नीतीश ने पीएम मोदी से बिहार को विशेष राज्य का दर्जा और विशेष सहायता देने की दोहराई मांग

मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र लिखकर बिहार को विशेष राज्य का दर्जा और विशेष सहायता दिए जाने की मांग दोहराई है। प्रधानमंत्री को लिखे अपने पत्र में नीतीश ने कहा कि अपनी उक्त मांग को पत्रों के माध्यम से अथवा अंतरराज्यीय परिषद एवं नीति आयोग की विभिन्न बैठकों में केंद्र सरकार के समक्ष रखा है। उन्होंने कहा कि देश की आजादी के बाद विकास के दृष्टिकोण से राज्यों के अनुभव में काफी भिन्नता रही है। जहां कई राज्यों को तेजी से विकास हुआ है, वहीं कई अन्य राज्य अभाव से ग्रसित रहे हैं।

 

नीतीश ने कहा कि बिहार जैसे राज्यों को इसका भारी खमियाजा भुगतना पड़ा है। उन्होंने कहा कि बिहार जैसे पिछड़े राज्य के लिए यह चिन्ता का विषय है कि राज्यों के बीच निधि के बंटवारा के लिए 14वें वित्त आयोग ने जो फार्मूला दिया है उसके आधार पर कुल राशि में बिहार का हिस्सा 10.9 प्रतिशत से घटकर 9.7 प्रतिशत हो गया है। नीतीश ने कहा कि बिहार द्वारा हरित आवरण को बढ़ाये जाने के प्रयास को प्रोत्साहित करने के बजाय उसकी उपेक्षा की गई है।

 

बिहार सबसे अधिक आबादी के घनत्व वाला राज्य है जिसकी प्रति व्यक्ति आय बहुत निम्न स्तर पर है. नीतीश ने कहा है कि वर्ष 2015-16 के आंकड़ों के अनुसार बिहार की प्रति व्यक्ति आय स्थिर मूल्यों (2011-12) पर 26801 रुपये है जबकि राष्ट्रीय औसत 77435 रुपये है. अत: राज्य की प्रति व्यक्ति आय राष्ट्रीय औसत का मात्र 34.6 प्रतिशत है.

 

नीतीश ने प्रधानमंत्री को लिखे पत्र में कहा है कि बिहार राज्य के विभाजन के समय बिहार पुनर्गठन अधिनियम 2000 में यह प्रावधान किया गया था कि विभाजन के फलस्वरूप बिहार को होने वाली वित्तीय कठिनाइयों के संदर्भ में एक विशेष कोषांग उपाध्यक्ष योजना आयोग के सीधे नियंत्रण में गठित होगा और वह बिहार की आवश्यकताओं के अनुरूप विशेष अनुशंसा करेगी. इस प्रावधान के आंशिक अनुपालन में बीआरजीएफ के तहत इस राज्य को कुछ सहायता दी जा रही थी जिसमें गत वर्षों में मांग के अनुरूप राशि नहीं दी जा रही है जिससे योजनाओं के क्रियान्वयन में भी प्रतिकूल प्रभाव पड़ा है और राज्य को अपने संसाधनों से राशि उपलब्ध करानी पड़ रही है.

 

नीतीश ने कहा कि इसी संदर्भ में केन्द्र सरकार द्वारा गठित रघुराम राजन समिति की अनुशंसाओं की तरफ ध्यान आकृष्ट करना चाहूंगा जिसमें उन्होंने राज्यों के लिए समग्र विकास सूचकांक प्रस्तुत किया था. इसके अनुसार देश के 10 सर्वाधिक पिछड़े राज्यों को चिन्हित किया गया था. इन राज्यों में बिहार भी सम्मिलित है. प्रतिवेदन में उल्लेख किया गया था कि सर्वाधिक पिछड़े राज्यों की विकास की गति बढ़ाने के लिये केन्द्र सरकार अन्य रूप में केन्द्रीय सहायता उपलब्ध करा सकती है. किन्तु केन्द्र सरकार के स्तर से इन अनुशंसाओं पर कोई कार्रवाई नहीं की गई है.

 

उन्होंने कहा कि इस पृष्ठभूमि में हमारी मांग है कि बिहार को विशेष राज्य का दर्जा मिलना आवश्यक है. राज्य को विशेष दर्जा मिलने से जहां एक ओर केन्द्र प्रायोजित योजना में केन्द्रांश के प्रतिशत में वृद्धि होती जिससे राज्य को अपने संसाधनों का उपयोग अन्य विकास एवं कल्याणकारी योजनाओं में करने का अवसर मिलता वहीं दूसरी ओर प्रत्यक्ष एवं अप्रत्यक्ष करों में छूट से निजी निवेश के प्रवाह को गति मिलती जिससे युवाओं के लिए रोजगार के नए अवसर सृजित होंगे. नीतीश ने कहा है कि बिहार अपना पिछड़ापन दूर कर देश की प्रगति में योगदान करना चाहता है. हमारी विशेष राज्य के दर्जे की मांग इसी सोच पर आधारित है. अत: इस पृष्ठभूमि में अनुरोध है कि बिहार को विशेष राज्य का दर्जा एवं विशेष सहायता प्रदान करने की कृपा की जाये.

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