पटना की स्वाति भारत के तरफ से मलेशिया में ‘इंटरनेशनल सुसाइड प्रिवेंशन कॉन्फरेंस’ को करेगी सम्बोधित

अक्सर टूटे हुए लोग टूटते चले जाते हैं, अपनी कमजोरियों से कमजोर होकर लोग आगे बढ़ना छोड़ देते हैं। अगर हम अपनी परेशानियों को अपनी ताकत बनाकर आगे बढ़ने की कोशिश करें तो सफलता ऐसी मिलती है की खुद के साथ ही दूसरों के लिए भी हम प्रेरणा बन जाते हैं। कुछ ऐसी कहानी बिहार की बेटी स्वाति कुमारी की है जो अपने परेशानियोंपरेशानियों से परेशान जरूर होती है लेकिन उसे खुदपर हावी होने के बजाय उसे अपना ताकत के रूप में इस्तेमाल करती है।

 

सुसाइड पर दो किताबें लिखने वाली स्वाति जुलाई में मलेशिया में इंटरनेशनल एसोसिएशन फॉर सुसाइड प्रिवेंशन और मलेशियन गवर्नमेंट की तरफ से आयोजित हो रहे इंटरनेशनल सुसाइड प्रिवेंशन कॉन्फरेंस में इंडिया की तरफ से ‘सुसाइड को कैसे रोका जा सकता है’ पर अपनी बात रखने जा रही हैं। स्वाति ने बताया की उनका एब्स्ट्रैक्ट एक्सेप्टेन्स और कांफ्रेंस में प्रेजेंट करने के लिए इनविटेशन लेटर मिला है।

 

कौन है स्वाति ?  

 

स्वाति कानपूर में पली-बढ़ी, वहीं से अपनी माध्यमिक शिक्षा पूरी की। स्वाति के माँ-पिता भी चाहते थे की स्वाति बड़ी होकर इंजीनियर या डॉक्टर बने पर वो बचपन से ही लिखने की शौक़ीन थी,गणित में रूचि नही होने के कारण मेडिकल की तैयारी की तो जरूर पर उसमें भी दिल नही लगा। 2007 में स्वाति पटना आ गयी और मगध विश्वविद्यालय से ग्रेजुएशन के बाद नेशनल स्कुल ऑफ़ बिजनेस से एमबीए की इसी बीच 2013 में स्वाति को एक एक्सचेंज प्रोग्राम के तहत फ़्रांस जाने का अवसर प्राप्त हुआ,इसी दौरान ऑक्टूबर में स्वाति की मां का देहांत हो गया. इस घटना ने स्वाति को पूरी तरह से तोड़ कर रख दिया। पूरी तरह से निराश हो चुकी स्वाति अपने सभी कामों को छोड़कर पटना आकर रहने लगी और यहीं की होकर रह गयी।

 

स्वाति ने अपनी मां की कही बातों को ही अपने जीने का सहारा बनाई और अपनी स्थिति और माँ की बातों को लिखते चली गयी और वर्ष 2014 में ये एक नॉबेल का रूप ले लिए, 7-8 महीने बाद एक अच्छे पकाशक के सहयोग्य से स्वाति की पहली नोबेल ‘ विदआउट ए गुड़ बाय ‘ पिछले वर्ष नवंबर 2015 में मार्केट में आयी। इस नॉबेल को लोगों ने खूब पसंद किया, पटना बुक फेयर में भी इस किताब की काफी चर्चा हुई।

 

इसके साथ ही सुसाइड प्रिवेंशन के लिए जागरूकता फ़ैलाने के लिए स्वाति ने बिहार के फेमस फोटोग्राफर सौरव अनुराज के साथ मिलकर ‘अमायरा- द एसेंस ऑफ़ लाइफ‘ आम की एक फोटो-स्टोरी बुक तैयार की थी जिसकी अंतराष्ट्रीय संस्थाओं ने भी तारीफ की थी। उनकी इस किताब से प्रेरित होकर बैंगलोर में सॉफ्टवेयर इंजीनियर की टीम ने बुक पर आधारित एक म्यूजिकल वीडियो बनाया था जिसे लोगों ने बहुत पसंद किया।

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