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बिहार में फिर हुआ 15 दिन के लिए लॉकडाउन, जानिए क्या मिलेगी छूट, क्या हैं पाबंदियां

देश में कोरोना की रफ्तार रुकने का नाम ही नहीं ले रही है। सरकार के कई प्रयासों के बावजूद संक्रमण और मौतों को स‍िलस‍िला जारी है। कई प्रदेशों में लॉकडाउन के बाद कोरोना के मामलों में जबरदस्त उछाल देखा गया है इसी बीच ब‍िहार में नीत‍ीश सरकार ने राज्य में 16 जुलाई से 31 जुलाई तक संपूर्ण लॉकडाउन लगाने का ऐलान क‍िया है।

हलांकि इस दौरान सभी इमरजेंसी सेवाएं सुचारू रूप से जारी रहेंगी।  बिहार सरकार द्वारा जारी की गई अधिसूचना के मुताबिक पूर्ण लॉकडाउन की अवधि के दौरान पूरे बिहार में इमरजेंसी सर्विस को छोड़कर,  परिवहन सेवा, शॉपिंग मॉल आदि  बंद रहेंगे, वहीं धर्मिक संस्थान को भी बंद करने का आदेश दिया गया है। सुबह और शाम फल-सब्जी सहित जरूरी सेवा की दुकानें खुली रहेंगी।

बिहार में लगातार बढ़ते कोरोना वायरस के संक्रमण को देखते हुए बिहार सरकार ने पूरे राज्य में अगले 15 दिन तक संपूर्ण लॉकडाउन लगाने का फैसला किया है। सोमवार को इस संबंध में प्रस्ताव तैयार कर लिया गया था. इस पर अंतिम मुहर के लिए मंगलवार को मुख्य सचिव दीपक कुमार की अध्यक्षता में क्राइसिस मैनेजमेंट ग्रुप (सीएमजी) की बैठक हुई।

जारी हुई गाइड लाइंस

आवश्यक केंद्र सरकार के अधीन सभी दफ्तर लॉकडाउन के दौरान पूरी तरह बंद रहेंगे। डिफेंस, पुलिस, पेट्रोल पंप, पोस्ट आफिस सहित कुछ कार्यालयों को इस लॉकडाउन से छूट दी गई है। बिहार सरकार के अधीन सभी सरकारी कार्यालय भी लॉकडाउन के दौरान बंद रहेंगे।

बिजली, पानी, स्वास्थ्य, सिंचाई, खाद्य वितरण, कृषि एवं पशुपालन विभाग। प्रदेश भर में सभी अस्पताल और स्वास्थ्य सेवाओं से जुड़े लोगों और कार्यों को पूरी तरह लॉकडाउन से छूट दी गई है।

सभी कॉमर्शियल और प्राइवेट संस्थान बंद रहेंगे। सिर्फ फल, सब्जी, अनाज, दूध, मछली आदि के दुकान खुल सकेंगे। हालांकि प्रशासन इनकी होम डिलिवरी की हर संभव व्यवस्था करने का प्रयास करेगा।

सभी बैंक और एटीएम खुले रहेंगे। होटल, रेस्त्रां या ढाबे खुले रहेंगे लेकिन वहां खाने की व्यवस्था लॉकडाउन के दौरान नहीं कर सकते. उन्हें सिर्फ पैकिंग की सर्विसेज देनी होगी। रेल, हवाई सफर को मंजूरी दी गई है। हालांकि आटो टैक्सी पूरे राज्य में संचालित रहेंगे। इसके अलावा जरूरी सेवाओं के लिए ही प्राइवेट गाड़ियों का संचालन हो सकता है। बाकी सभी ट्रांसपोर्ट सर्विस बाधित रहेगी।

बिहार में तेजी से बढ़ रही कोरोना संक्रमितों की संख्या

बता दें कि, बिहार में कोरोना वायरस के मामलों में तेजी से बढ़ोतरी हो रही है। पिछले कुछ दिनों से मरीजों की संख्या हजारों में मिल रही है। आज भी कोरोना के 1432 नए मरीज मिले हैं। बिहार के अपर मुख्य सचिव आमिर सुबहानी सहित कई वीआइपी कोरोना से संक्रमित पाए गए हैं। एक साथ भाजपा के 75 नेताओं की कोरोना की जांच रिपोर्ट पॉजिटिव आई है।

 

