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जरा याद करो कुर्बानी, बिहार के इन बेटों नें देश की रक्षा के लिए अपनी जान कुर्बान कर दिया

आज से 17 साल पहले, जब हम अपने-अपने घरों में बैठे सावन की बारिश का आनंद ले रहे थे, कारगिल में तैनात हमारे सैनिक अपनी लहू से उस बारिश में रंग भरने की कोशिश में थे| तमाम देशवासियों के साथ अपना बिहार की टीम अपने नौजवानों के सहादत को याद करती है| हम नमन करते हैं उन वीरों को जिन्होंने कश्मीर ही नहीं, बल्कि पूरे देश को बचाने के लिए अपने प्राणों की आहुति दे दी|

तो क्या हुआ था उस दौरान? क्यों मनाते हैं हम आज के दिन ‘विजय दिवस’?

60 से ज्यादा दिनों तक चले कारगिल युद्ध में भारत के लगभग 500 सैनिक शहीद हुए| इस युद्ध को जीतने के लिए भारतीय सेना की तरफ से इसे ‘ऑपरेशन विजय’ का नाम दिया गया था| बाद में जीत के जश्न और शहीदों के नमन के रूप में इस जीत के दिन को ‘विजय दिवस’ के नाम से मनाये जाने की घोषणा हुई|

दरअसल वो 3 मई 1999 का दिन था जब चरवाहों ने सूचना दी थी कि पाकिस्तान के सैनिक कारगिल में घुसपैठ कर रहे हैं| 5 मई को भारतीय सेना से गश्ती पर गये सैनिकों में से 5 को पाकिस्तानियों द्वारा बंधक बनाया गया और प्रताड़ित करते-करते जान ले ली गयी| 9 मई को पाकिस्तानी सेना की तरफ से गोलीबारी शुरू हो गयी| 10 मई से भारतीय सेना हरकत में आई और कुछ सैन्य टुकड़ियों को कारगिल क्षेत्र में भेजा गया| भारतीय सैनिकों के सामने एक चुनौती यह भी थी कि कैसे पता किया जाये ये घुसपैठ पाकिस्तानी सेना की तरफ से ही की जा रही है|

26 मई को इंडियन एयर फ़ोर्स ने घुसपैठियों पर आक्रमण किया और युद्ध का बिगुल दोनों तरफ से बज गया| 5 जून को भारतीय सेना ने वो दस्तावेज पेश किये जिनसे साबित होता था कि इसमें पाकिस्तान भी शामिल है| 4 जुलाई को भारतीय सेना ने टाइगर हिल पर पुनः कब्ज़ा कर लिया| 11 जुलाई तक पाकिस्तानी सेना पीछे हटती गयी और भारत ने बटालिक में जुबर हिल सहित महत्वपूर्ण चोटियों पर झंडे फहराये|

इस दौरान विश्व के कई देशों ने भारत का समर्थन किया और पाकिस्तान को अंतर्राष्ट्रीय दबाव में आकर हार स्वीकारनी पड़ी| हालाँकि वो कहते रहे कि ये हमला पाकिस्तानी सेना की तरफ से नहीं किया गया, लेकिन भारतीय सैनिकों के पास पुख्ता सबूत थे जो ये साबित करते थे की हमला पाकिस्तानी सेना की तरफ से ही हुआ है, वो घुसपैठ पाकिस्तानी सैनिकों की ही थी|

26 जुलाई को औपचारिक रूप से कारगिल युद्ध के समाप्ति की घोषणा हुई| दोनों देशों के द्वारा जारी राजकीय आंकड़ों के अनुसार भारत के 527 सैनिक शहीद हुए जबकि पाकिस्तान के 357-453| बाद में पाकिस्तान द्वारा अपने अपने 90 सैनिकों को मरणोपरांत ‘बहादूरी पुरस्कार’ तथा दो सैनिकों की ‘निशान-ए-हैदर’ पुरस्कार दिया जाना ये सुनिश्चित करता है कि हमला पाकिस्तान के आधिकारिक सैन्य संगठनों द्वारा ही किया गया था|

भारतीय सेना द्वारा द्रास में ‘कारगिल वार मेमोरियल’, कारगिल में शहीद जवानों की याद में बनाया गया है| मेमोरियल के मुख्य द्वार पर श्री माखनलाल चतुर्वेदी की कविता “पुष्प की अभिलाषा” लिखी हुई है| मेमोरियल के साथ एक संग्रहालय भी है जहाँ युद्ध से जुड़ी जानकारियाँ जैसे जवानों के चित्र, दस्तावेज, रिकॉर्डिंग इत्यादि उपलब्ध हैं|

इस युद्ध में कई वीर सपूत थे जिनका सम्बन्ध बिहार से है, इनके नाम इस प्रकार हैं-

मेजर चन्द्रभूषण द्विवेदी- शिवहर

नायक गणेश प्रसाद यादव- पटना

नायक विशुनी राय- सारण

नायक नीरज कुमार- लखीसराय

नायक सुनील कुमार- मुजफ्फरपुर

लांस नायक विद्यानंद सिंह- आरा

लांस नायक राम वचन राय- वैशाली

हवालदार रतन कुमार सिंह- भागलपुर

अरविन्द कुमार पाण्डेय- पूर्वी चम्पारण

प्रमोद कुमार- मुजफ्फरपुर

शिव शंकर गुप्ता- औरंगाबाद

हरदेव प्रसाद सिंह- नालंदा

एम्बु सिंह- सीवान

रमन कुमार झा- सहरसा

हरिकृष्ण राम- सीवान

प्रभाकर कुमार सिंह- भागलपुर

 

इनकी सहादत को श्रद्धांजली!

कारगिल युद्ध में शहीद सैनिकों की याद में पटना में भी ‘कारगिल वार मेमोरियल’ बनाया गया है, तथा ‘विजय’ की इस गाथा की याद में पटना के एक प्रमुख चौक को भी ‘कारगिल चौक’ का नाम दिया गया है|

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अपना बिहार की टीम शहीदों को याद करते हुए एक विशेष कार्यक्रम शुरू करने जा रही है| कल, दिनक 27 जुलाई से स्वतंत्रता दिवस, अर्थात 15 अगस्त तक हम बिहार के भिन्न-भिन्न जिलों से स्वंतंत्रता संग्राम में शहीद हुए अमरों की अमर-कथा लायेंगे| क्योंकि हम आजाद हो चुके हैं, हमारा फ़र्ज़ है कि उन आजादी के मतवालों की कहानियाँ हम दुहराते रहें| तो मनाते हैं जश्न अपनी आजादी का, आज से लगातार 20 दिनों तक|

शहीदों को नमन!

जय हिन्द! जय माँ भारती! वन्दे मातरम!

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