नवरात्रि विशेष: दरभंगा जिले में 75 फीट ऊंचे टीले पर अवस्थित माँ रत्नेश्वरी की महिमा अपरंपार है

दरभंगा जिला के जाले प्रखंड स्थित रतनपुर गांव मे लगभग 75 फीट ऊंचे टीले पर अवस्थित मां रत्नेश्वरी की महिमा अपरंपार है। सच्चे मन से उनके दरबार में आने वाले भक्त कभी खाली हाथ नहीं लौटते। जाले प्रखंड क्षेत्र का यह स्थान मिथिला राज्य काल में ओईनवर वंशीय राजा रत्नसेन सिंह की धरती हुआ करती थी, जिनकी कुल देवी रत्नेश्वरी भगवती थी। उनकी कृपा से ही राजा रत्नसेन सिंह ने खोई राजधानी दोबारा प्राप्त करने में सफलता हासिल की थी।

मां रत्नेश्वरी की प्रतिमा

कहा जाता है कि लगभग 75 वर्ष पहले बमभोली दास नामक एक संत ने वहां आकर तपस्या की और उन्हें भगवती के दर्शन हुए। अंकुरित एवं शक्तिपीठ होने के कारण दूर-दूर से भक्त मन्नत मांगने आते हैं।

अंकुरित होने के कारण यहां वैदिक मंत्रोच्चारण से सालों भर इनकी पूजा की जाती है। समस्त रतनपुर, ब्रह्मपुर के निवासी रत्नेश्वरी भगवती को अपना कुलदेवी मानते हैं। शारदीय एवं चैत्री नवरात्रि में इनकी विशेष रूप से पूजा होती है। नवरात्रा के दौरान यहां पुरुष, महिला और बच्चे को दंड प्रणाम करते हुए दृश्य देखते ही बनता है। इस संबंध में ज्योतिषाचार्य अलख नारायण कुमर जी ने बताया कि भगवान श्रीकृष्ण मोरध्वज के दरवाजे पर जांचने के लिए भेष बदलकर आए। अर्जुन को सिंह रूप में बदल दिया। उसने मोरध्वज से कहा कि तुम पति-पत्नी अपने हाथों से अपने पुत्र को चीर कर अपने सामने मैं हमारे सिंह को भोजन कराओ। दोनों ने उनकी उनकी बात को सहज स्वीकार करते हुए अपने पुत्र को आरी से चीरकर सिंह को भोजन कराने के लिए गया। तत्पश्चात भगवान श्रीकृष्ण और अर्जुन अपने असली रूप में आकर उन को वरदान दिया। उनके पुत्र भी जीवित हो गए, जो आगे चलकर राजा रत्नसेन हुए। उन्हीं के मठ पर आज रत्नेश्वरी मां दुर्गा भगवती अवस्थित है।

ऊंचे टीले पर अवस्थित मां रत्नेश्वरी

कुन्दन भारद्वाज, (दरभंगा)

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