कोटा बना सुसाइड सेंटर, एक और बिहारी छात्र ने किया आत्महत्या

कोटा: राजस्थान का कोटा शहर सुसाइड साईट बनता जा रहा है। कुछ दिन पहले बिहार के ही मुंगेर जिले की एक छात्रा के अप्रैल में कोटा में सुसाइड कर लेने की खबर आई थी। आज  बिहार के एक और छात्र ने राजस्थान के कोटा में सुसाइड कर लिया। भागलपुर से मेडिकल की तैयारी करने गए छात्र निखिल नयन ने बाथरूम में फव्वारे वाले नल में फांसी का फंदा लगाकर खुदकुशी कर ली।

 

 बिहार के भागलपुर के निखिल नाम के छात्र ने कोटा में खुदकुशी कर ली है। कुछ दिनों पहले ही वह मेडिकल की तैयारी करने कोटा गया था। 

हैरत की बात ये है कि निखिल के सुसाइड करने के दो दिन बाद इस घटना का पता चला।

निखिल कोटा के एलेन कोचिंग संस्थान नें मेडिकल की तैयारी करने गया था। निखिल जिस कमरे में रह रहा था वह दो दिनों से बंद था तो आस-पास रहने वाले छात्रों को शक हुआ, इसके साथ ही उसके कमरे से बदबू आने लगी तो छात्रों ने पुलिस को सूचना दी।

मंगलवार देर रात जब निखिल के कमरे का दरवाजा तोड़ा गया तो उसका शव बरामद हुआ जिससे सड़ांध आ रही थी। मामले की तहकीकात की जा रही है। निखिल के हॉस्टल के छात्रों से भी पूछताछ की जा रही है। मौके से पुलिस को सुसाइड नोट नहीं मिला है, लेकिन शुरूआती जांच में पता चला है कि पढ़ाई के तनाव की वजह से आत्महत्या किया है।

पुलिस ने शव को अपने कब्जे में ले लिया और उसके परिजनों को इत्तला दे दी है, परिजन आज शाम तक वहां पहुंचेंगे। मामले की तहकीकात की जा रही है। छात्रों से भी पूछताछ की जा रही है।

 

कोटा में सुसाइड की यह पहली घटना नहीं है। 

Sucide point kota

अप्रैल में मुंगेर की छात्रा ने कर लिया था सुसाइड

इससे पहले बिहार के ही मुंगेर जिले की एक छात्रा ने अप्रैल में कोटा में सुसाइड कर लिया था। पुलिस ने उसकी लाश हॉस्टल के कैम्पस से बरामद की थी। सुसाइड की पूरी घटना हॉस्टल में लगे सीसीटीवी कैमरे में कैद हो गई थी।

वैष्णवी (16) न्यू राजीव गांधी नगर के गुरु वात्सल्य हॉस्टल में रहकर पढ़ाई कर रही थी। दसवीं बोर्ड का एग्जाम देकर ही वह कोटा में आईआईटी जेईई की तैयारी करने आ गई थी। वैष्णवी के पेरेंट्स ने बताया कि वह साइंटिस्ट बनना चाहती थी।

 

हॉस्टल में लगे सीसीटीवी कैमरे में वैष्णवी की रात की सारी एक्टिविटी कैद हो गई। वैष्णवी ने रूम में हाथ की नस काटी थी। पुलिस को वैष्णवी के कमरे के बाहर खून मिला है। हॉस्टल की गैलरी से होते हुए चौथी मंजिल पर जाकर वहां से छलांग लगा दी। वो छत से कूदी तो पीठ के बल जमीन पर गिरी।

 

इससे पहले बिहार के छात्रों के बीच हुई थी खूनी वारदात

कोटा में छात्रों के बीच हिंसक भिड़ंत में एक कोचिंग छात्र की मौत हो गई। उस पर बड़ी संख्या में आए अन्य छात्रों ने हथियारों से हमला किय, जिसमें18 साल के सत्य प्रकाश तीन साल से कोटा में रहकर कोचिंग ले रहा था। इस हमले में उसकी मौके पर ही मौत हो गई, जबकि उसका साथी संदीप बुरी तरह घायल हो गया। सत्यप्रकाश बिहार के नवादा का रहने वाला था।

