खुशखबरी: इस प्रमंडलीय मुख्यालय में खुलेगा बिहार का 11वां विश्विद्यालय

बहुत दिनों से मुंगेर में विश्वविद्यालय खोलने की मांग जल्द ही पूरी होने वाली है।  मुंगेर में नया विश्वविद्यालय बनेगा। शिक्षा विभाग ने प्रस्ताव तैयार कर लिया है। जल्द ही मंजूरी के लिए कैबिनेट को भेजा जाएगा। शिक्षा विभाग की विभिन्न योजनाओं की प्रगति की समीक्षा के दौरान मंत्री डॉ. अशोक चौधरी ने यह जानकारी दी। यह राज्य का 11वां विश्वविद्यालय होगा। इसके पहले पाटलिपुत्र और पूणिया में विश्वविद्यालय खोलने के प्रस्ताव को कैबिनेट व राजभवन से मंजूरी मिल चुकी है।

 

तिलकामांझी व मिथिला विश्वविद्यालय के साथ बेगूसराय के कॉलेज भी होंगे शामिल

प्रस्तावित मुंगेर विश्वविद्यालय में मुंगेर प्रमंडल के सभी जिलों के कॉलेज शामिल होंगे। इसमें तिलकामांझी व एलएन मिथिला विश्वविद्यालय, दरभंगा के कॉलेज भी शामिल होंगे। बेगूसराय जिले के कॉलेज भी इसी के तहत आएंगे। इस प्रकार मुंगेर विवि को 21 अंगीभूत कॉलेजों के साथ-साथ संबंधित जिलों के संबद्ध व व्यावसायिक कोर्स कॉलेज मिलेंगे। वहीं, टीएम विवि भागलपुर को प्रमंडल के 12 अंगीभूत कॉलेजों के साथ-साथ संबंधित जिलों के संबद्ध व व्यावसायिक कोर्स कॉलेज मिलेंगे।

गौरतलब है कि मुंगेर में विश्वविद्यालय खोलने का मामला अब तूल पकड़ चुका था. स्थानीय स्तर पर राष्ट्रीय जनता दल के नेता विश्वविद्यालय निर्माण संघर्ष मोरचा बना कर वातावरण बनाने में लगे थे तथा हस्ताक्षर अभियान व संगोष्ठी के माध्यम से इसे जन आंदोलन का रूप दे रहे थे।

 

 

खुशखबरी: पटना में महान सम्राट अशोक के नाम खुलेगा एक और विश्वविद्यालय

पटना: बिहार के छात्रों और खासकर मगध विश्वविद्यालय से परेशान छात्रों के लिए एक बडी खुशखबरी है।  कल शिक्षा मंत्री अशोक चौधरी ने यह एलान किया किया कि पटना में महान सम्राट अशोक के नाम पर एक नया विश्वविद्यालय खोला जाएगा।  ?

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राजधानी को एक और विश्वविद्यालय की सौगात मिलेगी।  यह विश्वविद्यालय पटना के बेउर इलाके में खुलेगा। इसके अंतर्गत पटना और नालंदा के कॉलेज आयेंगे।  अशोक चौधरी ने मगध विश्वविद्यालय के शाखा कार्यालय में आयोजित स्नातक पार्ट-3 के रिजल्ट प्रकाशन के अवसर पर आयोजित समारोह में उन्होंने यह जानकारी दी।

 

मंत्री ने कहा कि सीएम की इच्छा है कि सम्राट अशोक के नाम पर विवि खोला जाए। कैबिनेट में इसपर चर्चा भी हुई है। बेऊर के पास विवि के लिए जमीन देखी जा रही है। जमीन मिलने के बाद इसपर आगे का काम शुरू होगा। सम्राट अशोक विवि के अंतर्गत पटना में स्थित मगध विवि के कॉलेज होंगे। इससे छात्रों को काफी सहुलियत मिलेगी। इससे पहले विवि के पदाधिकारियों ने मंत्री से अनुरोध किया था कि इतने बड़े विवि के बारे में भी वे कुछ सोचें। इसके तत्काल बाद शिक्षा मंत्री ने मगध विश्वविद्यालय के पदाधिकारियों की चिंता का जवाब दिया और सम्राट अशोक के नाम पर विवि खोलने की घोषणा कर दी।

 

इस यूनिवर्सिटी को बनाने के लिए बेऊर के पास जमीन भी देखी गई है. जमीन मिलने पर काम शुरू होगा. इससे पहले भी बिहार के मुख्यमंत्री ने पुर्णिया में विश्वविद्यालय खोलने के लिए ऐलान किया था. बिहार ने शिक्षा के क्षेत्र में कई बड़े कदम उठाये है. इस ऐलान के बाद छात्रों को प्राइवेट कॉलेज पर कम आश्रित रहना पड़ेगा और छात्रों की बढती संख्या के लिहाज से भी एक बड़ा कदम है.

शिक्षा मंत्री ने कहा कि शिक्षा को बेहतर करना हमारा उद्देश्य है।

देश की मिडिया : अगर टॉपर बनोगे बिहार में तो बदनाम करेंगे देश में !!

