इस बच्ची का क्या दोष? आईआईटी पास मगर बोर्ड ने इंटर रिजल्ट पर लगा रखा है रोक

पटना: दोष किसी का और सजा किसी और को!  जी हाँ,  बिहार में फर्जी टॉपर के कारण असली टॉपर को भी टॉपर बनने का सजा मिल रहा है। शिवानी सिंह बिहार में इंटर साइंस की सातवीं टॉपर और आईआईटी प्रवेश परीक्षा भी निकाल चुकी है मगर इस मेधावी छात्रा का आईआईटी जाने का सपना टूट सकता है क्योंकि इसका दोष है कि इसने बच्चा राय के कॉलेज से पढ़ाई की है। उन्हीं छात्रों में से एक शिवानी सिंह है।  

 

बोर्ड के रिव्यू टेस्ट में भी शिवानी पास कर गई है फिर भी बोर्ड ने उसका रिजल्ट रोक दिया है। पिता रोज बोर्ड औफिस के चक्कर लगा रहे है।  बेटी का दाखिला आईआईटी में करवाना है। शिवानी को 5 जुलाई तक अपना कागज जमा करना है।  मगर बोर्ड ने रिजल्ट रोक रखा है।  इसका जुर्म यही है कि इसने उसी बोर्ड द्वरा मान्यता प्राप्त वी आर कॉलेज से पढी।

 

इंजीनियरिंग की तैयारी करने वाले हर छात्र का सपना होता है कि उसका सलेक्शन आईआईटी में हो जाए। इसे सच करने के लिए दिन रात मेहनत करते हैं। शिवानी को उसके मेहनत का फल तो मिल गया है।मगर बिहार के कुछ फर्जी टॉपर उसके जिंदगी में विलेन की तरह आए हैं।

 

असली टॉपर शिवानी जेईई-मेंस की परीक्षा पास कर चुकी है और पांच जुलाई तक सर्टिफिकेट प्रस्तुत करने हैं पर शिवानी सिंह के लिए मुश्किलें खड़ी हो गई है। सरकार ने विशुन राय कालेज के रिजल्ट पर रोक लगा दिया है।
दरअसल सरकार ने शिवानी सिंह के साथ विशुन राय कॉलेज के सभी छात्रों का रिजल्ट रोक दिया है। उधर शिवानी को IIT में दाखिला लेने के लिए 5 जुलाई तक सभी दस्तावेज जमा कराने हैं। ऐसे में अगर शिवानी को दाखिला नहीं मिल पाएगा। आपको बता दें कि जांच परीक्षा में भी शिवानी पास हो गई थी।

 

सातवीं टॉपर थी शिवानी
शिवानी को इंटर की परीक्षा में साइंस में 417 अंक मिले थे। साइंस टॉपर की सूची में वो सातवें स्थान पर थी और टॉपर घोटाले के बाद परीक्षा समिति ने विशेष टीम ने शिवानी का सक्षात्कार लिया था जांच के बाद शिवानी फिर से सफल घोषित की गई।
बोर्ड ने रिजल्ट पर लगा दिया रोक

 

बोर्ड औफिस के लगा रहे चक्कर
परिजन पिछले 15 दिनों से बोर्ड ऑफिस के चक्कर काट रहे हैं पर बोर्ड की तरफ से शिवानी का रिजल्ट जारी किये जाने पर कार्यवाही नहीं हुई है।
बिहार विधालय परीक्षा समिति के अध्यक्ष आनंद किशोर ईनाडु इंडिया से कहा कि विशुन राय कॉलेज के सभी छात्रों का रिजल्ट रोका गया है, जांच में कॉलेज की अस्तित्व पर ही प्रश्न चिन्ह लग चुके हैं और पुलिस हर बिंदु पर जांच कर रही है। किशोर ने कहा कि कालेज ही फर्जी है ऐसे में बिना पुरा किए बिना रिजल्ट प्रकाशित करना बेहद मुश्किल काम है।

 

