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भोपाल सेंट्रल जेल से फरार हुए सिमी के आठों आतंकी एनकाउंटर में मारे गए

भोपाल की जेल से रविवार रात गार्ड की हत्या कर फरार हुए सभी कैदियों को पुलिस ने शहर के बाहरी इलाके में एक एनकाउंटर में मार गिराया है. राज्य के गृहमंत्री भूपेंद्र सिंह ने यह जानकारी दी. उन्होंने बताया कि ईंटखेड़ा गांव में पुलिस ने सभी को घेर लिया जिसके बाद हुए एनकाउंटर में सभी मारे गए. ये सभी आतंकी सिमी से जुड़े हुए बताए जा रहे हैं ।

बताया जा रहा है कि फरार होने  से पहले रात करीब दो बजे ड्यूटी पर तैनात गार्ड रमा शंकर की कैदियों ने हत्या की थी. हत्या के लिए कैदियों ने कोई धारदार वस्तु का इस्तेमाल किया. और फिर चादर के सहारे जेल की दीवार फांद कर फरार हो गए थे. भाग जाने वाले तीन लोग पहले भी इसी प्रकार से जेल से भागने में कामयाब हुए थे. कहा जा रहा है कि कैदियों ने फरार होने के लिए दीवाली की रात ही इसलिए चुनी ताकि पटाखों के शोर में वे अपना काम कर सकें.

कैदियों के फरार होने के बाद जेल सुपरिंटेंडेंट और तीन सुरक्षा गार्डों को निलंबित कर दिया गया था. राज्य के गृहमंत्री भूपेंद्र सिंह ने बताया था कि इस मामले की जांच होगी और फरार कैदियों की तलाश के लिए पुलिस टीमों का गठन किया गया था. फरार होने वाले अधिकतर कैदियों पर देशद्रोह का मुकदमा चल रहा है और कुछ पर डकैती का भी आरोप है. प्रदेश सरकार ने प्रत्येक फरार सिमी कार्यकर्ता की गिरफ्तारी पर पांच लाख रुपये का इनाम घोषित कर दिया था.

भोपाल के डीआईजी रमन सिंह ने बताया था, ‘‘सिमी के आठ कार्यकर्ता तड़के करीब दो से तीन बजे के बीच एक सुरक्षा गार्ड की हत्या करने के बाद जेल से फरार हो गए.’’ उन्होंने बताया कि ‘द स्टूडेंट्स इस्लामिक मूवमेंट ऑफ इंडिया’ के कार्यकर्ताओं ने एक सुरक्षा गार्ड की हत्या कर दी और उसके बाद वे चादरों की मदद से जेल की दीवार लांघ कर वहां से फरार हो गए.

(भोपाल सेंट्रल जेल से भागे कैदी)

डीआईजी ने बताया कि उन्होंने पहले गार्ड को घेर कर अपने कब्जे में लिया और फिर स्टील की प्लेट से उसका गला काट कर उसे मार डाला.

गृह मंत्रालय ने मध्यप्रदेश सरकार से इस घटना के संबंध में विस्तृत रिपोर्ट तलब की है जिससे यह पता चल सके कि क्या जेल प्रशासन की ओर से कोई चूक हुई या ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए कौन से कदम उठाए गए हैं.

सुरक्षा एजेंसियां इस बात को लेकर बहुत चिंतित हैं कि एक अक्तूबर 2013 को खंडवा स्थित जेल से भागे सिमी के सात कार्यकर्ताओं में से चार को तीन साल तक छिपे रहने के बाद मुश्किल से पकड़ा गया था और इन तीन साल में यह उग्रवादी आतंकवाद की कई और बैंक में लूटपाट की एक घटना में लिप्त थे.

1 अक्तूबर 2013 को सिमी के सात सदस्य मध्यप्रदेश के खंडवा में स्थित जिला जेल से 14 फुट ऊंची दीवार फांद कर भाग गए थे. यहां पर ये आतंकी जेल के बाथरूम की दीवार तोड़कर फरार हुए थे. खांडवा भोपाल से करीब 280 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है.

इनमें से एक कैदी ने अगले दिन आत्मसमर्पण कर दिया था और एक अन्य कैदी को मध्यप्रदेश के बड़वानी से दिसंबर 2013 में पकड़ा गया था. तीसरा कैदी पांच अप्रैल 2015 को तेलंगाना पुलिस के साथ एक मुठभेड़ में मारा गया था. चार कैदियों की पुलिस लगातार तीन साल तक तलाश करती रही और फरवरी 2016 में इन्हें ओडिशा के राउरकेला से गिरफ्तार किया गया.

जब चारों कैदी फरार थे तब वह लोग मध्यप्रदेश, आंध्रप्रदेश, तेलंगाना, कर्नाटक, तमिलनाडु, महाराष्ट्र, उत्तराखंड और उत्तर प्रदेश सहित विभिन्न राज्यों में आतंकवादी गतिविधियों में कथित तौर पर लिप्त थे.

आशंका है कि यह लोग तेलंगाना के करीमनगर स्थित एक बैंक में लूटपाट के एक मामले में और एक फरवरी 2014 को चेन्नई सेंट्रल स्टेशन पर बेंगलूरू-गुवाहाटी ट्रेन में हुए विस्फोट में लिप्त थे. इस विस्फोट में एक युवा सॉफ्टवेयर इंजीनियर की मौत हो गई थी. एक मई 2014 को पुणे के फर्शखाना पुलिस थाने में और 10 जुलाई 2014 को विश्रामबाग पुलिस थाने के समीप हुए इस विस्फोट में भी इन लोगों का हाथ होने की आशंका है.

बताया जाता है कि यह लोग उत्तराखंड के रुड़की और उत्तर प्रदेश के बिजनौर में हुई बम विस्फोट की घटनाओं में भी कथित तौर पर लिप्त थे.

 

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