जानिए बिहार के इस मजदूर के वायरल तस्वीर के पीछे की कहानी

दुधमुंहा बच्चा मर रहा था, बच्चे को आखिरी बार देखने की इनकी इच्छा पूरी नहीं हो पाई.

आर्टिकल के कवर में लगा यह फोटो सोशल मिडियापर वायरल हो गया है। लॉकडाउन में मजदूरों के दुर्दशा को बताती इस तस्वीर को देख कोई भी अपने भावनाओं को बाहर आने से नहीं रोक पा रहा। मगर क्या आप आप जानते है यह तस्वीर किसकी है और इस तस्वीर के पीछे क्या कहानी है?

यह तस्वीर बिहार के बेगूसराय जिले के निवासी रामपुकार पंडित की है। वे लॉकडाउन में दिल्ली में फंसे हुए थे। जिस वक्त ये तस्वीर ली गई वो बेगूसराय, बिहार अपने घर बात कर रहे थे।

दुधमुंहा बच्चा मर रहा था. बच्चे को आखिरी बार देखने की इनकी इच्छा पूरी नहीं हो पाई. ‘द हिन्दू’ से बातचीत में रामपुकार ने कहा, “हम मज़दूरों का कोई देश नहीं होता।”

दिल्ली में काम करने वाले रामपुकार उस समय टूट गए जब गांव से उनकी पत्नी का फ़ोन आया और पता चला कि उनके बेटे के मौत हो गयी। लॉकडाउन के कारण घर जाने का कोई साधन नहीं मिला तो रामपुकार पैदल ही अपने घर के तरफ दौर पड़ें।

आरोप है कि पुलिस वाले ने इस गरीब से पैसे भी लिए मगर गाज़ियाबाद से आगे जाने की अनुमति नहीं दी।

राम पुकार का आरोप है कि दिल्ली छोड़ने के बाद उसे यूपी गेट के पास यूपी पुलिस ने रोक दिया था और आगे बढ़ने नहीं दिया गया इस वजह से अगली रात उन्हें गाजीपुर फ्लाईओवर के नीचे सोना पड़ा। इस बीच राम पुकार ने पुलिसकर्मियों और अधिकारियों से उसे बिहार जाने की मांग की जिस पर किसी ने ध्यान नहीं दिया।

हालांकि कुछ लोगों और एनजीओ ने उनको खाना खिलाया और मदद की। उनको दिल्ली रेलवे स्टेशन लाया गया और श्रमिक स्पेशल ट्रेन से बिहार भेजने की व्यवस्था की गई।

अभी रामपुकार बेगूसराय पहुंच चुके हैं मगर अपने प्रखंड में क्वारन्टीन सेंटर में हैं। उनको इस बात का दुख है कि वे अपने बेटे के अंतिम संस्कार में भी शामिल नही हो पाए। परिवार के लोग भी चिंतित है।

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