यह बच्चों के भविष्य का सवाल है।  बोर्ड को जल्द से जल्द जांच पूरी करनी चाहिए ताकी जो दोषी हैं वह बचे नहीं और जो निर्दोष है उसके साथ अन्याय न हो। बोर्ड को कम से कम एसे बच्चों का रिजल्ट जारी कर देना चाहिए जो बोर्ड के समक्ष उपस्थित हो इंटरव्यू दे अपने को असली टॉपर साबित कर चुका है।

 

जन-जन की एक ही पुकार, मत बदनाम करो बिहार

पटना: अब बिहार के लोग पहले के तरह बिहार के खिलाफ कुछ भी सुन के चुप नहीं हो जाते बल्कि अब उसको करारा जवाब देते है वह भी सबूत और तथ्य के साथ। 

 

बिहार मेधा घोटाले, रूबी राय और बच्चा राय जैसे चंद नाम को ले और लोगों को आधा सच दिखा कुछ दिनों से मिडिया से लेकर सोशल साईटों पर बिहार के पूरे मेधा को और बिहारी लोगों के काबलियत का सरेआम मजाक उडाया जा रहा है और बिहार के छवि को नुकसान पहुचाया जा रहा है।  एक -दो लो उदाहरण को ले कर बिहार के सभी होनहार और टॉप बिहारी ब्रेन को रुबी राय नमूना बताया जा रहा है।

 

इसी के खिलाफ ‘आपन बिहार’ के नेतृत्व में सोशल साईटों पर बिहार को बदनाम करने वालों के खिलाफ एक जबरदस्त मुहीम चलाया जा रहा है हैशटैग #MatBadnamKaroBiharKo 

 

इस मुहीम के समर्थन में पूरा बिहारी समाज एक जुट हो गया है और फेसबुक,  Whatsapp से लेकर twitter तक यह हैशटैग ट्रेंड कर रहा है।  रोज हजारों की संख्या में लोग इस हैशटैग के साथ इसके समर्थन में पोस्ट व् शेयर कर रहें है चारों तरफ से लोग कह रहें है कि एक मामले को मुद्दा बना बिहार को बदनाम करना गलत है।

 

इस मुहीम के चलने के बाद बिहार को बदनाम करने वालों की आवाज अब कम सुनाई दे रही है और इसका असर भी दिख रहा है।

 

बिहार कैडर के आईपीएस अफसर कमल किशोर ने भी अपने फेसबुक इसके समर्थन में पोस्ट करते हुए कहा “What is wrong cannot and must not be condoned. But, the wrongdoings by a few should not be held against the entire clan,”

 

 तो सुपर 30 के संस्थापक आनंद कुमार ने भी इस मुहीम का समर्थन करते हुए कहा कि “I am supporting the campaign because the world needs to know that Bihari mind is a powerhouse and Biharis have reached places through sheer talent and hard work,” said the maths teacher who has posed for the campaign with a signboard that says ‘Mat badnam karo Bihar ko’.

 

इस मुहीम में शेयर किये जा रहे कुछ तस्वीर

 

फेसबुक पर लोग इसे अपना प्रोफाईल फोटो लगा रहे है

फेसबुक पर लोग इसे अपना प्रोफाईल फोटो लगा रहे है

 

ये आज से नही कई दशको से ट्रेंड चला आ रहा है, बिहार को नीचा दिखाने का। कोई भी मौका नही चूकते ये बिहारियों को लताड़ने में। प्लीज़ अब बस भी करो। ‪#‎MatBadnamKaroBiharKo‬

ये आज से नही कई दशको से ट्रेंड चला आ रहा है, बिहार को नीचा दिखाने का।
कोई भी मौका नही चूकते ये बिहारियों को लताड़ने में।
प्लीज़ अब बस भी करो।
‪#‎MatBadnamKaroBiharKo‬

 

बिहार को बदनाम करने वाले आँखों पर एक अलग चश्मा लगा लिए हैं

बिहार को बदनाम करने वाले आँखों पर एक अलग चश्मा लगा लिए हैं

 

आपन बिहार के इस मुहीम को आनंद कुमार ने भी समर्थन दिया है।

आपन बिहार के इस मुहीम को आनंद कुमार ने भी समर्थन दिया है।

 

