विशेष : रेडियो पर अपनी दमदार आवाज से लाखों दिलों पर राज करती है पटना की यह अंजलि

वो लड़की बिहार की आवाज कही जाती है| वो लड़की “दिमाग पटना! दिमाग!” कह के लाखों लोगों का दिल चुरा चुकी है| वो लड़की न सिर्फ खुबसूरत दिखती और बेबाक बोलती है, बल्कि हर छोटे-बड़े मुद्दे पर एक अलग राय भी रखती है| सूरत, आवाज और दिमाग का इतना सुंदर तालमेल बहुत कम देखने को मिलता है| सही मायने में पटना जिस आवाज का इन्तेजार पूरे दिन करता है, वो आवाज शाम के 5 बजे खुद चलकर उनके पास आ जाती है| यही तो जादू है रेडियो का, यही तो जादू है एक आर.जे. का|

जी हाँ! हम बात कर रहे हैं, रेडियो मिर्ची से 10 साल से जुड़ी आर.जे. की, जिसने पूरे देश में हंगामा मचा रखा है| इन्हें रेडियो मिर्ची की 2016 की बेस्ट आर.जे. सम्मान से नवाजा गया है| इन्हें दैनिक भास्कर ने भी इस साल ‘वीमेन एचीवर्स अवार्ड’ से सम्मानित किया है| जाने कितने दिलों की धड़कन बन चुकी ये आर.जे. फेसबुक पर 2 लाख से अधिक फोलोवर्स को भी अकेले मैनेज करती हैं|

 

बिहार में रहकर दस साल पहले किसी लड़की का ये कुव्वत जुटा पाना कि उसे अपने पैशन के साथ चलना है, ये बहुत बड़ी बात है| आज सफलता के नये आयाम गढ़ रही इस लड़की का नाम है- आर.जे. अंजलि|

हाल ही में ‘आपन बिहार’ की टीम से हुई लंबी बातचीत में से कुछ अंश आर.जे. अंजलि के फेन, दीवानों , शुभचिंतकों के लिए |

 

प्रश्न: आपको बेस्ट आर.जे. अवार्ड और विमेंस अचीवर्स अवार्ड मिला है, आपन बिहार की टीम की तरफ से बहुत बधाई हो! तो क्या अब जिम्मेदारियाँ बढ़ी हुई महसूस होती हैं?

अंजलि: थैंक यु, थैंक यु, थैंक यु सो मच! एक्चुअली जिम्मेदारियों से कहीं ज्यादा ये है कि हर वक्त आपको कोई देख रहा है| आपको हर समय प्रेजेंटेबल रहना पड़ता है| आपको पता नहीं होता, कब कहाँ, किससे मिलना हो| तो हर वक्त तैयार रहना बहुत जरूरी हो गया है अब|

प्रश्न: अब आप एक सेलेब्रिटी हैं, सोसाएटी के प्रति कर्तव्य बढ़े हुए से लगते हैं?

अंजलि: सोसाएटी, कर्तव्य… ये सब न बहुत भारी वर्ड्स हैं| जो मेरे पास आता है, मैं उसके अनुसार काम करती हूँ| मेरा कोई स्पेशल इनिशिएटिव नहीं है|

हाँ! एक चीज़ मेरा हमेशा से रहा है कि छोटी बच्चियों के लिए मेरा बहुत ज्यादा झुकाव है| खासकर इसलिए क्योंकि हमलोग चार बहनें हैं तो हमें पता है, बीइंग अ बिहारी, लड़कियों का एक अलग लेवल का चैलेंज होता है और शायद इसी वजह से लोग हमसे ज्यादा रिलेट करते हैं| सेलेब्रिटी का दर्जा मिला है, क्योंकि एक ‘अनकन्वेंशनल’ काम करके, एक मुकाम हासिल करना| अभी भी हमारी सोसाइटी में कहीं-न-कहीं ये बात है| खुद मुझे भी पूछा जाता है “ठीक है तुम रेडियो में हो, लेकिन आगे क्या”?

 

प्रश्न: तो एक प्रेशर आपने भी झेला है?

अंजलि: हाँ! इन दिनों ऐसा है न कि आप जो कर रहे हो, आपके पेरेंट्स और आपके आसपास के लोग आपसे इतनी ज्यादा उम्मीदें रखने लगते हैं| हर किसी को इंस्टेंट रिजल्ट चाहिए| “तुम आज आर.जे. बनी हो, तुमको आज बेस्ट आर.जे. का अवार्ड मिल जाना चाहिए”, “तुम राइटर बनी हो तो तुम्हें बेस्ट राइटर का अवार्ड मिल जाना चाहिए”|