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कोरोना वायरस ने बिहार के नीतीश-मोदी सरकार के 15 साल के विकास वाले गुबारे को फोड़ दिया

कोरोना वायरस ने बिहार के नीतीश सरकार के 15 साल के विकास वाले गुबारे को फोड़ दिया है| बेरोजगारी, पलायन, गरीबी, बदहाल स्वास्थ्य व्यवस्था से लेकर संसथानों की कमी तक की समस्या, जिसे नीतीश कुमार बड़े चालाकी से शराबबंदी, दहेजबंदी, मानव श्रृंखला, विषेश राज्य का दर्जा, चारा घोटाला, आदि जैसे मुद्दों की चादर से ढक के रखे हुए थे, वो चुनाव से पहले अचानक जीन के तरह सबके सामने आ गया है|

कोरोना वायरस के कारण जारी लॉकडाउन में लाखों लोग दुसरे राज्य में फसे हैं| सबसे ज्यादा तकलीफों का सामना मजदूरों और छात्रों को उठाना पड़ रहा है| कोचिंग हब के रूप में विकसित राजस्थान के कोटा शहर में बिहार के हजारों छात्र फसे हैं जो अपने घर वापस आने के लिए प्रदर्शन कर रहे हैं| देश भर में फसे मजदूर भी लगातार अपने राज्य वापस जाने के लिए हंगामा कर रहे हैं| स्थिति यह है कि लोग पैदल और साइकिल से ही हजारों किलोमीटर का सफ़र तय कर घर आने को मजबूर है|

ज्ञात हो कि देश में मजदूरी करने के लिए सबसे ज्यादा पलायन बिहार और यूपी राज्य से ही होती है| एनडीटीवी में छपे एक आकड़े के अनुसार देश में 1.2 करोड़ प्रवासी मजदूर सिर्फ बिहार और यूपी के हैं|

उत्तर प्रदेश की योगी सरकार लॉकडाउन के दौरान ही अपने छात्रों को कोटा बसें भेजकर अपने बच्चों को वापस लेकर आ गयी| उसके बाद दर्जनों राज्यों ने अपने छात्रों को वापस बुला लिया| बिहार सरकार पर भी दवाब बढ़ा तो वो लॉकडाउन के नियम का हवाला देकर बच्चों को वापस लाने से साफ़ मना करती रही| नीतीश कुमार ने तो प्रधानमंत्री को भी लॉकडाउन के  नियम पढ़कर सुना दिया और उनसे आग्रह किया कि लॉकडाउन के नियम सबके लिए सामान होने चाहिए| केंद्र सरकार लॉकडाउन के नियम में बदलाव करेगी, तभी हम अपने लोगों को वापस ला सकते हैं|

राज्यों के मांग को सुनते हुए केंद्र सरकार ने लॉकडाउन के नियम में ढील दे दी| गृह मंत्रालय ने कुछ शर्तों के साथ, फंसे हुए लोगों के लिए नई गाइडलाइन जारी कर दी| नई गाइडलाइन के तहत फंसे हुए लोग अपने राज्य वापस लाये जा सकते हैं|

इस फैसले के बाद बिहार के उपमुख्यमंत्री सुशील मोदी उत्साहित होते हुए इसका क्रेडिट लेने के लिए कूद पड़े| उन्होंने कहा कि बिहार के मांग पर ही केंद्र सरकार ने यह फैसला दिया है| बिहार के लोग खुश हैं कि अब वे वापस आ पायेंगें|

मगर कुछ ही समय बाद सुशील मोदी प्रेस कांफ्रेंस कर पलटी मार गयें| उन्होंने कहा कि अन्य राज्यों में फसे लोगों को वापस बिहार लाना असंभव है क्योकिं राज्य सरकार के पास बसें नहीं है| मगर सवाल है कि अन्य राज्यों के पास बसें हैं तो बिहार के पास क्यों नहीं? 15 साल के शासन में नीतीश सरकार प्रयाप्त बसें भी नहीं खरीद सकी? अगर सरकारी बसें प्रयाप्त संख्या में नहीं है तो क्या सरकार निजी बसों की सेवा नहीं ले सकते?