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विश्व प्रसिद्ध अमेरिकी पत्रिका फोर्ब्स ने दुनिया के 30 साल से कम उम्र के 30 सर्वश्रेष्ठ सामाजिक उद्यमियों की सूची निकाली है जिसमें बिहार के शरद सागर को शामिल किया गया है। यह पहला मौका है जब किसी बिहार के निवासी को फोर्ब्स पत्रिका में जगह मिली है।

विश्व प्रसिद्ध अमेरिकी पत्रिका फोर्ब्स ने दुनिया के 30 साल से कम उम्र के 30 सर्वश्रेष्ठ सामाजिक उद्यमियों की सूची निकाली है जिसमें बिहार के शरद सागर को शामिल किया गया है। यह पहला मौका है जब किसी बिहार के निवासी को फोर्ब्स पत्रिका में जगह मिली है।

बिहार बोर्ड के नये अध्यक्ष आनंद किशोर के बनते ही बोर्ड में हरकंप मचा हुआ है

पटना: इंटर बोर्ड परीक्षा के परिणाम में हुई गड़बडी और टॉपर घोटाले के लिए पूरे देश में बदनामी झेल रहे बिहार बोर्ड  अभी पूरे सिस्टम को क्लीन करने में लगे है। नए बोर्ड अध्यक्ष आनंद किशोर इसका नेतृत्व कर रहे है।  

 

इसी क्रम में जो कर्मचारी तीन साल से ज्यादा समय से कार्यालय में बने हुए थे, वरिष्ठ आईएएस अधिकारी आनंद किशोर ने  वैसे 218 कर्मचारियों का तबादला कर दिया है।

आनंद किशोर ने टॉपर घोटाला सामने आने के बाद वैसे कर्मचारियों को पहले ही निलंबित कर दिया है, जिनका जरा सा भी कनेक्शन घोटाले में सामने आया था. आनंद किशोर की इस कार्यवाही के बाद बोर्ड ऑफिस के कर्मचारियों में हड़कंप की स्थिति है.

 

उधर खबर आ रही है कि टॉपर घोटाला के मुख्य आरोपी के खिलाफ पुलिस के पास पुख्ता सबूत है।

 

एसआइटी की टीम ने बच्चा राय को दो दिनों के रिमांड पर लेकर शुक्रवार को पहले दिन पूछताछ की. एसआइटी की टीम ने इंटर मेधा घोटाले के संबंध में पूछा तो उसने पहले ही तरह ही रटा-रटाया जबाव दिया कि वह निर्देाष है और उसे फंसाया जा रहा है. जिस दिन बच्चा राय पकड़ा गया था, उस समय पुलिस के पास उसके खिलाफ साक्ष्य नहीं था मगर वहीं एसआइटी ने जैसे ही पुलिस की टीम ने विशुन राय कॉलेज परिसर व अन्य ठिकानों से बरामद समानों की जानकारी देने के साथ ही उसे जब दिखाया तो उसकी बोलती बंद हो गयी और उसके मुंह से जवाब तक नहीं निकला. इसके बाद एसआइटी टीम ने प्रश्नों की बौछार कर दी. एक तरह से एसआइटी टीम ने उससे पूछताछ के बाद मान लिया कि बच्चा राय ही इंटर मेधा घोटाले का मुख्य आरोपित है और वह बिहार बोर्ड के पूर्व अध्यक्ष लालकेश्वर प्रसाद सिंह के साथ मिलकर गोरखधंधा कर रहा था.

 

 

ये हैं असली टॉपर, इन्‍हें सलाम कीजिए

कुमुद सिंह/पटना: पत्रकारिता पेशा नहीं है। पत्रकारिता जूनून है। हर दिन हजारों लाखों खबरें हमारे आपके सामने से गुजर जाती है, लेकिन दशकों में कोई एक ऐसी खबर होती है जो हमें वर्षों तक याद रहती है।

toppers scam

आज बिहार में हजारों पत्रकार हैं, लेकिन जिन दो पत्रकारों के कारण हजारों पत्रकार अपनी पत्रकारिता पर गर्व कर रहा है वो यही हैं। टॉपर मामले के असली जमीनी हीरो।

 