लेकिन ऐसा नहीं होता है| ये एक सफ़र होता है, और वो सफ़र जब तक आप पूरा नहीं करोगे, आप रॉ से मैच्योर नहीं बन पाओगे| तो मेरा जो कैरियर है, इट्स 10 इयर्स स्पैन| ये दस साल में हुआ है यार! इंस्टेंट अंजलि जागी नहीं है, और न हो इंस्टेंट मैंने कुछ किया है| स्कूलिंग, कॉलेज, मेरा सबकुछ एक रेडियो प्रोफेशन में हुआ है| शायद इसलिए लोग मुझसे जुड़ते हैं कि उन्होंने ये देखा है| मेरे साथ वो भी बड़े हो रहे हैं| मुझे फेसबुक पर कई लोग कहते हैं कि जब स्कूल में था, तब से आपको सुन रहा हूँ| तो क्या है न, मेरे साथ वो मोमेंट जी चुके हैं|

हम क्यों अमिताभ बच्चन साहब को इतना ज्यादा पसंद करते हैं, क्योंकि बच्चन साहब के साथ, हम भी बड़े हुए हैं| एक स्ट्रगल होता है|

प्रश्न: इस स्ट्रगल के दस साल को बेस्ट आर.जे. अंजलि एक शब्द में क्या कहेंगी?

अंजलि: ये दस साल मेरे लिए ‘पटना’ रहा है| इन दस सालों में मैंने पटना के अलावा कुछ सोचा नहीं है| कोई त्यौहार नहीं मनाया| कई बार घर में किसी से बात करने में बोलते-बोलते ‘पटना’ बोल जाती हूँ| दिमाग में कांस्टेंटली ‘पटना’ चला है, दस साल से|

प्रश्न: आपको लोग बिहार की आवाज कहते हैं| बिहार के रेडियो की आवाज कहते हैं| इस बारे में क्या कहेंगी?

अंजलि: ये उनलोगों का बड़प्पन है जो ऐसा कहते हैं| बस अपना काम कर रही हूँ| रेडियो से प्यार बहुत है| अगर हम रेडियो पर बात नहीं कर रहे, तो एक खालीपन सा रहता है| जो है दिमाग में, वो कह देने की आदत सी हो गयी है|

 

प्रश्न: एक फूडी अंजलि को अगर रोड पर खुल्ला छोड़ दिया जाये..?

अंजलि: तो पहले चाट| वो छोटे मटर वाला चाट, मसाले वाला| समोसा और गोलगप्पा भी टेस्ट कर सकते हैं| और जबतक पेट न भरे, तब तक सबकुछ|

 

प्रश्न: बिहार की कौन सी जगह घूमने की दृष्टि से पसंद आता है?

अंजलि: बिहार में घूमने की स्थिति बिलकुल नहीं है| हमारे पास बहुत कुछ है, मगर हमने कभी ध्यान नहीं दिया| जब रेत को ‘कक्ष’ बना सकते हैं| समुद्र के किनारे को ‘बीच’ बना सकते हैं| तो हमारे पास तो इतना कुछ है|

हाँ! दो-तीन सालों में थोड़ा डेवलपमेंट या टूरिस्म की बात सामने आ रही है| मगर बिहार में टूरिस्म नहीं है| ठीक है बिहार म्यूजियम बन रहा है आज के डेट में, मगर पटना म्यूजियम की हालत क्या है| हम बहुत आगे बढ़ सकते थे| पर फिर ब्लेम गेम, ब्रेन ड्रेन का बहाना| चलो, अपनी खामियों को छुपाने के लिए ये ख्याल भी अच्छा है! ठीक है डेवलपमेंट हो रहा है| मगर सड़कें बनने से डेवलपमेंट नहीं होता| सड़कें, बिजली, ये सब नीड है|

 

प्रश्न: दस साल पहले की अंजलि और अब की अंजलि की सोच में कोई फर्क आया है?

अंजलि: दस साल में तो डेकोरेट होता है आदमी| दुनिया बदलती है, समाज बदलता है, शहर बदलता है| ऑफ़ कोर्स बिहार बदला है, पटना बदला है| मैं भी बहुत बदली हूँ| लोग कहते हैं कि “पहले तुम बहुत चहकती थी, पर अब तुम सेटल हो गयी हो, धीरे-धीरे, मैच्योर्ड|” तो अब चीजों को समझने की कोशिश करती हूँ| पॉजिटिव और नेगेटिव एंगल समझने की कोशिश| नेगेटिव तो कम… पॉजिटिव ज्यादा खोजती हूँ| तो ऐज अ पर्सन, एक लाइन में “बड़े हो गये हैं हम”|

 

प्रश्न: अंजलि अपने खाली टाइम में क्या करती है?

अंजलि: मुझे ट्रेवल करना बहुत पसंद है| अपने पेट्स के साथ रहना| मेरा मानना है कि अगर आपने 60 दिन जम के काम किये हैं तो आपको 3 दिन का ब्रेक लेना चाहिए| इससे तीन चीजें होती हैं| एक तो आप अपने काम से बोर नहीं होते, दूसरा आपका मेंटल स्टेबिलिटी स्ट्रांग रहेगा, तीसरा आप फिर से पूरे जोश के साथ काम में वापस आयेंगे| ये किसी भी प्रोफेशन के लिए जरूरी है|

 

प्रश्न: आर.जे. बनने के लिए क्या-क्या करना चाहिए?