 

अपने बच्चे को डाक्टर और इंजीनियर बनाने का सपना पूरा करने के लिए कोटा भेजने वाले माता-पिता को एक बार ठीक से विचार जरुर करना चाहिए।  वैसे माता – पिता को भी अपने आप में आत्म चिंतन करना चाहिए जो अपने बच्चेपर डाक्टर और इंजीनियर बनने का दवाब देते है।  एक बार सोचिये जरूर, यह आपके बच्चे के जिंदगी का सवाल है।

 

 

बिहार के सिर्फ आनंद कुमार नहीं बल्कि अभयानंद के सुपर 30 से भी 300 में से 270 छात्रों ने किया IIT JEE क्रैक..

पटना: सिर्फ पटना सुपर30 के संचालक आनंद कुमार ही नहीं बल्कि बिहार के पूर्व D. G. P अभयानंद भी हर साल गरीब मेधावीं बच्चों को आईआईटी में दाखिला करवाते है।  

 

पढाने का जुनून हो, कुछ अलग करने का जुनून हो तो वक्त की कमी तो बस बहाना है। आइजी अंकल के नाम से मशहूर बिहार के पूर्व डीजीपी अभयानंद को भी एक एेसा ही जुनून है- बच्चों को पढाना और आइआइटी की तैयारी कराना।

 

इस साल भी उनके द्वारा देश भर में संचालित रहमानी सुपर 30 से 270 बच्चों को आइआइटी की परीक्षा में उत्तीर्णता हासिल की है। वे कहते हैं जब बच्चों का रिजल्ट आता है तो उनको एसे खुशी महसूस होती है जैसे उनका खुद का रिजल्ट आया हो।

 

इस बार 270 बच्चों ने आइआइटी क्रैक किया है।

अभयानंद बताते हैं कि इस बार उनके रहमानी सुपर थर्टी और देश के बाहर सीएसआर के तहत चल रहे संस्थानों से 270 बच्चों ने आइआइटी क्रैक किया है। तीन सौ बच्चे इस कतार में थे। वह कहते हैं कि मेरी यह धारणा बन रही है कि अब हर समाज के लोग यह कोशिश कर रहे हैं बच्चे पढ़ें। उन्हें यह समझ में आ गया है कि यह सरकार के बूते की बात नहीं। समाज की मदद से ही आंकड़ा बढ़ रहा है। यह अच्छा है।

 

बिजी शिड्यूस से वक्त निकालकर प्रसिद्ध गणितज्ञ आनंद कुमार के सुपर-30 में फिजिक्स पढ़ाना शुरू किया। वहां बच्चे उन्हें आइजी अंकल कहते थे। एडीजी बनने के बाद भी बच्चे उन्हें इसी नाम से पुकारते थे।
उनके शिक्षक रहते सुपर-30 आइआइटी को रिकार्डतोड़ सफलता मिली। फिर कुछ कारणों से अभयानंद सुपर-30 से अलग हो गए और इसी साल आइजी अंकल के पढाने के जुनून के कारण ही रहमानी सुपर 30 की स्थापना हुई। इसके बच्चे हर साल आइआइटी में अपनी सफलता का परचम लहराते रहे हैं, इस बार भी रहमानी क्लासेज के 270 बच्चों ने आइआइटी क्रैक किया है। यह अभयानंद जी का ही कमाल है।
रिटायरमेंट के बाद और मेहनत की।
सुपर-30 से अलग होने के बाद उन्होंने मुस्लिम बच्चों को पढ़ाने की योजना बनाई। यहीं से जन्म हुआ रहमानी सुपर 30 का। वली रहमानी ने जगह उपलब्ध करायी इसीलिए इसका नाम रहमानी सुपर 30 पडा।  मुस्लिम बच्चों ने भी सफलता हासिल की। बच्चों के आइजी अंकल एडीजी हुए और डीजीपी होने के बाद कुछ वर्ष पहले रिटायर भी हो गए हैं मगर पढ़ाने और पढऩे का सिलसिला आज भी लगातार जारी है।

 

बिहार के लिए आनंद कुमार अभयानंद जैसे लोग गौरव है जो बार बार बिहार और बिहारी का नाम रौशन करते रहते है।