Bihar Election 2020: सुप्रीम कोर्ट ने दागियों पर कसा शिकंजा, बिहार चुनाव पर पड़ेगा असर

इस साल होने वाले बिहार विधानसभा चुनाव (Bihar Assembly Election 2020) से पहले सुप्रीम कोर्ट ने एक एतिहासिक फैसला सुनाकर राजनीतिक पार्टियों के सिरदर्द बढ़ा दिए हैं| गुरुवार को सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) ने सभी राजनीतिक दलों को आदेश दिया कि उसे अपने उम्मीदवारों के आधिकारिक मामलों का रिकॉर्ड अपने वेबसाइट पर दिखाना होगा। साथ ही यब भी आदेश जारी किया कि क्रिमिनल बैकग्राउंड वाले उम्मीदवारों को वो टिकट क्यों दे रहे हैं, इसकी वजह बतानी होगी और जानकारी वेबसाइट के साथ अपने सोशल मीडिया हैंडल पर भी देनी होगी।

सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि सियासी दलों को वेबसाइट, न्यूजपेपर और सोशल मीडिया पर यह बताना होगा कि उन्होंने ऐसे उम्मीदवार क्यों चुनें जिनके खिलाफ आपराधिक मामले लंबित हैं। साथ ही कोर्ट ने यह भी निर्देश दिया कि सियासी दलों को ऐसे उम्मीदवार को चुनने के 72 घंटे के भीतर चुनाव आयोग को अनुपालन रिपोर्ट देनी होगी जिसके खिलाफ आपराधिक मामले लंबित हैं।

जिन उम्मीदवारों के खिलाफ आपराधिक मामले लंबित हैं उनके बारे में अगर राजनीतिक दल न्यायालय की व्यवस्था का पालन करने में असफल रहते हैं तो चुनाव आयोग (Election Commission) इसे शीर्ष अदालत के संज्ञान में लाए।

न्यायालय ने एक अवमानना याचिका पर यह आदेश पारित किया। उस याचिका में राजनीति के अपराधीकरण का मुद्दा उठाते हुए दावा किया गया था कि सितंबर 2018 में आए शीर्ष अदालत के निर्देश का पालन नहीं किया जा रहा है जिसमें सियासी दलों से अपने उम्मीदवारों के आपराधिक रिकॉर्ड का खुलासा करने को कहा गया था।

बिहार चुनाव में दिखेगा इसका असर

सुप्रीम कोर्ट के इस निर्देश को सबसे पहले बिहार चुनाव में लागू किया जायेगा| अभी बिहार विधानसभा में चुनकर आये कुल विधायकों में से 58% (243 में से 142) के खिलाफ अपराधिक मामले दर्ज हैं| इस मामले में राष्ट्रीय जनता दल (RJD) शीर्ष स्थान पर हैं| उनके कुल 80 विधयाकों में से 46 के खिलाफ अपराधिक मामले दर्ज हैं| ADR (Association of Democratic Reforms) के आंकड़ों के अनुसार 2019 में चुनकर संसद में आये बिहार के नये सांसदों में से 80% सांसद दागी हैं|

बिहार में राजनीति और बाहुबल का बहुत पुराना गठबंधन है| चुनाव जितने के नाम पर सभी पार्टियाँ क्रिमिनल बैकग्राउंड वाले उम्मीदवार को टिकट देते रहे हैं| सुप्रीम कोर्ट के इस निर्देश के बाद राजनीतिक पार्टियों पर दागी उम्मीदवार को टिकट न देने का नैतिक दवाब होगा| हालांकि राजनेताओं ने पहले से ही इसका तोड़ निकाल रखा है| वे दागी उम्मीदार के जगह उनकी पत्नियों को टिकट दे देते हैं|

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