फिर सुशील मोदी ने ट्वीट करते हुए केंद्र सरकार से बिहार के मजदूरों को बिहार वापस लाने के लिए स्पेशल ट्रेन चलाने की मांग की है| मतलब बिहार सरकार ने फिर गेंद केंद्र सरकार के पला में फेक कर, खुद को जिम्मेदारियों से बचा रही है|

वैसे यह सचाई है कि बिहार सरकार का बहाने उनकी मज़बूरी है| 15 साल में न सरकार राज्य के लिए इतना संसाधन विकसित कर पायी कि सभी प्रवासियों को वापस ला सके, उनकी स्क्रीनिंग करके उनको क्वारनटीन कर सकें और उनका इलाज करा सके|

बिहार के स्वास्थ्य व्यवस्था की बदहाली कई मौके पर उजागर हो ही चुकी है| 12 करोड़ आवादी वाले बिहार में मात्र 3 कोरोना हॉस्पिटल हैं और उसमे मात्र 50 वेंटीलेटर की सुविधा उपलब्ध है| सरकार अगर लोगों को राज्य में वापस लाती भी है, तब भी उनकी किरकिरी होना तय है|

दुसरे राज्यों द्वारा लगातार अपने नागरिकों को वापस लाने, बिहारी मजदूरों और छात्रों के लगातार प्रदर्शन और विपक्ष के आक्रामक विरोध के बाद सरकार पर जबरदस्त दवाब है| इसी साल बिहार में विधानसभा चुनाव है, लोगों का गुस्सा चुनाव परिणाम पर भी पड़ रहा है|

यही कारण है कि नीतीश कुमार की सहयोगी पार्टी बीजेपी के नेता बेचैन हो गये हैं| वे भी अब सरकार से लोगों को वापस लाने की मांग कर रहे हैं|

अब बिहार सरकार लोगों को वापस लाने के रास्ते निकलने के लिए 19 नोडल अधिकारियों की नियुक्ति की है| सरकार कह रही है कि ये सभी अधिकारी अपने संबंधित राज्यों में जाकर वहां के अधिकारी के संपर्क से फंसे बिहार के लोगों की जानकारी लेंगे। पूरी सूचना वह आपदा प्रबंधन को देंगे और विभाग उनके लाने की व्यवस्था करेगा।

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Coronavirus: बिहारियों के संघर्ष के सामने कमजोर दिख रहा कोरोना, लोगों की इम्यूनिटी क्षमता मजबूत

पिछड़ापन और गरीबी बिहार के लिए प्रकोप माना जाता है, जिसके कारण यहाँ जन्म लेने वाले लोगों को दुसरे राज्यों के लोगों से ज्यादा जिन्दगी में संघर्ष करना होता है| मगर इस समय जब पूरी दुनिया में लोग कोरोना वायरस के संक्रमण के कारण हजारों के संख्या में लोग मर रहे हैं, उस समय बिहारियों का संघर्ष फिर से उनके लिए ढाल बनकर सामने आई है|

शुक्रवार सुबह 10 बजे तक के आंकड़ों के मुताबिक बिहार (Bihar) में संक्रमण के 60 केस हो चुके हैं। इनमें से 15 लोग पूरी तरह ठीक होकर अपने-अपने घर जा चुके हैं, जबकि एक शख्स की जान गई है। बिहार (Bihar) में फैले कोरोना (Coronavirus) संक्रमण के मामलों में एक बात गौर करने वाली है।

एक तरफ जहां पूरी दुनिया में वेंटिलेटर (Ventilator) की मारामारी मची है, वहीं बिहार (Bihar) में अब तक किसी भी कोरोना (Coronavirus) मरीज को वेंटिलेटर (Ventilator) या आईसीयू में रखने की जरूरत नहीं हुई है।

बिहार में अब तक जितने भी कोरोना संक्रमित मरीज आए हैं उन सबको केवल अलग वॉर्ड में क्वारंटीन करके और मलेरिया की दवाई खिलाकर ठीक किया जा रहा है। बिहार की राजधानी पटना के नालंदा मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल में कोरोना मरीजों का इलाज हो रहा है। यहां अबतक केवल दो कोरोना पॉजिटिव मरीज को इमरजेंसी वॉर्ड में शिफ्ट करने की नौबत आई है। आइए हम आपको बताते हैं कि इन पहलुओं पर विशेषज्ञों की राय क्या है?