अंजलि: आर.जे. बनने के लिए कुछ नहीं चाहिए| हर कोई आर.जे. बन सकता है| आर.जे. मतलब थिएटर ऑफ़ माइंड| अगर आप बिना दिखे हुए किसी को बता सकते हैं कि अभी आप क्या सोच रहे हैं, तो आप आज.जे. बन सकते हैं| सबसे बड़ी बात है, रेडियो पर्सन खुद से फेक नहीं हो सकता| अगर आप अपने-आप के लिए ओरिजिनल हैं, आप अपने खुद के फेवरेट हैं, तो आप आर.जे. हैं|

 

प्रश्न: इतनी बड़ी फेन फ़ॉलोविंग, अकेले कैसे मैनेज कर लेती हैं?

अंजलि: वो अब परिवार हो गया है| हर दिन एक नया चैप्टर, एक अलग टेस्ट के लोग| फेसबुक और ट्विटर से बहुत कुछ सीखने को भी मिलता है|

 

प्रश्न: आपके पास ऐसे मैसेज भी आते होंगे कि आप सेलेब्रिटी हैं, आपके पास पॉवर है, आप उनकी मदद कर सकती हैं?

अंजलि: हाँ! बिलकुल| लोग कहते हैं आपको इस चीज़ के लिए आवाज उठानी चाहिए, उस चीज़ के लिए आवाज उठानी चाहिए| लेकिन अगर आपकी आवाज वाकई स्ट्रोंग है तो हम खुद आप तक पहुँचेंगे| आजकल हर प्लेटफार्म पर लोग बहुत आसान तरीका चुनते हैं| “हम इनको ऐसा लिखेंगे तो हमारी प्रॉब्लम सॉल्व कर देंगे|” आप ऐसे क्यों जा रहे हैं? आप कोशिश करें| कहीं-न-कहीं कोई प्रॉब्लम है आपकी कोशिश में तभी मैं आपकी मदद नहीं कर पा रही| बाकी मेरी कोशिश होती है जितनी मदद कर सकूँ, मैं करती हूँ|

 

प्रश्न: आर.जे. अंजलि इतनी फेमस है, फिर भी एक फेसबुक पेज क्यों नहीं?

अंजलि: कुछ चीजों को लेकर मैं बहुत पर्सनल हूँ| जहाँ से शुरुआत की है, वो कभी छोड़ नहीं सकती| तो पेज का भी यही है|

 

प्रश्न: कोई ऐसा फैन जो सबसे अलग लगा हो?

अंजलि: बहुत से ऐसे लोग हैं| किसी ने बहुत महँगी घड़ी गिफ्ट की थी, आज तक नहीं जानती वो कौन हैं| हाल में एक लड़की समस्तीपुर से आई थी| चूँकि लड़की का मामला था, मैंने सोशल मीडिया पर शेयर नहीं किया| (यहाँ कहानी सुनाई गयी थी, हम भी शेयर नहीं कर पाएँगे)| और एक ठेले वाले ने मेरी तस्वीर का पोस्टर बनाया हुआ है… वो भी खास है|

प्रश्न: बिहार की जो बात सबसे अच्छी लगती हो?

अंजलि: अपनापन| यहाँ अपनापन बहुत है| हमलोग रिश्ते बनाने में सबसे आगे हैं| और यहाँ की यादाश्त बहुत स्ट्रोंग है|

 

प्रश्न: एक लड़की होने के नाते, समाज से एक चीज़ जो हटनी चाहिए|

अंजलि: लड़की मतलब शादी नहीं है, काम भी है| घर में ये सोच होना जरूरी है|

 

प्रश्न: फिल्मों में जब भी गुंडों का रोले होता है, वो बिहारियों को दिया जाता है या उस चरित्र को बिहारी दर्शाया जाता है… क्या कहेंगी?

अंजलि: गुंडागर्दी भी एक रोल है| बिहारी दिख तो रहे हैं| ये भी एक फेज है| फिर पॉजिटिव रोल भी मिलेंगे| नज़र में आना चाहिए, नज़र में नहीं हों तो प्रॉब्लम|

 

प्रश्न: एक आखिरी सवाल, अंजलि इस ब्यूटी, पॉपुलैरिटी और इंटेलिजेंस को एक साथ कैसे संभालती हैं?

अंजलि: जो भी है फ्लो में है| कोई एक्स्ट्रा एफर्ट नहीं होता| शो में कल से बेहतर आज क्या हो सकता है, वो सोचती हूँ| और बाकी सब तो ऐसा लगता है मुझे कि दस सालों में जो करती आई हूँ, वो मेहनत आज मुझे रिटर्न दे रही है|

 

प्रश्न: आपन बिहार के लिए सन्देश?

अंजलि: एक्चुअली मैं आश्चर्यचकित हूँ, आपलोग इतने कम उम्र में इतनी जिम्मेदारी का काम कर रहे हो| ये बहुत बड़ी बात है| यूँ ही पॉजिटिव तरीके से काम करते रहो और फ़ॉल्लोवर जितना अधिक हो सके बढ़ाओ|

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