छा लगता है. नंबर भी बढ़िया मिलता है.

मुन्नी को ऐसे आया आईडिया….
एक दिन एक सर हमारे स्कूल में आए. आज से करीब छह महीने पहले. उन्होंने छठवां से आठवां तक के सारे बच्चों से कहा कि कुछ नया चीज बनाने का आइडिया लिखो। क्या नया बनाना चाहिए जिससे लोगों को सहुलियत हो। सारे बच्चे लिखने लगे। मैं भी सोचने लगी कि क्या बनाना चाहिए. मेरे मन में आया कि क्यों ने एक ऐसा सिस्टम बन जाए जिससे कार के गेट में अंगुली दबने का खतरा खत्म हो जाए. क्योंकि एक बार एक कार के गेट में मेरी अंगुली दब गई थी.
फिर रेड लाइट जलनेवाली आइडिया मैंने लिख दी. लिख कर मैंने कॉपी जमा कर दी. बाहर से आए सर बच्चों की कॉपियां लेकर चले गए. हमलोग तो भूल भी गए थे. लेकिन  जब मुझे इस बात का पता चला कि मेरा चयन डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम इग्नाइट प्रतियोगिता में हो गया है और मुझे राष्ट्रपति से पुरस्कार मिलेगा  तो मेरे ख़ुशी का ठिकाना नहीं रहा.
और मुन्नी ने यह संदेश दिया है कि हमेशा कुछ नया सोचिए, समाज के लिए सोचिए और नया कीजिए. देशभर के 55 हजार 89 छात्रों का आइडिया दिल्ली पहुंचा था लेकिन उसमें से सिर्फ 32 छात्रों के आइडिया को चुना गया. अब इस आइडिया का पेंटेंट होगा.
मुन्नी आगे चल कर इंजिनियर बनना चाहती है और देश का नाम रौशन करना चाहती है.

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