भारत सरकार के ट्राॅपिकल डिजीज संस्थान, आरएमआइआइ के निदेशक डॉ प्रदीप दास का मानना है कि इसकी दो वजह हो सकती है| पहला भारत और खासकर बिहार के लोगों में कोरोना-19 के वायरस का जो घातक प्रभाव है, उसका असर नहीं हो पा रहा है| यह भी हो सकता है कि यहां के लोगों की रोग प्रतिरोधक क्षमता अमेरिकी और यूरोपियन लोगों से अधिक हो| उन्होंने बताया कि इसका दूसरा कारण यह हो सकता है कि बिहार के लोगों को बचपन से ही विभिन्न तरह के वायरस से जूझना पड़ता है|

वहीं दिल्ली के धर्मशिला हॉस्पिटल के कॉर्डियो डिपार्टमेंट के निदेशक डॉ. एके पांडेय ( Dr Ak Pandey) भी कामिनी झा के विचार से सहमत हैं। लेकिन उनका कहना है कि इसे क्षेत्र विशेष के संदर्भ में नहीं देखा जा सकता हैं ऐसा इसलिए कि इंडियन क्लाइमेट सिस्टम में ही काफी विविधता है। जहां तक खान पान की बात है अर्बन एरिया को छोड़ दें तो दक्षिण भारतीय हों या उत्तर भारतीय या फिर किसी भी क्षेत्र के भी लोग आज भी नेचुरल फूडिंग पर निर्भर हैं। सीजनल फूड प्राकृतिक रूप से उनके लाइफ का अहम हिस्सा होता है। सबसे अहम बात यह है कि भारतीय मौसमी विविधता की वजह से कई तरह के इनफेक्शन के प्रभाव में आते रहते हैं। इसलिए उनके इम्यूनिटी का लेवल हमेशा अमेरिकंस और यूरोपियंस से बेहतर होता है।

मलेरिया से जूझने का भी है असर

कोविड-19 के लिए समर्पित अस्पताल एनएमसीएच के प्रभारी अधीक्षक डॉ निर्मल कुमार सिन्हा का मानना है कि बिहार पुराने समय से मलेरिया संक्रमित जोन में रहा है| कोविड-19 के इलाज में अगर कोई दवा कुछ असर कर रही है, तो वह मलेरिया की है. इसी कारण अमेरिका भारत से मलेरिया की दवा मंगा रहा है| चूंकि अमेरिका और यूरोपियन देशों में मलेरिया का कभी असर ही नहीं रहा है, ऐसे में कोविड-19 वायरस का वहां पर गंभीर अटैक हो रहा है. बिहार में मलेरिया के कारण हो सकता है कि यहां के लोगों में उस वायरस के खिलाफ इम्युनिटी विकसित हो गयी है| हालांकि दोनों चिकित्सकों ने माना कि यह तो एक शोध का विषय है|

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Coronavirus: गया में एक संदिग्ध की मौत के बाद डॉक्टर ने चिता पर रखे शव से सैंपल लिया

जैसे-जैसे दिन बीत रहे हैं कोरोना वायरस को लेकर बिहार सरकार की पोल खुलती हुई नजर आ रही है| रविवार से पहले बिहार से कोरोना वायरस का एक भी केस सामने नहीं आया था मगर रविवार को अचानक खबर आई कि एक व्यक्ति कि मौत हो गयी और दो केस पॉजिटिव निकले हैं|

पहले यह अनुमान लगाय जा रहे थे कि बिहार में कोरोना नहीं पहुंचा है मगर हकिकत कुछ और है| वास्तव में बिहार में पर्याप्त संख्या में लोगों की टेस्टिंग ही नहीं हो पा रही है और जितने लोगों का हो रहा उसका रिपोर्ट आने में काफी समय लग जाता है| Indian Council of Medical Research के अनुसार 10 करोड़ से ज्यादा आबादी वाले बिहार में मात्र एक टेस्टिंग सेंटर आरएमआरआई, पटना में कोरोना वायरस की जांच हो रही है| हालत का अनुमान इस से लगाईये की मरने के बाद पता चल रहा है कि मरने वाले का कोरोना टेस्ट पॉजिटिव है| बिहार के गया से तो एक ऐसा भी मामला आया कि मरने के बाद उस आदमी का सैंपल लिया गया|

गया में एक संदिग्ध की मौत के बाद जब उसका अंतिम संस्कार किया जा रहा था, तब डॉक्टर उसका सैंपल लेने पहुंचे। डॉक्टरों ने चिता पर रखे शव से सैंपल लिया। इस बारे में सिविल सर्जन डॉ. ब्रजेश कुमार सिंह ने बताया कि मृतक जिन-जिन लोगों के संपर्क में आया था, उन्हें क्वारैंटाइन किया जा रहा है।

