जय जय बिहार तुझको वंदन, बधाई सबको रक्षाबंधन

जय जय बिहार तुझको वंदन, बधाई सबको रक्षाबंधन
©अविनाश कुमार सिंह

रक्षाबंधन भाई-बहन के दिव्य प्रेम का स्मारक पर्व है तथा पुरोहित-यजमान का सद्भाव उत्सव है I इन रेशमी धागों में इतनी शक्ति है, जितनी लोहे के जंजीरों में भी नहीं I लोहे की जंजीर को तोड़ देना आसान है, किन्तु बहन के प्रेमबंधन में बंधे भाई के लिए इसे तोड़कर निकल पाना असंभव है I रक्षाकवच द्वारा राष्ट्र की भगिनिशक्ति अपने भ्राताओं पर मंगलकामनाओं एवं आशीर्वादों की अमृतवर्षा करती है, जबकि सबल भ्रातागण स्त्री-शक्ति के साथ और सुरक्षा हेतु कृतसंकल्प हो जाते हैं I इसी दिन पुरोहितगण यजमानों पर अपनी मंगलकामनाओं की मंदाकिनी-वारि छिड़कते हैं I स्वर्गीय वृंदावनलाल वर्मा ने अपने नाटक ‘राखी की लाज’ में भाई-बहन के प्रेम का रोमांचकारी वर्णन किया है I आइए, हम भी आपको भाई-बहन की एक लघु कथा सुनाते हैं I

सीवान के महाराजगंज अनुमंडल के बीखाबाँध गाँव में ‘भईया-बहनी’ के नाम से प्रसिद्घ एक अनोखा मंदिर है जहाँ किसी देवी-देवता की नहीं, बल्कि भाई-बहन की पूजा होती है I किवंदती है कि इस गाँव से एक भाई अपनी बहन को उसके ससुराल से विदा कराकर ले जा रहा था, तभी कुछ मुग़ल सैनिकों ने उन्हें घेर लिया I सैनिकों की बुरी दृष्टि बहन पर थी I उनसे बचाव हेतु दोनों भाई-बहन ने धरती माँ से सुरक्षा की गुहार की I धरती फटी और दोनों उसमें समा गए I कुछ समय बाद वहाँ से भाई-बहन के प्रतीक के रूप में एक बरगद के पेड़ का उदय हुआ जो आपस में लिपटे भाई-बहन की तरह दिखता है I बाद में वहाँ एक सुनार द्वारा मंदिर का निर्माण किया गया I मंदिर के भीतर भाई-बहन की समाधि है जहाँ विशेषकर श्रावण में बहनें अपने भाइयों की रक्षा और लम्बी आयु के लिए पूजन हेतु दूर-दूर से आती हैं I

कथाएँ और भी हैं I पर हरि अनन्त, हरि कथा अनंता—की तरह बिहार की कथाएँ भी विविधता और असीमता को समेटे हैं I बाकी कथाएँ फिर कभी !

सभी भाई-बहनों को रक्षाबंधन की अनंत शुभकामनाएं I यह रक्षाबंधन आप सबकी कर्मशक्ति को अनंतगुणित कर दे, यही मंगलकामना है I

आपका ‘अपना’—अविनाश कुमार सिंह, राजपत्रित पदाधिकारी, गृह मंत्रालय, भारत सरकार I

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