चारा घोटाला हो या कोयला घोटाला, अक्‍सर जब मामले राष्‍ट्रीय स्‍तर पर चले जाते हैं, तो बडे और प्रसिद्ध पत्रकरों की भीड में वो पत्रकार कहीं दब जाता था, जिसकी नजर सूचना के बदले समचार पर पहुंची थी। जिस प्रकार वर्षा की हर बूंद मोती नहीं बनती है, वैसे ही हर सूचना में समाचार नहीं होता है।

अभी बिहार के दो बडे पत्रकार अमिताभ ओझा अौर इंदुभूषण जी के वाल पर इन दो नायकों के संबंध में पोस्‍ट दिखा तो शेयर करने से खुद को नहीं रोक पायी। ये दो चेहरे वही है जिन्‍होंने मेहनत कर एक ऐसी खबर ( बिहार बोर्ड इंटर टॉपर घोटाला ) सबके सामने लायी है, जिसने पूरे देश को हिला कर रख दिया है। अगर इनका लिय हुआ इंटरव्यू नहीं आया होता, तो इतने बड़े घोटाले का पर्दाफाश नहीं हो पाता।

 


जी हां, ये हैं बिहार के वैशाली जिले के दो पत्रकार जिसे न्यूज की दुनिया में स्ट्रिंगर कहते हैं। गुलाबी शर्ट में इंडिया न्यूज के चन्द्रमणि और उनके बगल में सहारा समय के प्रकाश मधुप हैं। गौरतलब है कि न्‍यूज चैनलों के मुकाबले अखबारों के पत्रकार बिहार में दस गुणा ज्‍यादा हैं।
लेकिन जहां अखबार के पत्रकार सूचना समेटते रहे, वहीं, रिजल्ट के दो दिन बाद साइंस के टॉपर सौरभ से चन्द्रमणि ने अपने मित्र प्रकाश के साथ इंटरव्यू किया। चन्द्रमणि को विज्ञान की जानकारी थी, सो उन्होंने पूछा कि पीरियॉडिक टेबल में मोस्ट रिएक्टिव एलिमेंट क्या होता है। इसपर सौरभ ने जवाब दिया ‘एल्युमिनियम’।

फिर पूछा कि सोडियम के इलेक्ट्रॉनिक स्ट्रक्चर के बाहरी कक्षा में कितने इलेक्ट्रॉन होते हैं। वह नहीं बता पाया। इस सवाल के बाद सौरभ के माता –पिता अपने बेटे के बचाव में आ गये और कहने लगे कि अभी यह बच्चा है।

 

इंटर आर्ट्स की टॉपर रूबी से प्रकाश मधुप ने सवाल पूछा कि उसका कौन-कौन सा सब्जेक्ट था, साथ में कैमरा खुद कर रहे थे। रूबी बताने लगी- इंग्लिश, ज्योग्राफी, म्यूजिक, प्रोडिकल साइंस। रुबी राय ज्योग्राफी भी ठीक से नहीं बोल पा रही थी। जब रूबी का जवाब आया तब वह खुद भी हंसने लगे जिसकी वजह से कैमरा भी हिलने लगा। ये सच वीडियो में देखा जा सकता है। फिर उससे पूछा गया कि यह ‘प्रोडिकल साइंस’ क्या होता है? यह नया विषय कौन सा है और इसमें किस चीज की पढ़ाई होती है। रुबी राय बोली— खाना बनाने के बारे में पढ़ाया जाता है। जब उनसे यह पूछा गया कि होम साइंस में क्या पढ़ाया जाता है, तो उसका भी जवाब नहीं दे सकी। रुबी राय के जवाब से उनके मां–बाप भी हंस पड़े थे।

 


अब मैं कुमुद सिंह भरतीय मीडिया का हिस्‍सा बनते हुए दावा करती हूं कि यह पूरी कहनी मेरी एक्‍सक्‍लूसिव है..सिर्फ मेरे वाल पर…। दूसरे के काम का नंबर कैसे अपने मार्कशीट में दर्ज कर लिया जाता है यह कोई भारतीय मीडिया के टॉपरों से सीखे।

 

सभार- कुमुद सिंह