 आज कल सोशल मीडिया के तथाकथित इंटेलेक्चुअल लोगो की प्रजाति बिहार बोर्ड के Toppers के बारे में लंबा चौड़ा आलेख लिख कर, भाँति-भाँति की टिप्पणियॉ से सोशल मीडिया को भर रखा है। और होना भी चाहिए इतनी बड़ी घटना जो हुयी हैं। लेकिन सबसे ज्यादा आश्चर्य कई सारे महानुभाव की लेखों को पढ़कर ये हुआ की इनमे से ज्यादा प्रजाति बिहारियों को गरिया रहे है, कोई बिहार के सारे आइएस, आईपीएस, डॉक्टर्स और इंजीनियर को फ़र्ज़ी बता रहा है तो कुछ लालू जी के नौंवी पास लल्लन की बखिया उदेरने में लगे है कुछ बिहारियों को सिर्फ इसलिए गाली दे रहे है की उन्होंने बीजेपी को वोट नही दिया और लालू और नितीश की सरकार वहां आ गयी।

 

कोई ये मनवाने में लगा है की बिहार के सभी बोर्ड (CBSE, ICSE) का भी यही हाल है और सभी नक़ल कर ही आईआईटी और आईआईएम में एडमिशन हासिल करते आये है। बिहार बोर्ड के Toppers की पोल खुलने के बाद सभी लोग इस खबर को शेयर करके ऐसे पोस्ट कर रहे है जैसे पता नही क्या हो गया।

 

जो हुआ बहोत बुरा हुआ और ये बिहार में शिक्षा व्यवस्था की पोल खोलता नज़र आ रहा है लेकिन इस बारे में कोई भी बात नही कर रहा है या कहना चाह रहा है की इन Toppers के Oral और written Reassessment में 13 में से 11 बिलकुल पास हुए!

इसका मतलब ये की जिन बिहार के Toppers की पुरे देश में चर्चा हो रही है उनमे सभी फर्ज़ीवाड़े से टॉप नही किया है। सिर्फ दो छात्र पास नही हुए इसके बावजूद कुछ लोग सभी toppers को शर्मशार कर रहे है, पता नही उनकी प्रॉब्लम क्या है या किस्से है?

बिहार से नफरत है, बिहारियों से उनकी जलती है या चारा खाने वाले परिवार से उनको प्रॉब्लम है या जो भी कारक हो!

 

इससे लोगो की घटिया मानसिकता के अलावा कुछ और नज़र नही आता दिख रहा है। सभी लोगो को एक ही रंग में रंगने का कोई मतलब नही निकलता। अगर बिहार में नितीश या अरविन्द केजरीवाल द्वारा सत्यापित लालू जी की सरकार आई भी तो क्या सभी लोगो ने आँख मूँद कर सिर्फ महागठबंधन को वोट दिया ???

नही न। Ias, Ips, Ifs, IIT, Medical, Bank PO या कोई भी ऐसा Recruitment Exam नही है जहाँ सिर्फ Marks के basis पर लोगो का चयन होता हो। हर प्रतियोगिता परीक्षा के लिए इनके dedicated domain की परीक्षाये होती है फिर भी कुछ पढ़े लिखे गवाँर जिनको की Intellectual गँवार बुलाना चाहूँगा वो बार बार अपने दो कौरी के आलेखों में बार बार इस बात का जिक्र कर रहे है जैसे की Ias, Ips की जॉब 10वीं की परीक्षा पास करने के बाद मिल जाती है।

 

पटना में कुछ दिनों पहले बिहार से Indian Foreign Service की सेवा देने वाले बिहार बोर्ड Toppers की मीटिंग हुयी जिसमे Columbia, Senegal, Ukraine, Argentina जैसे देशो के राजनयिकों ( Indian Ambassador) ने एक Joint Statement दिया जिसमे उन्होंने बिहार बोर्ड से निकले हुए अभी तक के सभी लोगो पर सवाल उठाने वाले महानुभावो के आरोपों पर दुःख व्यक्त किया और साथ में ये भी कहा की हम भी अपने समय में बिहार बोर्ड से निकले हुए छात्र रहे है।

 

कुछ चिन्दिचोरो और राजनेताओ के सह पर काम कर रहे है शिक्षा माफियाओ के वजह से सभी बिहारी छात्रो पर संदेह करना बिलकुल भी सही नही है।

 

टॉपर का रिजल्ट रद्द कर दिया गया, सम्बंधित कॉलेज का मान्यता भी रद्द कर दिया।
मगर अशोक चौधरी जी सबसे बड़ा दोषी बिहार बोर्ड पर मौन क्यों है?
क्या बोर्ड की कोई गलती नहीं?
नकल मुक्त परीक्षा कराने की जिम्मेदारी किसकी है?
कॉपियों के मूल्यांकन की जिम्मेदारी किसकी है?
सिर्फ बच्चों पर दोष मढ़ कर शिक्षा विभाग अपने नाकामी पर पर्दा डाल रहीं है। कौन छात्र नहीं चाहता कि परीक्षा में उसको अच्छा अंक प्राप्त हो और अगर उसको काबलियत से ज्यादा अंक किसी तरह आ भी गया तो उसका जिम्मेदार कौन????

 

किसी IAS के इंटरव्यू से कम नहीं था। हर कदम पर टॉपरों को देना पर रहा है अग्निपरीक्षा। कभी मिडिया के सामने तो कभी बोर्ड के सामने। अगले साल से बच्चे टॉपर बनने से भी डरेंगे।

 

नोट : इस पोस्ट का मक़सद बिहार बोर्ड के फ़र्ज़ी Toppers, बिहार के CM या नेताओ को डिफेंड नही करना बल्कि फेसबुक पर और मिडिया में सक्रीय भाँति भाँति के प्रजातियों को ये सन्देश देना है की जो की आइएस, आईपीएस और आईआईटियंस सिर्फ 10वीं के सर्टिफिकेट दिखने से नही बन जाते है और बिहार बोर्ड के अलावा CBSE और ICSE बोर्ड से भी 10वीं की परीक्षा देने वाले विद्यार्थियो की भी भरमार है इस प्रदेश में।