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मधुबनी स्टेशन पर बनी फिल्म ‘मधुबनी- द स्टेशन ऑफ कलर’ को मिला राष्ट्रीय फिल्म अवॉर्ड

बिहार में एक मशहूर कहावत है कि घर की मुर्गी दाल बराबर| यह कहावत बिहार के मधुबनी पेंटिंग पर सटीक बैठता है| पूरी दुनिया मधुबनी पेंटिंग की कायल है मगर अपने राज्य और देश में यह वर्षों से उपेक्षित थी| हाल ही में मधुबनी रेलवे स्टेशन को मधुबनी पेंटिंग से सजाया गया तो देश और दुनिया में उसकी तारीफ की गयी|

भारतीय रेलवे ने उत्साहित होते हुए अपने ट्रेन के कोचों को भी मधुबनी पेंटिंग से सजाने लगी| पेंटिंग ने मीडिया का ध्यान अपनी आकर्षित किया|

हाल ही में इस वर्ष के राष्ट्रीय फिल्म पुरष्कारों का घोषणा किया गया है| राष्ट्रीय पुरष्कार विजेता फिल्म में एक फिल्म बिहार के मधुबनी पेंटिंग से सजाया गया मधुबनी रेलवे स्टेशन पर बनी फिल्म भी है|  राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार बेस्ट नरेशन केटेगरी में मधुबनी- द स्टेशन ऑफ कलर को चुना गया है|

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ज्ञात हो कि मधुबनी रेलवे स्टेशन पर विश्व का सबसे बड़ी पेंटिंग बनाई गई है| 7005 वर्ग फीट में बनी मधुबनी पेंटिंग ने मधुबनी रेलवे स्टेशन को एक अलग पहचान दी है| स्टेशन की खूबसूरती देखते ही बनती है|

बिहार के कई स्टेशनों की दीवारों को सजाने के बाद मधुबनी (मिथिला) पेंटिंग अब राज्य से चलनेवाली राजधानी और संपर्क क्रांति एक्सप्रेस की बोगियों पर भी उकेरी गई है। एक अक्टूबर 2018 को राजेंद्र नगर से नई दिल्ली जाने वाली राजधानी एक्सप्रेस (अप-डाउन) के सभी 22 बोगियों को मिथिला पेंटिंग से सजाया गया। ट्रेन के बाहरी दीवारों पर ज्यामितीय पैटर्न का उपयोग कर महीन रेखाओं वाली रंगीन चित्रकारी की गई है।

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ज्ञात हो कि जानकारों के अनुसार मिथिला में सैकड़ों वर्षों से महिलाओं द्वारा घर की दीवारों पर मिथिला पेंटिंग बनाने का इतिहास रहा है। मैथिल महिलाएं घरों में त्योहार, पूजा या अन्य विशेष अवसरों पर ‘अड़िपन’ या अल्पना बनाती रही हैं। इन्हें ही बाद में चलकर मिथिला पेंटिंग की संज्ञा दी गई।

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