गया में एक संदिग्ध की मौत के बाद जब उसका अंतिम संस्कार किया जा रहा था, तब डॉक्टर उसका सैंपल लेने पहुंचे। डॉक्टरों ने चिता पर रखे शव से सैंपल लिया। इस बारे में सिविल सर्जन डॉ. ब्रजेश कुमार सिंह ने बताया कि मृतक जिन-जिन लोगों के संपर्क में आया था, उन्हें क्वारैंटाइन किया जा रहा है।

जिस संदिग्ध की कोरोना से मौत, उसके परिजनाें को ही जबरन सौंप दिया शव

मुंगेर के एक 38 साल के युवक को एम्स में 20 मार्च को आइसोलेशन वार्ड में भर्ती किया गया था। 21 मार्च की सुबह 9:28 में मौत हो गई। कोराेना की रिपोर्ट रविवार को आई। एम्स के निदेशक डॉ. पीके सिंह ने इसकी पुष्टि की। मरीज की दोनों किडनी भी फेल्योर थी। वहीं, एम्स के आइसोलेशन वार्ड में 19 मार्च से भर्ती दीघा के पोलसन रोड की 45 साल की महिला की भी रविवार को रिपोर्ट पॉजिटिव आई। इसके अलावा एनएमसीएच में भर्ती  मरीज की भी प्राथमिक रिपोर्ट पॉजिटिव आई है, हालांकि आरएमआरआई की ओर से दोबारा मरीज की जांच कराई जा रही है। वह 3 दिन पूर्व एम्स से बिना भर्ती हुए निकल गया था। इधर, मुंबई से आए विशेष ट्रेन के 3990 यात्रियों की दानापुर में स्क्रीनिंग कराई गई। जिनमें 24 संदिग्ध मिले। इन्हें अस्पताल में भर्ती कराया गया।

छात्र भागकर घर चला गया, अब रिपोर्ट पॉजिटव

स्काॅटलैंड से फुलवारीशरीफ आया छात्र एम्स पहुंचा तो उसे आइसोलेशन के लिए कहा गया, लेकिन वह वहां से भागकर घर आ गया। जब इसकी जानकारी प्रशासन को हुई तो उसे घर से पकड़कर एनएमसीएच में भर्ती करा दिया। रविवार को उसकी कोरोना वायरस की रिपोर्ट पॉजिटिव आ गई। उसे आइसोलेशन वार्ड से अलग कर दिया गया है। वह 19 मार्च को मुंबई होते पटना एयरपोर्ट पहुंचा था।

इधर, रविवार की शाम उसकी रिपोर्ट पॉजिटिव आने की सूचना के बाद उसके गांव और आसपास में हड़कंप मच गया। प्रशासन ने उसके परिजनों को घर में ही रहने को कहा है।

उसके पड़ोस के लोगों को भी एहतियात बरतने और घर में ही रहने को कहा गया है। वह स्कॉटलैंड में कंप्यूटर साइंस का छात्र है। स्थानीय मुखिया के पति व उसके गांव के लोगों ने कहा कि जिस दिन वह आया, उस दिन भी कई लोगों से मिलते हुए घर गया। फिर जब घर से एम्स के लिए निकला तो भी आठ-दस लोगों से मिलते गया।

बिहार सरकार के लापरवाही रवैया करोड़ों लोगों की जिन्दगी खतरे में डाल रही है| बिहार में स्वास्थ आपातकाल की स्थिति पहली बार नहीं है और न ही सरकार की नाकामी पहली बार दिख रही है। हालांकि कोरोना वायरस को फैलने से रोकने के लिए कई राज्यों की तर्ज पर बिहार में भी 31 मार्च तक लॉकडाउन करने का फैसला किया है। रविवार को बिहार में भी एक कोरोना पीड़ित की मौत हुई है। इसके अलावा चार केस पॉजीटिव पाए गए हैं। सीएम नीतीश कुमार के आवास पर उच्च स्तरीय बैठक में यह फैसला लिया गया है| देश में कोरोना के कुल संक्रमित मामलों बढ़कर 341 तक पहुंच गए हैं। भारतीय रेलवे ने भी 31 मार्च तक सभी यात्री ट्रेनों को रद्द करने का फैसला लिया है।