विश्वस्तरीय शिक्षा के द्वार मुसहर समाज में नेतृत्व की नीव डाल रहे हैं बिहार के शरद सागर

ये बच्चें जो आज छात्रवृत्ति पर विश्वस्तरीय शिक्षा हासिल करने जा रहे हैं, वो कल अपने समाज की आवाज़ बनेंगे.

दलित समाज देश में सबसे गरीब और पिछड़ा समाज है, मगर बिहार में मुसहर जाति को दलितों में भी महादलित के रुप में जाना जाता है। गूगल पर जब आप मुसहर जाति को सर्च कीजियेगा तो आपको पता चलेगा कि इस समाज को ‘मुसहर’ इसलिए कहा जाता है कि इस जाती के लोग जीवित रहने के लिए चूहा (मूसा) खाते हैं। उनके गरीबी, पिछड़ेपन और उनके साथ हुए शोषण का अंदाजा आप इस बात से लगाईये कि किसी व्यक्ति को किस परिस्थिति में चूहा खाने को मजबूर होना पड़ता होगा।

मगर इसी गूगल न्यूज पर इसी समाज के दो होनहार छात्रों की एक खबर दो दिनों से पूरे देश में ट्रेंड कर रही है, जो न सिर्फ एक बेहतर कल की उम्मीद देती है, बल्कि देश के लोगों को प्रेरित भी कर रही है।

बिहार के महादलित समाज के गौतम कुमार (18) और अनोज कुमार (18) ने प्रतिष्ठित अशोका विश्वविद्यालय से स्नातक की पढ़ाई के लिए 42-42 लाख रूपए की पूर्ण छात्रवृति हासिल की है। पटना जिले के मसौढ़ी और जमसौत रहने वाले ये दोनों छात्र मुसहर समुदाय से आते हैं। दोनों के पिता देहारी मज़दूर हैं और परिवार गरीबी रेखा से नीचे जीवन यापन करने को मजबूर हैं।

सबसे बड़ी बात है कि गौतम और अनोज अपने परिवार से कॉलेज जाने वाले पहले सदस्य होंगे और उन दोनों को राष्ट्रीय संगठन डेक्सटेरिटी ग्लोबल द्वारा चयनित एवं प्रशिक्षित किया गया है। डेक्सटेरिटी ग्लोबल शैक्षणिक अवसरों और प्रशिक्षण के माध्यम से भारत एवं विश्व के लिए नेतृत्व की अगली पीढ़ी तैयार करने में कार्यरत है।

अनोज

यह छात्रवृति गौतम और अनोज के चार साल की पढाई की पूरी लागत को कवर करेगी – ट्यूशन, निवास, किताबें और आपूर्ति, स्वास्थ्य बीमा, और यात्रा व्यय इत्यादि। इसके अतिरिक्त दोनों छात्रों को व्यक्तिगत खर्चों के लिए मासिक जेब खर्च भी मिलेगा। अशोका विश्वविद्यालय प्रसिद्ध शिक्षाविदों एवं उद्योगपतियों द्वारा स्थापित एक प्रमुख लिबरल आर्ट्स संस्थान है जहाँ 18 से अधिक देशों के छात्र-छात्राएँ पढ़ते हैं।

अशोका विश्वविद्यालय में गौतम कंप्यूटर साइंस में डिग्री हासिल करेंगे, जबकि अनोज गणित में अपनी प्रतिभा को आगे ले जाएंगे।

गौतम और अनोज दोनों ने अपने इस उपलब्धि पर प्रतिक्रिया देते हुए यह जोड़ देकर यह कहा कि वे अपनी शिक्षा का उपयोग अपने समुदाय की सेवा करने में करेंगे। यह एक बड़ी बात है। अगर हम किसी भी समाज के पिछड़ेपन के वजह को खोजें तो एक प्रमुख वजह उस समाज में शिक्षा की कमी होती है।

बाबा साहब अम्बेडकर कहते थे कि पिछड़ों को अगर उनको अपना हक लेना है तो उसे सबसे पहले शिक्षित होना होगा।

जैसे बाबा साहेब ने छात्रवृत्ति पर विश्वस्तरीय शिक्षा हासिल करके दलितों और पिछड़ों को बराबरी का अधिकार दिलवाया। ठीक उसी तरह ये बच्चें जो आज छात्रवृत्ति पर विश्वस्तरीय शिक्षा हासिल करने जा रहे हैं, वो कल अपने समाज की आवाज़ बन सकते हैं।

गौतम और अनोज के इस कामयाबी के पीछे शरद सागर और उनकी संस्था डेक्सटेरिटी ग्लोबल का एक अहम योगदान है। शरद सागर ने अपने संस्था के माध्यम से इन छात्रों को लंबी छलांग लगाने के लिए तैयार किया है। ज्ञात हो कि पटना स्थित डेक्सटेरिटी ग्लोबल के कई बच्चें विश्वस्तरीय छात्रवृति और अवसरों को अपने नाम कर रहे हैं। शरद सागर शैक्षणिक अवसरों के द्वारा गौतम और अनोज जैसे युवाओं की एक फौज को अगली पीढ़ी के नेतृत्व के लिए तैयार कर रही है।

हाल ही में संगठन ने घोषणा किया कि संगठन के बच्चों को इस वर्ष एशिया, अमेरिका और यूरोप के शीर्ष कॉलेजों में पढ़ने के लिए 21.93 करोड़ से अधिक की छात्रवृति प्राप्त हुई है। सागर द्वारा बिहार के पटना से देश में नेतृत्व निर्माण की एक नई क्रांति की शुरुवात हो चुकी है। आने वाले समय इस संगठन से निकले होनहार छात्रों का प्रभाव राष्ट्र निर्माण में भी दिखेगा।

– अविनाश कुमार, संपादक

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