जानिए क्या है प्रमुख वजहें जिसके कारण नीतीश कुमार को पसंद आ गया एनडीए का राम !

राष्ट्रपति चुनाव को लेकर अगर किसी राज्य में सबसे ज्यादा सियासी माहौल गरम है, तो वह है बिहार. बिहार में महागठबंधन की सरकार है. यहां राजद-जदयू और कांग्रेस, एक साथ तीन दलों की संयुक्त महागठबंधन की सरकार है. राष्ट्रपति उम्मीदवार के रूप में बिहार के पूर्व राज्यपाल रामनाथ कोविंद के नाम की घोषणा होने के बाद मुख्यमंत्री नीतीश कुमार कांग्रेस और राजद को झटका देते हुए रामनाथ कोविंद को अपना समर्थन दे दिया .

पूरे देश में चर्चाओं और अटकलों का बाजार काफी गर्म है। लोग जानना चाहते हैं कि आखिर नीतीश कुमार ने अपने सहयोगी को झटका देते हुए एनडीए के राम को क्यों पसंद किया ?

आइए हम आपको बताते है इसकी वजह . . . 

 

1. बेहतर संबंध और सामंजस्य

 

बिहार के राज्यपाल रामनाथ कोविंद से मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के बेहतर संबंध रहे हैं। वो एक राज्यपाल-मुख्यमंत्री का हो या दो लोगों के आपसी रिश्ते और दोस्ती का। अगस्त 2015 में रामनाथ कोविंद बिहार के राज्यपाल बने और उन्होंने अपने व्यवहारकुशलता से नीतीश का दिल जीत लिया।

 

बिहार के पूर्व के राज्यपालों की तुलना में दोनोें के बीच कभी भी मनमुटाव की खबरें नहीं आई और यही कारण था कि राष्ट्रपति उम्मीदवार घोषित होने के बाद सीएम ने कोविंद से मुलाकात कर उनकी जबरदस्त प्रशंसा की।

 

जदयू के लगभग सभी नेताओं और विधायकों रामनाथ कोविंद को अच्छा व्यक्ति बताया है।

 

2.कई अहम फैसले का कोविंद ने किया था समर्थन

 

शराबबंदी जैसे अहम फैसले पर रामनाथ कोविंद ने नीतीश का समर्थन किया था, जबकि महागठबंधन दल के नेताओं के साथ ही अन्य कई दल और कानूनविद इसकी आलोचना कर रहे थे। वहीं, कुलपति चयन में भी कोविंद ने नीतीश की पसंद को तवज्जो दी थी, जबकि कोविंद कुलाधिपति थे और उनके पास सर्वोच्च अधिकार थे।

 

3. दलित उम्मीदवार

तीसरा और जो महत्वपूर्ण कारण देखा जा रहा है, वह है कोविंद की साफ छवि के साथ उनका दलित होना. जानकारों के मुताबिक वह एक उदारवादी दलित चेहरा हैं, जिनका राजनीतिक सफर पूरी तरह बेदाग रहा. जदयू को यह पता है कि बिहार में दलित वोटबैंक भी है और वह जदयू को सपोर्ट करता है. कहीं कोविंद को सपोर्ट नहीं करने के बाद मामला उल्टा ना पड़ जाए.

 

4.  नीतीश कुमार इससे पहले भी अपना अलग स्टैंड लेते रहे हैं. नोटबंदी का मामला हो या फिर कोई अन्य बात, वह अपने हिसाब से अपनी स्टाइल में किसी स्टैंड पर कायम हो जाते हैं. नीतीश ने 2012 में एनडीए के साथ रहते हुए भी यूपीए के राष्ट्रपति उम्मीदवार को समर्थन किया था और अब महागठबंधन में रहते हुए कोविंद को समर्थन करेंगे.

 

 

 

 

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