Industry in Bihar: क्या बिहार में टेक्नोलॉजी एजुकेशन और आइटी इंडस्ट्री नहीं फल फूल सकता है?

पिछले 13 सालों में राज्य सरकार आईटी, सॉफ्टवेयर या नॉलेज पार्क बनवाके आईटी-टेक्नोलॉजी कम्पनियों को नहीं बुलाया, मतलब है कि ये सब कभी सरकार के ध्यान और प्रायरिटी में रहा ही नहीं।

भोपाल, बैंगलोर, बंगाल, पंजाब, नोएडा, जयपुर आदि की सारी इंजीनियरिंग कॉलेजे बिहारी छात्रों से भरी हुई है। क्यों भरी हुई है ? कारण बस इतना है की हमारे यहाँ बिहार में शिक्षा व्यवस्था ठेहुने के बल रेंग रहा है। ऐसा नहीं है की हमारे यहाँ इंजीनियरिंग कॉलेजे नहीं है लेकिन जानबूझकर उनका हाल ऐसे किया गया है कि न तो वहाँ ठीक से पढाई होती है और न कैरियर व कैम्पस प्लेसमेंट आदि के लिए कम्पनियाँ आती है।

Women’s Institute of Technology (WIT) एक ऐसा प्लेटफार्म हो सकता था जहाँ से पढ़के मिथिला की बेटियाँ किसी अच्छे आईटी एमनसी में आराम से काम कर सकती थी। लेकिन LNMU के इस कॉलेज में न अच्छे स्तर के लैब्स की सुविधा है और न टेक्नोक्रेटिक इनवायर्मेंट। केवल कम्यूटर साइंस और आईटी ओरिएंटेड इस कॉलेज में अगर कैम्पस प्लेसमेंट्स के लिए बड़ी आईटी एमएनसी’ज नहीं आती तो ये सिर्फ LNMU का नकारापन है।

परिणाम भोगती है इलाके की लड़कियां की चार साल डिग्री करके, लाखों खर्च होने के बाद भी वो सरकारी नौकरियों की तैयारी या शादी की तरफ धकेल दी जाती है।

दरभंगा कॉलेज ऑफ इंजीनियरिंग (DCE) एक ऐसा प्लेटफार्म हो सकता था जहाँ अगर बढिय्या इंफ्रास्ट्रक्चर, लैब्स, कैम्पस, हॉस्टल, प्रोफेशर्स, प्लेसमेंट्स, इवेंट्स आदि की सही व्यवस्था होती तो ये एडुकेशनल-माइग्रेशन रोकने का माध्यम बन सकता था। लेकिन 2008 में इसे LNMU से हटाकर उस AKU (पटना) का हिस्सा बना दिया गया जिसका 6 एकड़ का कैम्पस भी आजतक बनके तैयार नहीं हुआ है, ये नहीं हुआ की एलएनएमयू की व्यवस्था सुधारी जाए। यदि राज्य सरकार सहूलियतें और सुविधा देने के लिए तैयार होंगी तो क्या बिहार में प्राइवेट टेक्नोलॉजी इंस्टीट्यूट्स नहीं खुलेंगे ? सैकड़ों में खुलेंगे।


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नीतीश कुमार जी स्वयं इंजीनियर रहे हैं, राज्य में आईआईटी, एनआईटी के अलावा दर्जनों इंजीनियरिंग कॉलेज हैं पर यदि पिछले 13 सालों में मुख्यमंत्री महोदय से कोई आईटी, सॉफ्टवेयर या नॉलेज पार्क बनवाके आईटी-टेक्नोलॉजी कम्पनियों को नहीं बुलाया जा सका तो इसका साफ मतलब है कि ये सब कभी उनके ध्यान और प्रायरिटी में रहा ही नहीं।

लाखों बिहारी इंजीनियर बैंगलोर-पुणे-हैदराबाद-मुम्बई के आईटीहब्स में हैं, जिनके लाखों का पैकेज-टैक्स उस राज्य का जीडीपी और राजस्व बढ़ाता है। वो वापस आना चाहते हैं पर राजनीतिक नेतागण चाहते ही नहीं की पढ़े-लिखे-जागरूक लोग बिहार में रहें, नहीं तो इनकी राजनीतिक रोटियां कैसे सीखेंगी।

सबसे आसान है टेक्नोलॉजी और आईटी-सॉफ्टवेयर कम्पनियों को बुलाना। कोई कच्चा-माल, मशीन्स, लोकल बाजार नहीं चाहिए, बस इंफ्रास्ट्रक्चर-बिजली-सड़क बनाके लीज पर दे दीजिए और 5 साल के लिए टैक्स छूट के साथ सुरक्षा की गारंटी। वो खुद आएंगे और रोजगार-सम्भावनाओं की असीम मौके लेके आएंगे। दरभंगा, भागलपुर, हाजीपुर, गया आदि कमाल के विकल्प हैं इन आईटी-नॉलेज-सॉफ्टवेयर पार्क्स के लिए पर इन नेताओं ने इस सबके लिए कभी कुछ नहीं किया।

2015 में जब रविशंकर प्रसाद “कम्यूनिकेशन इलेक्ट्रॉनिक्स एंड इंफॉर्मेशन टेक्नोलोजी” मंत्री बने थे तो उन्होंने बड़े तामझाम के साथ घोषणा की थी की दरभंगा और भागलपुर में आइटी पार्क खोलने जा रहे हैं। मुजफ्फरपुर और बक्सर में नेशनल इंस्टिट्यूट ऑफ इलेक्ट्रॉनिक्स एंड इंफॉर्मेशन टेक्नोलोजी (NIELIT) खोलने जा रहे हैं। पांच साल बीत गया, दुबारा सरकार बन गई, दूसरे टर्म का भी एक साल बीत गया, राज्य में भी उनकी ही पार्टी की सरकार है। लेकिन अबतक कोई अपडेट नहीं है।

– आदित्य मोहन 


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