देशहित में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ आए मुख्यमंत्री नीतीश कुमार

दिल्ली: एक दुसरे के धुर विरोधी देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार देशहित के मुद्दे पर साथ आ गये है।  संसद में जीएसटी के लिए समर्थन जुटाने के लिए मोदी सरकार को सबसे बडी राहत उसके सबसे बडे विरोधी नीतीश कुमार ने दिया है।

 

कल मंगलवार को वित्त मंत्री अरुण जेटली से बिहार के सीएम नीतीश कुमार ने मुलाकात की. मुलाकात के बाद नीतीश ने कहा कि वो और उनकी पार्टी जीएसटी बिल के समर्थन में है.

 

नीतीश ने कहा, ”हम और हमारी पार्टी जीएसटी के हिमायती हैं. हम आज से ही नहीं बल्कि बहुत पहले से जीएसटी के समर्थन में हैं. यह विधेयक देशहित में है. राज्यहित में और जनता के हित में है इसलिए हम पूरी तरह से इसके साथ हैं.”

नीतीश ने कहा, ”हम यूपीए के समय भी जीएसटी के साथ थे और वर्तमान सरकार के समय भी इसके समर्थन में हैं.” वित्तमंत्री से मुलाकात पर नीतीश ने कहा कि सरकार जब भी कोई विधेयक का प्रस्ताव लाती है तो इसके लिए राज्यों से सुझाव लेती है.

 

दिल्ली में हुई मुलाकात में बिहार के लिए घोषित किए गए पैकेज की बकाया राशि पर भी चर्चा हुई. इससे पहले अरुण जेटली की गुरुवार को राज्यसभा के विपक्ष के नेता गुलाम नबी आजाद और उपनेता आनंद शर्मा से मुलाकात के बाद सरकार के प्रबंधकों को उम्मीद है कि जीएसटी बिल संसद के दोनों सदनों में आसानी से पास हो जाएगा.

कहां फंसा है जीएसटी बिल का पेंच?

  • सबसे ज्यादा दिक्कत कांग्रेस की इस मांग पर है कि टैक्स की अधिकतम दर 18 फीसदी रखने की बात संविधान में शामिल हो.
  • सरकार का कहना है कि ऐसा प्रावधान अगर संविधान में रखा तो ज़रूरत पड़ने पर संशोधन करना बेहद मुश्किल होगा, जो ठीक नहीं है.
  • कांग्रेस ये भी मांग कर रही है कि जीएसटी के मुद्दे पर केंद्र और राज्यों में विवाद होने पर उनका निपटारा एक स्वतंत्र ट्रिब्यूनल करे.
    सरकार चाहती है विवादों का निपटारा जीएसटी काउंसिल के जरिये हो, जिसमें केंद्र और राज्य दोनों की भागीदारी रहेगी. ज्यादातर
    राज्य सरकारें इससे सहमत हैं.
  • कांग्रेस की तीसरी मांग दो राज्यों के बीच वस्तुओं की आवाजाही पर प्रस्तावित 1 फीसदी टैक्स हटाने की है.
    चर्चा है कि सरकार कांग्रेस की इस मांग को मंजूर कर सकती है.
  • मोदी सरकार विपक्ष के समर्थन के बिना जीएसटी बिल को पास नहीं करा सकती, क्योंकि राज्यसभा में उसका बहुमत नहीं है.जीएसटी बिल कैसे पास होगा?
    जीएसटी बिल एक संविधान संशोधन विधेयक है, जिसके पारित होने के लिए राज्यसभा में उपस्थित दो-तिहाई सांसदों का समर्थन जरूरी है.
  • समर्थन करने वाले इन सांसदों की तादाद सदन की कुल संख्या के आधे से ज्यादा होना भी ज़रूरी है.
    राज्यसभा में अभी कुल 244 सांसद हैं, जिसके दो-तिहाई का मतलब है 163 सांसदों का समर्थन.
    यानी इतने सांसदों का समर्थन मिल जाए तो बिल पास होना तय है.

राज्यसभा में अभी जीएसटी का समर्थन कर रही पार्टियों के सांसदों की संख्या 122 है.
69 राज्यसभा सांसद ऐसी पार्टियों के हैं, जो जीएसटी बिल के खिलाफ हैं तब इस मौके पर जीएसटी नीतीश कुमार का समर्थन सरकार के लिए बहुत राहत की खबर है। इससे अन्य राज्य सरकारें भी जुएसटी के समर्थन में आ सकती है और विपक्ष पर इसके समर्थन के लिए दबाव बढेगा।

 

 

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